Fri Sep 11, 2026 | 09:03 PM IST

Medically Reviewed by Prof Dr Smriti Agrawal , Professor & Gynaecologist - Department of Obstetrics & Gynaecology

पीसीओएस और हार्मोनल असंतुलन का क्‍या संबंध है? जानें र‍िसर्च और डॉक्‍टर की राय

पीसीओएस में शरीर के हार्मोन्‍स का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे उनका सही तरीके से काम करना प्रभावित होता है और हार्मोनल असंतुलन की समस्या हो सकती है। यह आगे चलकर टाइप 2 डायब‍िटीज और थायराइड में भी बदल सकती है। आगे जानते हैं पीसीओएस और हार्मोन असंतुलन का संबंध। 

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PCOS(Polycystic Ovary Syndrome) एक तरह की हार्मोनल समस्‍या है जो हार्मोन्‍स के असंतुलन के कारण हो सकती है। PCOS में शरीर के कई हार्मोन्‍स जैसे एंड्रोजन या एस्‍ट्रोजन का संतुल‍न ब‍िगड़ सकता है। इस असंतुलन के कारण ओवरीज ठीक से काम नहीं कर पाती हैं और ओव्‍यूलेशन प्रभाव‍ित हो सकता है। PCOS में एंड्रोजन जैसे हार्मोन का स्‍तर ब‍िगड़ने से मुंहासे, चेहरे या शरीर पर अनचाहे बाल जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं। हार्मोन्‍स के असंतुलन के कारण कुछ मह‍िलाओं में मूड स्‍व‍िंग्‍स, स्‍ट्रेस या ड‍िप्रेशन के लक्षण भी नजर आ सकते हैं। PCOS और हार्मोनल असंतुलन के बीच के संंबंध के बारे में बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने डॉ. स्मृति अग्रवाल, प्रोफेसर एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ, प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग, केजीएमयू, यूपी लखनऊ (Dr. Smriti Agrawal, Professor & Gynaecologist At Department Of Obstetrics & Gynaecology, King George's Medical University, UP, Lucknow) से बात की।

PCOS कैसे आपके हार्मोन्स पर असर डालता है?

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Gynaecologist Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि PCOS में हार्मोनल असंतुलन का असर पीर‍ियड्स पर दि‍खता है। इस PCOS के कारण अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स या स्‍पॉट‍िंग जैसी समस्‍या हो सकती है। यह स्‍थ‍ित‍ि भव‍िष्‍य में गर्भधारण को मुश्‍क‍िल बना सकती है क्‍योंक‍ि हार्माेन्‍स में गड़बड़ी के कारण न‍ियम‍ित ओव्‍यूलेशन में द‍िक्‍कत होती है।
2024 में Journal of Endocrinology में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, PCOS के कारण महिलाओं को मेटाबॉल‍िक समस्‍याएं, ओव्‍यूलेशन का रुकना, ओवरी में सिस्ट आदि हो सकते हैं। इस रोग के कारण कई प्रकार के हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं। स्‍टडी के अनुसार, PCOS का असर ग्रोथ हार्मोन, इंसुल‍िन, घ्रेल‍िन (Ghrelin), एंड्रोजन और एस्‍ट्रोजन जैसे हार्मोन्‍स पर पड़ सकता है। PCOS में GnRH or Gonadotropin Releasing Hormone (इसका मुख्य काम पिट्यूटरी ग्रंथि को संकेत देना होता है ताकि वह LH और FSH हार्मोन को रिलीज करे), LH या FSH जैसे हार्मोन्‍स का असंतुलन हो सकता है, ज‍िससे ओव्‍यूलेशन और मेटाबॉल‍िज्‍म दोनों प्रभावि‍त हो सकते हैं। ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) और फॉलिकल-स्टिम्युलेटिंग हार्मोन (FSH) दोनों हार्मोन पीरियड्स और प्रेग्नेंसी से जुड़े हैं। FSH हार्मोन ओवरीज में एग को तैयार करते हैं और LH हार्मोन उसे बाहर न‍िकालने में मदद करता है।

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PCOS के कारण हार्मोन्स से जुड़ी कौन सी समस्‍याएं हो सकती हैं?

