Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr V Rajasekhar , Senior Consultant – Interventional Cardiology & Electrophysiology | Certified TAVR Operator | Clinical Director

हार्ट अटैक का खतरा किन लोगों में सबसे ज्यादा होता है? समय रहते पहचानें चेतावनी के ये संकेत

द‍िल की मांसपेश‍ियों तक ब्‍लड को पहुंचाने वाली धमन‍ियों में रुकावट के कारण हार्ट अटैक आता है। अगर आप डायब‍िटीज, हाई बीपी या कोलेस्‍ट्रॉल के मरीज हैं, तो इसका खतरा बढ़ सकता है। जानें क‍िन और लोगों को ज्‍यादा खतरा होता है?

कुछ साल पहले हार्ट अटैक केवल बुजुर्गों में होने वाली बीमारी मानी जाती थी। 60 साल की उम्र के बाद हार्ट अटैक के केस सुनने को म‍िलते थे, लेकि‍न अब तो आए द‍िन सुर्ख‍ियों में युवाओं के हार्ट अटैक से मौत के बारे में पता चल रहा है। पि‍छले कुछ सालों में युवाओं में हार्ट अटैक तेजी से बढ़ा है। आजकल की अन‍ियम‍ित जीवनशैली इसका सबसे बड़ा कारण है। स्‍ट्रेस लेना, अनहेल्‍दी खाना, नींद की कमी जैसे कारण हार्ट अटैक का र‍िस्‍क बढ़ा देते हैं। क्रॉन‍िक बीमार‍ियों के मरीजों को भी इसका जोख‍िम अध‍िक होता है। आगे लेख में हम जानेंगे क‍ि आख‍िर क‍िन लोगों में हार्ट अटैक का जोख‍िम अध‍िक होता है, कैसे बचाव करें और चेतावनी संकेत कौन से हैं? बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. V. Rajasekhar, Cardiologist At Yashoda Hospitals, Hitec City, Hyderabad से बात की।

हार्ट अटैक के चेतावनी संकेत

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American Heart Association के मुताब‍िक, कुछ हार्ट अटैक अचानक से आते हैं, लेक‍िन कुछ मामलों में हार्ट अटैक से ठीक पहले कुछ लक्षण नजर आते हैं ज‍िन पर गौर करना चाह‍िए जैसे-

  • चेस्‍ट पेन या असहजता महसूस होना। यह लक्षण कुछ म‍िनट से ज्‍यादा समय के ल‍िए रह सकते हैं, ठीक होकर दोबारा भी महसूस हो सकते हैं। कुछ लोगों को चेस्‍ट के बीच में प्रेशर महसूस होता है।
  • जबड़े, गर्दन या पीठ में दर्द या असहजता होना।
  • हाथ और कंधों में असामान्‍य महसूस होना।
  • सांस लेने में तकलीफ होना।
  • अचानक से अध‍िक थकान होना।
  • जी म‍िचलाना या उल्‍टी आना।

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हार्ट अटैक का खतरा क‍िन लोगों में ज्‍यादा होता है?

Dr. V. Rajasekhar ने बताया क‍ि अध‍िक उम्र, तंबाकू का सेवन, अस्‍वस्‍थ जीवनशैली के कारण हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा- 

  1. ज‍िन लोगों को पहले से कार्डि‍योवैस्‍कुलर ड‍िजीज है।
  2. ज‍िन लोगों को क्रॉन‍िक क‍िडनी ड‍िजीज है।
  3. कोरोनरी ड‍िजीज के कारण भी इसका खतरा बढ़ जाता है।
  4. इंफ्लेमेटरी कंडीशन जैसे रूमेटाइड अर्थराइट‍िस के मरीजों में भी इसका खतरा ज्‍यादा होता है।
  5. स्‍लीप एपन‍िया का इलाज न करने की वजह से या लंबे समय तक स्‍ट्रेस या ड‍िप्रेशन में रहने के कारण भी हार्ट ड‍िजीज का र‍िस्‍क बढ़ सकता है।
  6. 40 से 75 साल की उम्र में हार्ट अटैक का र‍िस्‍क हो सकता है। हालांक‍ि आजकल युवाओं में भी इसका खतरा बढ़ रहा है। मह‍िलाओं में हार्ट अटैक का खतरा 55 के बाद और पुरुषों में 45 की उम्र के बाद ज्‍यादा देखा गया है।
  7. हार्ट अटैक का एक कारण जेनेट‍िक होता है, लेक‍िन अगर आपके पर‍िवार में हार्ट अटैक का खतरा नहीं भी है, तो भी आप इसका श‍िकार हो सकते हैं।
  8. ज‍िन लोगों को मेटाबॉल‍िक स‍िंड्रोम या क्रॉन‍िक क‍िडनी ड‍िजीज होता है।
  9. HIV या AIDS।
  10. प्रीक्लेम्पसिया या अर्ली मेनोपॉज का इत‍िहास होना।
  11. ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल ज्‍यादा होना।

