एंडोमेट्रियोसिस से आज के समय में दुनिया भर में लाखों महिलाएं प्रभावित है। इसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत (एंडोमेट्रियम) जैसी कोशिकाएं गर्भाशय के बाहर विकसित होने लगती हैं, जिससे तेज दर्द, सूजन और कई बार इनफर्टिलिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज या क्योर नहीं है, लेकिन सही उपचार और हेल्दी लाइफस्टाइल के जरिए इसे कुछ हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। एंडोमेट्रियोसिस से जूझ रही महिलाओं के मन में इस बीमारी को लेकर तरह-तरह के सवाल उठते हैं, जैसे कि एंडोमेट्रियोसिस क्या है और क्यों होता है? इसके अलावा सबसे अहम सवाल है कि आखिर एंडोमेट्रियोसिस के इलाज के विकल्प क्या-क्या हैं? इस बारे में सही जानकारी के लिए हमने, यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद की कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिशियन और गायनेकोलॉजिस्ट, डॉ. एम. वी. ज्योत्सना से बात की-
एंडोमेट्रियोसिस क्या है और क्यों होता है?
एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी स्थिति है, जिसमें एंडोमेट्रियल टिश्यू शरीर के अन्य हिस्सों, जैसे ओवरी, फैलोपियन ट्यूब्स और पेल्विक एरिया में विकसित होने लगते हैं। हर महीने हार्मोनल बदलाव के कारण ये टिशू भी रिएक्ट करते हैं, जिससे सूजन, दर्द और स्कार टिशू (adhesions) बन सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में लगभग 10% प्रजनन आयु की महिलाएं एंडोमेट्रियोसिस से प्रभावित हैं। यह केवल "पीरियड्स का दर्द" नहीं है, बल्कि सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसका कोई पक्का इलाज नहीं है और समय पर पहचान होना मुश्किल है। इलाज का मुख्य उद्देश्य लक्षणों को कम करना और जीवन की क्वालिटी में सुधार करना है।
एंडोमेट्रियोसिस के इलाज के विकल्प
डॉ. एम. वी. ज्योत्सना के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन सही समय पर सही उपचार से इसके लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है और जीवन की क्वालिटी को बेहतर बनाया जा सकता है।
1. दर्द से राहत के लिए दवाएं
एंडोमेट्रियोसिस के शुरुआती इलाज में दर्द को कंट्रोल करना सबसे जरूरी होता है। इसके लिए डॉक्टर नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) जैसे Ibuprofen और Naproxen की सलाह देते हैं। ये दवाएं पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द (डिसमेनोरिया) और पेल्विक पेन को कम करने में मदद करती हैं। हालांकि, यह केवल लक्षणों को कंट्रोल करती हैं, बीमारी की जड़ पर असर नहीं डालतीं। इसलिए इन्हें आमतौर पर हल्के मामलों में या अन्य उपचारों के साथ इस्तेमाल किया जाता है। साल 2017 में Cochrane Database of Systematic reviews के रिव्यू के अनुसार, NSAIDs हल्के से मध्यम दर्द में प्रभावी होते हैं, लेकिन लंबे समय तक केवल इन्हीं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता। साथ ही, यह बताने के लिए भी पर्याप्त सबूत नहीं हैं कि क्या कोई एक दवा दूसरी से बेहतर है। हालांकि इन दवाओं के साइड इफेक्ट्स (जैसे मतली या सिरदर्द) हो सकते हैं, जिसके प्रति मरीजों को सावधान रहना चाहिए।
