Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Payal Asthana , Fitness Expert

वेट लिफ्टिंग करने वाले जीते हैं ज्यादा, स्टडी का दावा: एक्सपर्ट बता रहे हैं अपनी राय

वेट ल‍िफ्टि‍ंग करने से स‍िर्फ मसल्‍स ही नहीं बनतीं बल्‍क‍ि यह एक लंबी उम्र का सीक्रेट भी है। हाल ही में एक स्‍टडी पब्‍ल‍िश हुई ज‍िसमें बताया गया क‍ि वेट ल‍िफ्टि‍ंग करके व्‍यक्‍त‍ि लंबा जी सकता है। एक्‍सपर्ट से जानते हैं वेट लिफ्टिंग करने के फायदे।

फ‍िट रहने के ल‍िए लोग अलग-अलग तरीकों का इस्‍तेमाल करते हैं ज‍िसमें से एक है वेट ल‍िफ्टि‍ंग। वेट ल‍िफ्ट‍िंग एक तरह की स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग एक्‍सरसाइज है ज‍िसमें डंबल या अन्‍य वेट प्रॉप्‍स की मदद से मांसपेश‍ियोंं को मजबूत बनाया जाता है। वैसे तो वेट ल‍िफ्टि‍ंग से शरीर को कई फायदे म‍िलते हैं, लेक‍िन हाल ही में एक स्‍टडी पब्‍ल‍िश हुई ज‍िसमें बताया गया क‍ि जो लोग वेट ल‍िफ्ट‍िंंग करते हैं वो लोग लंबी उम्र जी सकते हैं और ऐसे लोगों में समय से पहले मृत्‍यु का खतरा भी कम हो सकता है। आइए जानते हैं क्‍या कहती है स्‍टडी? वेट ल‍िफ्टि‍ंग के फायदे जानने के ल‍िए हमने Director Ozefit Fitness Club, Australia & Certified Fitness Coach Payal Asthana से बात की।

वेट ल‍िफ्टिंग करके जी सकते हैं लंबी लाइफ

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साल 2026 में British Journal Of Sports Medicine नामक एक जर्नल में प्रकाश‍ित स्‍टडी में तीन अध्ययनों के आंकड़ों को शाम‍िल क‍िया गया। इस स्‍टडी में लगभग 1.5 लाख लोगों को 30 सालों तक फॉलो क‍िया गया। स्‍टडी ने यह पाया क‍ि लोग हफ्ते में करीब 90 से 120 म‍िनट वेट ल‍िफ्ट‍ि‍ंग करते हैं, उनमें क‍िसी भी कारण से मृत्‍यु होने का खतरा ऐसे लोगों की तुलना में 13 प्रत‍िशत कम था जो ऐसी एक्‍सरसाइज नहीं करते थे। यानी वेट लि‍फ्टि‍ंग करने वाले लोगोंं की उम्र ज्‍यादा लंबी थी।

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द‍िल और द‍िमाग की बीमार‍ियों से बचाव होता है

स्‍टडी में यह भी देखा गया क‍ि ज‍िन लोगों ने वेट ल‍िफ्ट‍िंंग एक्‍सरसाइज की उनमें हार्ट की बीमारी से मृत्‍यु का खतरा 19 प्रत‍िशत और न्‍यूरोलॉज‍िकल बीमारी खासकर ड‍िमेंश‍िया से मृत्‍यु का खतरा 27 प्रत‍िशत तक कम था। स्‍टडी के मुताब‍िक, सबसे कम मृत्‍यु का खतरा उन लोगों में पाया गया जो स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग के साथ-साथ एरोब‍िक्‍स भी करते थे।

स्‍टडी के अनुसार, जब हम वेट ट्रेन‍िंग करते हैं, तो मांसपेश‍ियां मायोकाइन्‍स नामक केम‍िकल को रि‍लीज करती हैं। ये केम‍िकल शरीर में सूजन को कम करने, ब्‍लड शुगर लेवल कंट्रोल करने और कई अंगों के बेहतर कामकाज में मदद करते हैं।

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सेहत के ल‍िए क्‍यों फायदेमंद है वेट लिफ्टिंग?

Fitness Coach Payal Asthana ने बताया क‍ि-

  • वेट लिफ्टिंग और स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग की मदद से हड्ड‍ियों को मजबूत बनाने में मदद म‍िलती है।
  • इससे मांसपेश‍ियां मजबूत होती हैं और कमजोरी दूर होती है।
  • वेट ल‍िफ्टि‍ंग करने से बीपी कंट्रोल में रहता है और ह्रदय रोगों का खतरा कम होता है।
  • वेट ट्रेन‍िंग और ल‍िफ्टि‍ंग की मदद से मेटाबॉल‍िज्‍म बेहतर होता है और शरीर में फैट कम करने में मदद म‍िलती है।
  • वेट ल‍िफ्टि‍ंग की मदद से शरीर का संतुलन बेहतर होता है और चोट लगने का खतरा भी कम होता है।

न‍िष्‍कर्ष:

हाल ही में एक स्‍टडी पब्‍ल‍िश हुई ज‍िसमें देखा गया क‍ि जो लोग वेट ल‍िफ्ट‍िंग करते हैं वे लंबी उम्र जीते हैं और उनमें हार्ट एवं न्‍यूरोलॉज‍िकल बीमार‍ियोंं का खतरा भी कम होता है। स्‍टडी में यह भी देखा गया क‍ि वेट ल‍िफ्ट‍िंग करने वाले लोगों में समय से पहले मृत्‍यु का रि‍स्‍क भी कम था।

FAQ

  • वेट ल‍िफ्ट‍िंग एक्‍सरसाइज कौन-कौन सी हैं?

    वेट ल‍िफ्ट‍िंग में शोल्‍डर प्रेस, कर्ल्स, लंजेस, डेडल‍िफ्ट, स्क्वैट्स जैसी एक्‍सरसाइज कर सकते हैं।
  • वेट ल‍िफ्ट‍िंग एक्‍सरसाइज कैसे शुरू करें?

    शुरू में हल्‍के वजन से एक्‍सरसाइज करें। अगर आप नए हैं, तो एक्‍सपर्ट की देखरेट में हफ्ते में दो से तीन द‍िन से प्रैक्‍ट‍िस शुरू करें।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jun 24, 2026 13:17 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
  • Jun 24, 2026 13:17 IST

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    Published By : Yashaswi Mathur
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