माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जो दुनिया भर में लाखों महिलाओं को प्रभावित करती है। पुरुषों की तुलना में, महिलाओं में माइग्रेन ज्यादा देखा जाता है। इसका कारण हार्मोनल बदलाव हो सकता है। माइग्रेन ज्यादातर मामलों में एपिसोड (दौरों) में होता है। माइग्रेन का दर्द आमतौर पर चार से 72 घंटे तक रह सकता है और इसके साथ मतली, उल्टी जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं, रोशनी और आवाज से परेशानी हो सकती है। माइग्रेन अक्सर किशोरावस्था से शुरू होकर 45 साल की उम्र में ज्यादा देखने को मिलता है। यह समस्या बच्चों में कम और महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है। महिलाओं में माइग्रेन से जुड़े सवालों के जवाब जानने के लिए हमने Dr. M. Sheetal Kumar, Consultant Physician & Diabetologist, Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।
WHO की मानें, तो माइग्रेन का सही कारण अभी पूरी तरह पता नहीं है, लेकिन माना जाता है कि सिर की नसों और ब्लड वेसल्स के आस-पास सूजन पैदा करने वाले पदार्थ निकलते हैं, जिससे दर्द होता है। इसे अल्कोहल, नींद की कमी और कुछ खास खाने की चीजें ट्रिगर कर सकती हैं।
महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन से माइग्रेन ट्रिगर होता है
American Migraine Foundation के मुताबिक, महिलाओं को माइग्रेन के साथ कुछ खास चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। पीरियड्स, गर्भावस्था और मेनोपॉज के दौरान हार्मोन में होने वाले बदलाव माइग्रेन की तीव्रता और बार-बार होने पर असर डाल सकते हैं। हार्मोन में उतार-चढ़ाव माइग्रेन का एक सामान्य ट्रिगर है। कई महिलाओं में माइग्रेन की शुरुआत पहली माहवारी (पीरियड्स) के साथ होती है।
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माइग्रेन के लक्षण
माइग्रेन से पीड़ित महिलाओं को अक्सर सिर के एक तरफ धड़कने जैसा दर्द, जी मिचलाना, उल्टी, रोशनी और आवाज के प्रति सेंसिटिविटी और आंखों के सामने चमक जैसी आभा (auras) का अनुभव होता है जो 4 से 72 घंटों तक बना रह सकता है।
माइग्रेन का अटैक आने पर तुरंत क्या करें?
- किसी अंधेरे और शांत जगह पर लेटकर आराम करें।
- दवाओं को सही समय पर लें।
- ठंडी पट्टियां लगाएं।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
- स्क्रीन से दूरी बनाएं।
- जब माइग्रेन के लक्षण नजर आएं, तो डॉक्टर की सलाह पर दवाएं लें।
- माइग्रेन के दौरान तरल पदार्थ लें। जी मिचलाने पर इसे न लें।
- सिर की मालिश करने से भी आराम मिल सकता है।
पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में माइग्रेन का खतरा ज्यादा होता है?
पुरुषों के मुकाबले माइग्रेन के मामले महिलाओं में ज्यादा पाए जाते हैं। American Migraine Foundation के मुताबिक, पुरुषों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक माइग्रेन की समस्या महिलाओं में होती है और शोध से पता चलता है कि हार्मोन में उतार-चढ़ाव इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।
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क्या महिलाओं में माइग्रेन के पीछे जेनेटिक कारण हो सकते हैं?