  • हार्मोन्‍स का संतुलन ब‍िगड़ने के कारण इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस हो सकता है, जो आगे चलकर डायबि‍टीज और मोटापे का कारण बन सकता है।
  • पीसीओएस में बढ़ा हुए इंसुल‍िन के कारण ओवरी अध‍िक टेस्‍टोस्‍टोरोन बनाने लगती हैं ज‍िससे चेहरे पर अनचाहे बाल, मुंहासे, शरीर पर अनचाहे बाल और हेयरफॉल जैसी समस्‍याएं हो सकती हैं।
  • PCOS के कारण एंड्रोजन का स्‍तर बढ़ सकता है और LH और FSH हार्मोन का अनुपात बढ़ सकता है, ज‍िससे मह‍िलाओं में इनफर्टि‍ल‍िटी (Infertility) और अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स जैसी समस्‍याएं हो सकती है।
  • PCOS के कारण LH और FSH हार्मोन में गड़बड़ी होने से अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स की समस्‍या होती है।
  • PCOS के कई मामलों में फर्टिलिटी पर असर पड़ता है।
  • PCOS में हार्मोनल असंतुलन के कारण थायराइड संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।
  • लंबे समय तक PCOS में असंतुलन रहने पर डायबिटीज, मोटापा और हृदय रोग का खतरा भी बढ़ सकता है।

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PCOS में पहले कौन सा हार्मोन असंतुलि‍त होता है?

कोई एक तय हार्मोन नहीं है जो PCOS में सबसे पहले असंतुल‍ित होता है। ज्‍यादातर मामलों में PCOS की शुरुआत इंसुल‍िन लेवल के ब‍िगड़ने से मानी जाती है। जब इंसुल‍िन का स्‍तर बढ़ता है तो एक हार्मोनल चेन र‍िएक्‍शन शुरू हो जाता है- टेस्‍टोस्‍टोरोन का बढ़ना, ओव्‍यूलेशन का रुकना, फ‍िर LH और FSH का संतुलन ब‍िगड़ना। कुछ मह‍िलाओं में PCOS की शुरुआत अलग भी हो सकती है। सबसे कॉमन पैटर्न की बात करें, तो वो है- इंसुल‍िन का ब‍िगड़ना, टेस्‍टोस्‍टोरोन का बढ़ना और बाकी हार्मोन्‍स का अंसतुल‍िन।

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PCOS के प्रकार और उनका हार्मोनल पैटर्न

PCOS-Chain-reaction

PCOS के कई प्रकार होते हैं और हर PCOS टाइप में हार्मोनल पैटर्न अलग-अलग होता है-

1. इंसुलिन-प्रतिरोधी PCOS

इंसुल‍िन रेजि‍स्‍टेंस के कारण इंसुल‍िन बढ़ जाता है और ओवरी ज्‍यादा टेस्‍टोस्‍टोरोन बनाने लगती है और इस स्‍थ‍ित‍ि को इंसुल‍िन-प्रत‍िरोधी PCOS कहा जाता है।

हार्मोनल पैटर्न:

इंसुल‍िन रेजिस्टेंस, इंसुल‍िन और टेस्‍टोस्‍टेरोन बढ़ता है, ओव्‍यूलेशन घटता है ज‍िससे LH हार्मोन बढता है, FSH हार्मोन घटता है, पीर‍ियड्स अन‍ियम‍ित होते हैं ज‍िससे पीसीओएस होता है।

2. इंफ्लेमेटरी PCOS

शरीर में सूजन बढ़ने के कारण हार्मोन्‍स ब‍िगड़ते हैं ज‍िसके कारण इंफ्लेमेटरी PCOS हो सकता है।

हार्मोनल पैटर्न:

सूजन बढ़ती है ज‍िससे टेस्‍टोस्‍टोरोन बढ़ता है, ओव्‍यूलेशन घटता है, ज‍िससे पीर‍ियड्स अन‍ियम‍ित होते हैं और पीसीओएस हो सकता है।

3. एड्रिनल PCOS

एड्र‍िनल ग्‍लैंड जब ज्‍यादा एंड्रोजन बनाती है, तो एड्र‍िनल PCOS हो सकता है। ज्‍यादातर मामलों में यह समस्‍या स्‍ट्रेस के कारण होती है।

हार्मोनल पैटर्न:

स्ट्रेस बढ़ता है, DHEA-S बढ़ता है ज‍िससे एंड्रोजन का स्‍तर भी बढ़ता है, ओव्‍यूलेशन घटता है और पीसीओएस हो सकता है। DHEA-S एंड्रोजन हार्मोन (जैसे टेस्टोस्टेरोन) बनाने में मदद करता है। वहीं एंड्रोजन एक ग्रुप है ज‍िसमें टेस्‍टोस्‍टोरोन जैसे हार्मोन शाम‍िल होते हैं। ये शरीर में बालों की ग्रोथ, मसल्‍स और कुछ शारीर‍िक बदलावों को कंट्रोल करते हैं।

