Wed Oct 7, 2026 | 03:00 AM IST

Medically Reviewed by Dr Vikash Goyal , Cardiologist

कोलेस्ट्रॉल के प्रकार क्या हैं? कार्डियोलॉजिस्ट से जानें इसका रोल, खतरे और नॉर्मल लेवल

कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए जरूरी फैट जैसा पदार्थ होता है, लेकिन इसका असंतुलन दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है। इसलिए कोलेस्ट्रॉल के प्रकार, उनका काम, जोखिम और नॉर्मल रेंज को समझना जरूरी है, ताकि समय रहते इसे कंट्रोल कर दिल को हेल्दी रखा जा सके।
कोलेस्ट्रॉल के प्रकार क्या हैं? कार्डियोलॉजिस्ट से जानें इसका रोल, खतरे और नॉर्मल लेवलकोलेस्ट्रॉल के प्रकार क्या हैं? कार्डियोलॉजिस्ट से जानें इसका रोल, खतरे और नॉर्मल लेवल

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में दिल से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं और इसका एक बड़ा कारण असंतुलित कोलेस्ट्रॉल है। गुरुग्राम के पारस हेल्थ के कार्डियोलॉजी के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. विकास गोयल के अनुसार, कोलेस्ट्रॉल एक वैक्सी (चिकना) पदार्थ होता है, जो हमारे खून में पाया जाता है और शरीर के लिए बेहद जरूरी है। यह कोशिकाओं की दीवार (cell membrane) बनाने, हार्मोन तैयार करने और विटामिन D के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। शरीर खुद भी लिवर के जरिए कोलेस्ट्रॉल बनाता है और कुछ मात्रा हमें खाने-पीने से मिलती है। समस्या तब होती है जब इसकी मात्रा या प्रकार असंतुलित हो जाता है। यही असंतुलन दिल की बीमारियों, स्ट्रोक और अन्य गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।

कोलेस्ट्रॉल के प्रकार  

डॉ. विकास गोयल बताते हैं कि कोलेस्ट्रॉल को मुख्य रूप से तीन प्रकारों में बांटा जाता है और हर एक का शरीर पर अलग असर होता है। 

1. LDL (Low Density Lipoprotein)

LDL को खराब कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है क्योंकि यह खून की नलियों में जमा होकर प्लाक बनाता है। इससे धमनियां संकरी हो जाती हैं और ब्लड फ्लो कम हो जाता है। समय के साथ यह हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकता है। 

2. HDL (High Density Lipoprotein)

HDL को अच्छा कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है क्योंकि यह शरीर में जमा खराब कोलेस्ट्रॉल को हटाने में मदद करता है। यह LDL को लिवर तक ले जाकर शरीर से बाहर निकालने में सहायता करता है, जिससे दिल हेल्दी रहता है। 

3. ट्राइग्लिसराइड्स (Triglycerides)

यह एक प्रकार का फैट होता है जो शरीर में एनर्जी स्टोर करने का काम करता है लेकिन जब इसकी मात्रा ज्यादा हो जाती है, तो यह दिल के लिए खतरनाक बन सकता है और मोटापा व डायबिटीज से जुड़ी समस्याएं बढ़ा सकता है। 

National Heart, Lung, and Blood Institute में प्रकाशित आर्टिकल के अनुसार, अच्छे स्वास्थ्य के लिए आपके शरीर को कुछ ट्राइग्लिसराइड्स की जरूरत होती है। हालांकि, आपके ब्लड में ट्राइग्लिसराइड्स का हाई लेवल हार्ट डिजीज और स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकता है। आमतौर पर, खून में ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल ज्यादा होने पर कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। अगर खून में ट्राइग्लिसराइड्स के बढ़े हुए लेवल का इलाज या कंट्रोल न किया जाए, तो इससे कोरोनरी हार्ट डिजीज और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। 

शरीर में कोलेस्ट्रॉल क्यों जरूरी है? 

कोलेस्ट्रॉल को अक्सर लोग सिर्फ खराब मान लेते हैं, जबकि सच यह है कि यह शरीर के लिए बेहद जरूरी तत्व है। डॉ. विकास गोयल बताते हैं कि यह हमारे शरीर के कई जरूरी कार्यों में अहम भूमिका निभाता है। अगर शरीर में कोलेस्ट्रॉल न हो, तो कई जरूरी प्रक्रियाएं ठीक से काम ही नहीं कर पाएंगी। इसलिए इसे पूरी तरह खत्म करने के बजाय संतुलित मात्रा में बनाए रखना ज्यादा जरूरी है। 