माइग्रेन एक जेनेटिक बीमारी हो सकती है। अगर परिवार में किसी को माइग्रेन है, तो यह हो सकता है कि महिला में माइग्रेन के लक्षण नजर आएं। National Institute of Neurological Disorders and Stroke के मुताबिक, यह देखा गया है कि पुरुषों के मुकाबले, महिलाओं में यह समस्या ज्यादा होती है। मासिक धर्म या प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलाव मुख्य कारण माने जाते हैं। सिरदर्द की शुरुआत किसी महिला में पीरियड्स या प्रेग्नेंसी के दौरान हो सकती है।
महिलाओं में माइग्रेन के कारण

Dr. M. Sheetal Kumar ने बताया कि माइग्रेन की शुरुआत दिमाग में होने वाले केमिकल बदलावों, नसों के एक्टिव होने और ब्लड वेसल्स के फैलने से होती है। महिलाओं में जेनेटिक, हार्मोन और पर्यावरणीय कारक इसे और भी खराब कर देते हैं। माइग्रेन की समस्या महिलाओं में ज्यादा देखी जाती है और इसका संबंध हार्मोनल बदलाव जैसे पीरियड्स, गर्भावस्था और मेनोपॉज के साथ देखा गया है। Mayo Clinic के मुताबिक, एस्ट्रोजन हार्मोन के लेवल में उतार-चढ़ाव कई महिलाओं में सिरदर्द को ट्रिगर कर सकता है। यह बदलाव पीरियड्स से पहले या उस दौरान, प्रेग्नेंसी में या मेनोपॉज के समय हो सकता है।
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क्या डाइट माइग्रेन को कंट्रोल कर सकती है?
Dr. M. Sheetal Kumar ने बताया कि डाइट की मदद से माइग्रेन को कंट्रोल कर सकते हैं। माइग्रेन के लक्षणों को कंट्रोल करने के लिए डाइट में मैग्नीशियम से भरपूर भोजन को शामिल करें और नियमित समय पर भोजन करें। कैफीन, अल्कोहल और चीज (cheese) जैसी चीजों से बचें।
माइग्रेन की जांच
माइग्रेन के लिए इतिहास और लक्षणों के पैटर्न को देखने के बाद डॉक्टर इलाज करते हैं। MRI या सीटी स्कैन जैसी इमेजिंग जांच की जा सकती है।
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माइग्रेन का इलाज
- माइग्रेन का इलाज लक्षण और अटैक की तीव्रता के आधार पर किया जाता है। तुरंत राहत के लिए डॉक्टर पेनकिलर्स दे सकते हैं।
- पीरियड्स से जुड़े माइग्रेन में हार्मोन्स को कंट्रोल करने के लिए दवाएं दी जा सकती हैं।
- कुछ मामलों में गर्भनिरोधक दवाएं दी जाती हैं ताकि हार्मोनल असंतुलन को कंट्रोल किया जा सके, हालांकि यह सीधे तौर पर माइग्रेन का इलाज नहीं है इसलिए केवल कुछ मामलों में डॉक्टर की सलाह से इसका इस्तेमाल किया जाता है।
- Dr. M. Sheetal Kumar ने बताया कि, “तत्काल राहत के लिए ट्रिप्टान या NSAID का इस्तेमाल किया जाता है। बार-बार होने वाले दौरों की रोकथाम के विकल्पों में बीटा-ब्लॉकर्स, CGRP इनहिबिटर और बोटोक्स शामिल हैं।’’
मेंस्ट्रुअल माइग्रेन क्या है?
मेंस्ट्रुअल माइग्रेन में माइग्रेन के लक्षण पीरियड्स शुरू होने से दो दिन पहले से लेकर तीन दिन बाद तक दिखाई देते हैं। यह समस्या एस्ट्रोजन लेवल के गिरने के कारण होती है।
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क्या हार्मोनल असंतुलन माइग्रेन को ट्रिगर कर सकता है?
हां, पीरियड्स, गर्भनिरोधक दवाएं या मेनोपॉज के कारण एस्ट्रोजन के लेवल में गिरावट अक्सर महिलाओं में माइग्रेन के दौरे पड़ने का कारण बनती है।
क्या प्रेग्नेंसी माइग्रेन पर असर डालती है?
कई महिलाओं की स्थिति दूसरी या तीसरी तिमाही में हार्मोन के स्थिर होने के कारण बेहतर हो जाती है, लेकिन कुछ लोगों की स्थिति शुरुआत में या बच्चे के जन्म के बाद बिगड़ सकती है।
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माइग्रेन से बचने के लिए क्या करें?
