हार्ट डिजीज के खतरे को कम करने के लिए वेट लॉस एक असरदार तरीका है। हार्ट के अधिकतर मरीजों को डॉक्टर वजन कंट्रोल करने की सलाह देते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि जब शरीर में फैट की मात्रा ज्यादा होती है, तो कोलेस्ट्रॉल लेवल, बीपी लेवल और अन्य मार्कर्स को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है और हार्ट डिजीज का खतरा रहता है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या केवल वजन कम करके हार्ट डिजीज के खतरे को टाला जा सकता है? इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमने Dr. Rajasekhar, Senior Consultant Interventional Cardiology & Electrophysiology, Certified Proctor For TAVR & Clinical Director At Yashoda Hospital, Hitec City, Hyderabad से बात की।
वेट लॉस से घटता है हार्ट डिजीज रिस्क
Dr. V. Rajasekhar ने बताया कि वजन घटाने से हार्ट डिजीज के खतरे को टालने में मदद मिलती है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और इंसुलिन रेजिस्टेंस की वजह से दिल पर दबाव पड़ता है और ये सभी शरीर का वजन ज्यादा होने से जुड़े हैं। हर व्यक्ति जो मोटापे का शिकार है या जिसका वजन ज्यादा है, उसे हार्ट डिजीज का खतरा हो, ऐसा भी जरूरी नहीं है। इसलिए हार्ट रिस्क से बचने के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव करने पर गौर करना चाहिए।
American Heart Association के मुताबिक, ज्यादा वजन के कारण हार्ट हेल्थ प्रभावित हो सकती है। जिन लोगों का वजन ज्यादा होता है, उनमें हाई बीपी, हाई कोलेस्ट्रॉल, स्लीप एपनिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं जिससे हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ सकता है। 5 से 10 प्रतिशत वजन कम करके भी हार्ट डिजीज का खतरा कम कर सकते हैं।
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हार्ट के लिए क्यों फायदेमंद है वेट लॉस?
हार्ट डिजीज से बचने के लिए वेट लॉस करना कई मायनों में फायदेमंद है जैसे-
- जब शरीर में फैट ज्यादा होता है, तब शरीर में टोटल ब्लड वॉल्यूम और हार्ट पर दबाव बढ़ सकता है जिससे हाई बीपी की समस्या होती है।
- वेट लॉस से गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद मिलती है और हार्ट अटैक का रिस्क कम होता है।
- जिन मरीजों ने 5 से 10 प्रतिशत वेट लॉस किया, उनके टोटल कोलेस्ट्रॉल, बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स लेवल में सुधार आया। साल 2015 में Translational Behavioral Medicine नामक जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, जब शरीर में ज्यादा सूजन होती है, तो हार्ट डिजीज का रिस्क ज्यादा होता है। वेट लॉस करने से सूजन को कम करने में मदद मिलती है और हार्ट हेल्दी रहता है।
- टाइप 2 डायबिटीज और मोटापा का भी गहरा संबंध है। डायबिटीज में मोटापा बढ़ सकता है और मोटापे के कारण डायबिटीज का खतरा हो सकता है। टाइप 2 डायबिटीज से ब्लड वेसल्स डैमेज हो सकती हैं और हार्ट को नुकसान पहुंचता है।
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हार्ट रिस्क से बचने के लिए सिर्फ वजन घटाना काफी नहीं

वेट लॉस की मदद से वजन घटाने में मदद जरूर मिलती है, लेकिन इसके अलावा और भी कई फैक्टर्स हैं जिन पर गौर करना चाहिए। जैसे-
- हार्ट को हेल्दी रखने के लिए नियमित फिजिकल एक्टिविटी जरूरी है। हार्ट को हेल्दी रखने के लिए ब्रिस्क वॉक, एरोबिक एक्सरसाइज, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, जॉगिंग वगैरह फायदेमंद है।
- हार्ट को स्वस्थ रखने और हार्ट अटैक के खतरे से बचने के लिए डाइट पर गौर करें। रागी, ज्वार, बाजरा जैसे होल ग्रेन्स, दाल, चना, राजमा जैसे प्रोटीन आहार, लो फैट दूध, दही और छाछ का सेवन कर सकते हैं। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (CDC) के मुताबिक, हार्ट डिजीज के खतरे से बचने के लिए सैचुरेटेड और ट्रांस फैट्स, सोडियम, शुगर वगैरह की मात्रा कम करें।
- हार्ट डिजीज के खतरे से बचने के लिए धूम्रपान से बचें, स्ट्रेस घटाएं, अच्छी नींद लेना भी जरूरी है।
- ऐसा जरूरी नहीं है कि केवल मोटापे से पीड़ित लोगों में ही हार्ट डिजीज का खतरा होगा। सामान्य वजन वाले लोगों में भी इन फैक्टर्स के कारण हार्ट डिजीज का रिस्क हो सकता है।
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हार्ट डिजीज से बचने के लिए कौन सी जांच कराएं?
