फैट लॉस का मतलब है शरीर के फैट को कम करने की प्रक्रिया। शरीर के फैट को कम करने के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और कार्डियो एक्सरसाइज को असरदार माना जाता है। यह दोनों ही एक्सरसाइज कैलोरी बर्न करने में मदद करती हैं। American Health Association के मुताबिक, फिटनेस के लिए हर हफ्ते कम से कम 150 मिनट मीडियम इंटेंसिटी वाली एक्सरसाइज और 75 मिनट प्रति हफ्ते हाई इंटेंसिटी वाली एक्सरसाइज करनी चाहिए। कार्डियो और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग में कई ऐसी एक्सरसाइज हैं जो हाई इंटेंसिटी और लो इंटेंसिटी पॉवर का इस्तेमाल करती हैं। जानते हैं कि आखिर फैट लॉस के लिए दोनों में से क्या ज्यादा असरदार है? बेहतर जानकारी के लिए हमने Director Ozefit Fitness Club, Australia & Certified Fitness Coach Payal Asthana से बात की।
कार्डियो एक्सरसाइज से हार्ट रेट बढ़ता है
कार्डियो एक्सरसाइज में हार्ट रेट और सांस लेने की गति बढ़ जाती है। कार्डियो एक्सरसाइज की मदद से हार्ट डिजीज से बचने में मदद मिलती है, कैलोरी बर्न होती है, स्टैमिना बढ़ता है, बीपी और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में भी मदद मिलती है। टाइप 2 डायबिटीज के खतरे को कम करने के लिए भी कार्डियो एक असरदार एक्सरसाइज है। स्ट्रेस घटाने और अनिद्रा को दूर करने के लिए भी यह एक अच्छी एक्सरसाइज है। कार्डियो एक्सरसाइज करने से शरीर की एनर्जी बढ़ती है और आप ज्यादा एनर्जेटिक महसूस करते हैं।
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से मांसपेशियों की ताकत बढ़ती है
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग में मांसपेशियों को रेजिस्टेंस टाइप के खिलाफ काम कराया जाता है। जैसे- डंबल उठाना, डंबल का वजन ही रेजिस्टेंस है। इस एक्सरसाइज का उद्देश्य मांसपेशियों की ताकत को बढ़ाने का होता है। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग की मदद से बॉडी कॉम्पोजिशन में सुधार होता है, जोड़ों की तकलीफ को दूर करने में मदद मिलती है और इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार होता है।
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फैट लॉस के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या कार्डियो चुनें?

Fitness Coach Payal Asthana ने बताया कि फैट लॉस के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और कार्डियो दोनों का संयोजन जरूरी है। फैट लॉस के लिए वही एक्सरसाइज अच्छी होती है जिसे आप कंसिस्टेंट होकर फॉलो कर पाएं। किसी एक एक्सरसाइज को फैट लॉस के लिए ज्यादा बेहतर कहना गलत होगा। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के लिए जब मसल मांस ज्यादा होगा, तो ज्यादा कैलोरी बर्न करने में मदद मिलेगी। British Heart Association में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग की मदद से मसल्स बनाने में मदद मिलती है। इससे कैलोरी बर्न करने में मदद मिलती है।
वहीं दूसरी ओर कार्डियो एक्सरसाइज से हार्ट रेट बढ़ाने में मदद मिलती है जिससे कैलोरी बर्न करने में मदद मिलती है। कार्डियो को लंबे समय तक कर सकते हैं इसलिए लोग इसे ज्यादा असरदार मानते हैं, हालांकि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी फैट लॉस में अहम भूमिका निभाती है इसलिए दोनों एक्सरसाइज को मिलाकर अपने रूटीन का हिस्सा बनाएं।
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स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, कार्डियो और कैलोरी डेफिसिट से घटाएं वजन
Fitness Coach Payal Asthana ने बताया कि कार्डियो एक्सरसाइज के दौरान कैलोरी बर्न करने में मदद मिलती है। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से मांसपेशियां बनती हैं और मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है। जहां स्ट्रेंथ ट्रेनिंग मांसपेशियों को बनाए रखने में मदद करती है और कार्डियो हार्ट हेल्थ और स्टैमिना को बेहतर बनाता है। फैट कम करने के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, कार्डियो और कैलोरी डेफिसिट (कम कैलोरी लेने) का कॉम्बिनेशन सबसे अच्छा होता है।
क्या कहती हैं स्टडीज?
