Fri Sep 11, 2026 | 08:18 PM IST

Medically Reviewed by Dr Bharath Kumar Surisetti , Consultant Neurologist | MD, DM (Neurology), PDF Movement Disorders (NIMHANS)

PCOS और माइग्रेन में क्या संबंध है? डॉक्टर से जानें कारण, लक्षण और मैनेजमेंट के तरीके

PCOS और माइग्रेन के बीच का कनेक्शन मुख्य रूप से हार्मोनल असंतुलन के कारण होता है। PCOS वाली महिलाओं में अक्सर एस्ट्रोजन का स्तर तेजी से बदलता है, जो गंभीर सिरदर्द और माइग्रेन को ट्रिगर कर सकता है।

कई महिलाएं पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) जैसी गंभीर हार्मोनल समस्या का सामना करती हैं। PCOS के कारण कई समस्याएं हो सकती हैं, जैसे- पीरियड्स अनियमित होना, वजन बढ़ना, चेहरे या शरीर पर अनचाहे बाल और एक्ने। PCOS में सिरदर्द होना आम बातहै और कई मामलों में इसका कारण माइग्रेन हो सकता है। ऐसे में इससे पीड़ित महिलाओं के मन में अक्सर यह सवाल आता है कि PCOS में महिलाओं को माइग्रेन की समस्या क्यों होती है? PCOS और माइग्रेन का आपस में क्या कनेक्शन है? इस बारे में विस्तार से जानते हैं हैदराबाद स्थित यशोदा अस्पताल में कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी से।

PCOS और माइग्रेन के बीच क्या कनेक्शन है?

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी का कहना है कि, “PCOS और माइग्रेन के बीच संबंध पर अभी रिसर्च जारी है, लेकिन अभी तक यह साफ नहीं है कि एक बीमारी दूसरी समस्या का सीधा कारण है। दोनों ही समस्याएं हार्मोन्स में बदलाव के कारण होने वाली परेशानियां हैं और ज्यादातर महिलाओं में देखी जाती हैं, इसलिए अक्सर ये साथ में दिखाई देती हैं। माइग्रेन का कनेक्शन खासतौर पर एस्ट्रोजन हार्मोन के बदलाव के कारण होता है, खासकर जब पीरियड्स के समय एस्ट्रोजन हार्मोन अचानक कम हो जाता है। वहीं, PCOS में एंड्रोजन हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है और ओव्यूलेशन नियमित नहीं होता है। दोनों ही समस्याओं में हार्मोन असंतुलन होता है, लेकिन एंड्रोजन हार्मोन में उतार-चढ़ाव माइग्रेन को उस तरह ट्रिगर नहीं करता है, जैसे एस्ट्रोजन की कमी करती है।”

2021 में Molecular Biology Reports में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, जहां एक ओर जेनेटिक कारण माइग्रेन की समस्या में बड़ी भूमिका निभाते हैं, वहीं दूसरी ओर सेक्स हार्मोन जैसे एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन भी माइग्रेन के दर्द को शुरू करने के मुख्य कारण हो सकते हैं। इसके अलावा, कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याएं जैसे नींद में कमी, पीरियड्स का रुक जाना और नसों से जुड़ी बीमारियां, जो अक्सर PCOS से पीड़ित महिलाओं में देखी जाती हैं, माइग्रेन के दर्द को और ज्यादा बढ़ा सकती हैं या उसे शुरू करने का कारण बन सकती हैं।

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डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी बताते हैं कि "PCOS से पीड़ित महिलाओं में माइग्रेन की समस्या थोड़ी ज्यादा देखने को मिलती है। इसका कारण सीधे हार्मोनल असंतुलन नहीं होता है, बल्कि इंसुलिन रेसिस्टेंस, मोटापा और तनाव जैसे कारण हो सकते हैं, जो माइग्रेन की संभावना को बढ़ा देते हैं।"

एस्ट्रोजन हार्मोन माइग्रेन को कैसे ट्रिगर करता है?