  • सबसे पहले, कोलेस्ट्रॉल शरीर की हर कोशिका (cell) की दीवार यानी सेल मेम्ब्रेन बनाने में मदद करता है। यह कोशिकाओं को मजबूत और लचीला बनाए रखता है, जिससे वे सही तरीके से काम कर पाती हैं। इसके अलावा, यह हार्मोन बनाने में भी अहम भूमिका निभाता है। खासकर एस्ट्रोजन और टेस्टोस्टेरोन जैसे जरूरी हार्मोन कोलेस्ट्रॉल की मदद से ही बनते हैं, जो शरीर के विकास, फर्टिलिटी और कई अन्य कार्यों के लिए जरूरी होते हैं। 
  • कोलेस्ट्रॉल पाचन प्रक्रिया में भी अहम भूमिका निभाता है। यह बाइल एसिड बनाने में मदद करता है, जो हमारे द्वारा खाए गए खाने, खासकर फैट को पचाने में सहायक होता है। इसके बिना शरीर को पोषक तत्वों को सही तरीके से अवशोषित करने में परेशानी हो सकती है। 
  • इसके अलावा, कोलेस्ट्रॉल दिमाग और नर्वस सिस्टम के लिए भी जरूरी है। यह नसों के सही सिग्नल ट्रांसमिशन में मदद करता है और मेंटल हेल्थ को सपोर्ट करता है। 

इसलिए यह कहना गलत होगा कि कोलेस्ट्रॉल पूरी तरह खराब है। असल समस्या तब होती है जब इसका लेवल असंतुलित हो जाता है। संतुलित कोलेस्ट्रॉल शरीर को हेल्दी बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है। 

कौन-सा कोलेस्ट्रॉल सबसे ज्यादा खतरनाक है? 

डॉ. विकास गोयल के अनुसार, LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। यह धीरे-धीरे नसों में जमा होकर ब्लॉकेज बनाता है और कई बार बिना किसी लक्षण के हार्ट अटैक का कारण बन जाता है। अगर किसी व्यक्ति में LDL ज्यादा और HDL कम हो, तो खतरा और बढ़ जाता है। इसके अलावा ट्राइग्लिसराइड्स का हाई लेवल भी जोखिम को बढ़ाता है। 

साल 2024 की CDC की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ स्वास्थ्य स्थितियां शरीर में कोलेस्ट्रॉल के लेवल को तेजी से बिगाड़ सकती हैं और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती हैं। जैसे टाइप 2 डायबिटीज में अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) का लेवल कम हो जाता है और खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) बढ़ जाता है, जिससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ता है। इसी तरह मोटापा भी ट्राइग्लिसराइड्स और LDL को बढ़ाकर स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। इसके अलावा Familial Hypercholesterolemia जैसी जेनेटिक समस्या में बहुत ज्यादा LDL पाया जाता है। इसलिए जरूरी है कि इन स्थितियों को समय पर पहचानकर कंट्रोल किया जाए। सही डाइट, नियमित एक्सरसाइज और डॉक्टर की सलाह से इन जोखिमों को कम किया जा सकता है और दिल को हेल्दी रखा जा सकता है।

नॉर्मल कोलेस्ट्रॉल लेवल क्या होना चाहिए?

डॉ. विकास गोयल बताते हैं कि शरीर को हेल्दी रखने के लिए कोलेस्ट्रॉल का संतुलित लेवल होना बेहद जरूरी है। एक हेल्दी व्यक्ति के लिए अलग-अलग प्रकार के कोलेस्ट्रॉल की सामान्य रेंज तय की गई है, जिसे समझना जरूरी है। कुल कोलेस्ट्रॉल का लेवल 200 mg/dL से कम होना चाहिए। यह सभी प्रकार के कोलेस्ट्रॉल (LDL, HDL, VLDL) का कुल टोटल होता है। अगर यह 200-239 mg/dL के बीच है तो इसे बॉर्डरलाइन माना जाता है, जबकि 240 mg/dL से ऊपर होने पर दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। 

1. LDL 

LDL का लेवल 100 mg/dL से कम होना अच्छा माना जाता है। 160 mg/dL से ज्यादा होने पर यह हाई रिस्क कैटेगरी में आता है और हार्ट अटैक की संभावना बढ़ा सकता है। 

2. HDL 

HDL का लेवल पुरुषों और महिलाओं में अलग-अलग होता है, पुरुषों में इसका लेवल 40mg/dL  या उससे ज्यादा और महिलाओं में 50mg/dL या उससे ज्यादा लेवल सामान्य माना जाता है। 60 mg/dL या उससे ज्यादा होना दिल के लिए अच्छा माना जाता है, क्योंकि यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। वहीं 40 mg/dL से कम होना हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ा सकता है। 

3. ट्राइग्लिसराइड्स 

ट्राइग्लिसराइड्स का लेवल 150 mg/dL से कम होना चाहिए। 150-199 mg/dL बॉर्डरलाइन हाई माना जाता है, जबकि 200 mg/dL से ऊपर होने पर यह खतरनाक हो सकता है और दिल की बीमारी, मोटापा व डायबिटीज का जोखिम बढ़ा सकता है। 

