एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी समस्या है जो महिलाओं के लिए बेहद दर्दनाक साबित होती है और कई बार इतनी गंभीर हो जाती है कि रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो जाता है। एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय की अंदरूनी परत (एंडोमेट्रियम) जैसे ऊतक शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगते हैं। इससे महिलाओं को तेज पेल्विक पेन, पीरियड्स के दौरान असहनीय दर्द और कई बार इनफर्टिलिटी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गंभीर मामलों में डॉक्टर कभी-कभी हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय हटाने की सर्जरी) की सलाह देते हैं, लेकिन क्या यह वाकई एंडोमेट्रियोसिस का स्थायी समाधान है? इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए हमने, यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद की कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिशियन और गायनेकोलॉजिस्ट, डॉ. एम. वी. ज्योत्सना से बात की। डॉ. एम. वी. ज्योत्सना के अनुसार, हिस्टेरेक्टॉमी एंडोमेट्रियोसिस के कुछ मामलों में राहत जरूर देती है, लेकिन इसे अकेला इलाज नहीं माना जा सकता।
Endometriosis क्या है?
एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय की अंदरूनी परत यानी एंडोमेट्रियम जैसी कोशिकाएं गर्भाशय के बाहर जैसे अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब या पेल्विक टिश्यू पर विकसित होने लगती हैं। इससे सूजन, चिपकाव (adhesions), दर्द और कभी-कभी इनफर्टिलिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। Elsevier Reproductive Biomedicine & Society online में साल 2021 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, 'एंडोमेट्रियोसिस' (endometriosis) एक गंभीर बीमारी होने के बावजूद दुनिया भर में लंबे समय से उपेक्षित (Neglected) रही है। इसे "मिस्ड डिजीज" या भूली हुई बीमारी कहा गया है क्योंकि इसके लक्षणों, जैसे कि मासिक धर्म यानी पीरियड्स का दर्द, को अक्सर सामान्य मानकर अनदेखा कर दिया जाता है। रिपोर्ट का निष्कर्ष यह है कि वैज्ञानिक शोध और सरकारी नीतियों में इस बीमारी को प्राथमिकता नहीं दी गई है, जिसे "अनडन साइंस" (अधूरा विज्ञान) कहा जा सकता है। रिपोर्ट अंत में जोर देती है कि महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी इस अदृश्य समस्या पर अब ध्यान देने, निवेश करने और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की सख्त जरूरत है।
Hysterectomy क्या है और यह कब किया जाता है?
डॉ. एम. वी. ज्योत्सना बताती हैं कि हिस्टेरेक्टॉमी एक बड़ी सर्जरी है जिसमें गर्भाशय को हटाया जाता है। कुछ मामलों में अंडाशय और फैलोपियन ट्यूब भी हटाए जाते हैं, जिसे सल्पिंगो-ओफोरेक्टॉमी (salpingo-oophorectomy) कहा जाता है। यह प्रक्रिया कई तरह से की जा सकती है-
- लैप्रोस्कोपिक
- वैजाइनल
- एब्डॉमिनल
सर्जरी का प्रकार बीमारी की गंभीरता, मरीज की स्थिति और सर्जन की विशेषज्ञता पर निर्भर करता है।
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एंडोमेट्रियोसिस में हिस्टेरेक्टॉमी के फायदे
डॉ. एम. वी. ज्योत्सना बताती हैं कि कुछ मरीजों में हिस्टेरेक्टॉमी काफी प्रभावी साबित हो सकती है, खासकर तब जब दर्द बहुत ज्यादा हो और दवाओं से कंट्रोल में न आ रहा हो। इस सर्जरी के बाद कई महिलाओं में लगातार पेल्विक पेन में कमी आती है, पीरियड्स से जुड़ी समस्याएं पूरी तरह खत्म हो जाती हैं, जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) बेहतर होती है।
साल 2024 में Cureus Journal of Medical Science में प्रकाशित एक Peer Review के अनुसार, हिस्टेरेक्टॉमी को एंडोमेट्रियोसिस से जुड़े गंभीर दर्द के लिए एक 'निश्चित' (definitive) इलाज माना जाता है, खासकर तब जब अन्य उपचार विफल हो जाते हैं। इस स्टडी के अनुसार, लगभग 84% महिलाओं ने इस सर्जरी के रिजल्ट पर संतोष व्यक्त किया और 76% ने दर्द में भारी कमी महसूस की।
स्टडी यह भी बताती है कि यदि गर्भाशय के साथ-साथ अंडाशय (ovaries) भी निकाल दिए जाएं, तो दर्द से राहत मिलने की संभावना बहुत बढ़ जाती है (केवल 10% महिलाओं में दर्द बना रहा), जबकि अंडाशय न निकालने पर 61% महिलाओं में दर्द की समस्या बनी रह सकती है। हालांकि, यह एक बड़ा ऑपरेशन है जिसमें इंफेक्शन और जल्दी मेनोपॉज जैसे जोखिम भी शामिल हैं।
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हिस्टेरेक्टॉमी के नुकसान और जोखिम
डॉ. एम. वी. ज्योत्सना बताती हैं कि यह सर्जरी कई मामलों में राहत देती है, लेकिन इसके कुछ गंभीर नुकसान भी हैं-
- इंफेक्शन, ब्लीडिंग और आसपास के अंगों को नुकसान का खतरा रहता है।
- यदि ओवरी हटा दी जाए, तो समय से पहले मेनोपॉज हो सकता है।
- हार्मोनल असंतुलन, हड्डियों की कमजोरी (ऑस्टियोपोरोसिस) और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
- महिला की फर्टिलिटी हमेशा के लिए खत्म हो जाती है।
क्या हिस्टेरेक्टॉमी एंडोमेट्रियोसिस का इलाज है?
