हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) की समस्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और WHO की रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में हाइपरटेंशन के 140 करोड़ मामले हैं, जिसमें 30 से 79 साल के वयस्कों में से दो तिहाई लोग कम और मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि करीब 60 करोड़ वयस्कों को पता ही नहीं है कि उन्हें हाइपरटेंशन की बीमारी है। सिर्फ 32 करोड़ वयस्क ही ब्लड प्रेशर पूरी तरह कंट्रोल में है। दुनियाभर में हाइपरटेंशन प्रीमेच्योर डेथ का एक प्रमुख कारण है। हाई बीपी में सबसे बड़ी समस्या यह है कि मरीज बीपी की दवा लेने से बचते हैं और अगर डॉक्टर दवा देते हैं, तो भी मरीज इसे रेगुलर नहीं लेते। हाई बीपी की दवा कब, कैसे लेनी चाहिए और कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए, ये सब जानने के लिए हमने Dr Deebanshu Gupta, Consultant Interventional Cardiologist, Sarvodaya Hospital, Jalandhar से बात की।
हाई ब्लड प्रेशर क्या है?
Mayo Clinic के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) यानी हाइपरटेंशन में शरीर की आर्टरी पर असर पड़ता है। इसमें आर्टरी की दीवारों पर ब्लड का प्रेशर लगातार बहुत ज्यादा बनने लगता है, जिस वजह से हार्ट को ब्लड पंप करने में बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। ब्लड प्रेशर को mm Hg में मापा जाता है। आमतौर पर, 130/80 mm Hg या उससे अधिक की रीडिंग को हाइपरटेंशन माना जाता है। डॉ. दिबांशु कहते हैं, “ब्लड प्रेशर को मापने के लिए दो पैमाने देखते हैं। सिस्टोलिक और डायस्टोलिक दो रीडिंग होती हैं, जिससे पता चलता है कि व्यक्ति का बीपी हाई है या लो है। सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर को आम भाषा में ऊपर का नंबर कहा जाता है। यह उस प्रेशर को बताता है, जब हार्ट संकुचित होता है और आर्टरी की दीवारों पर दबाव डालता है। डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर जिसे नीचे का नंबर कहते हैं। यह दो हार्टबीट के बीच का दबाव है, जब हार्ट आराम करता है। इन दोनों की रीडिंग लेकर ही मरीज को हाई और लो बीपी बताया जाता है।”

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ब्लड प्रेशर कितना नॉर्मल होना चाहिए?
American Heart Association के मुताबिक, नॉर्मल ब्लड प्रेशर 120/80 mm Hg से कम होता है और अगर सिस्टोलिक 120 से 129 mm Hg के बीच और डायस्टोलिक 80 mm Hg से कम होता है, तो यह बढ़े हुए बीपी की कैटेगरी में आता है।
श्रेणी |
ऊपर का नंबर (Systolic) mm Hg |
नीचे का नंबर (Diastolic) mm Hg |
सामान्य |
120 से कम |
80 से कम |
बढ़ा हुआ |
120 - 129 |
80 से कम |
स्टेज 1 |
130 - 139 |
80 - 89 |
स्टेज 2 |
140 या अधिक |
90 या अधिक |
आपातकालीन |
180 से अधिक |
120 से अधिक |
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हाई बीपी के लक्षण क्या हैं?
WHO और डॉ. दिबांशु दोनों के मुताबिक, हाई ब्लड प्रेशर को साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण मरीज को महसूस ही नहीं होते, जब तक कि ये शरीर के किसी अंग को नुकसान न पहुंचाने लग जाए। हाई बीपी (हाइपरटेंशन) में मरीज को निम्न लक्षण महसूस हो सकते हैं।
- सिरदर्द
- धुंधला दिखाई देना
- सीने में दर्द या प्रेशर महसूस होना
- अगर किसी मरीज का बीपी 180/120 mmHg या उससे ऊपर पहुंच जाए, तो कई गंभीर लक्षणों का सामना करना पड़ सकता है।
- गंभीर सिरदर्द
- सांस लेने में दिक्कत होना
- कंफ्यूजन या बहुत ज्यादा एंग्जायटी होना
- कानों में भिनभिनाहट जैसा महसूस होना
- नाक से खून आना
- हार्टबीट असामान्य होना
हाई बीपी में डॉक्टर दवा की कब सलाह देते हैं?
