Fri Sep 11, 2026 | 09:04 PM IST

Medically Reviewed by Prof Dr Smriti Agrawal , Professor & Gynaecologist - Department of Obstetrics & Gynaecology

PCOS का खतरा किन महिलाओं को ज्यादा होता है? डॉक्‍टर से जानें

हार्मोनल समस्‍याओं में एक कॉमन समस्‍या पीसीओएस या पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम है। पीसीओएस में हार्मोन्‍स का संतुलन ब‍िगड़ने के कारण अंडाशय की कार्य क्षमता प्रभाव‍ित हो सकती है। जानते हैं क‍िन मह‍िलाओं को पीसीओएस का ज्‍यादा खतरा होता है?

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पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (Polycystic Ovary Syndrome) एक हार्मोनल समस्‍या है। पीसीओएस की स्‍थि‍त‍ि में ओवरी के बाहरी क‍िनारे पर छोटी-छोटी स‍िस्‍ट बन जाती है। इससे ओव्‍यूलेशन की प्रक्र‍िया प्रभाव‍ित हो सकती है। अगर समय पर पीसीओएस की जांच हो जाए, तो इलाज में मदद म‍िलती है। कुछ मह‍िलाओं में पीसीओएस का खतरा ज्‍यादा होता है। जैसे स्‍ट्रेस, नींद की कमी और हार्मोनल असंतुल‍न से गुजरने वाली मह‍िलाएं पीसीओएस का श‍िकार हो सकती हैं। कुछ मह‍िलाओं को पीसीओएस का पता तब चलता है जब पीर‍ियड्स अन‍ियम‍ित होते हैं या गर्भधारण में कठ‍िनाई होती है।

World Health Organisation (WHO) के मुताब‍िक, पीसीओएस के 10 से 13 प्रत‍िशत मामले र‍िप्रोडक्‍ट‍िव एज (Reproductive Age) में होते हैं। डब्‍ल्‍यूएचओ के मुताब‍िक, दुन‍ियाभर में करीब 70 प्रत‍िशत मह‍िलाओं को यह पता भी नहीं होता क‍ि उन्‍हें पीसीओएस है। इसल‍िए यह समझना जरूरी है क‍ि क‍िन मह‍िलाओं को पीसीओएस का खतरा ज्‍यादा हो सकता है? इस लेख में र‍िसर्च और डॉक्‍टर से हम समझेंगे क‍ि पीसीओएस से क‍िन मह‍िलाओं को ज्‍यादा सावधान रहना चाह‍िए? इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने डॉ. स्मृति अग्रवाल, प्रोफेसर एवं स्त्रीरोग विशेषज्ञ, प्रसूति एवं स्त्रीरोग विभाग, केजीएमयू, यूपी लखनऊ (Dr. Smriti Agrawal, Professor & Gynaecologist At Department Of Obstetrics & Gynaecology, King George's Medical University, Lucknow) से बात की।

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पीसीओएस क‍िसे होता है?

पीसीओएस ज्‍यादातर 15 से 45 वर्ष की मह‍िलाओं में देखा जाता है। यह एक हार्मोनल समस्‍या है, जो उन मह‍िलाओं में ज्‍यादा देखा जाता है ज‍िनके शरीर में एंड्रोजन हार्मोन का स्‍तर सामान्‍य से अध‍िक हो जाता है। अनुवांशिकता और इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण भी इसके होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

पीसीओएस के लक्षण क्‍या हैं?

Mayo Clinic के मुताब‍िक, पीसीओएस के लक्षण (Symptoms Of PCOS) हर मह‍िला में थोड़े अलग हो सकते हैं। पीसीओएस होने पर-

  • अनियमित पीरियड्स,
  • एंड्रोजन हार्मोन का अध‍िक होना,
  • पॉलीसिस्टिक ओवरी और
  • मोटापा जैसे लक्षण हो सकते हैं।

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क‍िन मह‍िलाओं में पीसीओएस का खतरा ज्‍यादा होता है?

Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि ज‍िन मह‍िलाओं के पर‍िवार में पीसीओएस का इति‍हास होता है, उनमें पीसीओएस की संभावना हो सकती है। इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस या हार्मोनल असंतुलन की स्‍थि‍त‍ि में भी पीसीओएस की संभावना ज्‍यादा हो सकती है। शारीर‍िक गत‍िव‍िध‍ि की कमी, लंबे समय तक स्‍ट्रेस, मेटाबॉल‍िक समस्‍याओं के कारण भी पीसीओएस का खतरा हो सकता है। World Health Organisation (WHO) के मुताब‍िक, पीसीओएस के कारण जेस्‍टेशनल डायब‍िटीज (गर्भावस्था के दौरान होने वाली शुगर), हाइपरटेंशन, कार्डि‍योवैस्‍कुलर ड‍िजीज जैसी बीमार‍ियों का खतरा बढ़ सकता है। आगे व‍िस्‍तार से समझते हैं क‍िन मह‍िलाओं को पीसीओएस का खतरा ज्‍यादा हो सकता है?

