Fri Sep 11, 2026 | 08:18 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vidya Tickoo , Consultant Endocrinologist & Diabetologist

थायराइड और डायब‍िटीज के बीच क्‍या संबंध है? रि‍सर्च और एक्‍सपर्ट से समझें

थायराइड और डायब‍िटीज दोनों का ही संबंध हार्मोनल असंतुलन के साथ देखा जाता है। थायराइड हार्मोन में बदलाव का असर इंसुल‍िन सेंस‍िट‍िव‍िटी और ब्‍लड शुगर लेवल पर हो सकता है। आगे समझें थायराइड और डायब‍िटीज के बीच का कनेक्‍शन।

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थायराइड और डायब‍िटीज के बीच अक्‍सर कनेक्‍शन देखा जाता है। ऐसा माना जाता है क‍ि दोनों बीमार‍ियां एक-दूसरे के साथ जुड़ी हुई हैं। थायराइड एक छोटी त‍ितली के आकार की ग्रंथ‍ि होती है जो गर्दन के सामने होती है। यह शरीर के मेटाबॉल‍िज्‍म को कंट्रोल करती है। थायराइड ग्रंथ‍ि T3 और T4 हार्मोन्‍स को बनाती है जो शरीर के कई अंगों के काम को प्रभाव‍ित करते हैं। थायराइड के दो प्रकार होते हैं। पहला हाइपोथायराइड‍िज्‍म (Hypothyroidism) ज‍िसमें थायराइड हार्मोन कम बनते हैं और दूसरा हाइपरथायराइडिज्म (Hyperthyroidism) ज‍िसमें थायराइड हार्मोन जरूरत से ज्‍यादा बनते हैं। वहीं दूसरी ओर डायब‍िटीज एक ऐसी बीमारी है ज‍िसमें शरीर का ब्‍लड शुगर लेवल बढ़ सकता है। ऐसा तब होता है जब शरीर पर्याप्‍त इंसुल‍िन नहीं बना पाता है। थायराइड और डायब‍िटीज के बीच का संबंध समझने के ल‍िए हमने Dr. Vidya Tickoo, Consultant Endocrinologist & Diabetologist At Yashoda Hospitals, Hitech City, Hyderabad से बात की।

थायराइड और डायब‍िटीज के बीच क्‍या संबंध है?

Dr. Vidya Tickoo ने बताया क‍ि थायराइड और डायबिटीज के बीच एक मजबूत संबंध है। थायराइड हार्मोन मेटाबॉलिज्‍म को कंट्रोल करते हैं, जो सीधे तौर पर इंसुलिन सेंस‍िट‍िव‍िटी और ब्लड शुगर कंट्रोल करने की क्रि‍या को प्रभावित करता है। अध्ययनों से पता चलता है कि टाइप 2 डायबिटीज वाले 10 से 15 प्रत‍िशत लोगों को थायराइड की समस्याएं भी होती हैं, खासकर हाइपोथायराइडिज्‍म।

2025 में Heliyon नामक जर्नल में प्रकाश‍ित हुई एक स्‍टडी के मुताब‍िक, टाइप 2 डायब‍िटीज के मरीजों में थायराइड ड‍िसऑर्डर आमतौर पर देखा गया है। इसका दर लगभग 61.9 प्रत‍िशत न‍िकला। इसमें सबसे ज्‍यादा हाइपोथायराइड‍िज्‍म पाया गया। इसके अलावा थायराइड के मरीजों में इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस और डायब‍िटीज से संबंध‍ित समस्‍याएं ज्‍यादा देखी गई हैं इसल‍िए न‍ियम‍ित स्‍क्रीन‍िंग जरूरी मानी गई है।

2024 में Journal Of The Association Of Physicians Of India नामक जर्नल में प्रकाश‍ित हुई एक स्‍टडी के मुताब‍िक, टाइप 2 डायब‍िटीज के लगभग 28.3 प्रत‍िशत मरीजों में थायराइड ड‍िसऑर्डर पाया गया और यह समस्‍या एचबीए1सी के हाई लेवल से जुड़ी देखी गई। स्‍टडी ने यह भी बताया क‍ि थायराइड हार्मोन और इंसुल‍िन दोनों म‍िलकर ग्‍लूकोज मेटाबॉल‍िज्‍म को कंट्रोल करते हैं।

2021 में Cureus नामक जर्नल में प्रकाश‍ित हुई एक स्‍टडी के मुताब‍िक, थायराइड और टाइप 2 डायब‍िटीज एक-दूसरे को प्रभाव‍ित करते हैं और थायराइड हार्मोन में बदलाव से ग्‍लूकोज का स्‍तर प्रभाव‍ित हो सकता है। स्‍टडी के मुताब‍िक, ऐसी स्‍थ‍ित‍ि में हाइपोथायराइडिज्म में इंसुल‍िन बनना कम हो सकता है और हाइपरथायराइडिज्म में इंसुल‍िन रेजि‍स्‍टेंस बढ़ सकता है ज‍िससे डायब‍िटीज का खतरा रहता है।

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क्या थायराइड की समस्याएं डायब‍िटीज के जोखिम को बढ़ा सकती हैं?

