कम उम्र में हार्ट अटैक आना काफी आम हो गया है। एक दशक पहले तक छोटी उम्र में हार्ट अटैक के मामले काफी कम देखने को मिलते थे, लेकिन अब युवाओं में दिल से जुड़ी गंभीर समस्याओं के कुछ मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे मामलों में सिर्फ तनाव या खराब लाइफस्टाइल को जिम्मेदार मानना सही नहीं है। कई बार इसके पीछे आनुवंशिक बीमारी, जन्मजात हार्ट की समस्याएं, बहुत ज्यादा कोलेस्ट्रॉल या पहले हुई किसी बीमारी का असर भी हो सकता है।
युवाओं में हार्ट अटैक के खतरे को जानने के लिए हमने Dr. Deebanshu Gupta, Consultant Interventional Cardiologist, Sarvodaya Hospital, Jalandhar से बात की।
कम उम्र में हार्ट अटैक आने के 5 कारण
Dr. Deebanshu Gupta ने बताया कि कम उम्र में हार्ट अटैक होने के पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। कुछ रिस्क ऐसे हैं, जिन्हें बदला नहीं जा सकता, जबकि कुछ कारणों पर समय रहते काम किया जा सकता है।
1. जन्मजात हृदय रोग और कोरोनरी आर्टरी की समस्या
Dr. Deebanshu Gupta कहते हैं, “कुछ बच्चों में हार्ट की बनावट या कोरोनरी धमनियों की संरचना जन्म से ही सामान्य नहीं होती। जैसे कुछ बच्चों में एओर्टिक वाल्व स्टेनोसिस, कोरोनरी आर्टरी की असामान्य शुरुआत और हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी जैसी कंडीशंस में हार्ट तक ब्लड पहुंचने के प्रोसेस पर असर डाल सकती है। हालांकि, आजकल हार्ट से जुड़ी बीमारियों का पता बचपन में ही चल जाता है, लेकिन कुछ मामलों में लक्षण काफी देर बाद सामने आते हैं। खासतौर पर जब युवा एक्सरसाइज करते समय सीने में दर्द, सांस फूलना या बेहोशी जैसी समस्या महसूस करते हैं।”
2. जेनेटिकल ज्यादा कोलेस्ट्रॉल होना
Dr. Deebanshu Gupta ने कहा, “कम उम्र में हार्ट अटैक के पीछे फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया भी एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है। यह एक जेनेटिकल कंडीशन है, जिसमें शरीर में LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर बहुत ज्यादा रह सकता है। यह दुर्लभ और गंभीर बीमारी है, जिसे Homozygous Familial Hypercholesterolemia (HoFH) कहते हैं। इसमें कोलेस्ट्रॉल का स्तर बचपन से ही बहुत ज्यादा हो सकता है और कुछ मरीजों में टीनएज उम्र तक कोरोनरी आर्टरी डिजीज विकसित हो सकती है। इसलिए अगर परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक या बहुत ज्यादा कोलेस्ट्रॉल की हिस्ट्री है, तो बच्चों और युवाओं की नियमित जांच कराना महत्वपूर्ण हो सकता है।”
3. कावासाकी डिजीज होना
Dr. Deebanshu Gupta ने बताया कि कावासाकी डिजीज आमतौर पर छोटे बच्चों में होने वाली एक सूजन संबंधी बीमारी है, लेकिन इसका असर आगे चलकर दिल की कोरोनरी धमनियों पर पड़ सकता है। अगर बीमारी का समय पर इलाज न हो, तो कोरोनरी आर्टरी में सूजन, फैलाव या बाद में संकुचन हो सकता है। कुछ मामलों में वहां खून का थक्का बनने से ब्लड के फ्लो में रुकावट हो सकती है। इससे हार्ट अटैक का रिस्क बढ़ सकता है। अगर किसी बच्चे को पहले से कावासाकी डिजीज हुई थी, तो उसे डॉक्टर की सलाह के अनुसार लंबे समय तक हार्ट फॉलो-अप जरूरी हो सकता है।
heart attack in young people
यह भी पढ़ें- हार्ट अटैक का खतरा किन लोगों में सबसे ज्यादा होता है? समय रहते पहचानें चेतावनी के ये संकेत
4. स्मोकिंग,नशा और खराब लाइफस्टाइल
Dr. Deebanshu Gupta के मुताबिक, युवाओं का अनहेल्दी लाइफस्टाइल हार्ट अटैक का कारण हो सकता है। जो युवा सिगरेट, तंबाकू का सेवन करते हैं, फिजिकल एक्टिविटी बिल्कुल नहीं करते, बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड फूड खाते हैं और शराब पीते हैं, उन्हें हार्ट से जुड़ी बीमारियां और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, जो युवा कोकीन और एम्फेटामाइन जैसे कुछ नशीले पदार्थ लेते हैं, उनमें दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर की गंभीर समस्या हो सकती है। इससे युवाओं में हार्ट की बीमारियां होने का रिस्क बढ़ सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हार्ट की बीमारियों के रिस्क को रोकने के लिए तंबाकू का सेवन, बहुत ज्यादा नमक, चीनी और फैट और अल्कोहल नहीं लेना चाहिए। इसके साथ मोटापे को कंट्रोल करना जरूरी है और फिजिकल एक्टिविटी करनी चाहिए।