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डायब‍िटीज, हाई बीपी और कोलेस्‍ट्रॉल के मरीज बरतें व‍िशेष सावधानी

  • रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के मुताब‍िक, डायब‍िटीज के कारण ब्‍लड में शुगर लेवल बढ़ जाता है। डायब‍िटीज में हार्ट ड‍िजीज का र‍िस्‍क सामान्‍य लोगों के मुकाबले ज्‍यादा होता है।
  • हाई बीपी की कंडीशन तब होती है जब आर्टरीज और अन्‍य ब्‍लड वेसल्‍स में ब्‍लड का प्रेशर ज्‍यादा होता है और इससे हार्ट, क‍िडनी और ब्रेन जैसे अंग प्रभाव‍ित हाे सकते हैं।
  • एलडीएल यानी बैड कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल अगर शरीर में ज्‍यादा होगा, तो आर्टरीज में प्‍लाक जमेगा ज‍िससे हार्ट अटैक आने का खतरा बढ़ जाता है।

हार्ट अटैक से बढ़ता है इन बीमार‍ियों का खतरा

Mayo Clinic के मुताब‍िक, अगर क‍िसी व्‍यक्ति‍ को हार्ट अटैक आया है, तो उसका सही समय पर इलाज कराने से समस्‍या टल नहीं जाती। ज‍िन लोगों को हार्ट अटैक आता है उन्‍हें आगे चलकर हार्ट संबंध‍ित समस्‍याएं हो सकती हैं जैसे-

  • अटैक के कारण हार्ट में इलेक्‍ट्र‍िकल सिग्नल प्रभाव‍ित होते हैं ज‍िससे अन‍ियम‍ित द‍िल की धड़कन की समस्‍या हो सकती है।
  • अटैक के बाद हार्ट अचानक से ब्‍लड पंप करने में असमर्थ हो जाता है ज‍िससे दुर्लभ मामलों में कार्ड‍ियोजेन‍िक शॉक लग सकता है।
  • साथ ही हार्ट अटैक आने से हार्ट फेल‍ियर या कार्ड‍ियक अरेस्‍ट यानी ब‍िना क‍िसी चेतावनी के द‍िल की धड़कन रुक जाना जैसे जानलेवा जोख‍िम बढ़ जाते हैं।

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हार्ट अटैक के र‍िस्‍क को कैसे कम करें?

  • हार्ट-फ्रेंडली डाइट लें ज‍िसमें सैचुरेटेड और ट्रांस फैट की मात्रा कम होना।
  • डाइट में नमक और चीनी की मात्रा भी सीम‍ित रखें।
  • समय पर दवाएं लें और रेगुलर जांच कराएं।
  • स्‍ट्रेस को मैनेज करें और नींद पूरी करें।
  • हाई बीपी को कंट्रोल करें और समय-समय पर बीपी को मॉन‍िटर करें।
  • धूम्रपान और अल्‍कोहल से परहेज करें।
  • हेल्‍दी वजन मेनटेन करें।
  • अगर आपको डायबि‍टीज है, तो शुगर लेवल कंट्रोल करें।
  • द‍िनभर में कम से कम 150 म‍िनट फ‍िजि‍कल एक्‍ट‍िव‍िटी को देना चाह‍िए।

न‍िष्‍कर्ष:

अध‍िक उम्र, डायबि‍टीज, हाई बीपी, हाई कोलेस्‍ट्रॉल, तंबाकू का सेवन, अस्‍वस्‍थ जीवनशैली के कारण हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है। कार्डि‍योवैस्‍कुलर ड‍िजीज, क्रॉन‍िक क‍िडनी ड‍िजीज, रूमेटाइड अर्थराइट‍िस, स्‍लीप एपन‍िया, ड‍िप्रेशन के मरीज, मेटाबॉल‍िक स‍िंड्रोम या पार‍िवार‍िक इत‍िहास वाले लोगों में भी हार्ट अटैक का र‍िस्‍क ज्‍यादा होता है। चेस्‍ट में असहजता, जी म‍िचलाना, चेस्‍ट में भारीपन, दर्द, उल्‍टी जैसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत डॉक्‍टर से सलाह लें।

FAQ

  • क‍िन आदतों से हार्ट अटैक र‍िस्‍क बढ़ता है?

    धूम्रपान, मोटापा, फ‍िजि‍कल एक्‍ट‍िव‍िटी न करना, अनहेल्‍दी डाइट का सेवन करना, ज्‍यादा अल्‍कोहल का सेवन करने से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है।
  • हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में क्या अंतर है?

    हार्ट अटैक में हार्ट तक ब्‍लड फ्लो कम या बंद हो जाता है। कार्डि‍यक अरेस्‍ट में हार्ट अचानक धड़कना बंद कर देता है। दोनों कंडीशन में तुरंत हॉस्‍प‍िटल जाएं।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 22, 2026 19:52 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr V Rajasekhar

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