PMOS एक हार्मोनल और मेटाबॉलिक समस्या है। इस दौरान पीरियड्स का बार-बार अनियमित होना या लंबे समय तक न आना स्ट्रेस का कारण बन सकता है। वहीं, वजन या प्रजनन क्षमता को लेकर चिंता मानसिक दबाव बढ़ा सकती है। कुछ महिलाओं को लंबे समय तक यह चिंता रहती है कि PMOS भविष्य में गर्भधारण को प्रभावित कर सकता है। इस वजह से PMOS को मेंटल हेल्थ के साथ जोड़ा जाता है। National Health Service, UK के मुताबिक, PMOS महिलाओं में डिप्रेशन का कारण बन सकता है। PMOS के लक्षण आमतौर पर लड़कियों और 18 साल से कम उम्र की युवा महिलाओं में नजर आने लगते हैं और मेनोपॉज तक बने रह सकते हैं। यह समस्या ऐसी किसी भी महिला को हो सकती है जिनके पास ओवरीज हैं। आइए जानते हैं PMOS मानसिक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है और इससे कैसे बचें? बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Smriti Agrawal, Professor & Gynaecologist At Department Of Obstetrics & Gynaecology, King George's Medical University, Lucknow से बात की।
PMOS में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं क्यों होती हैं?
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PMOS में इंसुलिन रेजिस्टेंस और मेटाबॉलिक बदलाव देखे जा सकते हैं जिनके कारण शरीर में लगातार थकान, वजन से जुड़ी परेशानियां और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर सकती है और मानसिक सेहत प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से PMOS को केवल पीरियड्स या ओवरी की समस्या समझना काफी नहीं है। अगर किसी महिला को लगातार उदासी, चिंता, चिड़चिड़ापन, नींद में बदलाव जैसी समस्या हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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मानसिक स्वास्थ्य के लिए PMOS के नुकसान
- लगातार हार्मोनल और शारीरिक लक्षणों के कारण PMOS में उदासी, निराशा और रुचि कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- अनियमित पीरियड्स, वेट गेन, हेयर लॉस जैसे लक्षण और बीमारी को लेकर चिंता से इमोशनल स्ट्रेस बढ़ सकता है।
- स्ट्रेस और एंग्जायटी से अनिद्रा की समस्या हो सकती है जिसका असर एकाग्रता और लाइफस्टाइल पर पड़ सकता है।
- भविष्य में गर्भधारण की चिंता मानसिक दबाव का कारण बन सकती है।
- PMOS में चेहरे के बाल, मुंहासे, वजन बढ़ना या सिर के बाल पतले होना आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकता है।
PMOS है डिप्रेशन, एंग्जाइटी और ईटिंग डिसऑर्डर की वजह
ज्यादातर महिलाएं PMOS के बारे में इतना ही जानती हैं कि यह समस्या होने पर पीरियड्स बहुत कम आ सकते हैं या कई दिनों तक चल सकते हैं। जबकि PMOS के नुकसान केवल शारीरिक नहीं मानसिक भी होते हैं। Mayo Clinic के मुताबिक, PMOS में डिप्रेशन, एंग्जाइटी और ईटिंग डिसऑर्डर जैसी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती हैं। पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS) को पहले पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) कहा जाता था।
PMOS पीड़ित महिलाओं में एंग्जायटी और डिप्रेशन की दर अधिक
साल 2023 में Cureus में प्रकाशित एक स्टडी रिव्यू के मुताबिक, PMOS में हार्मोनल बदलाव, खासकर इंसुलिन रेजिस्टेंस और हाइपरएंड्रोजेनिज्म को खराब मानसिक स्वास्थ्य का कारण बताया। PMOS से पीड़ित महिलाओं में एंग्जायटी और डिप्रेशन का जोखिम बढ़ा हुआ पाया गया है। रिव्यू में एंग्जायटी लगभग 28 से 39% और डिप्रेशन करीब 11 से 25% के बीच पाया गया।
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PMOS में मेंटल हेल्थ ठीक रखने के लिए क्या करें?
- PMOS में मानसिक स्वास्थ्य सुधारने के लिए सिर्फ तनाव कम करने की कोशिश करना काफी नहीं है। शारीरिक लक्षणों के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का इलाज जरूरी है।
- पीरियड्स की अनियमितता, वजन और मेटाबॉलिक हेल्थ को संभालने से मानसिक तनाव भी कम हो सकता है। अगर डिप्रेशन या एंग्जाइटी के लक्षण हैं, तो डॉक्टर से बात करें।
- वॉक करना, साइकलिंग, योग, डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज, स्ट्रेस और मूड को बेहतर करने में मदद कर सकती है।
- नींद को प्राथमिकता दें। रोज लगभग एक ही समय पर सोने-जागने की कोशिश करें और देर रात तक स्क्रीन देखने से बचें।
- संतुलित डाइट लें। बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड फूड और मीठी चीजों का सेवन कम करें और पर्याप्त प्रोटीन, फाइबर, सब्जियां, फल और साबुत अनाज शामिल करें।
- अगर स्ट्रेस या एंग्जाइटी ज्यादा है, तो काउंसलिंग या सीबीटी थेरेपी की मदद भी डॉक्टर की सलाह से ले सकते हैं।
डॉक्टर से संपर्क कब करें?
अगर उदासी, चिंता, चिड़चिड़ापन, नींद की समस्या हो और लाइफस्टाइल प्रभावित हो रही हो, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
निष्कर्ष:
PMOS से शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक सेहत भी प्रभावित होती है। PMOS के लक्षणों से स्ट्रेस, एंग्जाइटी, डिप्रेशन, ईटिंग डिसऑर्डर, इमोशनल स्ट्रेस बढ़ सकता है। भविष्य में गर्भधारण की चिंता मानसिक दबाव बढ़ा सकती है। आत्मविश्वास कम हो सकता है। इससे बचने के लिए एक्सरसाइज, हेल्दी डाइट, सीबीटी थेरेपी जैसे उपायों की मदद ले सकते हैं।
FAQ
सीबीटी थेरेपी क्या है?
सीबीटी (CBT) थेरेपी एक तरह की मनोचिकित्सा है, जिसमें व्यक्ति के विचार और व्यवहार आपस में कैसे जुड़े हैं, इस पर काम किया जाता है। इससे स्ट्रेस कंट्रोल करने में मदद मिलती है।पैनिक अटैक क्या होता है?
पैनिक अटैक अचानक आने वाली बहुत तेज घबराहट या डर की स्थिति है, जो कई बार बिना किसी साफ कारण के भी शुरू हो सकती है।
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Aug 24, 2026 20:03 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Prof Dr Smriti Agrawal
