प्रेग्नेंसी एक ऐसा खूबसूरत समय होता है, जिसमें हर मां अपने बच्चे के बेहतर स्वास्थ्य के बारे में ही सोचती है। प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल और शारीरिक बदलाव होते हैं, जिसका सीधा कनेक्शन कई बार ब्लड प्रेशर पर पड़ता है। अक्सर महिलाएं ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव को नॉर्मल समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। समय पर ब्लड प्रेशर के लेवल पर ध्यान न देने पर मां और होने वाले बच्चे की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में जरूरी होता है कि ब्लड प्रेशर से जुड़ी कोई भी समस्या होने पर महिलाओं को तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। हालांकि, प्रेग्नेंसी में ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्या होने पर महिलाओं को कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए इस बात को लेकर कंफ्यूज रहती है। इसलिए, आइए इस लेख में Dr.(Prof.) Anju Suryapani, Sr. Consultant - Obstetrics & Gynaecology, Metro Hospital, Noida से इस बारे में जानते हैं।
प्रेग्नेंसी में हाई और लो ब्लड प्रेशर कितना होना चाहिए?
Dr.(Prof.) Anju Suryapani के अनुसार, प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में ब्लड प्रेशर की समस्या होना आम बात है। हालांकि, इस समय आपका ब्लड प्रेशर पर निगरानी रखना जरूरी है, जिसके लिए हाई और लो ब्लड प्रेशर के बारे में पताहोना जरूरी है।
- नॉर्मल ब्लड प्रेशर: 120/80 या इसके आसपास ब्लड प्रेशर का लेवल होना नॉर्मल होता है। यह मां और बच्चे दोनों के लिए बिल्कुल सुरक्षित माना जाता है।
- हाई BP: अगर आपका ब्लड प्रेशर बार-बार 140/90 या इससे ज्यादा आता है, तो इसे हाई ब्लड प्रेशर माना जाता है। इस स्थिति पर ध्यान देना जरूरी होता है।
- बहुत गंभीर स्थिति: अगर ब्लड प्रेशर 160/110 या उससे ऊपर पहुंच जाए, तो यह खतरे का संकेत है। ऐसे में बिना देर किए तुरंत डॉक्टर के पास जाना जरूरी है।
- लो ब्लड प्रेशर: प्रेग्नेंसी में ब्लड प्रेशर लेवल 90/60 से कम हो तो यह लो ब्लड प्रेशर होता है। पहली और दूसरी तिमाही में लो ब्लड प्रेशर होना नॉर्मल माना जाता है।
प्रेग्नेंसी में ब्लड प्रेशर की समस्या होने पर डॉक्टर के पास कब जाएं?
Dr.(Prof.) Anju Suryapani का कहना है कि प्रेग्नेंसी में अगर आपका ब्लड प्रेशर 140/90 या उससे ज्यादा है और इसके साथ आपको कुछ स्वास्थ्य समस्याएं हो रही हैं तो बिना देर किए तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए।
1. बहुत तेज सिर में दर्द होना
प्रेग्नेंसी में ब्लड प्रेशर ज्यादा होने के साथ सिर के आगे या गर्दन के पीछे वाले हिस्से में बहुत तेज दर्द होने पर हल्की-फुल्की दवा लेने पर भी अगर यह ठीक न हो तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह महिला के दिमाग की नसों पर ब्लड प्रेशर के दबाव बढ़ने का संकेत हो सकता है।
2. आंखों में धुंधलापन
अचानक धुंधला दिखाई देना, आंखों के सामने तारे या तेज रोशनी चमकती हुई महसूस हो या दो-दो चीजें दिखाई दे तो इस अनदेखा नहीं करना चाहिए। हाई ब्लड प्रेशर के साथ यह समस्या प्री-क्लैम्पसिया का सीधा संकेत हो सकता है।
3. पेट के ऊपरी हिस्से या पसलियों में दर्द
ब्लड प्रेशर ज्यादा होने के साथ अगर पसलियों के ठीक नीचे खासकर दाईं तरफ बहुत तेज दर्द होना भी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। अक्सर महिलाएं इसे नॉर्मल गैस का दर्द समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, जो नहीं करना चाहिए। यह स्थिति लिवर पर ब्लड प्रेशर के दबाव पड़ने के कारण हो सकता है।

