Fri Sep 11, 2026 | 06:55 PM IST

Medically Reviewed by Dr Chetna Jain , Gynecologist

PCOS का पता चलने में देरी क्यों होती है? जानें डॉक्टर से कारण

अक्सर देखा गया है कि महिलाओं को PCOS की बीमारी का पता बहुत देर से चलता है। इसकी वजह महिलाओं को लक्षणों की पहचान न होना, खराब लाइफस्टाइल और PCOS के टेस्ट के बारे में जानकारी न होने जैसे कई कारण शामिल हैं।

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन के कारण होता है और इस वजह से महिलाओं को अनियमित पीरियड्स से लेकर प्रेग्नेंसी में दिक्कत आ सकती है। WHO के अनुसार, रिप्रोडक्टिव उम्र की लगभग 10 से 13% महिलाएं PCOS से प्रभावित हैं। साल 2025 के Reproductive Health में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, पश्चिमी देशों और अन्य एशियाई देशों के मुकाबले, भारतीय महिलाओं में PCOS के मामले ज्यादा पाए गए हैं। इन आंकड़ों को देखकर कहा जा सकता है कि भारत में महिलाओं को PCOS को लेकर जागरूकता अभी कम है और इस वजह से बीमारी का पता अक्सर देर से चलता है। भारतीय महिलाओं को PCOS बीमारी के बारे में देरी से पता चलने के कारणों को जानने के लिए हमने गुरुग्राम के क्लाउडनाइन हॉस्पिटल के ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी विभाग की डायरेक्टर डॉ. चेतना जैन (Dr. Chetna Jain, Director Dept of Obstetrics & Gynecology, Cloudnine Group of Hospitals, Sector 14, Gurgaon) से बात की।

PCOS की पहचान करने में देरी के कारण

डॉ. चेतना कहती हैं, “भारत में खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में रहने वाली महिलाओं को PCOS की जानकारी कम होती है या फिर इस बीमारी के बारे में देरी से पता चलता है। इससे वे वजन बढ़ने, रेगुलर पीरियड्स न होने, प्रेग्नेंसी में दिक्कत होने, चेहरे पर बाल आना और मुंहासे आने जैसी दिक्कतों से गुजरती हैं। इससे उनकी मेंटल हेल्थ पर भी बहुत असर पड़ता है।” साल 2021 में प्रकाशित Human Reproduction के मुताबिक, जिन महिलाओं को PCOS है, उनमें डिप्रेशन होने का रिस्क आम महिलाओं के मुकाबले 50% ज्यादा होता है। इसमें यह भी बताया गया है कि चाहे महिला को पता हो कि उसे PCOS है या नहीं, डिप्रेशन का खतरा दोनों में बराबर रहता है। इसका मतलब है कि डिप्रेशन होने का एक कारण शरीर में हार्मोनल असंतुलन हो सकता है, जिस पर आमतौर पर महिलाएं ध्यान नहीं देतीं क्योंकि उन्हें बीमारी के बारे में पता ही नहीं होता।

pcos diagnosis late quote by dr chetna

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लक्षणों की पहचान न हो पाना

डॉ. चेतना जैन कहती हैं, “आमतौर पर PCOS में महिलाएं वजन बढ़ना, चेहरे पर मुंहासे होना, बाल झड़ना, थकान होना या चेहरे पर बाल आना जैसे लक्षणों को किसी दूसरी बीमारी से जोड़कर देखने लगती हैं। कई मामलों में देखा है कि महिलाएं वजन घटाने के लिए तरह-तरह के डाइट प्लान करती हैं या फिर चेहरे पर बाल या मुंहासे हटाने के लिए ट्रीटमेंट कराती हैं। वे इसे PCOS से जोड़कर नहीं देख पाती और इस वजह से वे इसका टेस्ट भी नहीं करातीं। दरअसल, बाल झड़ने से लेकर वजन बढ़ने तक की समस्याएं महिलाओं की ब्यूटी से जोड़कर देखी जाती हैं, जिसका इलाज वे मार्केट में मिलने वाले तरह-तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट्स से करने की ही कोशिश करती हैं। असल में इसका कारण PCOS की बीमारी होती है, इसलिए महिलाओं को इन सभी लक्षणों की पहचान करके गायनेकोलॉजिस्ट से मिलकर PCOS का टेस्ट जरूर कराना चाहिए, ताकि लक्षण होने के कारणों को जाना जा सके।”