एस्ट्रोजन हार्मोन का सीधा असर हमारे दिमाग के उन केमिकल्स पर पड़ता है, जो दर्द को कंट्रोल करते हैं। जब पीरियड्स आने से ठीक पहले शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल अचानक तेजी से गिरता है, तो इससे दिमाग की नसें ज्यादा सेंसिटिव हो जाती हैं। यह हार्मोनल विड्रॉल माइग्रेन के दर्द को शुरू कर देता है। 2016 में Seminars in Pediatric Neurology में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर में होने वाले उतार-चढ़ाव माइग्रेन के दर्द को सीधे प्रभावित करते हैं। पीरियड्स शुरू होने से ठीक पहले जब महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल अचानक गिरता है तो यह माइग्रेन का मुख्य कारण बनता है।

पीसीओएस के साथ होने वाले माइग्रेन के लक्षण क्या हैं?

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी बताते हैं कि PCOS और माइग्रेन के लक्षणों की बात करें तो माइग्रेन में सिर के एक तरफ तेज धड़कने जैसा दर्द होता है, साथ में मतली और उल्टी जैसी महसूस होना, तेज रोशनी से परेशानी होना और कभी-कभी आंखों के सामने चमक या धुंध नजर आना शामिल हैं। वहीं, दूसरी ओर, PCOS में अनियमित पीरियड्स, पिंपल्स, वजन बढ़ना और शरीर में पुरुष हार्मोन के लक्षण नजर आते हैं। 

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PCOS और माइग्रेन को एक साथ कैसे मैनेज करें?

डॉ. भरत कुमार सुरिसेट्टी के अनुसार, PCOS और माइग्रेन को मैनेज करने का तरीका हर व्यक्ति के हिसाब से अलग-अलग होता है, जिसमें डॉक्टर्स हार्मोनल संतुलन, मेटाबॉलिक हेल्थ और माइग्रेन के लिए दी जाने वाली दवा या थेरेपी पर फोकस करते हैं। इसके अलावा - 

  1. हार्मोन को संतुलित रखना- PCOS और माइग्रेन दोनों हार्मोन से जुड़ी समस्याएं हैं। इसलिए, दवाओं या थेरेपी की मदद से हार्मोन को बैलेंस करने में मदद मिल सकती है। 
  2. मेटाबॉलिक हेल्थ में सुधार करना- शरीर की मेटाबॉलिक सेहत में सुधार करना फायदेमंद हो सकता है। मेटाबॉलिक हेल्थ में सुधार करने से इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी समस्याओं को कम किया जा सकता है, जो दोनों स्थितियों को बिगाड़ सकती हैं।
  3. माइग्रेन का सही इलाज करना- माइग्रेन के सिरदर्द को ठीक करने के लिए डॉक्टर द्वारा बताई गई सही दवा और थेरेपी समय-समय पर लेने से माइग्रेन अटैक को कम करने में मदद मिल सकती है। 
  4. लाइफस्टाइल में हेल्दी बदलाव करना- अपनी जीवनशैली में हेल्दी बदलाव करना, जैसे एक्टिव रहना और शारीरिक गतिविधियों को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। 
  5. हेल्दी वजन को बनाए रखना- एक हेल्दी और स्थिर वजन बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि ज्यादा वजन PCOS के लक्षणों और माइग्रेन की गंभीरता को बढ़ा सकता है। 
  6. संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेना- अपने खाने में संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर फूड्स शामिल करना दोनों ही समस्याओं को संतुलित करने के लिए जरूरी होता है। इसके साथ ही चीनी और प्रोसेस्ड फूड्स से परहेज करना भी जरूरी है। 
  7. रोजाना एक ही समय पर और पर्याप्त नींद लेना- रोजाना एक तय समय पर सोना और जागना, रोजाना कम से कम 7 से 8 घंटे की गहरी नींद और पर्याप्त नींद लेना माइग्रेन अटैक से बचाव में मदद कर सकता है।
  8. तनाव कम करने के लिए मेडिटेशन करना- माइग्रेन और PCOS दोनों में तनाव एक बड़ा ट्रिगर हो सकता है। इसलिए, तनाव कम करने के लिए आप नियमित रूप से मेडिटेशन या योग कर सकते हैं।

ये सभी चीजें PCOS और माइग्रेन दोनों के असर को कम करने में मदद कर सकती हैं। 

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डॉक्टर से कब मिलें? 