डॉ. दिबांशु कहते हैं, "हाई बीपी की दवा लेने के लिए मरीज को अपना ब्लड प्रेशर चेक करते रहना चाहिए। अगर मरीज का बीपी 120 से 129 / 80 से कम है, तो ऐसे में दवा की जरूरत नहीं होती, लेकिन साथ ही यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि मरीज को किडनी से जुड़ी किसी भी तरह की बीमारी न हो। हालांकि, अगर लगातार यही रीडिंग आ रही है, तो लाइफस्टाइल में बदलाव करना बहुत जरूरी है। इसके अलावा, अगर मरीज 50 साल से ज्यादा उम्र का है और लगातार यह रीडिंग आ रही है, तो डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए। अगर 140/90 या इससे ज्यादा है, तो दवा की जरूरत है। हाई बीपी को कंट्रोल करने के लिए डॉक्टर दवा देते हैं। इसके साथ, अगर मरीज को किसी और तरह की भी समस्या है, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। मैं सभी को यह कहूंगा कि अगर बीपी में उतार-चढ़ाव हो रहा है, तो उसे रेगुलर बीपी चेक रखना चाहिए और डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।"
हाई बीपी की दवा कब लेनी चाहिए?
British Heart Foundation के अनुसार, हाई बीपी की दवा लेने का समय इस बात पर निर्भर करता है कि वह उस समय कितनी असरदार होगी। ज्यादातर बीपी की दवाएं एक ही समय पर लेना ज्यादा जरूरी होता है। हाई बीपी की दवा का समय इस बात पर भी निर्भर करता है कि दवा शरीर में कितनी जल्दी प्रोसेस हो जाती है। कई दवाओं को शरीर जल्दी प्रोसेस कर लेता है, तो कुछ दवाओं को लंबे समय तक शरीर में बनी रहती है। कुछ दवाओं को खाली पेट लेना होता है, तो कुछ दवाएं खाने खाते समय लेना जरूरी होता है, ताकि पेट में जलन न हो। इस बारे में डॉ. दिबांशु कहते हैं, “मैं हमेशा हाई बीपी की दवा मरीज की उम्र, सेहत और मेडिकल कंडीशन देखकर देता हूं, क्योंकि हाई बीपी के साथ कई और बीमारियां भी जुड़ी हो सकती है, इसलिए मरीज की कंडीशन के अनुसार ही दवा दी जाती है।”
बीपी की दवा के साइड इफेक्ट्स क्या हो सकते हैं?
बीपी की दवा सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर लें। कई बार बीपी की दवा से कुछ साइड इफैक्ट्स भी देखने को मिल सकते हैं। British Heart Foundation के अनुसार, बीपी की दवा शुरू करने पर मरीजों को ये दिक्कतें हो सकती हैं। अगर ये परेशानियां लगातार रहती हैं, तो डॉक्टर से सलाह लें।
- चक्कर आना - बीपी की दवा लेने पर शरीर को तालमेल बिठाने की वजह से चक्कर आ सकते हैं।
- सिरदर्द - जब ब्लड प्रेशर तेजी से नीचे गिरता है, तो सिरदर्द की शिकायत हो सकती है।
- सूखी खांसी - कुछ खास दवाओं के कारण मरीज को खांसी की परेशानी हो सकती है।
- थकान - कुछ दवाएं शरीर में सुस्ती या थकान जैसा महसूस करा सकती है।
- टखनों में सूजन - कुछ मरीजों के पैरों या टखनों में सूजन भी हो सकती है।
क्या प्रेग्नेंसी में हाई बीपी होने पर दवा दी जाती है?
