Fri Sep 11, 2026 | 09:50 PM IST

हार्ट अटैक

हार्ट अटैक का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में सीने में दर्द की तस्वीर सामने आती है, लेकिन यह जानना बहुत जरूरी है कि हर हार्ट अटैक एक जैसा नहीं होता और इसके शुरुआती संकेत भी अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ मामलों में तो हार्ट अटैक के लक्षणों में पीठ, गर्दन या जबड़े में दर्द भी हो सकता है। इस वजह से लोग इसके लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। हार्ट अटैक में समय पर पहचान और इलाज बेहद जरूरी होता है, क्योंकि जितनी देर तक हार्ट की मांसपेशियों को पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन नहीं मिलती, नुकसान का खतरा उतना बढ़ सकता है। इसलिए हमने Dr. Sanket Garg, Sr. Consultant, Cardiac Surgery, Metro Group of Hospitals, Noida से बात की। उनका कहना है कि हार्ट अटैक क्यों आता है, इसके शुरुआती संकेत क्या हैं, किन लोगों को ज्यादा खतरा रहता है और ऐसी स्थिति में तुरंत क्या करना चाहिए? इस बारे में लोगों को जानकारी होना बहुत जरूरी है।

हार्ट अटैक क्या है?

Cleveland Clinic के अनुसार, हार्ट अटैक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें हार्ट को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन युक्त ब्लड नहीं मिल पाता है। इस कंडीशन में किसी एक कोरोनरी आर्टरी में ब्लॉकेज के कारण हार्ट तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता। इस वजह से हार्ट की मांसपेशियों के टिश्यू धीरे-धीरे नष्ट होने लगते हैं। इससे हार्ट को सामान्य रूप से पंप करने में दिक्कत होने लगती है और शरीर के बाकी हिस्सों में भी ब्लड का फ्लो कम हो जाता है।

Dr. Sanket Garg कहते हैं, “हार्ट अटैक को मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (Myocardial Infarction) भी कहा जाता है। इसमें फैट और कोलेस्ट्रॉल जमा होने पर प्लाक बन जाते हैं और जब यह प्लाक फटता है, तो खून का थक्का बन जाता है। यह धमनियों को बंद कर देता है, जिस वजह से हार्ट में ब्लड फ्लो कम हो जाता है और हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ जाता है।”

हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

Dr. Sanket Garg का मानना है कि हार्ट अटैक के लक्षण अचानक या तेजी से भी आ सकते हैं या फिर हल्के दर्द के साथ धीरे-धीरे भी शुरू हो सकते हैं। अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
American Heart Association के मुताबिक, ये लक्षण हार्ट अटैक के हो सकते हैं। 

लक्षण की कैटेगरी 

लक्षण

छाती में दर्द होना 

सीने में असहजता और बेचैनी महसूस होना।
यह कंडीशन कुछ मिनटों से ज्यादा समय के लिए बनी रह सकती है। छाती में दबाव, जकड़न या भारीपन जैसा महसूस होना। 

शरीर के ऊपरी हिस्से में दर्द

एक या दोनों बांहों में दर्द या बेचैनी
पीठ में दर्द
गर्दन में दर्द
जबड़े में दर्द
पेट में तकलीफ या दर्द

सांस लेने में तकलीफ

सांस फूलना या सांस लेने में परेशानी होना 

अन्य लक्षण 

पसीने के साथ शरीर ठंडा महसूस होना
जी मिचलाना
तेज या अनियमित धड़कन
बहुत ज्यादा थकान महसूस होना 

महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षणों में अंतर

Dr. Sanket Garg कहते हैं, “महिलाओं और पुरुषों में हार्ट अटैक का सबसे आम लक्षण छाती में दर्द होना या बेचैनी है, लेकिन महिलाओं में कुछ लक्षण अलग तरह के हो सकते हैं।”

  • एंग्जायटी
  • सांस लेने में तकलीफ होना
  • पेट खराब होना
  • उल्टी या जी मिचलाना
  • कंधे, पीठ या बांह में तेज दर्द
  • बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस होना

हार्ट अटैक से जुड़े रिस्क फैक्टर क्या हो सकते हैं?

