Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Dr Purendra Bhasin , Ophthalmologist

लो-ब्लड प्रेशर कैसे ग्लूकोमा का खतरा बढ़ा सकता है? डॉक्टर से जानें आंखों की सेहत और लो-बीपी का कनेक्शन

आंखों से जुड़ी बीमारी ग्लूकोमा होने का कारण ब्लड प्रेशर का कम होना भी हो सकता है। खासतौर पर रात के समय ब्लड प्रेशर कम होने पर ग्लूकोमा होने के रिस्क को बढ़ा सकता है। इस लेख में डॉक्टर ने ग्लूकोमा और लो-ब्लड प्रेशर के बीच के कनेक्शन को विस्तार से बताया है।

ग्लूकोमा में आंखों के बढ़े हुए प्रेशर को चेक किया जाता है, लेकिन ऐसे में सवाल उठता है कि क्या आंखों का प्रेशर सामान्य होने पर ग्लूकोमा नहीं होगा? क्या ग्लूकोमा होने का कारण ब्लड प्रेशर का कम होना भी हो सकता है। इन सवालों के जवाब जानने के लिए हमने Dr. Purendra Bhasin, Opthamologist, Founder & Director, Ratan Jyoti Netralaya, Gwalior से बात की।

उन्होंने बताया कि कुछ लोगों में आंखों का दबाव सामान्य सीमा में रहने के बावजूद ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचता रहता है। इसे नॉर्मल टेंशन ग्लूकोमा कहते हैं, जिसमें ऑप्टिक नर्व तक जाने वाले ब्लड फ्लो में बदलाव के कई कारण हो सकते हैं।

लो-बीपी कैसे ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाता है?

Dr. Purendra Bhasin ने कहा, “ऑप्टिक नर्व आंख और दिमाग के बीच जानकारी पहुंचाने का काम करती है। इसके लिए ऑप्टिक नर्व को पर्याप्त ब्लड और ऑक्सीजन की जरूरत होती है। रात को सोने के दौरान ब्लड प्रेशर सामान्य से बहुत ज्यादा कम हो जाता है, तो कुछ लोगों में आंख के पीछे ऑप्टिक नर्व तक ब्लड के फ्लो पर काफी असर पड़ सकता है। इसी वजह से कुछ मरीजों में आंखों का प्रेशर बहुत ज्यादा न होने के बावजूद ग्लूकोमा से जुड़ा नुकसान हो सकता है।”

Pubmed में प्रकाशित स्टडी में लो ब्लड प्रेशर का आंखों पर असर को चेक किया गया। इसमें 85 लो ब्लड प्रेशर महिलाओं को शामिल किया गया। इसमें पाया गया कि रात के समय बीपी में गिरावट होने के कारण यह विजुअल फील्ड के नुकसान को और गंभीर बना सकता है। इसलिए इसे ग्लूकोमा का एक कारण माना गया है।

रात में लो- ब्लड प्रेशर को कैसे चेक करें?

Dr. Purendra Bhasin ने बताया कि अगर मरीज का ब्लड प्रेशर रात के समय बहुत ज्यादा कम होता है, तो उसे 24 घंटे की एम्ब्यूलेटरी ब्लड प्रेशर मॉनिटरिंग (ABPM) की सलाह दे सकते हैं। इसमें दिन और रात के अलग-अलग समय पर ब्लड प्रेशर रिकॉर्ड होता रहता है। इससे डॉक्टर को यह समझने में मदद मिल सकती है कि ब्लड प्रेशर दिनभर किस तरह बदल रहा है और रात में उसमें कितना कम हो रहा है। इससे ग्लूकोमा के रिस्क को समझने में मदद मिलती है।

क्या लो-ब्लड प्रेशर ठीक होने पर ग्लूकोमा रुक सकता है?

Dr. Purendra Bhasin का कहना है, “मेरे पास कई मरीज यही सवाल लेकर आते हैं, तो मेरा जवाब होता है कि सिर्फ ब्लड प्रेशर बढ़ा देना ग्लूकोमा का इलाज नहीं है। अगर किसी व्यक्ति को नॉर्मल टेंशन ग्लूकोमा है, तो डॉक्टर ऑप्टिक नर्व को आगे होने वाले नुकसान से बचाने की कोशिश करते हैं। इसके लिए मरीज की कंडीशन को देखते हुए आंखों का दबाव कम करने वाली दवाएं या लेजर की सलाह दे सकते हैं। इसलिए ग्लूकोमा का इलाज हमेशा रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है।”

low blood pressure cause glucoma

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ग्लूकोमा का रिस्क किन लोगों को ज्यादा रहता है?