1. ज‍िन मह‍िलाओं के पर‍िवार में पीसीओएस का इत‍िहास हो

ज‍िन मह‍िलाओं के पर‍िवार में पीसीओएस का इत‍िहास है, उन्‍हें पीसीओएस होने की संभावना अध‍िक होती है। मां या बहन को यह समस्‍या होने पर जोखि‍म बढ़ जाता है क्‍योंक‍ि पर‍िवार में हार्मोनल पैटर्न एक जैसा हो सकता है। इसल‍िए शुरुआत में ही असामान्‍य लक्षणों पर गौर करना चाह‍िए। साथ ही हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल को भी अपनाना चाह‍िए। 1998 में Cell Press Journal में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, अगर मां या बहन को पीसीओएस है, तो पीसीओएस का जोख‍िम लगभग 20 से 40 प्रत‍िशत तक बढ़ सकता है। कुछ र‍िसर्च में बताया गया है क‍ि पीसीओएस का जोख‍िम मां या बहन में होने के कारण दो से तीन गुना ज्‍यादा हो जाता है।

Journal of the Endocrine Society की एक र‍िसर्च के मुताब‍िक, South Asian मह‍िलाओं में पीसीओएस का जोख‍िम अध‍िक पाया गया। डेटा के मुताब‍िक, South Asian महिलाओं में पीसीओएस का खतरा लगभग 3 गुना ज्‍यादा था। यह खतरा केवल मोटापे से पीड़ित मह‍िलाओं में ही नहीं बल्‍क‍ि पतली मह‍िलाओं में भी देखा गया। इससे पता चलता है क‍ि South Asian मह‍िलाओं में पीसीओएस का खतरा ज्‍यादा हो सकता है।

2. अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स वाली मह‍िलाएं

ज‍िन मह‍िलाओं के पीर‍ियड्स अन‍ियम‍ित हैं, उन्‍हें भी पीसीओएस का खतरा हो सकता है। अनि‍यम‍ित पीर‍ियड्स, पीसीओएस का प्रमुख संकेत माना जाता है। पीर‍ियड्स का बार-बार म‍िस होना या बहुत देर से आना च‍िंता का व‍िषय है। इस स्‍थ‍ित‍ि में डॉक्‍टर से मदद जरूर लें।

3. Thyroid disorders वाली महिलाएं

थायराइड हार्मोन शरीर के मेटाबॉल‍िज्‍म को कंट्रोल करता है। इसमें गड़बड़ी होने के कारण पीसीओएस का खतरा हो सकता है। थायराइड और पीसीओएस के लक्षण कई बार एक जैसे लगते हैं। यह दोनों समस्‍याएं एक साथ भी हो सकती हैं इसल‍िए समय पर जांच और इलाज जरूरी है।

4. Diabetic family history वाली महिलाएं

ज‍िन मह‍िलाओं के पर‍िवार में डायबि‍टीज का इत‍िहास है, उनमें इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस का खतरा ज्‍यादा हो सकता है। इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस, पीसीओएस का कारण बन सकता है। शुगर लेवल स्‍थ‍िर न रहने पर हार्मोनल असंतुलन हो सकता है। ऐसी मह‍िलाओं को डाइट और एक्‍सरसाइज पर गौर करना चाह‍िए। साथ ही समय पर जांच करानी चाह‍िए।

5. Sedentary job करने वाली महिलाएं

जो मह‍िलाएं लगातार बैठकर काम करती हैं, उनमें अक्‍सर फ‍िज‍िकल एक्‍ट‍िव‍िटी की कमी हो जाती है। इस वजह से वजन बढ़ने और मेटाबॉलिज्म धीमा होने का खतरा ज्‍यादा रहता है। लाइफस्‍टाइल अगर एक्‍ट‍िव नहीं है, तो इंसुल‍िन रेजि‍स्‍टेंस का खतरा भी बढ़ सकता है। इससे धीरे-धीरे पीसीओएस के लक्षण बढ़ सकते हैं।