4. पोस्ट-पिल PCOS

बर्थ कंट्रोल पिल बंद करने के बाद अस्थायी हार्मोनल गड़बड़ी के कारण PCOS हो सकता है।

हार्मोनल पैटर्न:

बर्थ कंट्रोल प‍िल बंद करने से LH और टेस्‍टोस्‍टोरोन हार्मोन बढ़ते हैं और पीसीओएस होता है।

5. लीन PCOS

वजन सामान्य होने के बाद भी अंदरूनी हार्मोनल असंतुलन के कारण लीन PCOSकी समस्‍या हो सकती है।

हार्मोनल पैटर्न:

टेस्‍टोस्‍टोरोन बढ़ता है, ओव्‍यूलेशन घटता है ज‍िससे पीर‍ियड्स अन‍ियम‍ित होते हैं और पीसीओएस होता है। हर PCOS प्रकार में हार्मोन्‍स अलग-अलग भूम‍िका न‍िभाते हैं। सही इलाज के ल‍िए यह समझना जरूरी है क‍ि क‍िस प्रकार का हार्मोनल पैटर्न शरीर में चल रहा है।

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PCOS और सामान्‍य हार्मोनल असंतुलन में अंतर

PCOS लंबे समय तक रहने वाली क्रॉन‍िक समस्‍या कहलाती है। यह हार्मोनल और मेटाबॉल‍िक समस्‍या है। वहीं दूसरी ओर हार्मोनल असंतुलन अस्‍थायी समस्‍या है और अक्‍सर यह स्‍ट्रेस, अन‍िद्रा, थायराइड गड़बड़ी और वजन में अचानक बदलाव के कारण होती है। PCOS की स्‍थ‍िति‍ में कई हार्मोन्‍स का स्‍तर एक साथ ब‍िगड़ता है जैसे LH हार्मोन बढ़ जाता है, टेस्टोस्टेरोन का स्‍तर भी बढ़ सकता है और अन्‍य हार्मोन्‍स जैसे थायराइड और इंसुल‍िन भी अंसतुलि‍त हो सकते हैं। हार्मोनल असंतुलन आमतौर पर इलाज या लाइफस्‍टाइल से ठीक क‍िया जा सकता है, वहीं दूसरी ओर PCOS का स्‍थायी इलाज मुश्‍‍क‍िल है, इसके लक्षणों को कंट्रोल क‍िया जा सकता है।

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उम्र के मुताब‍िक PCOS में कौन से हार्मोनल बदलाव आते हैं?

उम्र के मुताब‍िक, PCOS में हार्मोनल बदलाव अलग-अलग चरणों में द‍िखाई दे सकते हैं-

  • किशोरावस्था में अक्‍सर टेस्‍टोस्‍टोरोन और LH हार्मोन बढ़ा हुआ रहता है, ज‍िससे मुंहासे, ऑयली त्‍वचा और अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स की समस्‍या शुरू हो जाती है।
  • 20 से 30 साल की उम्र में ज्‍यादातर PCOS के मरीजों को इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस की समस्‍या होती है ज‍िससे वजन बढ़ता है, इंफर्टि‍ल‍िटी हो सकती है।
  • 30 से 40 की उम्र में इंसुल‍िन रेजि‍स्‍टेंस और डायब‍िटीज जैसी मेटाबॉल‍िक समस्‍याएं भी बढ़ने लगती हैं। इस उम्र में एंड्रोजन का स्‍तर धीरे-धीरे कम होने लगता है।
  • 40 के बाद मेनोपॉज नजदीक आता है, तो ओव्‍यूलेशन पहले से ही कम होता है और इस दौरान मेटाबॉल‍िक जोख‍िम जैसे टाइप 2 डायब‍िटीज और हार्ट ड‍िजीज का खतरा ज्‍यादा होता है।

PCOS जब कम उम्र में होता है, तो हार्मोनल समस्‍याएं ज्‍यादा द‍िखती है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, उम्र के साथ मेटाबॉल‍िक समस्‍याएं जैसे डायब‍िटीज या थायराइड ज्‍यादा हावी हो जाती हैं।

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PCOS की जांच में कौन से हार्मोन्‍स असंतुलित होते हैं और इनकी Normal Range क्या है?