- Mayo Clinic के मुताबिक, हार्ट डिजीज के खतरे से बचने के लिए 18 साल की उम्र से जांच शुरू की जानी चाहिए। इस उम्र में हर 2 साल में 1 बार बीपी की जांच होनी चाहिए।
- अगर उम्र 18 से 39 के बीच है और हाई बीपी का खतरा हो सकता है, तो साल में 1 बार जांच जरूर कराएं।
- 40 साल या उससे ज्यादा उम्र में भी साल में कम से कम 1 बार हाई बीपी की जांच जरूर करानी चाहिए।
- अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन का सुझाव है कि 9 से 11 साल और 17 साल से 21 के बीच कोलेस्ट्राॅल जांच करानी चाहिए। इससे कम उम्र में हार्ट रिस्क का पता चल सकता है।
- हर 4 से 6 सालों में कोलेस्ट्रॉल लेवल की जांच कराएं। अगर हार्ट रिस्क है या परिवार में बीमारी है, तो हर साल भी जांच करा सकते हैं।
- 45 साल की उम्र से लगातार शुगर लेवल को भी मॉनिटर करना चाहिए।
- अगर परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, तो 45 की उम्र से पहले भी शुगर लेवल की जांच करा सकते हैं।
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किन लोगों हार्ट डिजीज का ज्यादा खतरा होता है?
अगर आपका वजन ज्यादा है, आप एक्टिव नहीं हैं, हेल्दी डाइट नहीं लेते हैं, अल्कोहल का सेवन करते हैं, परिवार में हार्ट डिजीज का इतिहास है या अन्य कोई गंभीर बीमारी है, तो व्यक्ति हार्ट डिजीज की चपेट में आ सकता है।
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युवाओं को बरतनी चाहिए विशेष सावधानी
आजकल हम देख रहे हैं कि युवाओं में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कम उम्र में हार्ट अटैक के कारण लोगों को जान गंवानी पड़ती है। कारण है केवल अनियमित लाइफस्टाइल पैटर्न। देर तक जागना, देर से डिनर करना, सुबह देर से उठना, धूम्रपान, बाहर के जंक फूड पर निर्भर रहने की वजह से व्यक्ति हार्ट रिस्क की श्रेणी में आ जाता है।
निष्कर्ष:
वेट लॉस करके हार्ट डिजीज के खतरे को 5 से 10 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है, लेकिन हार्ट अटैक, स्ट्रोक या अन्य हार्ट डिजीज से बचने के लिए केवल वजन कम करना काफी नहीं है। इसके लिए नियमित फिजिकल एक्टिविटी, हेल्दी डाइट, धूम्रपान से परहेज, स्ट्रेस मैनेजमेंट, अच्छी नींद पर गौर करना भी जरूरी है। तभी आप हार्ट डिजीज के खतरे को कम कर पाएंगे। युवाओं को अनियमित दिनचर्या और खराब जीवनशैली के चलते हार्ट रिस्क का खतरा ज्यादा होता है इसलिए उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। साथ ही बचाव के लिए समय-समय पर बीपी, कोलेस्ट्रॉल लेवल और शुगर लेवल की जांच कराना जरूरी है।
FAQ
पेट की चर्बी कम करने से भी हार्ट डिजीज का रिस्क कम होता है?
हां, पेट की चर्बी घटाकर भी हार्ट डिजीज का रिस्क घटाने में मदद मिलती है। पेट के आसपास जमा चर्बी जिसे हम विसरल फैट कहते हैं वह सूजन और मेटाबॉलिक समस्याएं बढ़ा सकती हैं जिससे हार्ट डिजीज का रिस्क बढ़ता है।तेजी से वजन घटाना हार्ट के लिए सुरक्षित है?
नहीं, तेजी से वजन कम करना हार्ट के साथ-साथ शरीर के लिए सुरक्षित नहीं है। यह तरीका लंबे समय के लिए सुरक्षित नहीं होता है और इससे हार्ट पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है।
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Current Version
Jul 15, 2026 15:20 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Jul 15, 2026 15:20 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr V Rajasekhar