6. टीनएजर्स या युवत‍ियां

Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि पीसीओएस (Polycystic Ovary Syndrome) उम्र के अलग-अलग पड़ाव पर दस्‍तक दे सकता है। प्‍यूबर्टी की स्‍टेज पर कुछ टीनएज गर्ल्स में हार्मोन्‍स के असंतुल‍न के कारण पीसीओएस की समस्‍या हो सकती है। वहीं युवा मह‍िलाओं में अनहेल्‍दी ईट‍िंग हैब‍िट्स या वजन ज्‍यादा होने जैसे कारणों के चलते पीसीओएस हो सकता है। पीसीओएस के कारण आगे चलकर फर्टिलिटी, टाइप 2 डायब‍िटीज या मेटाबॉल‍िक ड‍िसआर्डर का खतरा बढ़ सकता है। 2019 में International Journal of Reproductive BioMedicine की एक स्‍टडी के मुताब‍िक, किशोरावस्था और प्‍यूबर्टी की स्‍टेज में पीसीओएस की संभावना 11 प्रत‍िशत तक हो सकती है। स्‍टडी में यह भी बताया गया क‍ि इस उम्र में पीसीओएस की पहचान महत्‍वपूर्ण मानी जाती है।

7. ज्‍यादा वजन वाली मह‍िलाएं 

हां, ज‍िन मह‍िलाओं का वजन ज्‍यादा है उनमें पीसीओएस का खतरा ज्‍यादा हो सकता है-

  • मोटापे के कारण इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस का खतरा बढ़ सकता है।
  • इंसुल‍िन लेवल हाई होने के कारण पीसीओएस की संभावना बढ़ सकती है।
  • मोटापे के कारण टाइप 2 डायब‍िटीज, हाई बीपी और हार्ट ड‍िजीज का खतरा बढ़ सकता है।
  • वजन कंट्रोल करने से पीसीओएस के लक्षणों को कंट्रोल करने में मदद म‍िल सकती है। 2008 में The Journal of Clinical Endocrinology and Metabolism में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, मोटापे के कारण पीसीओएस का खतरा बढ़ सकता है।
  • स्‍टडी में यह भी बताया गया क‍ि खानपान की गलत आदतें मोटापा और पीसीओएस को बढ़ावा दे सकती है।

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पीसीओएस के र‍िस्‍क फैक्‍टर्स क्‍या हैं?

Mayo Clinic के मुताबि‍क,पीसीओएस के कई र‍िस्‍क फैक्‍टर्स हो सकते हैं जैसे-

  • इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस के कारण पीसीओएस का खतरा बढ़ सकता है क्‍योंक‍ि इंसुल‍िन की ज्‍यादा मात्रा के कारण मेल हार्मोन एंड्रोजन का लेवल ज्‍यादा हो सकता है। इससे ओव्यूलेशन की प्रक्र‍िया प्रभाव‍ित हो सकती है और पीसीओएस की संभावना बढ़ सकती है।
  • कुछ मामलों में पीसीओएस के पीछे जेनेट‍िक कारण भी हो सकते हैं।
  • अगर पर‍िवार में क‍िसी मह‍िला को पीसीओएस है, तो अन्‍य मह‍िलाओं में भी इसकी संभावना बढ़ सकती है।

क्‍या अनहेल्‍दी लाइफस्‍टाइल से पीसीओएस का खतरा बढ़ता है?

अनहेल्‍दी लाइफस्‍टाइल के कारण पीसीओएस का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा जेनेट‍िक्‍स और हार्मोनल फैक्‍टर्स भी होते हैं जो पीसीओएस के खतरे को बढ़ा सकते हैं। अगर र‍िफाइंड कार्ब्स, शुगर और प्रोसेस्‍ड फूड्स वाली डाइट लेंगे, तो वजन बढ़ सकता है, इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस की समस्‍या हो सकती है और इससे पीसीओएस होने की आशंका बढ़ जाती है। फ‍िज‍िकल एक्‍ट‍िव‍िटी की कमी से मोटापे का श‍ि‍कार हो सकते हैं ज‍िससे मेटाबॉल‍िज्‍म पर बुरा असर पड़ता है और पीसीओएस हो सकता है।

2022 में Springer Nature Link में प्रकाश‍ित हुई एक र‍िव्‍यू स्‍टडी के मुताब‍िक, पीसीओएस की स्‍थ‍ित‍ि में लाइफस्‍टाइल कारकों की भूम‍िका पाई गई। स्‍टडी में बताया गया क‍ि स्‍मोकि‍ंग, ज्‍यादा कैलोरी लेना, खर्राटे और कुछ अन्‍य कारक पीसीओएस वाली महि‍लाओं में ओव्‍यूलेटरी ड‍िसफंक्‍शन से जुड़ा हो सकता है।

