माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें मरीज को सिरदर्द होता है। यह दर्द हल्का हो सकता है और कई बार गंभीर भी हो जाता है। माइग्रेन में होने वाला सिरदर्द अक्सर चुभने वाला महसूस होता है, जो कि सिर की एक तरफ के हिस्से को अधिक प्रभावित करता है। यह दर्द 4 से 72 घंटे तक रह सकता है, जिसमें उल्टी और मतली जैसी समस्या भी हो सकती है। बहरहाल, माइग्रेन को कभी भी हार्ट से जुड़ी समस्याओं से जोड़कर नहीं देखा जाता है। सवाल उठता है कि क्या वाकई माइग्रेन का संबंध दिल से नहीं होता है या इनका आपस में कोई कनेक्शन है? आइए, जानते हैं ग्रेटर नोएडा स्थित सर्वोदय अस्पताल में Director-Neurology डॉ. अभिनव गुप्ता से।
माइग्रेन और हार्ट हेल्थ के बीच कनेक्शन
-1784015864456.jpg)
माइग्रेन और कार्डियोवास्कुलर हेल्थ के बीच गहरा कनेक्शन है और इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है। इस संबंध में साल 2023 में European Heart Journal में प्रकाशित एक रिसर्च से पता चलता है कि जिन लोगों को बार-बार माइग्रेन का सिरदर्द होता है, उनमें कई तरह की बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। खासकर, जिन लोगों को ऑरा के साथ (माइग्रेन सिरदर्द शुरू होने से लगभग 15 से 60 मिनट पहले कुछ चेतावनी वाले संकेत दिखाई देना या महसूस होना) होता है, उनमें समस्या अधिक देखने को मिलती है। इस रिसर्च में स्पष्ट बताया गया है कि इन लोगों में सामान्य लोगों की तुलना में स्ट्रोक, हार्ट अटैक, अनियमित दिल की धड़कन होना और दिल की बीमारियों से होने वाली मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है। इसका मतलब साफ है कि जो लोग माइग्रेन से पीड़ित हैं, उन्हें नियमित रूप से अपने दिल की सेहत का पूरा ध्यान रखना चाहिए।
इसे भी पढ़ें: हार्ट की सूजन (कार्डिटिस): लक्षण, कारण और बचाव के उपाय जानें डॉक्टर से
माइग्रेन में हार्ट से जुड़ी समस्या होने के लक्षण
हृदय गति में बदलावः माइग्रेन में हार्ट से जुड़ी समस्या होने पर आपको अपने हृदय गति में अचानक बदलाव हो सकता है, जैसे अचानक से दिल का तेजी से धड़कना, धक-धक महसूस होना या असामान्य रूप से दिल की धड़कन का धीमा हो जाना। इसे मेडिकल भाषा में अरिदमिया कहा जाता है।
सीने में असहजताः माइग्रेन के मरीजों में हृदय संबंधी समस्या होने पर सीने में असहजता भी महसूस हो सकती है। इसमें जो लक्षण नजर आते हैं, वे हैं सीने में भारीपन, जकड़न, दबाव या तेज दर्द महसूस होना, जो बढ़कर आपके जबड़े, गर्दन या पीठ तक फैल सकता है।
ब्लड सर्कुलेशन में बदलावः माइग्रेन में हार्ट से जुड़ी बीमारी होने पर आपको ब्लड सर्कुलेशन में समस्या महसूस हो सकती है। इसके लक्षण के तौर पर हाथ-पैरों का अचानक से सुन्न हो जाना, कमजोरी महसूस होना या हाथ-पैरों का बिल्कुल ठंडा पड़ जाना नजर आते हैं।
इसे भी पढ़ें: हाई ब्लड प्रेशर में दवा कब शुरू करें? डॉक्टर से जानें सही समय और जरूरी सावधानियां
माइग्रेन में अपने दिल की सेहत का ध्यान कैसे रखें?