PCOS और माइग्रेन के बीच का कनेक्शन मुख्य रूप से शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव और मेटाबॉलिक बदलाव से जुड़ा हुआ है। महिलाओं में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे सेक्स हार्मोन माइग्रेन को ट्रिगर कर सकते हैं। इसलिए, अगर आप PCOS से पीड़ित हैं और माइग्रेन की समस्या से भी जूझ रहे हैं तो इसके लक्षणों को पहचानकर सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है। अगर आपको बार-बार तेज सिरदर्द होता है और इसके साथ ही जी मिचलाना, उल्टी और तेज रोशनी से दिक्कत होती है तो यह माइग्रेन का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में अगर पीरियड्स के आसपास आपका माइग्रेन बढ़ जाता है तो यह हार्मोनल बदलावों के कारण हो सकता है। इसलिए, इस स्थिति से राहत पाने के लिए आप बिना देर किए तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें और सही इलाज समय पर लेने की कोशिश करें। 

निष्कर्ष

PCOS और माइग्रेन के बीच कनेक्शन सीधा नहीं होता है, बल्कि कॉम्प्लेक्स होता है, जिसमें हार्मोनल असंतुलन और मेटाबॉलिक हेल्थ अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि ये दोनों ही अलग-अलग बीमारियां हैं, लेकिन इंसुलिन रेजिस्टेंस, मोटापा और तनाव जैसे कारण दोनों की स्थिति को बढ़ा सकते हैं। इसलिए, इन समस्याओं को मैनेज करने के लिए समय पर डॉक्टर से सलाह लेना और लाइफस्टाइल में सुधार करना भी बहुत जरूरी है। आप अपनी डाइट में संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर फूड्स शामिल करें, पर्याप्त नींद लें और तनाव को मैनेज करें। 

Image Credit: Freepik

FAQ

  • मुझे हार्मोनल माइग्रेन क्यों होता है?

    हार्मोनल माइग्रेन मुख्य रूप से पीरियड्स, प्रेग्नेंसी या मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन के लेवल में होने वाली कमी या उतार-चढ़ाव के कारण होता है। यह अचानक गिरावट दिमाग के दर्द की सेंसिटिविटी को बढ़ा देती है।
  • किस विटामिन की कमी से माइग्रेन हो सकता है?

    माइग्रेन मुख्य रूप से विटामिन डी और विटामिन बी2 की कमी के कारण हो सकता है। इसके अलावा, विटामिन बी12, फोलेट और मैग्नीशियम की कमी भी माइग्रेन अटैक को ट्रिगर कर सकती है। 
  • पीसीओएस सिरदर्द से कैसे छुटकारा पाएं?

    PCOS में सिरदर्द की समस्या अक्सर हार्मोनल असंतुलन या इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण होती है। इसलिए, इससे राहत पाने के लिए आप संतुलित डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद और तनाव को मैनेज करने के लिए मेडिटेशन और योग करना फायदेमंद हो सकता है। 
  • माइग्रेन का परमानेंट इलाज क्या है?

    माइग्रेन का कोई परमानेंट या स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन सही इलाज और लाइफस्टाइल में बदलाव से इसे पूरी तरह कंट्रोल किया जा सकता है और माइग्रेन अटैक को लगभग खत्म किया जा सकता है। इसके इलाज के लिए आप नियमित रूप से योगाभ्यास करें, पर्याप्त नींद लें, भरपूर मात्रा में पानी पिएं और तनाव को मैनेज करें। 
  • हार्मोनल माइग्रेन कब तक रहेगा?

    हार्मोनल माइग्रेन आमतौर पर 4 से 72 घंटे तक रह सकता है, लेकिन अगर इसका इलाज सही तरह से न किया जाए तो यह समस्या कई दिनों तक बनी रह सकती है। यह अक्सर पीरियड से 2 दिन पहले से लेकर पीरियड के पहले 3 दिनों तक रहता है। 

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Disclaimer

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कात्यायनी तिवारी पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज चैनल से की और बाद में डिजिटल मीडिया में हेल्थ और लाइफस्टाइल विषयों पर काम करना शुरू किया। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं।वह महिला स्वास्थ्य, पोषण, आयुर्वेद, योग, स्किन हेल्थ और प्रेग्नेंसी जैसे विषयों पर लिखती हैं। उनका प्रयास रहता है कि ताजा रिसर्च, विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय और प्रमाणित स्रोतों के आधार पर सही स्वास्थ्य जानकारी सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचे। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है।OnlyMyHealth से पहले वह Jantantra TV और Boldsky के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Apr 24, 2026 21:45 IST

    Modified By : Katyayani Tiwari
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