पीरियड्स रेगुलर न होने को इग्नोर करना

इस बारे में डॉ. चेतना ने कहा, “भारत में आमतौर पर लड़कियों के पीरियड्स रेगुलर न होने पर उसे नॉर्मल समझ लिया जाता है। मेरे पास कई महिलाएं आती हैं, जिन्हें युवावस्था से ही पीरियड्स रेगुलर नहीं आते थे और पीरियड के दौरान सामान्य से ज्यादा दर्द महसूस होता था, लेकिन उन्होंने इसे कभी समस्या समझा ही नहीं और इसलिए कभी PCOS का टेस्ट नहीं कराया। भारत में महिलाओं का PCOS डायग्नोस होने में देरी का सबसे बड़ा कारण परिवार का पीरियड्स के अनियमित होने को गंभीरता से न लेना होता है।”

लाइफस्टाइल में बदलाव

भारत में शहरी इलाकों में महिलाओं के लाइफस्टाइल में काफी बदलाव आया है। महिलाओं की भागदौड़ भरी जिंदगी में जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड का ज्यादा खाना, लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करना और नींद की कमी के कारण PCOS के रिस्क को बढ़ा सकता है। Reproductive Health के अनुसार, दिल्ली और एनसीआर जैसे शहरों में PCOS 17.40% तक पाया गया है। आमतौर पर महिलाएं इस ओर ध्यान नहीं देतीं और PCOS के लक्षणों को थकान समझकर इग्नोर कर देती हैं। इससे PCOS गंभीर हो सकता है।

PCOS को सिर्फ सिस्ट से जोड़कर देखना

डॉ. चेतना जैन कहती हैं, “कई मामलों में देखा गया है कि महिलाओं को लगता है कि अगर अल्ट्रासाउंड में ओवरी में सिस्ट या गांठें दिखाई नहीं दे रही हैं, तो इसका मतलब है कि PCOS नहीं है। PCOS के नाम में सिस्ट है, इसलिए कई बार महिलाएं इस बीमारी को सिर्फ सिस्ट से ही जोड़कर देखती हैं, जबकि इस बीमारी की पहचान सिर्फ सिस्ट के आधार पर नहीं की जा सकती। इसलिए कई बार अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट देखकर PCOS की पहचान नहीं हो पाती और इस वजह से इसे डायग्नोज करने में देरी हो जाती है। PCOS की जांच के लिए कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं, इसलिए अनुभवी और ट्रेंड डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है।”

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इनफर्टिलिटी चेकअप के दौरान PCOS का पता चलना

डॉ. चेतना जैन ने कहा, “PCOS का देरी से पता चलने का एक कारण यह भी है कि महिलाएं तब तक डॉक्टर के पास नहीं जातीं, जब तक उन्हें प्रेग्नेंट होने में दिक्कत महसूस न हो। कई मामलों में देखा है कि जब महिलाओं के टेस्ट होते हैं, तब पता चलता है कि उन्हें PCOS की दिक्कत है, जबकि यह बीमारी उन्हें काफी समय से हो सकती है। शादी के बाद जब प्रेग्नेंट नहीं हो पातीं, तब हार्मोनल टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और अन्य चेकअप से पता चलता है कि प्रेग्नेंसी न होने का कारण PCOS है, इसलिए मैं महिलाओं को हमेशा रेगुलर चेकअप की सलाह देती हूं ताकि समय पर PCOS जैसी बीमारी का पता चल सके और उसे मैनेज किया जा सके।”

PCOS की जांच कैसे होती है?