  • PCOS की जांच में कई हार्मोन असंतुल‍ित पाए जाते हैं इनमें सबसे कॉमन है ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) और फॉलिकल-स्टिम्युलेटिंग हार्मोन (FSH)।
  • PCOS में LH हार्मोन का स्‍तर बढ़ जाता है और FSH कम हो सकता है। PCOS में इन दोनों हार्मोन का अनुपात देखा जाता है। यह अनुपात बढ़कर 2:1 या 3:1 तक हो सकता है। इसका सामान्‍य अनुपात 1:1 होता है।
  • PCOS में टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) का स्‍तर बढ़ जाता है। म‍ह‍िलाओं में टेस्‍टोस्‍टेरोन की सामान्‍य रेंज आमतौर पर 15 से 70 ng/dL मानी जाती है।
  • PCOS में इंसुल‍िन कर स्‍तर भी बढ़ सकता है। फास्‍ट‍िंग इंसुल‍िन की नार्मल रेंट 2 से 25 के बीच मानी जाती है।
  • इन हार्मोन्‍स के अलावा डॉक्‍टर प्रोलैक्टिन (Prolactin) और थायराइड हार्मोन की भी जांच करते हैं। प्रोलैक्‍ट‍िन की सामान्‍य रेंज 2 से 25 मानी जाती है और थायराइड हार्मोन की सामान्‍य रेंज 0.4 से 4.0 के बीच मानी जाती है।
  • इन हार्मोन्‍स के असंतुलन से ओव्‍यूलेशन प्रभाव‍ित होता है और यह ही PCOS का कारण बन सकता है।

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टेस्‍ट र‍िपोर्ट में मरीज क्‍या देखें?

  • LH/FSH का अनुपात क‍ितना है? अगर इसका स्‍तर ज्‍यादा है, तो PCOSहो सकता है।
  • टेस्‍टोस्‍टोरोन ज्‍यादा है या नहीं? अगर इसका स्‍तर ज्‍यादा है, तो यह भी PCOS का संकेत हो सकता है।
  • इंसुल‍िन हाई है या नहीं? हाई इंसुल‍िन लेवल इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस की समस्‍या का संकेत हो सकता है और इसका संबंध PCOS से हो सकता है।
  • प्रोलैक्टिन और थायराइड हार्मोन का ज्‍यादा होना भी PCOS का संकेत हो सकता है।
  • केवल र‍िपोर्ट द‍ेखकर PCOS की पुष्‍ट‍ि नहीं होती। PCOSहै या नहीं, यह जानने के ल‍िए डॉक्‍टर की राय लेना जरूरी है।

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PCOS और थायराइड का संबंध

PCOS और थायराइड के बीच गहरा संबंध है। PCOS में शरीर में एंड्रोजन का स्‍तर बढ़ जाता है ज‍िससे ओव्‍यूलेशन प्रभाव‍ित होता है। वहीं थायराइड में खासकर हाइपोथायराइड‍िज्‍म की स्‍थ‍िति‍ में मेटाबॉल‍िज्‍म स्‍लो हो जाता है। इसका असर मास‍िक धर्म, ऊर्जा स्‍तर और वजन पर पड़ता है। यही वजह है क‍ि दोनों के लक्षण कई बार एक जैसे लगते हैं। PCOS और थायराइड दोनों ही एंडोक्राइन स‍िस्‍टम को प्रभाव‍ित करती हैं। थायराइड हार्मोन का असंतुलन इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस को बढ़ा सकता है जो PCOS का मुख्‍य कारण है।

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PCOS में हार्मोन्‍स को संतुल‍ित कैसे करें?

2023 में BMC Endocrine Disorders में प्रकाशित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, PCOSएक कॉम्‍प्‍लेक्‍स समस्‍या है जो प्रजनन स्‍वास्‍थ्‍य, मेटाबॉल‍िक और मानस‍िक स्‍वास्‍थ्‍य तीनों को प्रभाव‍ित कर सकता है। PCOSमें हार्मोन्‍स के संतुलन के ल‍िए लाइफस्‍टाइल मैनेजमेंट की मदद लेना फायदेमंद हो सकता है। स्‍टडी में बताया गया है क‍ि हेल्‍दी डाइट और एक्‍सरसाइज के साथ नींद, मानस‍िक स्‍वास्‍थ्‍य का ख्‍याल रखना भी फायदेमंद पाया गया है। Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि-

