जब हम बहुत देर चलकर आते हैं उस दिन पैरों में सूजन दिखती है जो अगले दिन तक उतर जाती है। ट्रैवल के दौरान भी ज्यादा देर बैठना पड़ता है या काम के दौरान ज्यादा देर बैठने से भी पैरों में सूजन हो जाती है, जो एक या दो दिन में ठीक हो जाती है, लेकिन जब सूजन कम न हो और समय के साथ बढ़ने लगे, तो यह चिंता की बात हो सकती है। MedlinePlus के मुताबिक, जब हार्ट ठीक से काम नहीं करता है, तो ब्लड फ्लो धीमा हो जाता है, इससे ब्लड नसों में जमा होने लगता है जिसके कारण टिशूज में फ्लूइड भर जाता है। जानें हार्ट की किन कंडीशन में पैरों में सूजन दिख सकती है? बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Rajasekhar, Cardiologist At Yashoda Hospitals, Hitec City, Hyderabad से बात की।
हार्ट फेलियर के कारण पैरों में सूजन आ सकती है

पैरों में सूजन के पीछे कई कारण हो सकते हैं जिनमें से एक हार्ट डिजीज भी है। हालांकि, पैर में सूजन होना हार्ट डिजीज का लक्षण नहीं है। हालांकि, जब हार्ट कमजोर होता है और ब्लड को ठीक से पंप नहीं कर पाता है तब हार्ट फेलियर की कंडीशन देखने को मिलती है जिसके कारण पैर, टखनों या पंजों में फ्लूइड भर जाता है और इसे ही लेग एडिमा या सूजन कहा जाता है। सूजन के अलावा सांस लेने में तकलीफ, वेट गेन या जल्दी थक जाने जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं। ऐसा नहीं है कि केवल हार्ट डिजीज के कारण ही पैरों में सूजन होती है। इसके पीछे अन्य कारण हो सकते हैं जैसे ब्लड क्लॉट, लिवर डिजीज, ज्यादा समय तक खड़ा रहने की आदत वगैरह। British Heart Foundation के मुताबिक, अगर पैर या टखनों में सूजन बनी रहे या अचानक से तेज हो जाए, तो यह हार्ट फेलियर का संकेत हो सकता है।
Mayo Clinic के मुताबिक, कंजस्टिव हार्ट फेलियर के कारण हार्ट के निचले चैंबर ठीक से ब्लड पंप नहीं कर पाते हैं। इस वजह से पैर में ब्लड जमा हो जाता है जिसे हम एडिमा कहते हैं। इससे पेट में भी सूजन आ सकती है और फेफड़ों में भी तरल पदार्थ भरने के कारण सूजन आ सकती है जिससे सांस की तकलीफ भी हो सकती है।
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कैसे पता करें सूजन की वजह हार्ट डिजीज है या नहीं?
पैरों में सूजन का कारण हार्ट डिजीज है या नहीं, इसका कारण पता लगाने के लिए डॉक्टर ईसीजी, चेस्ट एक्स-रे, इकोकार्डियोग्राम, ब्लड टेस्ट, नसों का अल्ट्रासाउंड करा सकते हैं। इन जांच की मदद से यह पता चलता है कि पैरों में सूजन का कारण हार्ट डिजीज है या नहीं। साल 2016 में Circulation: Heart Failure में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, 4196 प्रतिभागियों के डेटा का विश्लेषण किया गया, जिन्हें पहले से कोई हार्ट डिजीज नहीं था। स्टडी के मुताबिक, पैरों की लगातार सूजन के साथ अगर सांस फूलना, सांस की परेशानी या थकान जैसे लक्षण नजर आएं, तो हार्ट हेल्थ की जांच होनी चाहिए।
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पैर में सूजन कब चिंता की बात है?
- हल्की सूजन सामान्य बात है, लेकिन अगर सूजन लंबे समय तक बनी रहे, तो यह चिंता की बात है।
- अगर दर्द अचानक शुरू हो जाए।
- केवल एक पैर में सूजन हो रही हो।
- पैर में गर्माहट या रेडनेस महसूस हो।
- सांस लेने में तकलीफ या सीने में दर्द हो।
- पैरों की सूजन के साथ वजन तेजी से बढ़ना या शरीर में पानी जमा होने के अन्य संकेत दिखाई दें।
- त्वचा में बदलाव, जैसे रंग बदलना, घाव होना या नसों का ज्यादा उभरना दिखाई दे।
- किडनी, लिवर, हार्ट या नसों से जुड़ी पहले से कोई बीमारी हो और पैरों में नई सूजन शुरू हो जाए।
डॉक्टर से सलाह कब लें?
- क्रॉनिक सूजन होने पर या सूजन के बढ़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
- सीने में दर्द या हार्ट डिजीज के लक्षण नजर आने पर लापरवाही न करें।
- सांस लेने में तकलीफ होने पर या अनियमित हार्टबीट होने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
- किसी भी असामान्य लक्षण नजर आने पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है क्योंकि फ्लूइड अगर फेफड़ों में भर जाए, तो उसे पल्मोनरी एडिमा कहा जाता है। यह जानलेवा हो सकता है इसलिए डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
निष्कर्ष:
पैरों में सूजन हार्ट डिजीज का लक्षण नहीं है, लेकिन हार्ट फेलियर की कंडीशन में पैरों में सूजन हो सकती है। ब्लड टेस्ट, ईसीजी, चेस्ट एक्स-रे, इकोकार्डियोग्राम जैसी जांच की मदद से यह पता लगाया जाता है कि पैरों में सूजन के पीछे हार्ट डिजीज है या नहीं। अगर सीने में दर्द हो, सांस की तकलीफ हो, सूजन लगातार बढ़ रही हो, ताे डॉक्टर से संपर्क करना न भूलें।
FAQ
पैर में सूजन होने के गंभीर कारण क्या हैं?
किडनी या लिवर डैमेज, लिवर सिरोसिस, डीप वेन थ्रोम्बोसिस, क्रॉनिक वेनस इंसफिशिएंसी वगैरह पैर में सूजन के गंभीर कारण हैं।पैरों में सूजन का इलाज न करवाने पर क्या होगा?
पैरों में सूजन का इलाज न कराने पर दर्द बढ़ सकता है और चलने-फिरने में तकलीफ हो सकती है। सूजन वाली जगह इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है और पैरों का ब्लड फ्लो कम हो सकता है। इससे स्किन अल्सर होने की संभावना बढ़ जाती है।
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Jul 21, 2026 19:25 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr V Rajasekhar