National Heart, Lung and Blood Institute (NIH) के मुताबिक, हार्ट अटैक होने के कुछ रिस्क को कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन कुछ को कंट्रोल करना मुश्किल है।

रिस्क फैक्टर जिन्हें कंट्रोल किया जा सकता है।

  • ऐसे फूड्स जैसे सैचुरेटेड फैट या नमक से भरपूर फूड्स
  • रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी न करना
  • स्मोकिंग
  • हाई ब्लड कोलेस्ट्रॉल
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • हाई ब्लड शुगर या डायबिटीज
  • हाई ब्लड ट्राइग्लिसराइड्स
  • बहुत ज्यादा वजन और मोटापा

रिस्क फैक्टर्स जिन्हें कंट्रोल नहीं किया जा सकता है।

  • पुरुषों में 45 साल के बाद और महिलाओं में 55 साल के बाद हार्ट की बीमारी का खतरा बढ़ सकता है।
  • फैमिली हिस्ट्री
  • वायरस और बैक्टीरिया से होने वाले इंफेक्शन

हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में अंतर

Dr. Sanket Garg कहते हैं कि अक्सर लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में कंफ्यूज होते हैं, लेकिन दोनों में काफी अंतर होता है। हालांकि, हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है।

 

हार्ट अटैक 

कार्डियक अरेस्ट 

1. मुख्य समस्या 

इसमें ब्लड फ्लो में रुकावट आने से कोरोनरी धमनी में ब्लॉकेज हो सकता है। 

इसमें दिल की धड़कन और पंपिंग प्रोसेस अचानक बंद हो सकता है। 

2. शरीर पर प्रभाव 

पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलने के कारण दिल की मांसपेशियां धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं।

दिल, शरीर और दिमाग तक ब्लड पंप करना बंद कर देता है, जिससे सांस भी रुक जाती है।

3. सांस लेना

मरीज आमतौर पर होश में रहकर सांस लेता है। 

मरीज अचानक बेहोश हो जाता है और सामान्य रूप से सांस लेना बंद कर देता है।

4. दोनों का आपस में संबंध

हार्ट अटैक के कारण हृदय की धड़कन की रिद्म बिगड़ सकती है, जो कार्डियक अरेस्ट को जन्म दे सकता है।

वयस्कों में कार्डियक अरेस्ट का एक कारण हार्ट अटैक भी हो सकता है। 

5. मुख्य संकेत 

छाती में असहजता, दबाव, भारीपन, दर्द (जो बांह, गर्दन या पीठ तक जा सकता है) और पसीना आना।

व्यक्ति का अचानक गिर जाना, कोई प्रतिक्रिया न देना और सांस न चलना।

हार्ट अटैक और गैस या एसिडिटी के दर्द को कैसे पहचानें?

Dr. Sanket Garg का कहना है, “कई बार लोगों को सीने में जलन जैसा महसूस होता है और उन्हें लगता है कि ज्यादा खाना खाने की वजह से ऐसा हुआ है, लेकिन यह हार्ट अटैक का भी लक्षण हो सकता है। इसलिए हार्ट अटैक और गैस या एसिडिटी में अंतर को समझना चाहिए।”

Mayo Clinic के मुताबिक, हार्टबर्न और हार्ट अटैक में यह अंतर हो सकता है।

लक्षण

हार्टबर्न 

हार्ट अटैक 

दर्द का प्रकार 

आमतौर पर जलन जैसा महसूस होता है, जो पेट के ऊपरी हिस्से से सीने तक आता है।

सीने में भारी दबाव, जकड़न, तेज दर्द या निचोड़ने जैसा एहसास होता है।

दर्द का फैलना 

दर्द मुख्य रूप से सीने और भोजन नली के आस-पास सीमित रहता है।

दर्द गर्दन, जबड़े, पीठ, कंधे या बांहों (खासतौर पर बाईं बांह) तक फैल सकता है।

ट्रिगर 

भारी या मसालेदार खाना खाने के बाद, लेटने या झुकने पर बढ़ता है।

अक्सर फिजिकल या मेंटल तनाव के दौरान शुरू हो सकता है या आराम में भी आ सकता है।

साथ में दिखने वाले लक्षण 

मुंह में खट्टा स्वाद आना, खट्टी डकारें और एंटासिड दवा लेने से राहत मिलना।

ठंडा पसीना आना, सांस लेने में तकलीफ, अचानक चक्कर आना और बहुत ज्यादा थकान महसूस होना।

स्थिति की गंभीरता 

यह एक पाचन संबंधी समस्या है, जो जीवन के लिए तुरंत घातक नहीं होती।

यह एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें तुरंत डॉक्टरी मदद की जरूरत होती है।

क्या कम उम्र में भी हार्ट अटैक आ सकता है?