  • PCOS में हार्मोन्‍स का संतुल‍िन ठीक करने के ल‍िए इंसुल‍िन रेजि‍स्‍टेंस को कंट्रोल करना जरूरी है। इसके ल‍िए लो जीआई फूड्स जैसे ओट्स या साबुत अनाज का सेवन फायदेमंद हो सकता है। चीनी, मैदा और जंक फूड का सेवन कम करें और प्रोटीन और फाइबर का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है।
  • इसके साथ ही हफ्ते में कम से कम 150 म‍िनट एक्‍सरसाइज करना फायदेमंद हो सकता है। वॉक, योग और स्‍ट्रेंथ ट्रेन‍िंग को रूटीन में शाम‍िल करें।
  • एक्‍सरसाइज के जर‍िए वेट लॉस में मदद म‍िलेगी, वजन कम करने से अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स से बचने में मदद म‍िल सकती है।
  • सात से आठ घंटे की नींद लें। मेड‍िटेशन और प्राणायाम करें ज‍िससे स्‍ट्रेस हार्मोन कोर्ट‍िसोल बैलेंस हो सके जो PCOS के लक्षणों को ब‍िगाड़ सकता है।

क्या हार्मोन असंतुलन से मूड स्विंग्स होते हैं?

Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि PCOS में एस्‍ट्रोजन, प्रोजेस्‍टेरोन, थायराइड हार्मोन, कोर्ट‍िसोल हार्मोन के ब‍िगड़ने से व्‍यवहार पर असर पड़ सकता है। च‍ि‍ड़च‍िड़ापन, च‍िंता, एंग्‍जाइटी या मूड स्‍व‍िंग्‍स जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं। 2022 में Medical Neuropsychiatric Disease and Treatment में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताबि‍क, PCOSवाली मह‍िलाओं में एंग्‍जाइटी, ड‍िप्रेशन और मूड स्‍व‍िंग्‍स की समस्‍या हो सकती है।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • पीर‍ियड्स बार-बार अन‍ियम‍ित हो रहे हों, तो तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें।
  • पीर‍ियड्स के बीच में स्‍पॉट‍िंग हो, तो भी डॉक्‍टर से सलाह लें।
  • चेहरे पर अनचाहे बाल, वजन बढ़ने जैसे लक्षण लक्षण द‍िखने पर भी डॉक्‍टर से मदद लेना चाह‍िए।
  • मूड स्‍व‍िंग्‍स, अध‍िक थकान, हेयर फॉल भी हार्मोनल असंतुलन की ओर संकेत करते हैं।
  • अगर ये लक्षण लगातार बने रहें, तो डॉक्‍टर के पास जाने में देर न करें। समय पर इलाज म‍िलने से PCOS के लक्षणों को कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है।

न‍िष्‍कर्ष:

Gynaecologist Dr. Smriti Agrawal से हुई बातचीत के आधार पर पता चलता है क‍ि PCOS के साथ हार्मोनल असंतुलन का संबंध है। PCOS में एंड्रोजन हार्मोन का स्‍तर बढ़ सकता है। इसके अलावा LH और FSH हार्मोन का संतुल‍न भी ब‍िगड़ सकता है। Journal of Endocrinology और अन्‍य स्‍टडीज से पता चलता है क‍ि PCOS में हार्मोनल असंतुलन के कारण ओव्‍यूलेशन और मेटाबॉल‍िज्‍म प्रभाव‍ित हो सकते हैं। इसे कंट्रोल करने के ल‍िए हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल की मदद लेना फायदेमंद हो सकता है।

FAQ

  • PCOS में एंड्रोजन का लेवल बढ़ सकता है?

    हां, पीसीओएस में इंसुलि‍न के बढ़ने और ओवरी में गड़बड़ी के कारण एंड्रोजन का स्‍तर बढ़ सकता है। एंड्रोजन हार्मोन के बढ़ने पर अनचाहे बाल, हेयर फॉल जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं।
  • PCOS में पीरियड्स अनियमित क्यों होते हैं?

    पीसीओएस में हार्मोनल असंतुलन के कारण ओव्‍यूलेशन सही समय पर नहीं होता ज‍िसके कारण मह‍िलाओं में स्‍पॉट‍िि‍ंंग या अन‍ियम‍ित पीरियड्स की समस्‍या हो सकती है।
  • क्या PCOS से गर्भधारण में समस्या होती है?

    पीसीओएस में हर मह‍िला को गर्भधारण में मुश्‍क‍िल हो, ऐसा जरूरी नहीं है, लेकि‍न इस दौरान ओव्‍यूलेशन प्रभाव‍ित होने के चलते प्रेग्नेंसी में दिक्कत हो सकती है।
  • क्या हार्मोन संतुलित करने से पीसीओएस ठीक हो सकता है?

    पीसीओएस के लक्षणों को कंट्रोल क‍िया जा सकता है। अगर हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल के साथ पीसीओएस का ट्रीटमेंट कराएंगे, तो पीसीओएस के साथ हेल्‍दी लाइफ जीने में मदद म‍िलेगी। 

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 07, 2026 16:53 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
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