साल 2024 में International Journal Of Computational Research And Development के मुताबिक, जहां एक तरफ कार्डियो से फैट लॉस करने, हार्ट हेल्थ सुधारने और स्ट्रेस घटाने में मदद मिलती है वहीं दूसरी तरफ स्ट्रेंथ ट्रेनिंग की मदद से मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। इससे चोट लगने का खतरा भी कम होता है। स्टडी में यह बताया गया कि अगर फैट लॉस करना है, तो किसी एक पर निर्भर रहने के बजाय दोनों को फिटनेस रूटीन का हिस्सा बनाएं जो जल्दी फैट लॉस होगा।
साल 2021 में Obesity Reviews के मुताबिक, कार्डियो और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का मिश्रण फैट लॉस के लिए किसी एक एक्सरसाइज के मुकाबले ज्यादा असरदार साबित हो सकता है। लंबे समय तक फैट लॉस करने के लिए नियमित एक्सरसाइज के साथ संतुलित आहार को अपनाने की सलाह दी गई है।
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फैट लॉस के लिए कार्डियो और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग कैसे करें?
हफ्ते में दो से तीन दिन कार्डियो करें
जॉगिंग, रस्सी कूदना, तेज चलना, साइकिलिंग, डांस, ट्रेडमिल वॉक वगैरह कार्डियो एक्सरसाइज के उदाहरण हैं। कार्डियो से कैलोरी बर्न करने में मदद मिलेगी और हार्ट हेल्थ को भी बेहतर बना सकते हैं। मीडियम और हाई इंटेंसिटी एक्सरसाइज को मिक्स करके रूटीन में शामिल करें।
हफ्ते में तीन से चार दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें
लंजेस, पुश अप्स, डेडलिफ्ट, डंबल एक्सरसाइज, वेट लिफ्टिंग वगैरह स्ट्रेंथ ट्रेनिंग एक्सरसाइज हैं। इन एक्सरसाइज की मदद से सभी मसल ग्रुप्स को टार्गेट करने में मदद मिलती है और फुल बॉडी सेशन को करने के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग एक्सरसाइज असरदार होती हैं।
हफ्ते में एक से दो दिन रिकवरी को दें
योग, स्ट्रेचिंग वगैरह की मदद से मसल स्टिफनेस को कम करने में मदद मिलती है। इससे चोट लगने का खतरा भी कम होता है और लंबे समय तक आप फिटनेस जर्नी को बरकरार रख सकते हैं।
निष्कर्ष:
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और कार्डियो दोनों को ही करके फैट लॉस में मदद मिलती है। फैट लॉस के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, कार्डियो और कैलोरी डेफिसिट यानी कम कैलोरी लेने पर फोकस किया जाता है। हफ्ते में तीन से चार दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और दो से तीन दिन कार्डियो कर सकते हैं। हफ्ते में एक या दो दिन रिकवरी को भी देना चाहिए।
FAQ
क्या कार्डियो और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग एक ही दिन कर सकते हैं?
हां, दोनों एक ही दिन कर सकते हैं। इन दो एक्सरसाइज को अलग-अलग दिन भी किया जा सकता है। यह आपके फिटनेस लक्ष्य पर निर्भर करता है।फैट लॉस और वेट लॉस में क्या अंतर है?
फैट लॉस का मतलब है शरीर में मौजूद फैट को कम करना। वेट लॉस का मतलब है शरीर के टोटल वजन को कम करना। इसमें फैट के अलावा, पानी और मांसपेशियां भी शामिल होती हैं।क्या सिर्फ कार्डियो करने से वजन घटता है?
हां, सिर्फ कार्डियो करने से भी वजन घट सकता है। हालांकि, इसे स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के साथ करेंगे, तो मसल को टोन करने में और लंबे समय तक वेट लॉस को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
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Jul 21, 2026 18:23 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Payal Asthana