Sat Sep 12, 2026 | 08:40 PM IST

Medically Reviewed by Dr Anju Suryapani , Senior Consultant – Obstetrics, Gynaecology

क्या प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लड प्रेशर कम होना नॉर्मल है? डॉक्टर से जानें

प्रेग्नेंसी में लो ब्लड प्रेशर होना एक नॉर्मल कंडीशन है, जो हार्मोनल बदलावो ंके कारण होती है और आमतौर पर चिंता का कारण नहीं होती है। इसके बाद भी अगर किसी महिलाओं को लो ब्लड प्रेशर के कारण समस्याएं हो रही हैं तो डॉक्टर से सलाह लें। 

इस पेज पर:-


प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्या होना काफी आम बात है। इस समय महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल और शारीरिक बदलाव होते हैं, जिसका सीधा असर उनकी सेहत पर पड़ता है। खासकर, जो महिलाएं पहली बार मां बन रही हैं उनके अंदर सवालों के ढेर होते हैं, जिसमें प्रेग्नेंसी की शुरुआत में बार-बार चक्कर आने, उल्टी, सिर घूमने और ब्लड प्रेशर लो होने की समस्या शामिल है।अक्सर महिलाओं के मन में सवाल रहता है कि क्या प्रेग्नेंसी में ब्लड प्रेशर लो होना आम बात है? या क्या इससे बच्ची को कोई नुकसान तो नहीं होगा? Dr.(Prof.) Anju Suryapani, Sr. Consultant - Obstetrics & Gynaecology, Metro Hospital, Noida बताती हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लड प्रेशर लो होना काफी नॉर्मल है और इससे डरने की जरूरत नहीं होती है। आइए इस बारे में लेख में विस्तार से जानते हैं।

गर्भावस्था में बीपी कम होना नॉर्मल क्यों माना जाता है?

Dr.(Prof.) Anju Suryapani बताती हैं कि जब आप कंसीव करती हैं तो आपका शरीर बच्चे के विकास के लिए दिन-रात काम करने लगता है। इस दौरान शरीर में बहुत ज्यादा हार्मोनल बदलाव होते हैं। खासकर प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का लेवल तेजी से बढ़ता है। यह हार्मोन आपके ब्लड वेसल्स की मांसपेशियों को रिलैक्स कर देता है। जब ब्लड वेसल्स चौड़ी हो जाती हैं तो खून का बहाव थोड़ा धीमा हो जाता है, जिससे ब्लड प्रेशर कम हो जाता है। साल 2007 में Z Geburtshilfe Neonatol में प्रकाशित क्लिनिकल रिसर्च स्टडी में बताया गया है कि आमतौर पर ब्लड प्रेशर प्रेग्नेंसी के मध्य तक कम हो जाता है और डिलीवरी का समय आने तक यह फिर से नॉर्मल लेवल पर आ जाता है।

किस तिमाही में बीपी कितना रहता है?

Dr.(Prof.) Anju Suryapani का कहना है कि प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लड प्रेशर में होने वाले बदलावों और लो बीपी के लक्षणों को समझने के लिए आपको यह समझना जरूरी है कि आपका ब्लड प्रेशर किस तिमाही में कितना होना चाहिए।

पहली और दूसरी तिमाही

पहली और दूसरी तिमाही यानी प्रेग्नेंसी की शुरुआत से लेकर 24वें हफ्ते तक ब्लड प्रेशर थोड़ा कम रहता है, जैसे- 90/60 या 100/60। इस समय ब्लड प्रेशर का लेवल इतना होना बिल्कुल नॉर्मल होता है और यह किसी तरह की चिंता की बात नहीं होती है।

तीसरी तिमाही

डिलीवरी का समय जैसे- जैसे पास आता है, शरीर में खून की मात्रा बढ़ती जाती है। इससे ब्लड प्रेशर धीरे-धीरे वापस अपने नॉर्मल लेवल यानी 120/80 पर आने लगता है।

प्रेग्नेंसी में लो ब्लड प्रेशर होने पर क्या लक्षण महसूस हो सकते हैं?

Dr.(Prof.) Anju Suryapani के अनुसार, प्रेग्नेंसी में ब्लड प्रेशर थोड़ा कम होना नॉर्मल होता है, लेकिन इसके कारण आपको शरीर में कुछ समस्याएं नजर आ सकती हैं।

  • चक्कर आना या सिर घूमना, खासतौर पर तब, जब आप लेटने या बैठने के बाद अचानक से तुरंत खड़ी होती हैं।
  • अचानक उठते समय 2-3 सेकेंड के लिए आंखों के सामने अंधेरा छाना।
  • नींद पूरी होने के बाद भी दिनभर थकान और कमजोरी महसूस होना।
  • पानी की कमी होने के कारण बार-बार प्यास लगना
  • हाथ-पैर ठंडे महसूस होना या रंग हल्का पीला दिखना।

low-blood-pressure-in-pregnancy-inside

प्रेग्नेंसी में ब्लड प्रेशर लो होने पर क्या करें?