5. हाई ब्लड प्रेशर और मोटापा
Dr. Deebanshu Gupta कहते हैं, “मेरे पास कई युवा ऐसे आते हैं, जो कहते हैं कि इतनी यंग एज में उन्हें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरा नहीं हो सकता, लेकिन मैं बताना चाहता हूं कि लगातार खराब खान-पान, कम फिजिकल एक्टिविटी और बढ़ते वजन के कारण हार्ट की बीमारियां हो सकती है। हार्ट की बीमारियों के लक्षणों को नजरअंदाज करने से कम उम्र में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है।”
भारत में हार्ट अटैक के बढ़ते मामले
PubMed में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, National Crime Records Bureau (NCRB) ने बताया कि भारत में आर्ट अटैक से होने वाली मौतों में काफी ज्यादा बढ़ोतरी देखी गई है। साल 2022 में ही इसके मामलों में करीब 12.5% की वृद्धि हुई थी।
- PubMed की इसी रिपोर्ट में बताया गया कि Indian Heart Association के मुताबिक, भारतीय पुरुषों में होने वाले कुल हार्ट अटैक में से आधे 50 साल से कम उम्र के हैं। साल 2021 में 18 से 30 साल की उम्र के युवाओं में 2541 मृत्यु का कारण हार्ट अटैक था।
- साल 2023 में भारत के गुजरात में हार्ट अटैक से जुड़ी इमरजेंसी में भारी उछाल देखने को मिला।
- 'इमरजेंसी मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट' (EMRI) के 2023 आंकड़ों के अनुसार, गुजरात में 11 से 25 साल की उम्र के बीच 2853 लोगों की जान हार्ट अटैक के कारण गई।
युवा हार्ट अटैक के कौन से लक्षण नजरअंदाज न करें?
Dr. Deebanshu Gupta कहते हैं कि हर युवा को सीने में दर्द नहीं होता। इसलिए युवाओं को इन लक्षणों को बिल्कुल भी इग्नोर नहीं करना है।
- मांसपेशियों का दर्द
- एसिडिटी जैसा महसूस होना
- एंग्जायटी या सांस से जुड़ी समस्याएं
- एक्सरसाइज के दौरान सीने में दर्द या दबाव महसूस होना
- अचानक सांस फूलना
- एक्सरसाइज करते समय बेहोश हो जाना
- बहुत ज्यादा पसीना आना
- कमजोरी, चक्कर या दर्द हाथ, कंधे, पीठ या जबड़े तक फैल रहा हो
युवाओं को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
Dr. Deebanshu Gupta ने युवाओं को कहा कि हार्ट हेल्थ का ध्यान शुरू से ही रखना चाहिए। अगर किसी के परिवार में कम उम्र में हार्ट डिजीज का इतिहास हो तो डॉक्टर से बात करके ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर जरूर चेक कराएं।
- धूम्रपान और तंबाकू बिल्कुल न लें।
- ड्रग्स जैसे नशीले पदार्थों से बिल्कुल दूरी बनाकर रखें।
- रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी करें।
- बैलेंस्ड डाइट बहुत जरूरी है।
- अपनी नींद पूरी रखें।
- वजन को कंट्रोल में रखें।
- जंक या प्रोसेस्ड फूड को बिल्कुल सीमित रखें।
निष्कर्ष
Dr. Deebanshu Gupta सलाह देते हैं कि हार्ट अटैक की फैमिली हिस्ट्री होने पर युवाओं को खास ध्यान रखना चाहिए। इसके अलावा, अपने लाइफस्टाइल की आदतों में बदलाव करके हार्ट हेल्थ को बेहतर रखा जा सकता है। नशीले पदार्थों के सेवन से दूरी बनाकर रखने से दिल बेहतर तरीके से काम करता है। अगर किसी युवा को एक्सरसाइज के दौरान सांस फूलने या सीने में दर्द जैसा महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
All Image Credit: Magnific
FAQ
क्या धूम्रपान और वेपिंग कम उम्र में धमनियों को ब्लॉक कर सकते हैं?
निकोटिन धमनियों को सिकोड़ता है और रक्त में ऑक्सीजन का स्तर घटाता है। स्मोकिंग से ब्लड वेसल्स पर प्लेक तेजी से जमती है और थक्का बनने की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।पतले या फिट दिखने वाले युवाओं को भी क्या हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है?
बाहर से दुबले-पतले दिखने का मतलब यह नहीं है कि अंदर से दिल स्वस्थ है। लीन ओबेसिटी, जेनेटिक हाई कोलेस्ट्रॉल, या खराब खानपान से पतले लोगों की धमनियों में भी ब्लॉकेज हो सकती है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Aug 20, 2026 19:35 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Deebanshu Gupta