Dr. Sanket Garg का कहना है, "आजकल हार्ट अटैक सिर्फ बुजुर्गों तक ही सीमित नहीं रह गया है। कई बार स्वस्थ दिखने वाले वयस्कों में भी हार्ट अटैक आ सकता है। आजकल लाइफस्टाइल में बदलाव, स्ट्रेस, धूम्रपान, मोटापा, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं को कारण युवाओं में हार्ट अटैक के मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। कुछ मामलों में फैमिली हिस्ट्री के कारण भी युवाओं में हार्ट अटैक के मामले देखे जा सकते हैं।"

जिम हार्ट अटैक क्या है?

Dr. Sanket Garg कहते हैं कि हाल के दिनों में जिम में हार्ट अटैक के कई मामले देखने को मिले हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं।

  • जिम में हार्ट अटैक तब होता है, जब वर्कआउट के दौरान जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करते हैं, तो हार्ट में अचानक ब्लड फ्लो रुक सकता है।
  • कई बार लोगों को पता नहीं होता कि उन्हें किसी तरह की समस्या है, तो जब वह मुश्किल एक्सरसाइज करते हैं, तो यह हार्ट के लिए ट्रिगर हो सकता है।
  • कुछ लोग गलत वार्म-अप या कूल-डाउन करते हैं, जिससे हार्ट पर बिना वजह स्ट्रेस पड़ सकता है।
  • डिहाइड्रेशन या इलेक्ट्रोलाइट्स में असुंतलन होने पर भी हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ सकता है।
  • जो लोग स्ट्रेस में एक्सरसाइज करते हैं, तो उनमें शारीरिक और मानसिक तनाव मिलकर हार्ट अटैक का कारण बन सकता है।

डायबिटीज में हार्ट अटैक आने का क्या कारण है?

Dr. Sanket Garg ने कहा, "डायबिटीज के मरीजों को हार्ट की बीमारियां होने का रिस्क काफी ज्यादा रहता है। डायबिटीज के कारण हार्ट तक जाने वाली ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंच सकता है, जिस वजह से हार्ट अटैक आने का खतरा बढ़ सकता है। आमतौर पर डायबिटीज के रोगियों को सीने में जलन, सांस लेने में तकलीफ, चक्कर या सिर हल्का महसूस हो सकता है। कई लोगों को हाथों में चिपचिपाहट या पसीने के साथ ठंड भी लग सकती है। कई बार हार्ट अटैक बिना किसी लक्षणों के भी आ सकता है, जो खतरनाक साबित हो सकता है।"

हार्ट अटैक में तुरंत क्या करना चाहिए?

Dr. Sanket Garg कहते हैं कि हार्ट अटैक आने पर मरीज के आस-पास के लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए। समय पर फर्स्ट एड और तुरंत मेडिकल मदद मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकती है। इसके लिए मरीज के आस-पास के लोगों को ये काम करने चाहिए।

  • मरीज में हार्ट अटैक के लक्षणों को देखते ही तुरंत एम्बुलेंस को कॉल करें।
  • मरीज को आराम से बैठने में मदद करें और उसकी बेल्ट या टाई को ढीला कर दें।
  • अगर मरीज को एस्पिरिन से एलर्जी नहीं है, तो उसे चबाने के लिए एस्पिरिन की गोली दी जा सकती है। यह खून के थक्कों को कम कर सकती है।
  • एस्पिरिन देने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। खुद से एस्पिरिन न दें।
  • अगर मरीज बेहोश हो गया है या सांस नहीं ले पा रहा हो, तो मरीज को CPR दिया जा सकता है।
  • मरीज को हौसला देते रहें और उसे अकेला न छोड़ें।

हार्ट अटैक में क्या नहीं करना चाहिए?