Dr.(Prof.) Anju Suryapani का कहना है कि अगर प्रेग्नेंसी में आपका ब्लड प्रेशर कम रहता है और डॉक्टर ने किसी गंभीर स्थिति होने की आशंका से मना किया है तो आपको किसी मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं होती है। ऐसे में आप अपने लाइफस्टाइल और डाइट में इन बदलावों को करके ब्लड प्रेशर को नॉर्मल रख सकते हैं।

1. खुद को हाइड्रेटेड रखें

शरीर में पानी की कमी लो ब्लड प्रेशर का कारण बनती है। इसलिए, दिन में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पिएं। पानी के अलावा आप नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ या ताजे फलों का जूस पी सकते हैं।

2. अचानक झटके से न उठें

बिस्तर या कुर्सी से उठते समय जल्दबाजी न करें। जब आप सोकर उठें तो पहले 1 से 2 मिनट बिस्तर पर धीरे से बैठ जाएं और अपने पैरों को नीचे लटकाएं। इसके बाद फिर आराम से खड़ी हो जाएं।

3. सही पोजीशन में सोएं

प्रेग्नेंसी के दौरान हमेशा बाईं करवट लेकर सोएं। इससे गर्भाशय का वजन शरीर के ब्लड वेसल्स पर नहीं पड़ता है, जिससे दिल और बच्चे तक ब्लड सर्कुलेशन बेहतर रहता है।

इसे भी पढ़ें: प्रेग्नेंसी में कम या ज्यादा ब्लड प्रेशर होने पर कब करना चाहिए डॉक्टर से बात?

4. थोड़ा-थोड़ा करके बार-बार खाएं

एक बार में हैवी लंच या डिनर करने से बचें, क्योंकि यह आपके पाचन प्रक्रिया के लिए खून के फ्लो को पेट की तरफ बढ़ा सकता है, जिससे ब्लड प्रेशर ज्यादा कम हो सकता है। इसके स्थान पर आप दिन में 5 से 6 बार थोड़ा-थोड़ा हेल्दी फूड या स्नैक्स खा सकते हैं।

5. खाने में हल्का नमक बढ़ाएं

अगर आपको बहुत ज्यादा चक्कर या कमजोरी महसूस होती है तो आप डॉक्टर की सलाह पर अपनी डाइट में सूप, शिकंजी या सलाद में थोड़ा सा नमक बढ़ाकर ले सकती हैं।

डॉक्टर से कब मिलें?

प्रेग्नेंसी के दौरान लो ब्लड प्रेशर एक आम समस्या है, लेकिन अगर आपको लो ब्लड प्रेशर के साथ अन्य लक्षण महसूस हो तो इसे नॉर्मल समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इन समस्याओं में चक्कर आने से बेहोश होना, सीने में दर्द या सांस लेने में तकलीफ होना, तेज और लगातार सिर में दर्द होना, योनि से ब्लीडिंग या पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द होना और बच्चे की हलचल में अचानक कमी महसूस होना शामिल हैं। इसलिए, अगर आपको ये समस्याएं महसूस हों तो आप बिना देर किए अपने गायनेकोलॉजिस्ट से कंसल्ट करें।

निष्कर्ष

Dr.(Prof.) Anju Suryapani का कहना है कि प्रेग्नेंसी में लो ब्लड प्रेशर होना महिलाओं के शरीर की एक नॉर्मल प्रक्रिया का हिस्सा है। इसलिए, इस प्रक्रिया के कारण घबराना नहीं चाहिए, बल्कि अपनी डाइट, भरपूर मात्रा में पानी पीना और सही तरह से आराम करना शामिल है। हालांकि, अगर लो ब्लड प्रेशर के कारण शरीर से जुड़ी समस्याएं ज्यादा हों तो आप अपने डॉक्टर से सलाह लें।
Image Credit: Freepik

FAQ

  • प्रेग्नेंसी में लो ब्लड प्रेशर के क्या कारण हो सकते हैं?

    प्रेग्नेंसी में ब्लड प्रेशर का कम होना पहली और दूसरी तिमाही में बहुत नॉर्मल होता है। इसका कारण शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव और ब्लड फ्लो का बढ़ना शामिल हैं।
  • प्रेग्नेंसी में ब्लड प्रेशर कैसे बढ़ाएं?

    प्रेग्नेंसी में लो ब्लड प्रेशर को सही तरीके से बढ़ाने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, नमक का सेवन थोड़ा बढ़ाएं और थोड़ी-थोड़ी देर पर कुछ न कुछ खाएं।

Read Next

प्रेग्नेंसी में कम या ज्यादा ब्लड प्रेशर होने पर कब करना चाहिए डॉक्टर से बात?

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Jul 23, 2026 17:01 IST

    Published By : Katyayani Tiwari
    Reviewed By : Dr Anju Suryapani

Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content
Medically reviewed content
200+ medical reviewers in network
17 Years of Trusted Health Content