क्रिएटिनिन एक तरह का बाई प्रोडक्ट होता है, जो प्रोटीन मेटाबॉलिज्म से बनता है। यह यूरिन के जरिए शरीर के बाहर निकल जाता है, लेकिन किसी कारण अगर किडनी ठीक से काम नहीं कर रही हैं, तो शरीर को क्रिएटिनिन को बाहर निकालने में समस्या आ सकती है और शरीर में क्रिएटिनिन का लेवल बढ़ सकता है। क्रिएटिनिन लेवल ज्यादा होना, किडनी में किसी बीमारी का संकेत हो सकता है। किडनी की बीमारी को चेक करने के लिए किडनी फंक्शन टेस्ट होता है जिसके अंतर्गत कई पैरामीटर्स होते हैं जिसमें से एक होता है क्रिएटिनिन लेवल चेक करने के लिए क्रिएटिनिन टेस्ट (Creatinine Test)। इस टेस्ट की मदद से पता चलता है कि शरीर में क्रिएटिनिन का लेवल क्या है? क्रिएटिनिन टेस्ट से जुड़े जरूरी सवालों के जवाब जानने के लिए हमने Dr. Rajasekara Chakravarthi Madarasu, Senior Consultant Nephrologist, Clinical Director & HOD Of Nephrology And Transplant Services At Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।
क्रिएटिनिन क्या होता है?
क्रिएटिनिन (Creatinine) एक तरह का वेस्ट प्रोडक्ट है जो हमारे मसल्स में बनता है। क्रिएटिनिन सभी के शरीर में पाया जाता है। हमारी किडनी इसे लगातार शरीर से बाहर निकालने का काम करती है और यही वजह है कि सामान्य तौर पर इसका लेवल ऊपर नहीं जा पाता है। जब किडनी ठीक ढंग से काम नहीं करती, तो क्रिएटिनिन शरीर के बाहर नहींं जा पाता और इसका लेवल बढ़ने लगता है।
Dr. Rajasekara Chakravarthi Madarasu ने बताया कि जो भी मरीज हाई क्रिएटिनिन लेवल के साथ हमारे पास आते हैं, वे किडनी की सेहत के बारे में नहींं पूछते, उनका सवाल यह होता है कि क्रिएटिनिन लेवल को कैसे कम करें? जबकि क्रिएटिनिन केवल एक वेस्ट प्रोडक्ट है, अगर क्रिएटिनिन लेवल ज्यादा है, तो इसका सीधा मतलब यह माना जाता है कि किडनी में कोई समस्या है, इसका मतलब है कि हमें किडनी पर गौर करना चाहिए। किडनी की समस्या ज्यादातर मामलोंं में हाई बीपी या हाई शुगर के कारण होती है, अगर इसे कंंट्रोल कर लेंंगे, तो किडनी की गंभीर बीमारी से बच सकते हैं।
National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases के मुताबिक, डॉक्टर ब्लड में क्रिएटिनिन की मात्रा का इस्तेमाल करके आपके GFR (किडनी की फिल्टर करने की दर) का अनुमान लगाते हैं। जैसे-जैसे किडनी की बीमारी बढ़ती है, क्रिएटिनिन का स्तर भी बढ़ जाता है।
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eGFR क्या है और इसका क्रिएटिनिन से क्या संबंध है?
eGFR (Estimated Glomerular Filtration Rate) किडनी के फिल्टर करने की क्षमता का अनुमान होता है। यह अनुमान ब्लड में क्रिएटिनिन के लेवल के आधार पर लगाया जाता है।
सीरम और यूरिन क्रिएटिनिन टेस्ट में क्या अंतर है?
ब्लड (सीरम टेस्ट) में क्रिएटिनिन किडनी की सफाई या फिल्टर करने की क्षमता बताता है। वहींं यूरिन टेस्ट में क्रिएटिनिन शरीर से निकले अपशिष्ट की मात्रा दिखाता है।
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क्रिएटिनिन टेस्ट क्यों किया जाता है?