- माइग्रेन से बचने के लिए डॉक्टर से पता करें कि किन चीजों से आपको माइग्रेन अटैक हो सकता है यानी ट्रिगर्स पर नजर रखें।
- स्ट्रेस घटाएं क्योंकि माइग्रेन अटैक स्ट्रेस के दौरान बढ़ सकता है।
- अगर माइग्रेन की दवा ले रही हैं, तो डॉक्टर की सलाह पर डोज तय करें।
- खाना न छोड़ें, समय पर भोजन करें।
- हाइड्रेशन के लिए पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों और पानी का सेवन करें।
- स्ट्रेस कंट्रोल करने के लिए योग, गहरी सांस लेने के व्यायाम या हल्की कसरत करें।
- अल्कोहल और कैफीन का सेवन न करें।
- नियमित रूप से व्यायाम करें, क्योंकि इससे स्ट्रेस कम होता है और हार्मोन का संतुलन बना रहता है।
- सोने का सही रूटीन बनाए रखें।
डॉक्टर से संपर्क कब करें?
महिलाओं को माइग्रेन की स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए जब-
- अचानक से दर्द शुरू हो जाए
- बहुत तेज या लगातार सिरदर्द हो
- न्यूरोलॉजिकल बदलाव दिखें
- बार-बार दौरे पड़ें
- अगर ओवर-द-काउंटर मेडिसिन असर न करें
ऐसे मामलों में, डॉक्टर की सलाह पर इलाज कराएं जिससे माइग्रेन को बढ़ाने वाले कारणों की पहचान और उसका इलाज सही ढंग से हो पाए।
निष्कर्ष:
Dr. M. Sheetal Kumar से हुई बातचीत और रिसर्च से पता चलता है कि महिलाओं में माइग्रेन हार्मोन, जीन्स और जीवनशैली से जुड़े कारकों से प्रभावित हो सकता है। माइग्रेन के कारणों में हार्मोन्स में बदलाव, स्ट्रेस वगैरह शामिल हो सकते हैं। महिलाएं स्वस्थ रहने के लिए हेल्दी डाइट लेंगी, तनाव से निपटने के उपाय अपनाएंगी और जरूरी सावधानियां बरतेंगी, तो वे इससे बच सकती हैं।
FAQ
किन चीजों से माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है?
स्ट्रेस, पर्याप्त भोजन न करना, हार्मोनल बदलाव, वाइन का सेवन, तेज गंध और नींद में बदलाव से माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है।महिलाओं में माइग्रेन ज्यादा आम क्यों है?
पीरियड्स, प्रेग्नेंसी और मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का उतार-चढ़ाव महिलाओं को ज्यादा सेंसिटिव बना देते हैं। इसमें हार्मोन की अहम भूमिका होती है।क्या माइग्रेन का पूरी तरह से इलाज संभव है?
माइग्रेन का पूरी तरह से इलाज संभव नहीं है। जीवनशैली में बदलाव, बचाव के उपाय और माइग्रेन के इलाज में इस्तेमाल होने वाली CGRP दवाओं की मदद से इस बीमारी को कंट्रोल कर सकते हैं।माइग्रेन का दौरा कितने समय तक रहता है?
आमतौर पर बिना इलाज के यह 4 से 72 घंटे तक रह सकता है। दवाओं के इस्तेमाल से इसकी अवधि कम हो सकती है।क्या माइग्रेन खतरनाक है?
हां माइग्रेन सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। गंभीर मामलों में इसके लक्षण स्ट्रोक जैसे होते हैं जिसे स्टेटस माइग्रेनोसस (Status Migrainosus) कहते हैं और इसमें तुरंत इलाज की जरूरत होती है।
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Current Version
Apr 23, 2026 20:04 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Apr 23, 2026 20:04 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr M Sheetal Kumar