Fri Sep 11, 2026 | 06:55 PM IST

Medically Reviewed by Dr Shobha Gupta , Medical Director and IVF Consultant

एंडोमेट्रियोसिस की वजह से कैसे बढ़ सकता है माइग्रेन? डॉक्टर से जानें दोनों के बीच कनेक्शन

जिन महिलाओं को एंडोमेट्रियोसिस की समस्या होती है, उनमें माइग्रेन होने का रिस्क ज्यादा हो सकता है। इसका कारण हार्मोनल बदलाव, लगातार शरीर में सूजन बने रहना और जेनेटिकल जैसे कई कारण हो सकते हैं। इस लेख में डॉक्टर ने दोनों बीमारियों के बीच के कनेक्शन को विस्तार से समझाया है।

जिन महिलाओं को पीरियड्स के दौरान पेट में बहुत तेज दर्द, कमर दर्द या बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है, उन महिलाओं को एंडोमेट्रियोसिस चेक कराने की सलाह दी जाती है। हालांकि, बहुत कम महिलाएं जानती हैं कि एंडोमेट्रियोसिस की बीमारी सिर्फ यूटरस या पेट दर्द तक ही सीमित नहीं रहती, बल्कि इससे कई महिलाओं को माइग्रेन की समस्या भी हो सकती है। इस बारे में जानने के लिए हमने वृंदावन स्थित Mumma's Blessing IVF और Birthing Paradise की मेडिकल डायरेक्टर, गायनेकोलॉजिस्ट और IVF स्पेशलिस्ट Dr. Shobha Gupta से बात की। उन्होंने बताया कि एंडोमेट्रियोसिस और माइग्रेन के बीच बड़ा कनेक्शन है, क्योंकि दोनों ही बीमारियां हार्मोनल बदलाव, शरीर में होने वाली सूजन और नर्व सिस्टम में होने वाले बदलाव से जुड़ी हैं। इस वजह से महिलाओं को पीरियड्स के आसपास माइग्रेन के अटैक ज्यादा देखने को मिलते हैं।

एंडोमेट्रियोसिस माइग्रेन को कैसे बढ़ाता है?

Dr. Shobha Gupta कहती हैं, “एंडोमेट्रियोसिस में महिलाओं के यूटरस की अंदरूनी परत जैसी कोशिकाएं गर्भाशय के बाहर बढ़ने लगती हैं। ये कोशिकाएं ओवरी, फैलोपियन ट्यूब, आंत, मूत्राशय या पेल्विक हिस्से में भी विकसित हो सकती हैं। इस वजह से पीरियड्स के दौरान असहनीय दर्द, पेल्विक एरिया में दर्द, सेक्शुअल इंटिमेसी के दौरान दर्द और कई गंभीर मामलों में प्रेग्नेंसी में दिक्कत होने जैसी समस्याएं हो सकती है.। एंडोमेट्रियोसिस से माइग्रेन होने के कई कारण हो सकते हैं।”

एस्ट्रोजन हार्मोन में उतार-चढ़ाव

Dr. Shobha Gupta के अनुसार, “एंडोमेट्रियोसिस और माइग्रेन दोनों ही एस्ट्रोजन हार्मोन से प्रभावित होते हैं। पीरियड्स शुरू होने से पहले एस्ट्रोजन का लेवल गिरने लगता है और यही बदलाव कई महिलाओं में माइग्रेन अटैक का कारण बन सकता है। दूसरी ओर यही हार्मोन एंडोमेट्रियोसिस के घावों पर भी असर डाल सकता है।”

शरीर में लगातार सूजन बने रहना

Dr. Shobha Gupta के मुताबिक, “एंडोमेट्रियोसिस में शरीर के अंदर लगातार सूजन बनी रहती है। इस दौरान शरीर में प्रोस्टाग्लैंडिन्स और साइटोकाइन्स जैसे केमिकल्स निकलते हैं, जो पूरे शरीर में दर्द के प्रति सेंसिटिविटी बढ़ा सकते हैं और इस वजह से माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है।”

