उम्र बढ़ने के साथ-साथ खासकर 50 की उम्र के बाद शरीर में मांसपेशियों की ताकत धीरे-धीरे कम होने लगती है, हड्डियों का घनत्व घट सकता है और जोड़ों में जकड़न महसूस होने लगती है। लंबे समय तक यह माना जाता रहा है कि भारी वजन उठाना केवल यंग लोगों के लिए सही होता है, जबकि बढ़ती उम्र में केवल हल्की वॉक या योग ही करना चाहिए लेकिन Max Hospital Patparganj के ऑर्थोपेडिक्स एंड जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर डॉक्टर दीपक अरोड़ा मानते हैं कि सही टेक्नीक के साथ की गई स्ट्रेंथ ट्रेनिंग उम्र बढ़ने के प्रभाव को काफी हद तक कम करने में मदद कर सकती है। यह न केवल मसल्स को मजबूत बनाती है, बल्कि रोजमर्रा के कामों को आसान बनाने, बैलेंस बनाए रखने और आत्मनिर्भर जीवन जीने में भी सहायक हो सकती है।
50 की उम्र के बाद वेट लिफ्टिंग सही है?
डॉक्टर दीपक अरोड़ा के अनुसार, ''उम्र बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को फिजिकल एक्टिविटीज छोड़ देनी चाहिए। बल्कि इस उम्र में नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग मसल्स और हड्डियों को मजबूत बनाए रखने, शरीर का बैलेंस सुधारने और रोजमर्रा के कामों को आसानी से करने में मदद करती है। हालांकि, शुरुआत हमेशा अपनी फिटनेस और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर करनी चाहिए।''
इसे भी पढ़ें: क्या फास्ट वॉक करें तो 5,000 कदम भी फिट रहने के लिए पर्याप्त हैं? एक्सपर्ट से जानें
- डॉ. दीपक अरोड़ा बताते हैं कि 50 की उम्र के बाद शरीर में मसल्स का नेचुरल रूप से कम होनी शुरू हो जाती हैं।
- यदि इस पर ध्यान न दिया जाए तो कमजोरी और हड्डियों के फ्रैक्चर की संभावना बढ़ सकती है।
- नियमित वेट ट्रेनिंग मांसपेशियों को मजबूत बनाने के साथ-साथ हड्डियों पर पॉजिटिव दबाव डालती है, जिससे बोन डेंसिटी बनाए रखने में मदद मिलती है।
- इसके अलावा यह मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाती है, वजन कंट्रोल रखने में सहायक होती है और जोड़ों को सपोर्ट करने वाली मसल्स को मजबूत करती है।
साल 2026 में हार्वर्ड द्वारा की गई British Journal of Sports Medicine में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, बढ़ती उम्र में लंबी और सेहतमंद जिंदगी जीने के लिए सिर्फ वॉक या रनिंग यानी एरोबिक एक्सरसाइज काफी नहीं है, बल्कि मांसपेशियों की मजबूती रेसिस्टेंस ट्रेनिंग भी उतनी ही जरूरी है। लगभग 1.47 लाख लोगों पर 30 साल तक चली इस रिसर्च से पता चला है कि जो लोग हर हफ्ते 90 से 119 मिनट वेट लिफ्टिंग या बॉडी-वेट एक्सरसाइज करते हैं, उनमें मौत का खतरा 13% तक कम हो जाता है। इतना ही नहीं, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने वालों में दिल की बीमारियों से मौत का खतरा 19% और भूलने की बीमारी यानी डिमेंशिया जैसी दिमागी दिक्कतों का खतरा 27% तक घट जाता है।
इसे भी पढ़ें: Surya Namaskar vs Walking: रोजाना फिट रहने के लिए क्या बेहतर है? एक्सपर्ट से जानें
इस स्टडी का सबसे बड़ा निचोड़ यह है कि जब आप पैदल चलना या दौड़ना जैसी कार्डियो एक्सरसाइज के साथ-साथ हफ्ते में कम से कम 1.5 से 2 घंटे मसल्स को मजबूत करने वाली कसरत भी जोड़ देते हैं, तो दोनों मिलकर सबसे अच्छा रिजल्ट देती हैं। दोनों एक्सरसाइज साथ करने वालों में असमय मौत का खतरा 45% तक कम पाया गया। इसलिए, अगर आप एक लंबी, एक्टिव और मानसिक रूप से हेल्दी जिंदगी चाहते हैं, तो एरोबिक और रेसिस्टेंस दोनों तरह की एक्सरसाइज को अपने रुटीन का हिस्सा जरूर बनाएं।

किन बातों का रखें ध्यान
डॉ. दीपक अरोड़ा के अनुसार, 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को भारी वजन उठाने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। शुरुआत हल्के वजन या रेजिस्टेंस बैंड से करें और धीरे-धीरे शरीर की क्षमता के अनुसार वजन बढ़ाएं। हर एक्सरसाइज को सही तकनीक से करना बेहद जरूरी है, क्योंकि गलत पॉश्चर से मांसपेशियों, कंधों, घुटनों या कमर में चोट लग सकती है। वर्कआउट से पहले वार्म-अप और बाद में कूल-डाउन करना भी जरूरी है। यदि पहले से ऑस्टियोपोरोसिस, गठिया, घुटनों का दर्द, कमर दर्द या हार्ट संबंधी बीमारी है, तो एक्सरसाइज शुरू करने से पहले डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेना चाहिए।
डॉक्टर की सलाह
डॉ. दीपक अरोड़ा के अनुसार, जिन लोगों की हाल ही में हड्डी की सर्जरी हुई हो, ऑस्टियोपोरोसिस हो, हाई ब्लड प्रेशर या हार्ट रोग हो, उन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के वेट लिफ्टिंग शुरू नहीं करनी चाहिए। यदि एक्सरसाइज के दौरान तेज दर्द, चक्कर, सांस लेने में तकलीफ या सीने में दर्द महसूस हो, तो तुरंत एक्सरसाइज रोककर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। साथ ही सप्ताह में कम से कम दो से तीन दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और बाकी दिनों में वॉक, स्ट्रेचिंग या बैलेंस एक्सरसाइज को शामिल करना बेहतर रहता है।
निष्कर्ष
50 साल की उम्र के बाद वेट लिफ्टिंग पूरी तरह सुरक्षित हो सकती है, बशर्ते इसे सही तरीके और अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार की जाए। नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत रखने, जोड़ों को सहारा देने में अहम भूमिका निभाती है। किसी भी नई एक्सरसाइज की शुरुआत करने से पहले ऑर्थोपेडिक एक्सपर्ट या फिटनेस प्रोफेशनल की सलाह लेना सबसे सुरक्षित होता है।
All Image Credit- magnific
FAQ
क्या वेट लिफ्टिंग रोजाना करनी चाहिए?
वेट लिफ्टिंग रोजाना नहीं करनी चाहिए, मांसपेशियों को रिकवरी का समय देना जरूरी होता है। आमतौर पर सप्ताह में 2-3 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग पर्याप्त मानी जाती है।वेट ट्रेनिंग के बाद क्या खाना चाहिए?
वर्कआउट के बाद प्रोटीन और कॉम्प्लेक्स कार्ब्स युक्त भोजन, जैसे दाल, पनीर, अंडा, दही या अंकुरित अनाज लेना चाहिए, ऐसे फूड्स रिकवरी और मसल्स रिपेयर में मदद करते हैं।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Jul 20, 2026 13:14 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Deepak Kumar Arora