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2. हार्मोनल थेरेपी
डॉ. एम. वी. ज्योत्सना के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस के उपचार में हार्मोनल थेरेपी को सबसे प्रभावी और मुख्य विकल्प माना जाता है। इसका उद्देश्य शरीर में एस्ट्रोजन के लेवल को कम करना होता है, ताकि एंडोमेट्रियल टिश्यू की बढ़ोतरी रुक सके। पहली तो कंबाइंड हार्मोनल कॉन्ट्रासेप्टिव्स यानी बर्थ कंट्रोल पिल्स होती हैं, जो हार्मोन को संतुलित कर दर्द और ब्लीडिंग को कम करती हैं। इसके अलावा प्रोजेस्टिन का उपयोग किया जा सकता है, जो कि एंडोमेट्रियल टिश्यू को सिकोड़ने में मदद करते हैं।
साल 2021 में Reviews in Endocrine and Metabolic Disorders में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, हार्मोनल थेरेपी एंडोमेट्रियोसिस के दर्द को प्रभावी रूप से कम करने में मदद करती है, खासकर मध्यम और गंभीर मामलों में। हार्मोनल थेरेपी का मुख्य उद्देश्य शरीर में एस्ट्रोजन के प्रभाव को कम करना और मासिक धर्म यानी पीरियड्स को रोकना है ताकि दर्द से राहत मिल सके और बीमारी को बढ़ने से रोका जा सके। डिएनोजेस्ट (Dienogest) और जीएनआरएच (GnRH) जैसी दवाएं लक्षणों को कंट्रोल करने और सर्जरी के बाद बीमारी को दोबारा लौटने से बचाने में अहम भूमिका निभाती हैं।

3. सर्जिकल इलाज
डॉ. एम. वी. ज्योत्सना कहती हैं, ''जब दवाओं से राहत नहीं मिलती या लक्षण बहुत गंभीर होते हैं, तब सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। सबसे सामान्य सर्जिकल तरीका है लैप्रोस्कोपिक सर्जरी है। यह सर्जरी खासकर उन महिलाओं के लिए फायदेमंद होती है जो भविष्य में गर्भधारण करना चाहती हैं। इससे दर्द में राहत मिलती है और फर्टिलिटी बेहतर हो सकती है। हालांकि, एंडोमेट्रियोसिस दोबारा हो सकता है, इसलिए फॉलो-अप जरूरी होता है। गंभीर मामलों में हिस्टेरेक्टॉमी (गर्भाशय हटाना) का विकल्प भी अपनाया जाता है, लेकिन इसे अंतिम उपाय माना जाता है।''
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फर्टिलिटी और एंडोमेट्रियोसिस
डॉ. एम. वी. ज्योत्सना बताती हैं कि एंडोमेट्रियोसिस महिलाओं की फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकता है। सूजन और चिपकने (adhesions) के कारण अंडाणु और शुक्राणु का मिलना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में कई महिलाओं को आईवीएफ और आईयूआई (IUI) का सहारा लेना पड़ सकता है। डॉक्टर यह सलाह देती हैं कि इलाज का तरीका महिला की उम्र, बीमारी के लेवल और उसकी जरूरतों के हिसाब से ही तय करना चाहिए।
साल 2012 की American Society for Reproductive Medicine (ASRM) की एक रिपोर्ट के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस और इनफर्टिलिटी के बीच गहरा संबंध है, लेकिन केवल दवाओं से इसका इलाज करने से कंसीव करने में मदद नहीं मिलती है। असल में, हार्मोनल दवाएं ओव्यूलेशन को रोक देती हैं, जिससे इलाज के दौरान कंसीव करना संभव नहीं होता। हल्का एंडोमेट्रियोसिस होने पर सर्जरी से मामूली सुधार हो सकता है, लेकिन गंभीर मामलों में सर्जरी या IVF (टेस्ट ट्यूब बेबी) जैसी तकनीकें ज्यादा फायदेमंद साबित होती हैं।
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डॉक्टर से कब मिलें?