Yale Medicine के अनुसार, अगर प्रेग्नेंट महिला का ब्लड प्रेशर 140/90 या उससे ज्यादा हो, तो हल्का हाई ब्लड प्रेशर माना जाता है, जबकि 160/110 से ऊपर की रीडिंग को गंभीर हाई ब्लड प्रेशर माना जाता है। इसे प्रीक्लेम्पसिया/एक्लेम्पसिया कहा जाता है। प्रेग्नेंसी में हाई बीपी का इलाज कराना बहुत जरूरी है, क्योंकि इलाज न होने पर मां और भ्रूण दोनों के लिए जानलेवा हो सकता है। प्रेग्नेंसी में हाई बीपी को कंट्रोल करने के लिए डॉक्टर 12 से 14 हफ्ते से आखिरी महीने तक बीपी कंट्रोल करने की लो डोज दवा की सलाह दे सकते हैं। डॉक्टर हमेशा प्रेग्नेंट महिला की स्थिति को देखते हुए ही सेफ दवा देते हैं। डॉ. दिबांशु कहते हैं कि अगर हाई बीपी बहुत ज्यादा गंभीर हो, तो बच्चे के फेफड़ों का विकास रुक सकता है, ऐसे में स्टेरॉयड के इंजेक्शन भी दिए जा सकते हैं। ऐसे गंभीर मामलों में 34 से 37 हफ्ते के बीच डिलीवरी कराना सबसे सेफ तरीका होता है।
क्या बच्चों में हाई बीपी होने पर दवा दी जाती है?
Mayo Clinic के मुताबिक, अगर बच्चों को हाई बीपी की समस्या है, तो इसका इलाज उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। अगर बच्चे को हल्का या मध्यम हाई बीपी है, तो डॉक्टर बच्चे के लाइफस्टाइल में बदलाव करने का सुझाव देते हैं। अगर लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव करने के बावजूद बीपी की समस्या ठीक न हो, तो डॉक्टर बच्चे को दवा दे सकते हैं। डॉक्टर तय करते हैं कि बच्चे को कितने समय तक दवा देनी है और अगर बच्चे का वजन ज्यादा होता है, तो उसे कम करने की सलाह दी जाती है।

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क्या हाई बीपी की दवा उम्र भर लेनी पड़ती है?
डॉ. दिबांशु कहते हैं, "कई मामलों में ब्लड प्रेशर की दवा उम्रभर लेनी पड़ सकती है ताकि हार्ट अटैक, स्ट्रोक या किडनी खराब होने से बचाया जा सके। अगर मरीज अपने लाइफस्टाइल जैसे रेगुलर एक्सरसाइज या वजन कम कर लेता है और डाइट में भी बदलाव करता है, तो दवा कम की जा सकती है और अगर बीपी पूरी तरह से कंट्रोल हो जाए, तो दवा बंद भी की जा सकती है, लेकिन मरीजों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हाई बीपी की दवा खुद से बंद न करें। यह करना खतरनाक हो सकता है। मरीजों को यह जानना बहुत जरूरी है कि दवाएं लंबे समय तक इस्तेमाल की जा सकती हैं, इसलिए डॉक्टर जब भी दवा देते हैं, तो मरीज की कंडीशन को देखते हुए देते हैं।"
बीपी की दवा लेते समय कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?
डॉ. दिबांशु कहते हैं कि हाई बीपी के मरीज दवा दिन में कभी भी ले लेते हैं। इससे कई बार दवा का असर कम हो सकता है। मरीजों की छोटी-छोटी गलतियों के कारण दवा का असर पूरी तरह से नहीं मिल पाता।
- मरीज हाई बीपी की दवा के साथ बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर या गर्भनिरोधक दवा लेते हैं।
- कुछ लोग बीपी की दवा के साथ बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट्स और विटामिन लेना शुरू कर देते हैं।
- घर पर रीडिंग लेते समय डिवाइस सही होना जरूरी है।
- रीडिंग लेने से 5 मिनट पहले खुद को शांत रखें और फिर रीडिंग लें।
- रोजाना नमक की मात्रा ज्यादा लेने से भी दवा का असर कम होता है।
- डॉक्टर की बताई डाइट न लेने से दवा का असर कम हो सकता है।
- वजन बढ़ने से हाई बीपी की दवा कम असर कर सकती है।
- शराब या स्मोकिंग करने से भी दवा का पूरा असर नहीं दिखता।
- थायराइड या ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया भी दवा का असर कम कर सकती है।
हाई बीपी को कैसे मैनेज करें?