Dr. Purendra Bhasin कहते हैं, “नॉर्मल टेंशन ग्लूकोमा का खतरा कुछ लोगों में ज्यादा देखा जा सकता है। इसमें वे लोग भी शामिल हैं, जिन्हें लंबे समय से लो ब्लड प्रेशर रहता है या जिनके ब्लड प्रेशर में रात के समय बहुत ज्यादा कम हो जाता है।

  • हाई ब्लड प्रेशर की दवाएं लेने वाले लोग, खासकर जिनका बीपी रात में बहुत कम हो जाता है।
  • फैमिली में ग्लूकोमा की हिस्ट्री होना
  • माइग्रेन की समस्या
  • ब्लड से जुड़ी समस्याएं
  • ऑप्टिक नर्व से जुड़े रिस्क
  • उम्र बढ़ना

हालांकि, कोई एक कारण ग्लूकोमा का कारण नहीं बन सकता। सही रिस्क जानने के लिए डॉक्टर से रेगुलर चेकअप की जरूरत होती है।

ग्लूकोमा की शुरुआत में पता क्यों नहीं चलता?

Dr. Purendra Bhasin के अनुसार, ग्लूकोमा के शुरुआत में लक्षण बहुत हल्के होते हैं। इसलिए कई लोगों को काफी समय तक यह पता ही नहीं चलता कि उनकी ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंच रहा है। समय के साथ धीरे-धीरे साइड विजन प्रभावित हो सकता है। व्यक्ति को इसका अहसास तब होता है जब उसकी आंखों की रोशनी को काफी हद तक नुकसान पहुंच चुका होता है।

ग्लूकोमा की जांच कैसे की जाती है?

Dr. Purendra Bhasin ने बताया कि ग्लूकोमा की जांच के दौरान डॉक्टर सिर्फ आंखों का दबाव नहीं देखते, बल्कि ये टेस्ट भी किए जा सकते हैं।

  • टोनोमेट्री - इससे आंख के अंदर का दबाव मापा जाता है।
  • ऑप्टिक नर्व की जांच - इसमें ऑप्टिक नर्व के आकार और उसकी संरचना में किसी बदलाव को देखते हैं।
  • OCT जांच - OCT की मदद से ऑप्टिक नर्व और रेटिनल नर्व फाइबर लेयर की कंडीशन चेक किया जा सकता है।
  • विजुअल फील्ड टेस्ट - इससे मरीज के साइड विजन को चेक किया जाता है।
  • गोनियोस्कोपी - इससे आंख के ड्रेनेज एंगल की जांच की जाती है।

ग्लूकोमा से बचाव के उपाय

Dr. Purendra Bhasin ने लोगों को ग्लूकोमा से बचाव की ये सलाह दी हैं।

  • अगर परिवार में किसी को ग्लूकोमा रहा है, तो रेगुलर आंखों का चेकअप कराएं।
  • बढ़ती उम्र या पहले से आंखों से जुड़ी कोई समस्या होने पर नियमित आंखों की जांच जरूरी है।
  • डायबिटीज और ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं को मैनेज करना जरूरी है।
  • जो लोग ब्लड प्रेशर की दवाएं लेते हैं, उन्हें बिना डॉक्टर की सलाह दवा बंद नहीं करनी चाहिए।

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निष्कर्ष

लो ब्लड प्रेशर होने पर ग्लूकोमा होने का रिस्क बढ़ सकता है, लेकिन सिर्फ यह अकेला रिस्क फैक्टर नहीं है। अगर किसी का रात में ब्लड प्रेशर बहुत कम होता है, तो उसे समय रहते डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। इसके अलावा, अगर परिवार में किसी को ग्लूकोमा की हिस्ट्री है या फिर पहले से आंखों की समस्या है, तो रेगुलर आंखों का चेकअप जरूर कराएं।

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FAQ

  • क्या सामान्य ब्लड प्रेशर होने पर भी ग्लूकोमा हो सकता है?

    हां। नॉर्मल टेंशन ग्लूकोमा में आंखों का दबाव सामान्य सीमा में होने के बावजूद ऑप्टिक नर्व को नुकसान हो सकता है।
  • क्या ग्लूकोमा में हमेशा आंखों का प्रेशर बढ़ा होता है?

    हर बार ऐसा नहीं होता। कुछ मरीजों में सामान्य आंखों के दबाव के बावजूद ग्लूकोमा हो सकता है।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 13, 2026 13:59 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Purendra Bhasin

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