CGRP प्रोटीन का असर

NCBI में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, माइग्रेन के दौरान CGRP (Calcitonin Gene-Related Peptide) प्रोटीन की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। स्टडी में पाया गया है कि जिन महिलाओं को एंडोमेट्रियोसिस और माइग्रेन दोनों होते हैं, उनमें पीरियड्स के दौरान इस प्रोटीन का स्तर असंतुलित पाया गया है। इससे दर्द और सूजन दोनों बढ़ सकते हैं।

endometriosis can cause migraine

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दर्द के प्रति सेंसिटिविटी

Dr. Shobha Gupta ने बताया कि अगर लंबे समय तक एंडोमेट्रियोसिस का दर्द बना रहे, तो दिमाग और नसों का सिस्टम दर्द के प्रति बहुत ज्यादा सेंसेटिव हो सकता है। इसे सेंट्रल सेंसिटाइजेशन कहा जाता है। ऐसे में हल्के ट्रिगर भी माइग्रेन का कारण बन सकते हैं।

एंडोमेट्रियोसिस और माइग्रेन को लेकर रिसर्च क्या कहती है?

Journal of Clinical Medicine में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित महिलाओं में माइग्रेन की समस्या सामान्य महिलाओं के मुकाबले ज्यादा देखने को मिली है। अलग-अलग रिसर्च में पाया गया है कि करीब 21.7% से 54% महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस और माइग्रेन दोनों साथ मौजूद थे। इस स्टडी में यह भी बताया गया है कि एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित महिलाओं में माइग्रेन होने का रिस्क करीब 1.7 गुना ज्यादा था।

एंडोमेट्रियोसिस और माइग्रेन का इलाज

Dr. Shobha Gupta कहती हैं कि एंडोमेट्रियोसिस का इलाज महिला की उम्र, लक्षणों की गंभीरता और प्रेग्नेंसी के प्लान को ध्यान में रखकर किया जाता है। दर्द कम करने के लिए मरीज को पेनकिलर दवाएं, हार्मोनल थेरेपी या जरूरत पड़ने पर लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की सलाह दी जा सकती है। अगर मरीज को माइग्रेन भी है, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी जरूर दें, ताकि इलाज सही तरीके से हो सके। माइग्रेन के इलाज के लिए हार्मोनल दवाएं या पेनकिलर दवाएं दी जा सकती हैं।

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निष्कर्ष
Dr. Shobha Gupta सलाह देती हैं कि अगर किसी महिला को एंडोमेट्रियोसिस की समस्या है और वह हर महीने माइग्रेन अटैक से भी जूझ रही है, तो उसे डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए। ऐसे में गायनेकोलॉजिस्ट और न्यूरोलॉजिस्ट दोनों से सलाह लेना बेहतर रहता है। समय पर इलाज कराने से दोनों बीमारियों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।

FAQ

  • क्या इन दोनों बीमारियों के पीछे कोई जेनेटिक कारण भी है?

    एंडोमेट्रियोसिस और माइग्रेन दोनों बीमारियों में कुछ खास तरह के जीन म्यूटेशन सांझा होते हैं। ये जीन मुख्य रूप से शरीर में सेक्स हार्मोन्स के रिसेप्टर्स और दर्द को महसूस करने वाले सिग्नलों को नियंत्रित करते हैं।
  • क्या एंडोमेट्रियोसिस के इलाज के लिए ली जाने वाली दवाएं भी माइग्रेन बढ़ा सकती हैं?

    एंडोमेट्रियोसिस के दर्द को रोकने के लिए डॉक्टर अक्सर गर्भनिरोधक गोलियां या हार्मोनल थेरेपी देते हैं। इन दवाओं के कारण शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव कुछ महिलाओं में माइग्रेन के दौरों को और ज्यादा बार-बार या तीव्र बना सकते हैं, खासकर उन महिलाओं में जिन्हें माइग्रेन विद ओरा की शिकायत होती है।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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