Dr. Vidya Tickoo ने बताया क‍ि थायराइड की समस्‍याओं से डायब‍िटीज का जोख‍िम बढ़ सकता है। अगर थायराइड की बीमारी का इलाज नहीं किया जाए, तो यह शरीर में शुगर लेवल को बिगाड़ सकती है और डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकती है। हाइपोथायराइडिज्‍म में शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है और इंसुलिन ठीक से काम नहीं करता, जबकि हाइपरथायराइडिज्‍म में इंसुलिन जल्दी टूटने लगता है। जिन लोगों में हाइपोथायराइडि‍ज्‍म की स्‍थ‍ित‍ि समय पर कंट्रोल नहीं होती, उनमें टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा दो से तीन गुना ज्यादा हो सकता है।

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थायराइड और इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस के बीच क्‍या संबंध है?

Dr. Vidya Tickoo ने बताया क‍ि थायराइड हार्मोन के असंतुलन से इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस जैसी समस्‍या हो सकती है। थायराइड में बदलाव का असर डायब‍िटीज को प्रभाव‍ित कर सकता है। 2024 में BMC Endocrine Disorders नामक जर्नल में पब्‍ल‍िश हुई एक स्‍टडी के मुताब‍िक, बदलते हुए थायराइड फंक्‍शन का संबंध इंसुल‍िन रेजि‍स्‍टेंस के साथ देखा गया है। 2025 में BMJ Open नामक जर्नल में प्रकाश‍ित स्‍टडी के मुताब‍िक, हाइपोथायराइडिज्म और हाइपरथायराइडिज्म दोनों में इंसुल‍िन रेजि‍स्‍टेंस ज्‍यादा पाई गई। स्‍टडी के मुताबि‍क, एचबीए1सी और ग्‍लूकोज का लेवल भी असामान्‍य था।

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हाइपोथायराइडिज्म शुगर लेवल को कैसे प्रभावित करता है?

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हाइपोथायराइडिज्म (थायराइड हार्मोन की कमी) इंसुलिन की क्रिया में रुकावट डालकर शुगर लेवल को बढ़ा सकता है। थायराइड हार्मोन की कमी से कोशिकाओं में ग्लूकोज के अब्‍जॉर्ब होने की क्र‍िया कम हो जाती है ज‍िससे इंसुलिन रेजि‍स्‍टेंस बढ़ता है और पाचन क्रिया धीमी हो जाती है। इस वजह से भोजन के बाद शुगर लेवल अचानक बढ़ जाता है। मरीज अक्सर थकान महसूस करते हैं, उनका वजन बढ़ता है और उन्हें शुगर लेवल कंट्रोल करने में परेशानी होती है। इस स्‍थ‍िति‍ में TSH लेवल की जांच जरूरी होती है।

हाइपरथायराइडिज्म शुगर लेवल को कैसे प्रभावित करता है?

हाइपरथायराइडिज्म (थायराइड हार्मोन की अधि‍क मात्रा) लिवर में ग्लूकोज के प्रोडक्‍शन को तेज करके और ग्लाइकोजन भंडार को तेजी से तोड़कर ब्लड शुगर बढ़ाता है। थायराइड हार्मोन की ज्‍यादा मात्रा शरीर के इंसुलिन का इस्तेमाल भी तेजी से करने लगती है, जिससे ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव आता है।

थायराइड और डायब‍िटीज दोनों होने पर कौन सी समस्‍याएं हो सकती हैं?

  • असंतुल‍ित शुगर लेवल
  • असंतुल‍ित थायराइड लेवल
  • असंतुलि‍त कोलेस्ट्रॉल
  • थकान
  • हृदय संबंधि‍त समस्याएं
  • वजन में उतार-चढ़ाव
  • बांझपन

थायराइड और डायब‍िटीज को एक साथ कैसे मैनेज करें?