Cleveland Clinic के अनुसार, हाई बीपी को कंट्रोल करने के लिए लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव करना बहुत महत्वपूर्ण है।
- वजन सही होना जरूरी है।
- डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और कम फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट जरूर लें।
- नमक कम से कम लें। रोजाना 1500 mg से ज्यादा नमक न लें।
- पोटैशियम से भरपूर फूड्स जैसे केले, एवोकाडो और आलू छिलके सहित शामिल करें।
- रोजाना रेगुलर एक्सरसाइज करें। हफ्ते में 150 मिनट एक्सरसाइज जरूर करें।
- स्मोकिंग बिल्कुल न करें।
- शराब सीमित करें या फिर बिल्कुल न लें।
डॉक्टर से कब मिलें?
हाई बीपी के लक्षण बहुत ज्यादा महसूस नहीं होते, लेकिन अगर बार-बार तेज सिरदर्द हो रहा हो, धुंधला दिखने लगे या नाक से खून आने लगे, तो डॉक्टर से बीपी चेक कराना चाहिए। इसके अलावा, हार्ट और किडनी से जुड़ी बीमारियों से बचने के लिए लोगों को बीपी का रेगुलर चेक कराना चाहिए।
निष्कर्ष
अगर हाई ब्लड प्रेशर का समय रहते इलाज न हो, तो यह शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए बीपी का रेगुलर चेकअप कराना चाहिए ताकि समय रहते पहचान हो सके। अगर मरीज का बीपी कंट्रोल में नहीं रहता या गंभीर रूप से ज्यादा होता है, तो डॉक्टर मरीज को दवा लेने की सलाह देते हैं। डॉक्टर मरीज को नमक कम लेने, रेगुलर एक्सरसाइज करने, वजन कम करने और संतुलित डाइट लेने की सलाह देते हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि मरीज को हाई बीपी की दवा बिना डॉक्टर की सलाह के न तो शुरू करनी चाहिए और न ही बंद करनी चाहिए।
FAQ
क्या बीपी नॉर्मल होने पर दवा बंद की जा सकती है?
बीपी दवा लेने के कारण ही नॉर्मल रहता है। इसे खुद से बंद करना खतरनाक हो सकता है और बीपी अचानक बढ़ सकता है। इसलिए बीपी की दवा बंद करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।पेनकिलर लेने से बीपी पर क्या असर पड़ता है?
बिना डॉक्टरी सलाह के ली गई पेनकिलर या सप्लीमेंट्स बीपी की दवा के असर को कम कर सकते हैं। इससे बीपी बढ़ भी सकता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह लेना बहुत जरूरी है।घर पर बीपी नापते समय सबसे बड़ी गलती क्या होती है?
बीपी नापते हुए लोग शांत नहीं बैठते और किसी न किसी से बात करते ही रहते हैं। इसके अलावा, रीडिंग एक बार ही लेते हैं, जबकि दो से तीन बार रीडिंग लेने से मशीन की सटीकता का पता चलता है।क्या सिर्फ मोटे लोगों को ही हाई बीपी होता है?
ऐसा नहीं है, हाई बीपी दुबले या नॉर्मल वजन के लोगों को भी हो सकता है।
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Apr 26, 2026 11:15 IST
Modified By : Aneesh Rawat Apr 26, 2026 11:15 IST
Modified By : Aneesh RawatApr 26, 2026 11:15 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Deebanshu Gupta