-1784015885277.jpg)
माइग्रेन के मरीजों के लिए बहुत जरूरी है कि वे अपने हार्ट हेल्थ का पूरा ध्यान रखें। इसके लिए वे यहां बताए गए टिप्स को अपना सकते हैं-
दवाओं पर रखें नजर
एक्यूट माइग्रेन में कुछ खास किस्म की दवाएं दी जाती हैं। कई दवाओं का प्रभाव सीधे हृदय पर पड़ता है। इसलिए, माइग्रेन के मरीजों को ध्यान रखना है कि अगर उन्हें कोरोनरी आर्टरी डिजीज, असंतुलित हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्या है, तो जो भी दवा ले रहे हैं, उस संबंध में एक्सपर्ट से सलाह जरूर ले लें।
ब्लड प्रेशर को मॉनिटर करें
हाइपरटेंशन हार्ट के मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। इसलिए इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है। वहीं, अगर माइग्रेन के मरीजों को हाई ब्लड प्रेशर है या ब्लड प्रेशर का स्तर स्थिर नहीं रहता है, तो उन्हें नियमित रूप से अपने ब्लड प्रेशर के स्तर को मॉनिटर करना चाहिए। वैसे भी हाई ब्लड प्रेशर और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, माइग्रेन से पीड़ित लोगों में बहुत आम है।
स्मोकिंग न करें
माइग्रेन के मरीजों को स्मोकिंग नहीं करनी चाहिए, इससे सिरदर्द ट्रिगर हो सकता है। वहीं, अगर आपको दिल से जुड़ी बीमारी भी है, तो यह आपको और भी खराब कर सकता है। विशेषज्ञ यही सलाह देते हैं कि माइग्रेन के मरीजों को ही नहीं, बल्कि स्वस्थ लोगों को भी स्मोकिंग से दूर रहना चाहिए। खासकर, हार्ट के मरीजों को स्मोकिंग नहीं करनी चाहिए, इससे ब्लड फ्लो बाधित हो सकता है।
इसे भी पढ़ें: क्या विटामिन की कमी आपके हार्ट को भी नुकसान पहुंचा सकती है? डॉक्टर से जानें
नियमित करें एक्सरसाइज
एक्सरसाइज करना सबके लिए फायदेमंद होता है। माइग्रेन और हार्ट की बीमारियों से साथ-साथ जूझ रहे लोगों को भी इसे अपनी जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए। साल 2018 में The Journal of Headache And Pain में प्रकाशित शोध पत्र के अनुसार, एक्सरसाइज करने से माइग्रेन अटैक में कमी आ सकती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि जब कोई माइल्ड एक्सरसाइज करता है, तो इससे बॉडी में में माइग्रेन का ट्रिगर थ्रेशोल्ड (सहन करने की क्षमता) बढ़ जाता है। ऐसे में माइग्रेन की फ्रीक्वेंसी में अपने आप कमी आने लगती है। हालांकि, रिसर्च में यह भी कहा गया है कि कुछ लोगों के लिए एक्सरसाइज ट्रिगर फैक्टर की तरह काम करता है। इसलिए, आप अपनी सेहत की जरूरत के अनुसार माइल्ड या हल्की एक्सरसाइज करें। इसका पॉजिटिव असर हेल्थ पर भी देखने को मिल सकता है।
हेल्दी डाइट फॉलो करें
माइग्रेन के मरीजों के लिए जरूरी है कि वे अपनी डाइट के साथ समझौता न करें। डॉक्टर बताते हैं कि मैग्नीशियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड जैसी चीजों को डाइट में शामिल करने से हेल्थ में सुधार होता है और इसे हार्ट के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। हालांकि, कौन सी चीजें आपके माइग्रेन को ट्रिगर कर सकती हैं, इस बात का ध्यान रखें।
तनाव मैनेज करें
बढ़ता तनाव माइग्रेन और हार्ट हेल्थ, दोनों को प्रभावित करता है। ऐसे में डॉक्टर सलाह देते हैं कि अपनी सेहत में सुधार करने के लिए तनाव को मैनेज जरूर करें। इसके लिए माइंडफुल एक्टिविटी करें, जैसे मेडिटेशन करें। जरूरी हो, तो प्रोफेशनल की मदद भी ली जा सकती है।
इसे भी पढ़ें: क्या बार-बार होने वाले इंफेक्शन से भविष्य में दिल की बीमारी का खतरा बढ़ सकता है? बता रहे हैं डॉक्टर
निष्कर्ष
माइग्रेन और कार्डियोवास्कुलर हेल्थ का आपस में गहरा कनेक्शन है। इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। अगर किसी को बार-बार माइग्रेन पेन होता है, तो उन्हें अपने ट्रिगर प्वाइंट को समझना चाहिए। ध्यान रखें कि अगर किसी को फ्रीक्वेंटली माइग्रेन हो रहा है, तो यह दिल को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इस तरह की स्थिति से बचने के लिए समय पर डॉक्टर के पास जाएं और जीवनशैली में जरूरी बदलाव भी करें।
All Image Credit: Freepik
FAQ
माइग्रेन के मरीजों को चाय या कॉफी क्यों नहीं पीनी चाहिए?
चाय-कॉफी में कैफीन होता है, जो कि ब्लड वेसल्स को सिकोड़ देता है। जब कैफीन का असर खत्म होता है, तो नसें अचानक फैल जाती हैं, जिससे तेज माइग्रेन अटैक आ सकता है।क्या ज्यादा देर तक भूखे रहने से भी माइग्रेन पेन ट्रिगर हो सकता है?
हां, लंबे समय तक खाना न खाने से ब्लड शुगर का स्तर अचानक गिर जाता है (हाइपोग्लाइसीमिया), जिससे मस्तिष्क की नसों में तनाव बढ़ता है और माइग्रेन पेन होने लगता है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Jul 14, 2026 20:45 IST
Modified By : Meera Tagore Jul 14, 2026 20:45 IST
Published By : Meera Tagore
Reviewed By : Dr Abhinav Gupta