थायराइड और डायब‍िटीज को एक साथ मैनेज करने के ल‍िए इन आसान ट‍िप्‍स को फॉलो करें-

  • हर तीन से छह महीनों में TSH, T4, HbA1c और खाली पेट ग्लूकोज की जांच कराएं।
  • संतुलित आहार (कम ग्लाइसेमिक, आयोडीन-युक्त भोजन), हर हफ्ते 150 मिनट व्यायाम और 7-8 घंटे की नींद लें।
  • डॉक्‍टर की सलाह से थायराइड और डायब‍िटीज की दवा का डोज और समय तय करें।
  • इंसुलिन सेंस‍िट‍िव‍िटी को बेहतर बनाने के लिए थायराइड लेवल को नॉर्मल रखने का लक्ष्‍य बनाएं।
  • क‍िसी भी प्रकार की डायब‍िटीज होने पर व्‍यक्‍त‍ि को रूटीन चेकअप में थायराइड टेस्‍ट को शाम‍िल करना चाह‍िए।

थायराइड और डायब‍िटीज लेवल को संतुल‍ित रखने के ल‍िए डाइट ट‍िप्‍स

  • लो ग्‍लाइसेम‍िक फूड्स चुनें जैसे ओट्स, दलिया, चना, राजमा वगैरह।
  • मीठा और रिफाइंड कार्ब्स जैसे चीनी, मिठाई, सफेद ब्रेड, मैदा कम करें।
  • नमक और प्रोसेस्ड फूड्स जैसे स्‍ट्रीट फूड और पैकेट वाले स्नैक्स कम करें।
  • बादाम, अखरोट, सीड्स जैसे अलसी या च‍िया सीड्स खाएं। इससे हार्मोन्‍स को संतुल‍ित रखने में मदद म‍िलेगी।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

अगर आपको ये लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टरी मदद लें-

  • ब्लड शुगर लगातार 250 mg/dL से ज्‍यादा या <70 mg/dL से कम बना रहना।
  • नए लक्षण, जैसे बहुत ज्‍यादा थकान, दिल की धड़कन तेज होना, बिना किसी वजह वजन में बदलाव या सूजन आना।
  • दवाएं लेने के बाद भी TSH का स्तर सामान्य सीमा से बाहर रहना।
  • सीने में दर्द, सुन्न होना या देखने में दिक्कत क‍िसी बड़ी समस्‍या के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण नजर आने पर इंतजार न करें और तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें।

न‍िष्‍कर्ष:

Consultant Endocrinologist & Diabetologist Dr. Vidya Tickoo से हुई बातचीत के आधार पर पता चलता है क‍ि थायराइड और डायब‍िटीज दोनों एक-दूसरे को प्रभावि‍त कर सकते हैं। थायराइड हार्मोन का असंतुलन ब्‍लड शुगर को प्रभाव‍ित कर सकता है। इन दोनों का संतुल‍न अच्‍छी सेहत के ल‍िए जरूरी है। स्‍टडीज से पता चलता है क‍ि डायब‍िटीज और थायराइड का गहरा कनेक्‍शन है। थायराइड के कारण इंसुल‍िन हार्मोन पर प्रभाव देखा गया है जो क‍ि डायब‍िटीज के जोख‍िम को बढ़ा सकता है।

FAQ

  • क्या थायराइड की दवाएं डायब‍िटीज को प्रभावित करती हैं?

    हां, यह संभव है। हाइपोथायराइडिज्म में ली जाने वाली दवा मेटाबॉल‍िज्‍म को प्रभावि‍त कर सकती है ज‍िससे शुगर लेवल बढ़ सकता है और हाइपरथायराइडिज्म में भी दवाओं से शुगर लेवल प्रभाव‍ित होता है इसल‍िए दवा शुरू करते या बदलते समय हमेशा HbA1c और ग्लूकोज की जांच कराएं।
  • वजन बढ़ना थायराइड और डायब‍िटीज से कैसे जुड़ा है?

    हाइपोथायराइडिज्म मेटाबॉल‍िज्‍म को धीमा कर देता है, जिससे बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन बढ़ जाता है, जबकि डायबि‍टीज में इंसुलिन रेजि‍स्‍टेंस फैट को बढ़ावा देता है, खासकर पेट के आसपास चर्बी बढ़ती है ज‍िससे वजन बढ़ता है। 
  • थायराइड की दवा म‍िस होने पर क्‍या करें?

    थायराइड की दवा म‍िस होने पर अगले द‍िन न‍ियम‍ित तौर पर डोज लेना जारी रखें। थायराइड की दवा खाली पेट ली जाती है इसल‍िए खाने के बाद दवा का सेवन करने से बचें।  
  • थायराइड में डायब‍िटीज से कैसे बचें?

    थायराइड में मेटाबॉलिज्म धीमा होता है, जिससे वजन बढ़ सकता है। वजन कंट्रोल रखने से डायबिटीज का खतरा कम होता है। साथ ही एक्‍सरसाइज करें, स्‍ट्रेस कम करें और प्रोटीन एवं फाइबर र‍िच फूड्स लें।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 23, 2026 19:37 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
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