Dr. Rajasekara Chakravarthi Madarasu ने बताया कि क्रिएटिनिन टेस्ट क्रिएटिनिन को मापता है। यह किडनी की सेहत का पता लगाने, किडनी की बीमारी का पता लगाने, डायबिटीज या हाइपरटेंशन जैसी पुरानी बीमारियों पर नजर रखने या इलाज के असर को ट्रैक करने के लिए किया जाता है। समय पर पता चलने से आगे होने वाली समस्याओं से बचने में मदद मिलती है।
- Mayo Clinic के मुताबिक, क्रिएटिनिन टेस्ट की मदद से यह पता चलता है कि असामान्य लक्षणों के पीछे किडनी की बीमारी कारण है या नहीं।
- अगर आपको डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या ऐसी कोई दूसरी बीमारी है जिससे किडनी की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है, तो किडनी की बीमारी की जांच करने के लिए यह टेस्ट किया जाता है।
- जांच यह पता लगाने के लिए भी की जाती है कि क्या मौजूदा किडनी की बीमारी और खराब हो रही है या इलाज कितना अच्छा काम कर रहा है?
- दवाओं के साइड इफेक्ट पर नजर रखने के लिए, जिसमें किडनी डैमेज या किडनी फंक्शन में बदलाव शामिल है।
- यह ध्यान से देखने के लिए कि ट्रांसप्लांट की गई किडनी कितनी अच्छी तरह काम कर रही है।
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क्रिएटिनिन टेस्ट कैसे किया जाता है?
- क्रिएटिनिन ब्लड टेस्ट में जांंच के लिए ब्लड का सैंपल दिया जाता है।
- क्रिएटिनिन यूरिन टेस्ट में 24 घंंटे का सैंपल शीशी में दिया जाता है ताकि जांच में क्रिएटिनिन का स्तर चेक किया जा सके।
- यह टेस्ट जल्दी हो जाता है, इसमें कोई दर्द नहीं होता और इसे लैब में किया जाता है। आमतौर पर इसके लिए किसी खास तैयारी की जरूरत नहीं होती।
क्रिएटिनिन टेस्ट का नॉर्मल लेवल क्या है?
| नॉर्मल क्रिएटिनिन लेवल | |
| पुरुष | 0.74 से 1.35 |
| महिला | 0.59 से 1.04 |
पुरुषों के शरीर में मसल मास ज्यादा हो सकता है इसलिए महिलाओं के मुकाबले क्रिएटिनिन की वैल्यू पुरुषोंं के शरीर में अलग होती है।
पुरुषोंं में 0.74 से 1.35 क्रिएटिनिन लेवल सामान्य माना जाता है, वहीं महिलाओं में 0.59 से 1.04 तक सामान्य लेवल माना जाता है।
किसी भी व्यक्ति को सलाह दी जाती है कि वह किडनी फंंक्शन टेस्ट के साथ-साथ अपना यूरिन टेस्ट भी करवाए।
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हाई क्रिएटिनिन लेवल का मतलब क्या है?
| हाई क्रिएटिनिन लेवल | आमतौर पर 1.3 mg/dL से ऊपर |
| लो क्रिएटिनिन लेवल | आमतौर पर 0.6 mg/dL से नीचे |
- हाई क्रिएटिनिन लेवल
- आमतौर पर 1.3 mg/dL से ऊपर
- लो क्रिएटिनिन लेवल
- आमतौर पर 0.6 mg/dL से नीचे
हाई क्रिएटिनिन लेवल (आमतौर पर 1.3 mg/dL से ऊपर) किडनी के ठीक से फिल्टर न कर पाने का संकेत है। किसी अचानक हुई (Acute) या पुरानी (Chronic) किडनी की बीमारी की वजह से यह हो सकता है। क्रिएटिनिन लेवल हाई होने पर सूजन (edema), जी मिचलाना, त्वचा में खुजली, यूरिन कम आना, हाई बीपी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अगर इलाज न किया जाए, तो इससे किडनी फेल होने का खतरा रहता है।
National Kidney Foundation के मुताबिक, हाई क्रिएटिनिन लेवल के पीछे ये कारण हो सकते हैं-
- मांस का ज्यादा मात्रा में सेवन करना
- क्रिएटिनिन सप्लीमेंट्स लेना
- हाल ही में की गई तेज कसरत
- अधिक मसल मास वाले लोगों में (जैसे बॉडीबिल्डर)
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लो क्रिएटिनिन लेवल का मतलब क्या है?