डॉ. एम. वी. ज्योत्सना बताती हैं कि यह एक बहुत बड़ा मिथक है कि हिस्टेरेक्टॉमी एंडोमेट्रियोसिस को पूरी तरह खत्म कर देती है। असल में, यह बीमारी गर्भाशय के बाहर भी होती है, जैसे ओवरी, आंतों या पेल्विक टिशू में। ऐसे में सर्जरी के बाद भी कुछ एंडोमेट्रियल टिशूज शरीर में रह सकते हैं। अगर ओवरी सुरक्षित रहती हैं, तो हार्मोनल एक्टिविटी जारी रहती है, जिससे बीमारी दोबारा हो सकती है।
साल 2014 की European Society for Gynaecological Endoscopy की एक रिपोर्ट के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस के लिए गर्भाशय निकालना (Hysterectomy) हमेशा दर्द का स्थायी समाधान नहीं होता। यदि सर्जरी के दौरान अंडाशय (ovaries) नहीं निकाले जाते, तो बीमारी और दर्द दोबारा होने की संभावना 62% तक हो सकती है। अंडाशय न निकालने से दर्द लौटने का जोखिम 6 गुना और दोबारा ऑपरेशन की जरूरत पड़ने का जोखिम 8 गुना बढ़ जाता है। हिस्टेरेक्टॉमी की सफलता पूरी तरह इस बात पर निर्भर करती है कि डॉक्टर ने सर्जरी के समय बीमारी के सभी छोटे-छोटे अंशों को कितनी सटीकता से निकाला है। कम उम्र की महिलाओं के लिए अंडाशय बचाने या निकालने का निर्णय बहुत सोच-समझकर लेना चाहिए।
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सही निर्णय कैसे लें?
हिस्टेरेक्टॉमी का निर्णय बहुत सोच-समझकर लेना चाहिए। इसमें डॉक्टर और मरीज दोनों की भूमिका अहम होती है।
- मरीज को सर्जरी के फायदे और नुकसान पूरी तरह समझने चाहिए
- भविष्य में बच्चे की प्लानिंग है या नहीं, यह एक बड़ा फैक्टर है
- मानसिक और भावनात्मक सपोर्ट भी जरूरी होता है
एंडोमेट्रियोसिस के इलाज के अन्य विकल्प
डॉ. एम. वी. ज्योत्सना बताती हैं कि एंडोमेट्रियोसिस के इलाज में हिस्टेरेक्टॉमी को आमतौर पर अंतिम विकल्प माना जाता है। इससे पहले डॉक्टर कई अन्य तरीके अपनाते हैं। डॉ. एम. वी. ज्योत्सना के अनुसार, ''हर मरीज अलग होता है, इसलिए इलाज भी व्यक्तिगत होना चाहिए। बिना पूरी काउंसलिंग के सर्जरी का निर्णय नहीं लेना चाहिए।''
1. दवाएं
- पेनकिलर्स (NSAIDs)
- हार्मोनल थेरेपी (जैसे बर्थ कंट्रोल पिल्स, प्रोजेस्टिन आदि)
2. लैप्रोस्कोपिक सर्जरी
इसमें केवल एंडोमेट्रियल टिश्यू को हटाया जाता है, जिससे दर्द कम हो सकता है और फर्टिलिटी भी बनी रहती है।
3. इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF)
IVF एंडोमेट्रियोसिस का इलाज नहीं है लेकिन यदि महिला को कंसीव करने में समस्या हो रही है, तो IVF कंसीव करने का एक प्रभावी विकल्प हो सकता है।
हिस्टेरेक्टॉमी के बाद ठीक होने में कितना समय लगता है?