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डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • पीसीओएस के संकेत म‍िलते ही डॉक्‍टर से संपर्क करें ताक‍ि इस स्‍थ‍िति‍ की गंभीरता से बच सकें। कई मह‍िलाएं पीसीओएस के लक्षणों (PCOS Symptoms) को नजरअंदाज कर देती हैं, लेक‍िन सही इलाज के ल‍िए जांच और डॉक्‍टर की राय समय पर लेना जरूरी है।
  • अगर पीर‍ियड्स अन‍ियम‍ित हों, हैवी ब्‍लीड‍िंग हो या स्‍पॉट‍िंग यानी दो पीर‍ियड्स के बीच हल्‍की ब्‍लीड‍िंग हो, तो तुरंत डॉक्‍टर से सलाह लें।
  • अगर आप प्रेग्नेंसी प्‍लान कर रही हैं और पीर‍ि‍यड्स अन‍ियम‍ित हैं, तो डॉक्‍टर की सलाह लें।
  • अचानक वजन बढ़ रहा है या पेट के आसपास फैट जमा हो रहा है या अध‍िक थकान महसूस होती है, तो भी डॉक्‍टर की सलाह लें।

न‍िष्‍कर्ष:

Gynaecologist Dr. Smriti Agrawal से हुई बातचीत के आधार पर हमें पता चलता है क‍ि पीसीओएस का खतरा उन मह‍िलाओं को ज्‍यादा होता है ज‍िनके पर‍िवार में पीसीओएस का इत‍िहास रहा हो। इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस या हार्मोनल असंतुलन की स्‍थ‍िति‍ में भी पीसीओएस की संभावना बढ़ सकती है। जो मह‍िलाएं शारीर‍िक रूप से ज्‍यादा एक्‍ट‍िव नहीं होती हैं या जो लंबे समय तक स्‍ट्रेस का श‍िकार होती हैं, उनमें भी पीसीओएस की संभावना बढ़ सकती है।

FAQ

  • पीसीओडी और पीसीओएस में अंतर क्‍या है?

    पीसीओडी (PCOD) को पॉलीसिस्टिक ओवरी ड‍िजीज कहा जाता है जो क‍ि ओवरी से जुड़ी एक समस्‍या है। वहीं पीसीओएस (PCOS) को पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम कहा जाता है जो क‍ि हार्मोन्‍स और मेटाबॉल‍िक समस्‍या है। पीसीओडी एक आम व‍िकार है जो खराब जीवनशैली, स्‍ट्रेस या हार्मोनल असंतुलन के कारण होता है जबक‍ि पीसीओएस चयापचय संबंध‍ित व‍िकार है। पीसीओएस, पीसीओडी से भी ज्‍यादा जट‍िक समस्‍या है ज‍िसमें अंडाशय से अंडों का नियमित रूप से रिलीज (ओवुलेशन) होना प्रभावित हो जाता है।
  • पीसीओएस की जांच कैसे होती है?

    पीसीओएस की जांच के ल‍िए डॉक्‍टर ब्‍लड टेस्‍ट, अल्‍ट्रासाउंड, शुगर और इंसुल‍िन टेस्‍ट जैसी जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
  • पीसीओएस कि‍स उम्र में होता है?

    पीओओएस की कोई तय उम्र नहीं है लेक‍िन यह समस्‍या 15 से 35 की उम्र की मह‍िलाओं में ज्‍यादा देखने को म‍िलती है। 
  • पीसीओएस पूरी तरह से ठीक हो सकता है?

    डॉक्‍टर पीसीओएस का कोई स्‍थायी इलाज नहीं बताते हैं इसल‍िए पीसीओएस को पूरी तरह से ठीक करना मुश्‍क‍िल हो सकता है लेक‍िन इसके लक्षणों को कंट्रोल क‍िया जा सकता है। 
  • पीसीओएस से कैसे बचें?

    पीसीओएस से पूरी तरह बचना संभव नहीं है क्‍योंक‍ि इसके पीछे जेनेट‍िक कारण भी हो सकते हैं, लेक‍िन पौष्टिक भोजन, एक्‍सरसाइज और हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल के जर‍िए पीसीओएस के असर से कुछ हद तक बचा जा सकता है।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 06, 2026 18:42 IST

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