कई महिलाएं एंडोमेट्रियोसिस के लक्षणों को अक्सर सामान्य पीरियड्स का दर्द समझकर नजरअंदाज कर देती हैं, लेकिन कुछ संकेत ऐसे होते हैं, जिन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए। अगर आपको हर महीने पीरियड्स के दौरान बहुत तेज दर्द होता है, जो सामान्य पेन किलर दवाओं से भी ठीक नहीं होता, तो यह चिंता का विषय हो सकता है। इसी तरह, अगर पेल्विक एरिया में लगातार दर्द बना रहता है, पीरियड्स के बीच में भी दर्द होता है या संभोग के दौरान दर्द महसूस होता है, तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें।
अगर पीरियड्स बहुत ज्यादा हेवी हो रहे हैं या लंबे समय तक चल रहे हैं, तो यह भी एंडोमेट्रियोसिस का संकेत हो सकता है। इसके अलावा, अगर आप लंबे समय से कंसीव करने की कोशिश कर रही हैं लेकिन सफलता नहीं मिल रही है, तो यह भी डॉक्टर से मिलने का एक जरूरी कारण हो सकता है। पाचन से जुड़ी समस्याएं जैसे ब्लोटिंग, कब्ज, दस्त या पेशाब के दौरान दर्द भी इस बीमारी से जुड़े हो सकते हैं, खासकर अगर ये लक्षण पीरियड्स के आसपास ज्यादा बढ़ जाते हैं। समय पर डॉक्टर से मिलना इसलिए जरूरी है क्योंकि जल्दी पहचान होने पर बीमारी को बेहतर तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है।

निष्कर्ष
एंडोमेट्रियोसिस एक गंभीर लेकिन मैनेज करने वाली बीमारी है। हालांकि इसका स्थायी इलाज अभी तक उपलब्ध नहीं है, लेकिन सही जानकारी, समय पर पहचान और उचित उपचार से इसके लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। दवाइयों, हार्मोनल थेरेपी और जरूरत पड़ने पर सर्जरी जैसे विकल्प उपलब्ध हैं, जो मरीज की स्थिति के अनुसार चुने जाते हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि हर महिला का अनुभव अलग होता है, इसलिए इलाज भी उस हिसाब से ही होना चाहिए। किसी एक व्यक्ति के लिए जो तरीका काम करता है, वह दूसरे के लिए जरूरी नहीं कि उतना ही प्रभावी हो। इसलिए खुद से दवा लेने या इंटरनेट पर मिली जानकारी के आधार पर इलाज करने से बचना चाहिए। अपने शरीर के संकेतों को समझना और उन्हें नजरअंदाज न करना सबसे जरूरी है। अगर समय पर सही कदम उठाए जाएं, तो एंडोमेट्रियोसिस के साथ भी एक हेल्दी जीवन जिया जा सकता है।
FAQ
एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण क्या हैं?
एंडोमेट्रियोसिस होने पर महिला को तेज पीरियड्स दर्द, पेल्विक पेन, संभोग के दौरान दर्द, ज्यादा या अनियमित ब्लीडिंग और कंसीव करने में समस्या होती है, ये सभी लक्षण एंडोमेट्रियोसिस के संकेत हो सकते हैं।एंडोमेट्रियोसिस क्यों होता है?
एंडोमेट्रियोसिस क्यों होता है इसका सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। हालांकि, हार्मोनल बदलाव, जेनेटिक फैक्टर और इम्यून सिस्टम से जुड़ी समस्याएं इसके संभावित कारण माने जाते हैं।क्या एंडोमेट्रियोसिस से प्रेग्नेंसी पर असर पड़ता है?
एंडोमेट्रियोसिस फर्टिलिटी को प्रभावित कर सकता है। एंडोमेट्रियोसिस के कारण अंडाणु और शुक्राणु का मिलना मुश्किल हो सकता है, जिससे कंसीव करने में दिक्कत आ सकती है।क्या एंडोमेट्रियोसिस पूरी तरह ठीक हो सकता है?
एंडोमेट्रियोसिस पूरी तरह ठीक नहीं हो सकता है, इसका कोई स्थायी इलाज अभी तक उपलब्ध नहीं है, लेकिन दवाओं, हार्मोनल थेरेपी और सर्जरी से इसके लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।क्या लाइफस्टाइल एंडोमेट्रियोसिस का कारण बनती है?
लाइफस्टाइल एंडोमेट्रियोसिस का सीधा कारण नहीं है। इसके सटीक कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन हार्मोनल, जेनेटिक और इम्यून सिस्टम से जुड़े कारक जिम्मेदार माने जाते हैं। हालांकि, हेल्दी लाइफस्टाइल लक्षणों को मैनेज करने में मदद कर सकती है।
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Current Version
Apr 21, 2026 12:01 IST
Modified By : Akanksha Tiwari Apr 21, 2026 12:01 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr M V Jyothsna