डॉ. एम. वी. ज्योत्सना बताती हैं कि हिस्टेरेक्टॉमी के बाद ठीक होने का समय कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे सर्जरी का प्रकार, मरीज की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति आदि। आमतौर पर पूरी तरह से ठीक होने में 4 से 8 हफ्ते का समय लग सकता है। अगर ओपन सर्जरी की गई है, तो रिकवरी में थोड़ा ज्यादा समय यानी 6-8 हफ्ते लग सकते हैं। वहीं, लैप्रोस्कोपिक या वैजाइनल हिस्टेरेक्टॉमी में शरीर जल्दी रिकवर करता है और 3-4 हफ्तों में सामान्य एक्टिविटीज शुरू की जा सकती हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि शरीर पूरी तरह से अंदर से ठीक हो गया है, इसलिए डॉक्टर की सलाह मानना जरूरी होता है। सर्जरी के बाद शुरुआती दिनों में दर्द, थकान और हल्की कमजोरी महसूस हो सकती है, जो धीरे-धीरे कम हो जाती है। हर महिला की रिकवरी अलग होती है, इसलिए अगर ज्यादा दर्द, ब्लीडिंग या अन्य असामान्य लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
डॉक्टर से कब मिलें?
एंडोमेट्रियोसिस या उससे जुड़े लक्षणों को अक्सर महिलाएं सामान्य पीरियड पेन समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, लेकिन कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिन्हें हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। सही समय पर डॉक्टर से परामर्श लेने से न केवल बीमारी की पहचान जल्दी हो सकती है, बल्कि इसके बढ़ने और गंभीर होने से भी बचा जा सकता है। सबसे पहले, अगर आपको लंबे समय से लगातार पेल्विक यानी पेट के निचले हिस्से में दर्द बना रहता है, तो यह सामान्य नहीं है। खासतौर पर अगर यह दर्द पीरियड्स के अलावा भी बना रहता है या धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है, तो यह एंडोमेट्रियोसिस का संकेत हो सकता है। इसी तरह, यदि पीरियड्स के दौरान दर्द इतना ज्यादा हो कि आपकी रोजमर्रा की एक्टिविटीज प्रभावित होने लगें, बार-बार पेनकिलर लेने की जरूरत पड़े या ऑफिस/स्कूल मिस करना पड़े, तो डॉक्टर से मिलना जरूरी हो जाता है।
इसके अलावा, अगर दवाओं और सामान्य उपचार से आपको कोई खास राहत नहीं मिल रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह इस बात का संकेत हो सकता है कि समस्या गहरी है और एक्सपर्ट की जरूरत है। कई महिलाओं को संभोग के दौरान दर्द (painful intercourse) या मल-मूत्र त्याग के समय भी ज्यादा दर्द महसूस हो सकता है, ऐसी स्थिति में भी तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अगर आप लंबे समय से कंसीव करने की कोशिश कर रही हैं लेकिन सफलता नहीं मिल रही, तो भी डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, क्योंकि एंडोमेट्रियोसिस फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकता है।
निष्कर्ष
एंडोमेट्रियोसिस की समस्या न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्थिति पर भी असर डालती है। ऐसे में इसका सही और समय पर इलाज बेहद जरूरी हो जाता है। हिस्टेरेक्टॉमी को अक्सर एक अंतिम विकल्प के रूप में देखा जाता है, खासकर तब जब अन्य उपचार जैसे दवाएं, हार्मोनल थेरेपी या लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से राहत नहीं मिलती लेकिन यह समझना जरूरी है कि यह सर्जरी हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं होती और न ही यह एंडोमेट्रियोसिस का पूरा इलाज है।
डॉ. एम. वी. ज्योत्सना के अनुसार, हिस्टेरेक्टॉमी से कई महिलाओं को दर्द और पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं में राहत मिल सकती है, लेकिन यदि शरीर में एंडोमेट्रियल टिशू अन्य जगहों पर मौजूद हैं, तो लक्षण दोबारा उभर सकते हैं। इसके अलावा, इस सर्जरी के साथ जुड़े जोखिम, जैसे संक्रमण, हार्मोनल बदलाव, समय से पहले मेनोपॉज और फर्टिलिटी का स्थायी नुकसान भी ध्यान में रखना जरूरी है। इसलिए, किसी भी महिला को हिस्टेरेक्टॉमी का निर्णय जल्दबाजी में नहीं लेना चाहिए। यह एक व्यक्तिगत निर्णय है, जो मरीज की उम्र, लक्षणों की गंभीरता पर निर्भर करता है।
FAQ
हिस्टेरेक्टॉमी के बाद क्या दर्द पूरी तरह खत्म हो जाता है?
कई महिलाओं में दर्द में काफी राहत मिलती है, लेकिन कुछ मामलों में दर्द पूरी तरह खत्म नहीं होता या समय के साथ वापस आ सकता है।क्या हिस्टेरेक्टॉमी के बाद महिला मां बन सकती है?
गर्भाशय हटाने के बाद महिला गर्भधारण नहीं कर सकती, इसलिए यह निर्णय बहुत सोच-समझकर लेना चाहिए।क्या एंडोमेट्रियोसिस पूरी तरह ठीक हो सकता है?
यह एक क्रॉनिक बीमारी है, जिसे पूरी तरह खत्म करना मुश्किल हो सकता है। हालांकि सही इलाज से इसके लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
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Current Version
Apr 20, 2026 11:00 IST
Modified By : Akanksha Tiwari Apr 20, 2026 11:00 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr M V Jyothsna