इन सभी लेवल्स का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। अगर इनमें से कोई भी लेवल सामान्य सीमा से बाहर जाता है, तो यह हार्ट डिजीज, स्ट्रोक और अन्य मेटाबॉलिक समस्याओं का संकेत हो सकता है। इसलिए नियमित जांच, हेल्दी डाइट और एक्सरसाइज से इन्हें कंट्रोल में रखना चाहिए। 

ज्यादा कोलेस्ट्रॉल होने के खतरे 

हाई कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए साइलेंट किलर” की तरह काम करता है। शुरुआत में इसके लक्षण दिखाई नहीं देते, लेकिन अंदर ही अंदर यह नसों को नुकसान पहुंचाता रहता है। इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक, हाई ब्लड प्रेशर और किडनी से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। जब धमनियों में ब्लॉकेज बढ़ जाता है, तो ब्लड फ्लो बाधित होता है, जिससे अचानक गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। 

कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के लिए क्या करें?

डॉ. विकास गोयल बताते हैं कि कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने के लिए रोजाना 30-45 मिनट एक्सरसाइज करें, जैसे वॉकिंग, जॉगिंग या योग। अपने खानपान में फाइबर और प्रोटीन बढ़ाएं और तला-भुना खाना कम करें। फल, सब्जियां, साबुत अनाज, नट्स और बीजों का सेवन बढ़ाएं। धूम्रपान और शराब से दूरी बनाएं। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर दवाइयां भी दे सकते हैं, जिन्हें नियमित लेना जरूरी होता है।

डॉक्टर से कब मिलें?

कोलेस्ट्रॉल से जुड़ी समस्या अक्सर साइलेंट होती है, यानी शुरुआत में इसके कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते। यही कारण है कि समय पर डॉक्टर से मिलना बहुत जरूरी हो जाता है। अगर आपके परिवार में दिल की बीमारी, हाई कोलेस्ट्रॉल या स्ट्रोक का इतिहास रहा है, तो आपको नियमित रूप से अपनी जांच करानी चाहिए। अगर आपको बार-बार सीने में दर्द, सांस फूलना, जल्दी थकान महसूस होना या चक्कर आना जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। ये संकेत दिल से जुड़ी समस्याओं की ओर इशारा कर सकते हैं। इसके अलावा, अगर आपका वजन तेजी से बढ़ रहा है या आपको डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हैं, तो कोलेस्ट्रॉल की जांच जरूर करानी चाहिए। 40 साल की उम्र के बाद हर व्यक्ति को नियमित हेल्थ चेकअप कराना चाहिए, भले ही कोई लक्षण न हों। वहीं, अगर आपकी रिपोर्ट में LDL ज्यादा और HDL कम आता है, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

 निष्कर्ष

कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए जरूरी होता है, लेकिन इसका संतुलन बनाए रखना सबसे जरूरी है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, गलत खानपान और कम फिजिकल एक्टिविटी के कारण लोगों में हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या तेजी से बढ़ रही है। यह एक ऐसी स्थिति है जो धीरे-धीरे शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचाती है और कई बार अचानक हार्ट अटैक या स्ट्रोक का कारण बन जाती है। अच्छी बात यह है कि थोड़ी-सी जागरूकता और सही लाइफस्टाइल अपनाकर इसे काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। बैलेंस डाइट, नियमित एक्सरसाइज, तनाव कम करना और समय-समय पर हेल्थ चेकअप करवाना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा शुरू या बंद नहीं करनी चाहिए।

FAQ

  • क्या कोलेस्ट्रॉल हमेशा खराब होता है?

    नहीं, कोलेस्ट्रॉल पूरी तरह खराब नहीं होता। शरीर को इसकी जरूरत होती है, लेकिन इसका संतुलन बिगड़ने पर यह नुकसानदायक बन जाता है।
  • LDL और HDL में क्या अंतर है?

    LDL धमनियों में जमा होकर ब्लॉकेज बनाता है, जबकि HDL शरीर से खराब कोलेस्ट्रॉल को हटाने में मदद करता है।
  • हाई कोलेस्ट्रॉल के लक्षण क्या होते हैं?

    अक्सर हाई कोलेस्ट्रॉल के कोई शुरुआती लक्षण नहीं होते। यह धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाता है।
  • कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के मुख्य कारण क्या हैं?

    एक्सरसाइज की कमी, मोटापा, गलत खानपान, तला-भुना खाना, धूम्रपान, शराब और जेनेटिक कारण इसके मुख्य कारण हैं।

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Akanksha Tiwari

Health & Lifestyle Journalist

आकांक्षा तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। वह पोषण, आयुर्वेद, प्रेगनेंसी, हार्ट हेल्थ और फिटनेस जैसे विषयों पर लिखती हैं और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह India TV, India Ahead और News Nation के साथ काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: आकांक्षा द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 25, 2026 17:15 IST

    Modified By : Akanksha Tiwari
  • Apr 25, 2026 17:15 IST

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