Dr. Sanket Garg ने कहा कि हार्ट अटैक आने पर इन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।

  • मरीज को बिल्कुल भी घबराना नहीं चाहिए।
  • मरीज को अकेला न छोड़ें।
  • मरीज को खुद गाड़ी चलाने, चलने या भागने न दें, क्योंकि इससे शरीर में स्ट्रेस बढ़ सकता है।
  • लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
  • घर पर खुद ही इलाज न करें।

हार्ट अटैक की जांच कैसे होती है?

Mayo Clinic के अनुसार, डॉक्टर हार्ट अटैक से जुड़े लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जान सकते हैं। इसमें ब्लड प्रेशर, नाड़ी और शरीर के तापमान को चेक किया जा सकता है। इसके अलावा, ये टेस्ट भी किए जा सकते हैं।

1. इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ECG या EKG)

हार्ट अटैक की जांच के लिए सबसे पहले डॉक्टर ECG करते हैं, जो हार्ट से गुजरने वाले इलेक्ट्रिकल सिग्नलों को रिकॉर्ड करता है। छाती और कभी-कभी बांहों व पैरों पर इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं। सिग्नलों को तरंगों के रूप में रिकॉर्ड किया जाता है, जिसे मॉनिटर पर देखा जा सकता है। इसे कागज पर भी प्रिंट लिया जा सकता है। ECG से यह भी पता चलता है कि मरीज को हार्ट अटैक आया है या पहले कभी आया था। आमतौर पर लोग ECG और Echo में कंफ्यूज हो जाते हैं। इसलिए दोनों में फर्क समझना जरूरी है।

2. ब्लड टेस्ट

हार्ट अटैक के बाद दिल को नुकसान पहुंचाने वाले कुछ खास प्रोटीन धीरे-धीरे ब्लड में रिलीज होने लगते हैं। इन कार्डियक मार्कर्स की जांच के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है।

3. चेस्ट एक्स-रे

चेस्ट एक्स-रे दिल और फेफड़ों के आकार और उनकी स्थिति के बारे में बताता है।

4. इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram)

इसमें अल्ट्रासाउंड धड़कते हुए दिल की तस्वीरें बनाता है, जिसमें पता चलता है कि हार्ट और हार्ट वाल्व के जरिए ब्लड फ्लो कैसे हो रहा है। इकोकार्डियोग्राम के जरिए यह पहचान की जाती है कि हार्ट का कोई हिस्सा क्षतिग्रस्त तो नहीं हुआ है।

5. एंजियोग्राफी

एंजियोग्राफी में डॉक्टर द्वारा एक लंबी, पतली नली (कैथेटर) को आमतौर पर पैर या हाथ के माध्यम से धमनी में डाला जाता है। फिर इसे हार्ट तक पहुंचाया जाता है। इसमें कैथेटर की मदद से एक खास तरह की डाई को हृदय की रक्त वाहिकाओं में प्रवाहित किया जाता है।

6. कार्डिएक कंप्यूटराइज्ड टोमोग्राफी (CT)

इस जांच में धड़कते दिल और छाती की विस्तार से तस्वीरें ली जाती हैं, जिससे मरीज के हार्ट की कंडीशन को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलती है।

हार्ट अटैक का इलाज कैसे होता है?

Dr. Sanket Garg ने कहा, "हार्ट अटैक में दिल के ब्लड फ्लो को ठीक करने के लिए तुरंत इलाज शुरू किया जाता है। इलाज का तरीका मरीज की कंडीशन पर निर्भर करता है। हार्ट अटैक में आमतौर पर एस्पिरिन दवा दी जा सकती है, ताकि खून के थक्कों को कम किया जा सके। इसके अलावा, क्लॉट बस्टर्स दवाएं हार्ट के ब्लड फ्लो को रोकने वाले रक्त के थक्कों को घोलने में मदद करती हैं। जितनी जल्दी ये दवाएं दी जाएं, उतना ही नुकसान कम होता है। कुछ मामलों में ब्लड थिनर दवाएं दी जा सकती हैं और कई बार मरीज की धमनी को खोलने के लिए सर्जरी भी की जा सकती है।"