Mayo Clinic के अनुसार, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) की जांच सिर्फ एक टेस्ट के जरिए नहीं होती, बल्कि डॉक्टर मरीज के लक्षणों, पीरियड्स और वजन में हो रहे बदलावों को देखकर ही टेस्ट की सलाह देते हैं।

  1. पेल्विक की जांच - इस टेस्ट में डॉक्टर रिप्रोडक्टिव अंगों को चेक करते हैं ताकि उन्हें किसी भी तरह की गांठ का पता चल सके।
  2. ब्लड टेस्ट - इस टेस्ट से हार्मोन के लेवल को मापा जाता है। इस टेस्ट में पीरियड्स की समस्याएं और एंड्रोजन हार्मोन चेक किए जाते हैं। इसके अलावा, कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स और ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट भी किया जा सकता है।
  3. अल्ट्रासाउंड - इसके जरिए ओवरीज और यूटरस की लाइनिंग की मोटाई चेक की जाती है।

जिन महिलाओं को PCOS की समस्या होती है, उन्हें समय-समय पर ब्लड प्रेशर, ग्लूकोज लेवल और कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए। इसके अलावा, डिप्रेशन और एंग्जाइटी की भी स्क्रीनिंग करानी चाहिए।

क्या PCOS हमेशा के लिए ठीक हो सकता है?

Cleveland Clinic के अनुसार, PCOS का कोई भी परमानेंट इलाज नहीं है। डॉक्टर महिला के लक्षणों की पहचान करके उन्हें मैनेज कर सकते हैं। PCOS के मरीजों को हेल्दी लाइफस्टाइल, हेल्दी और बैलेंस्ड डाइट पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। महिलाओं को वजन कंट्रोल करने और इंसुलिन रेजिस्टेंस कम करने की दवाओं के साथ रेगुलर चेकअप कराना जरूरी होता है।

डॉक्टर से कब मिलें?

अगर महिलाओं को लंबे समय से पीरियड रेगुलर न हो, वजन कम न हो रहा हो, मुंह पर बाल और मुंहासे हों, बाल झड़ रहे हों या प्रेग्नेंट होने में दिक्कत आ रही हो, तो डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए।

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निष्कर्ष

डॉ. चेतना कहती हैं कि PCOS में देरी होने का कारण भारतीय महिलाओं में पीरियड, प्रेग्नेंसी और हार्मोनल समस्याओं के बारे में खुलकर बात न करना भी है। महिलाएं अपने परिवार में इस तरह की समस्याएं बताने से झिझकती हैं, इस वजह से भी डॉक्टर की सलाह लेने में देरी हो जाती है और PCOS की समय पर पहचान नहीं हो पाती। अगर महिलाओं को अपने शरीर और पीरियड में बदलाव दिखे, तो उन्हें तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। 

FAQ

  • PCOS में पीरियड कैसे लाएं?

    PCOS में पीरियड रेगुलर करने के लिए महिलाओं को अपने लाइफस्टाइल में बदलाव, बैलेंस्ड डाइट और वजन को कंट्रोल करना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह पर हार्मोनल दवाइयां भी ली जा सकती हैं।
  • क्या PCOS होने पर गर्भवती हो सकती हूं?

    PCOS होने पर प्रेग्नेंसी संभव है। PCOS में ओव्यूलेशन में दिक्कत होती है, लेकिन डॉक्टर की सलाह लेकर दवाइयां और अपनी डाइट व लाइफस्टाइल में बदलाव करके कई महिलाएं नेचुरली मां बन सकती हैं।
  • क्या मेनोपॉज के बाद PCOS रह सकता है?

    हां, मेनोपॉज के बाद भी PCOS का असर रह सकता है। हालांकि, मेनोपॉज के बाद पीरियड्स बंद हो जाते हैं, लेकिन पुरुषों के हार्मोन एंड्रोजन का हाई लेवल शरीर में बना रह सकता है। इससे मुंह या शरीर पर बाल उगने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
  • क्या पीसीओएस बालों को प्रभावित करता है?

    पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम में बालों पर असर पड़ता है। पुरुष हार्मोन का स्तर बढ़ने के कारण महिलाओं के मुंह और शरीर पर बाल आ सकते हैं और सिर के बाल झड़ सकते हैं। महिलाओं के सिर के बाल पतले होने लगते हैं।
  • क्या वजन घटाने के बाद पीसीओएस ठीक हो जाता है?

    वजन घटाने से पीसीओएस (PCOS) पूरी तरह ठीक नहीं होता, हालांकि इसके लक्षणों में काफी हद तक सुधार हो सकता है। पीसीओएस की समस्या को डॉक्टर की सलाह लेकर मैनेज किया जा सकता है।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Modified By : Aneesh Rawat
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