Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Payal Asthana , Fitness Expert

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से जुड़े इन 5 म‍िथकोंं पर न करें भरोसा, एक्‍सपर्ट से जानें सच

कई लोग फ‍िटनेस के ल‍िए स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍ि‍ंग शुरू तो कर देते हैं, लेक‍िन एक्‍सरसाइज के फायदे नहीं म‍िल पाते। इसका कारण है अधूरी जानकारी। जानें स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग से जुड़े ऐसे 5 म‍िथक जो आपकी फ‍िटनेस जर्नी में रुकावट बन सकते हैं। 

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (Strength Training) एक प्रकार की एक्‍सरसाइज है ज‍िसकी मदद से मसल्‍स को मजबूत बनाने में मदद म‍िलती है। पुश अप्‍स, प्‍लैंक, डंबल, बारबेल, स्क्वैट्स वगैरह स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग के उदाहरण हैं। स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंंग की मदद से मसल्‍स मजबूत बनते हैं, शरीर का स्‍टैम‍िना बढ़ता है, वजन कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है और हड्ड‍ियां मजबूत होती हैं। स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग से मेटाबॉलि‍ज्‍म को एक्‍ट‍िव करने में मदद म‍िलती है और हार्मोन्‍स का संतुलन भी बना रहता है। हालांक‍ि गलत ढंग से या अधूरी जानकारी के साथ स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग करेंगे, तो ज्‍यादा फायदे नहीं म‍िलेंगे। स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग से जुड़े कुछ म‍िथकों के पीछे छुपी सच्‍चाई जानकार इसे बेहतर ढंग से फ‍िटनेस जर्नी में इस्‍तेमाल क‍िया जा सकता है। स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग से संबंध‍ित म‍िथक जानने के ल‍िए हमने Director Ozefit Fitness Club, Australia & Certified Fitness Coach Payal Asthana से बात की।

1. म‍िथक- स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग केवल पुरुषों के ल‍िए है

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कई मह‍िलाओं को ऐसा लगता है क‍ि स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग केवल पुरुषों के ल‍िए होती है और इससे वह 'Bulky' द‍िखेंगी, जबक‍ि ऐसा नहीं है। स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग से मह‍िलाओं का शरीर 'Bulky' नहीं द‍िखता बल्‍क‍ि शरीर ज्‍यादा टोन्‍ड और फ‍िट नजर आता है।

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2. म‍िथक- स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग में हैवी वेट उठाना पड़ता है

कई लोग स्ट्रेंथ ट्रेन‍िंग इसल‍िए नहींं करते क्‍योंक‍ि उन्‍हें हैवी वेट उठाना पड़ता है जबक‍ि ऐसा नहीं है। कम वजन वाले डंबल्‍स के साथ भी आप स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍ि‍ंग कर सकते हैं और वो भी घर बैठे। ऐसा जरूरी नहीं है क‍ि इसके ल‍िए आपको ज‍िम जाना जरूरी है या भारी मशीनों के साथ वर्कआउट करना जरूरी है।

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3. म‍िथक- स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग केवल युवाओं के ल‍िए है

कुछ लोग ऐसा समझते हैं क‍ि स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग केवल युवाओं के ल‍िए है जबक‍ि यह हर उम्र के व्‍यक्‍त‍ि के ल‍िए है। सही ढंग से अगर स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग की जाए, तो यह ज्‍यादातर सभी उम्र के लोगों को फायदा पहुंचाती है। बुजुर्ग भी इससे अपनी हड्ड‍ियां और मसल्‍स मजबूत कर सकते हैं।

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4. म‍िथक- स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग में सप्‍लीमेंट्स खाना जरूरी होता है

ऐसा जरूरी नहीं है क‍ि स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग में सप्‍लीमेंट्स लेना जरूरी होता है। हेल्‍दी डाइट के साथ स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग एक्‍सरसाइज कर सकते हैं।सप्‍लीमेंट्स केवल जरूरत के मुताब‍िक और एक्‍सपर्ट की सलाह पर ही ल‍िए जाते हैं।

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5. म‍िथक- जोड़ों के ल‍िए स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग अच्‍छी नहीं होती

ऐसा नहीं है। स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग की मदद से जोड़ों को मजबूत बनाने में मदद म‍िलती है। हालांक‍ि गलत ढंग से क‍िया गया वर्कआउट जोड़ों पर दबाव डाल सकता है और चोट लगने की आशंका बढ़ सकती है इसल‍िए एक्‍सपर्ट की सलाह लेकर ही वर्कआउट करना चाह‍िए। 2017 में Journal Of Thoracic Disease में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग की मदद से मसल्‍स और कनेक्‍ट‍िव ट‍िशूज को मजबूत बनाने में मदद म‍िलती है ज‍िससे जोड़ों को सपोर्ट म‍िलता है।

न‍िष्‍कर्ष:

इस लेख में हमने समझा क‍ि स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग केवल पुरुषों के ल‍िए नहीं है, इसे मह‍िलाएं भी कर सकती हैं। साथ ही यह जरूरी नहीं है क‍ि स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग में हैवी वेट उठाना पड़े, यह भी जरूरी नहीं है क‍ि इसे केवल युवा ही कर सकते हैं। बुजुर्गों के ल‍िए भी स्‍पेशल स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग प्रोग्राम होता है। कुछ लोगों को लगता है क‍ि इससे जोड़ों पर बुरा असर होता है, जबक‍ि ऐसा नहीं है। स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग में सप्‍लीमेंट्स का सेवन करना ही पड़ेगा, यह भी जरूरी नहीं है।

FAQ

  • एक हफ्ते में क‍ितनी बार स्‍ट्रेंथ ट्रेनिंग करें?

    शुरू में हफ्ते में दो से तीन बार स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग कर सकते हैं। एडवांस स्‍टेज पर लोग हफ्ते में चार से पांच बार भी करते हैं। यह व्‍यक्‍त‍ि की शारीर‍िक क्षमता पर न‍िर्भर करता है। 
  • क‍िसे स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग नहीं करना चाह‍िए?

    ज‍िन लोगों को हार्ट की समस्‍या है, बीपी कंट्रोल नहीं है, चोट लगी है या फ्रैक्‍चर हुआ है उन्‍हें डॉक्‍टर की सलाह के बगैर स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग नहीं करना चाह‍िए। गर्भावस्‍था में भी डॉक्‍टर की सलाह के बगैर एक्‍सरसाइज न करें।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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