1. कोरोनरी एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग

इस प्रक्रिया में हार्ट की धमनियों को खोलने के लिए एक पतली कैथेटर को धमनी के संकुचित हिस्से तक ले जाते हैं। इसके बाद बंद धमनी को चौड़ा करने और उसमें ब्लड फ्लो में सुधार करने के लिए एक छोटा से गुब्बारा फुलाया जाता है। इसके बाद धमनी में धातु की जाली वाले एक छोटे स्टेंट को लगाया जाता है, जिससे धमनी को खोलने और ब्लड फ्लो को बेहतर करने में मदद मिलती है। कुछ स्टेंट पर दवा की परत चढ़ी होती है जो धमनियों को खुला रखने में मदद करती है।

2. कोरोनरी आर्टरी बायपास ग्राफ्टिंग

अगर हार्ट अटैक बहुत गंभीर होता है, तो डॉक्टर मरीज की ओपन-हार्ट सर्जरी भी कर सकते हैं। इसमें सर्जन शरीर के किसी अन्य हिस्से से स्वस्थ ब्लड वेसल को लेते हैं, ताकि दिल में ब्लड फ्लो के लिए एक नया रास्ता बनाया जा सके। इसके बाद ब्लड बंद या संकुचित धमनी के बजाय इस नए रास्ते से होकर गुजरता है। कुछ गंभीर मामलों में इसे इमरजेंसी सर्जरी के तौर पर किया जा सकता है।

हार्ट अटैक के बाद मरीज को रिकवर कैसे किया जाता है?

National Heart, Lung, and Blood Institute (NHLBI) के मुताबिक, आमतौर पर हार्ट अटैक आने के बाद अगर मरीज को इलाज तुरंत मिल जाता है और हार्ट की मांसपेशियों को नुकसान कम होता है, तो लाइफस्टाइल में बदलाव करके मरीज बेहतर और एक्टिव जीवन जी सकता है।

हार्ट अटैक का इलाज होने के बाद भी मरीज को डॉक्टर की निगरानी में ही रहना चाहिए। इस दौरान डॉक्टर मरीज को एक्सरसाइज ट्रेनिंग, हार्ट को सेहतमंद रखने वाली आदतों और स्ट्रेस कम करने के लिए काउंसलिंग देते हैं। आमतौर पर, कार्डियक रिहैबिलिटेशन 12 हफ्तों तक हो सकती है। इसमें मरीज के इलाज के लिए दी जा रही दवाओं की जरूरत कम करना और भविष्य में हार्ट से जुड़ी समस्याओं को रोकने में मदद करना शामिल है।

हार्ट अटैक के बाद क्या खाना चाहिए?

NIH के अनुसार, हार्ट अटैक के बाद मरीज को अपने खान-पान पर खास ध्यान देना चाहिए। डॉक्टर हाई ब्लड प्रेशर को रोकने के लिए डाइट प्लान की सलाह दे सकते हैं। हार्ट अटैक के बाद मरीज को ये चीजें अपनी डाइट में शामिल करनी चाहिए।

  • मौसमी और हरी पत्तेदार सब्जियां
  • सेब, केला, संतरा, नाशपाती, अंगूर और आलू बुखारा जैसे फलों को शामिल किया जा सकता है।
  • दलिया, ब्राउन राइस और साबुत अनाज खाना चाहिए।
  • दूध, पनीर या दही लेना है, तो यह फैट-फ्री होना चाहिए।
  • सैल्मन, टूना और ट्राउट जैसी ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर मछलियां ली जा सकती हैं।
  • लीन चिकन
  • अंडे
  • मेवे, सीड्स और सोया प्रोडक्ट्स
  • राजमा, दालें, छोले, लोबिया और बींस ले सकते हैं।
  • कैनोला, कॉर्न, जैतून, तिल, सूरजमुखी और सोयाबीन का तेल सीमित मात्रा में लिया जा सकता है।

हार्ट अटैक के बाद मरीज को क्या नहीं खाना चाहिए?

NIH की इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि हार्ट अटैक के बाद मरीज को कुछ चीजों को सीमित कर देना चाहिए।

  • नमक की मात्रा को बिल्कुल सीमित रखें।
  • अगर हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, तो नमक का सेवन और ज्यादा सीमित करने की जरूरत हो सकती है।
  • चीनी से जुड़े प्रोडक्ट्स को बिल्कुल सीमित करना बेहतर रहता है।
  • स्मोकिंग को बिल्कुल छोड़ दें।
  • शराब से दूरी बना लें।
  • नारियल के तेल की मात्रा सीमित कर दें।
  • नमक और शुगर कम करने के लिए फूड लेबल पढ़ें। कम नमक और शुगर वाले प्रोडक्ट्स ही खरीदें।
  • घर का बना ताजा खाना खाएं।
  • खाने में नमक के बजाय हर्ब्स डालें।

हार्ट अटैक के बाद कैसे नॉर्मल रूटीन शुरू करें?