आमतौर पर 0.6 mg/dL से नीचे लो क्रिएटिनिन लेवल माना जाता है। लो क्रिएटिनिन लेवल कुपोषण का संकेत हो सकता है। लिवर की गंभीर बीमारी के कारण भी इसका स्तर कम हो सकता है। ब्लड में क्रिएटिनिन का स्तर कम होना आम बात नहीं है। ऐसी स्थिति में अपने डॉक्टर से तुरंंत संपर्क करें। लो क्रिएटिनिन लेवल के पीछे ये कारण हो सकते हैं-
- वीगन या शाकाहारी आहार का पालन करना
- मांसपेशियों का कम होना
- गर्भावस्था
- मांसपेशियों के क्षय रोग का इतिहास
- गंभीर लिवर रोग (सिरोसिस)
क्या पानी पीने से क्रिएटिनिन कम हो सकता है?
Dr. Rajasekara Chakravarthi Madarasu ने बताया कि बहुत ज्यादा पानी पीने से किडनी को हुए नुकसान को ठीक करना मुश्किल है और न ही इसका आपके क्रिएटिनिन के लेवल पर लंबे समय तक कोई अच्छा असर पड़ता है। अगर आप सीकेडी (क्रॉनिक किडनी रोग) के शुरुआती दौर में हैं, तो आपको एक नेफ्रोलॉजिस्ट और डाइट एक्सपर्ट के साथ मिलकर, किडनी के लिए सही डाइट और लाइफस्टाइल की जानकारी लेना चाहिए।
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क्रिएटिनिन लेवल ज्यादा होने पर कैसी डाइट लें?
- नमक और प्रोटीन कम करें (रेड मीट और डेयरी उत्पादों का सेवन सीमित करें)
- फल और सब्जियां जैसे सेब, पत्तागोभी खाएं।
- फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन बढ़ाएं।
- फॉस्फोरस रिच फूड्स से बचें।
- किडनी को हेल्दी रखने के लिए डॉक्टर की सलाह पर डैश डाइट (DASH Diet) फाॅलो करें।
किन लोगों को क्रिएटिनिन टेस्ट कराना चाहिए?
कोई भी व्यक्ति जिसे डायबिटीज, हाइपरटेंशन, परिवार में किडनी की बीमारी का इतिहास, बार-बार UTI होता हो या जिसमें सूजन जैसे लक्षण दिखाई देते हों। 60 साल से ज्यादा उम्र के लोग या सर्जरी के बाद के मरीजों के लिए यह एक रूटीन टेस्ट है।
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क्रिएटिनिन लेवल कैसे कम करें?
- डिहाइड्रेशन से क्रिएटिनिन बढ़ सकता है इसलिए पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें।
- दाल, पनीर, अंडा का सेवन सीमित करें क्योंकि ये सभी प्रोटीन स्रोत हैं। ज्यादा प्रोटीन से क्रिएटिनिन लेवल बढ़ सकता है।
- जिम और स्पोर्ट्स करने वाले लोग अक्सर क्रिएटिनिन सप्लीमेंट लेते हैं, जो शरीर में जाकर क्रिएटिनिन लेवल बढ़ा सकता है इसलिए सप्लीमेंट लेते समय सही मात्रा और डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। खासकर जिन लोगों को पहले से किडनी की समस्या है, उन्हें ऐसे सप्लीमेंट लेने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए।
- धूम्रपान और अल्कोहल से बचें। ये किडनी की कार्यक्षमता को खराब करते हैं और क्रिएटिनिन लेवल को बढ़ा सकते हैं।
- हाई बीपी और डायबिटीज किडनी खराब होने का बड़ा कारण हैं जिससे क्रिएटिनिन लेवल असंतुलित हो सकता है इसलिए नियमित जांच और दवा जरूरी है।
क्रिएटिनिन बढ़ने पर क्या करें?
- सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि क्रिएटिनिन क्यों बढ़ा है? इसके पीछे डिहाइड्रेशन, ज्यादा प्रोटीन, दवाएं या किडनी रोग जैसे कारण हो सकते हैं इसलिए डॉक्टर से संपर्क करके जांच कराएं।
- कुछ पेनकिलर और सप्लीमेंट किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं इसलिए बिना सलाह के दवा न लें।
- पेशाब कम हो जाए, पैरों और चेहरे पर सूजन आए या ज्यादा थकान हो, तो भी तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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डॉक्टर से संपर्क कब करें?
बीपी हाई रहता है या शुगर लेवल ज्यादा रहता है या हाई बीपी, डायबिटीज के मरीज हैं, तो समय-समय पर क्रिएटिनिन टेस्ट कराना चाहिए। इन लक्षणों के नजर आने पर भी डॉक्टर से संपर्क करें-
- सूजन होना
- पेशाब कम होना
- ज्यादा थकान होना
- मतली
- भ्रम होना
- सीने में दर्द
निष्कर्ष:
Senior Consultant Nephrologist, Dr. Rajasekara Chakravarthi Madarasu से हुई बातचीत के आधार पर हमें पता चलता है कि क्रिएटिनिन टेस्ट क्रिएटिनिन को मापता है। पुरुषोंं में 0.74 से 1.35 क्रिएटिनिन लेवल सामान्य माना जाता है, वहीं महिलाओं में 0.59 से 1.04 तक सामान्य लेवल माना जाता है। Mayo Clinic के अनुसार, क्रिएटिनिन टेस्ट यह पता लगाने में मदद करता है कि आपको किडनी की बीमारी है या नहीं। साथ ही इस जांंच से यह भी पता चलता है कि किडनी की बीमारी की स्टेज क्या है और इलाज कितना असरदार साबित हो रहा है। डायबिटीज, हाइपरटेंशन या किडनी के मरीजों को डॉक्टर की सलाह लेकर यह जांंच करानी चाहिए।
FAQ
क्या क्रिएटिनिन टेस्ट के लिए भूखा रहना जरूरी है?
नहीं, ब्लड या यूरिन क्रिएटिनिन टेस्ट के लिए भूखा रहना जरूरी नहीं है। आप सामान्य रूप से खा-पी सकते हैं। खाने-पीने से टेस्ट के नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ता है।क्रिएटिनिन टेस्ट कितनी बार करवाना चाहिए?
ज्यादा खतरे वाले लोग जैसे डायबिटीज या हाई बीपी के मरीजों को डॉक्टर की सलाह लेकर साल में एक बार जांंच जरूर करानी चाहिए और किडनी की समस्या वाले मरीजोंं को हर तीन से छह महीने में जांंच करानी चाहिए।क्रिएटिनिन टेस्ट की कीमत क्या है?
ब्लड टेस्ट में लगभग 200 से 500 रूपये लगते हैं। यूरिन टेस्ट में 400 से 800 लग सकते हैं। सरकारी अस्पतालों में 100 रूपये से भी कम में जांंच हो जाती है।क्रिएटिनिन टेस्ट कराने के क्या फायदे हैं?
किडनी की बीमारी का शुरुआती स्टेज पर पता चल सकता है। किडनी की गंभीर बीमारी वाले मरीजों में क्रिएटिनिन टेस्ट यह तय करने में मदद करता है कि डायलिसिस की जरूरत कब पड़ सकती है।
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Current Version
Apr 22, 2026 11:46 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Apr 22, 2026 11:46 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Rajasekara C Madarasu