4. चेहरे या हाथों पर अचानक सूजन
पैरों में हल्दी सूजन नॉर्मल है, लेकिन अगर चेहरे, आंखों के नीचे या हाथों की उंगलियों में अचानक बहुत ज्यादा सूजन आ जाए तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह शरीर में पानी जमा होने और ब्लड प्रेशर के अचानक बढ़ने का लक्षण होता है।
साल 2024 में Cureus में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, प्रेग्नेंसी में नॉर्मल सूजन होना आम बात है, लेकिन अगर सूजन बहुत ज्यादा हो और इसके साथ सांस फूलना, सीधा लेटने पर मुश्किल होना या ज्यादा थकान जैसे लक्षण हों तो यह दिल से जुड़ी समस्याओं का संकेत हो सकता है।
5. सांस फूलना या घबराहट
बैठे-बैठे या लेटे हुए भी सांस लेने में समस्या होना, सीने में भारीपन या अचानक बहुत तेज घबराहट होने की समस्या प्रेग्नेंसी में गंभीर हो सकता है। साल 2012 में Obstetric Medicine में प्रकाशित रिसर्च स्टडी के अनुसार, प्रेग्नेंसी में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का लेवल बढ़ने से सांस लेने की दर बढ़ जाती है। साथ ही, जैसे-जैसे प्रेग्नेंसी बढ़ती है, यह डायाफ्राम पर प्रेशर डालता है, जिससे सांस लेने में मुश्किल महसूस हो सकती है। यह समस्या आमतौर पर गर्भावस्था के 22वें से 28वें हफ्ते के बीच ज्यादा होती है। यह फेफड़ों के आसपास लिक्विड जमा होने का संकेत हो सकता है।
डॉक्टर के पास जाने से पहले क्या करें?
Dr.(Prof.) Anju Suryapani का कहना है कि अगर आपको सिर में तेज दर्द, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, सांस फूलना, घबराहट, चेहरे या हाथों पर अचानक सूजन होना और आंखों में धुंधलापन नजर आए तो इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में आप पैनिक करने से बचें, क्योंकि इससे आपका ब्लड प्रेशर लेवल ज्यादा बढ़ सकता है। इस स्थिति में आप शांत होकर बाईं करवट में लेट जाएं। बाईं करवट में लेटने से बच्चे और यूट्रस तक ब्लड सप्लाई बेहतर होती है। साथ ही, बिना अपने गायनेकोलॉजिस्ट से सलाह लिए कोई भी दवा या घरेलू उपचार करने से बचें। इस स्थिति में आप तुरंत अपने डॉक्टर से मिलें या फोन पर बात करें।
निष्कर्ष
Dr.(Prof.) Anju Suryapani कहती हैं कि प्रेग्नेंसी में हाई ब्लड प्रेशर को समय रहते सही दवाओं और लाइफस्टाइल की मदद से कंट्रोल किया जा सकता है। इसलिए, जरूरी है कि आप प्रेग्नेंसी के दौरान अपने शरीर में होने वाले किसी भी बदलाव को नजरअंदाज करने से बचें। किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें।
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FAQ
गर्भावस्था में बीपी कम होने के क्या लक्षण हैं?
प्रेग्नेंसी में ब्लड प्रेशर कम होना हाइपोटेंशन की समस्या होती है। इसके कारण शरीर में कई तरह के लक्षण नजर आ सकते हैं, जिसमें अचानक चक्कर आना, ज्यादा थकान, मतली, धुंधला दिखना, सांस फूलना और ठंडा पसीना आना शामिल है।गर्भवती महिला का बीपी क्यों बढ़ता है?
प्रेग्नेंसी में ब्लड प्रेशर बढ़ने का कारण खराब लाइफस्टाइल, हार्मोनल बदलाव, मोटापा या पहले से हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होना शामिल हैं।
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Jul 23, 2026 16:32 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Anju Suryapani