Dr. Sanket Garg कहते हैं, "हार्ट अटैक के कुछ हफ्तों बाद मरीज अपने नॉर्मल रुटीन में लौट सकते हैं। वैसे यह काफी हद तक मरीज की कंडीशन पर भी निर्भर करता है। आमतौर पर मरीज को एक्टिविटीज धीरे-धीरे बढ़ाने की सलाह दी जाती है।"

  • मरीज को झाड़ू या पोछा लगाने, भारी चीजें उठाने जैसे भारी काम न करने की सलाह दी जाती है।
  • अगर किसी काम को करने में दिक्कत हो या असहज महसूस हो, तो तुरंत रुककर आराम करें।
  • डॉक्टर की सलाह पर किसी भी तरह की कसरत करें।
  • अगर डॉक्टर ने एंजाइना की दवा दी है, तो एक्सरसाइज करते समय उसे अपने पास रखें।
  • खाना खाने के तुरंत बाद एक्सरसाइज न करें।
  • अगर कसरत करते समय बहुत पसीना आता है, तो एक्सरसाइज से पहले और बाद में पानी पिएं।

क्या हार्ट अटैक के बाद वॉक करना सुरक्षित है?

Dr. Sanket Garg का मानना है कि हार्ट अटैक के बाद वॉक करना एक्सरसाइज का बेहतर तरीका है। टहलने से इन समस्याओं को कम किया जा सकता है।

  • मरीज को वजन, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
  • हार्ट अटैक के बाद दिन में 5 से 10 मिनट टहलने की शुरुआत की जा सकती है और कई हफ्तों में धीरे-धीरे इसे बढ़ाकर आधा घंटा तक किया जा सकता है।
  • घर के आस-पास ही वॉक शुरू करें।
  • वॉक करते समय ध्यान रखें कि जमीन समतल हो।
  • चलने की गति इतनी ही रखें कि सांस न फूले।
  • अगर किसी दिन वॉक का मन नहीं है, तो शरीर को आराम दें।
  • वॉक से 5 मिनट पहले और बाद में शरीर को वार्म-अप और कूल-डाउन जरूर करें।

हार्ट हेल्थ को सेहतमंद रखने के लिए क्या करें?

Mayo Clinic और Dr. Sanket Garg लोगों को हार्ट हेल्थ को बेहतर रखने के लिए लाइफस्टाइल और डाइट में कुछ बदलाव करने की सलाह देते हैं।

  • रेगुलर एक्सरसाइज करने से हार्ट हेल्थ अच्छी रहती है।
  • हफ्ते में 5 या उससे ज्यादा दिन 30 मिनट तक एक्सरसाइज जरूर करनी चाहिए।
  • ट्रांस फैट, नमक और चीनी वाले फूड्स को सीमित रखना चाहिए।
  • साबुत अनाज, फल, सब्जियां और लीन प्रोटीन खाना चाहिए।
  • वजन को सेहतमंद रखें।
  • स्मोकिंग और अल्कोहल बिल्कुल छोड़ दें।
  • ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल का लेवल चेक रखें।
  • स्ट्रेस को मैनेज करने के लिए मेडिटेशन करें।
  • रोजाना 7 से 9 घंटे की नींद लेने की कोशिश करें।

निष्कर्ष

अगर किसी को सीने में भारीपन, दर्द, बाईं बांह की तरफ दर्द, जबड़े में दर्द या सांस लेने में तकलीफ हो, तो इसे एसिडिटी समझकर घर पर इलाज न करें। ये हार्ट अटैक के लक्षण हो सकते हैं। इसलिए तुरंत डॉक्टर को दिखाएं और जरूरी इलाज कराएं। अगर हार्ट अटैक का समय पर इलाज न हो, तो यह जानलेवा भी हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हार्ट को हेल्दी रखने के लिए नमक, चीनी, प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड और तेल की मात्रा को सीमित रखें।

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