Fri Sep 11, 2026 | 06:51 PM IST

Medically Reviewed by Dr Vidya Tickoo , Consultant Endocrinologist & Diabetologist

क्या थायराइड की वजह से भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है? डॉक्‍टर से जानें दोनों का कनेक्शन

थायराइड असंतुलन का मतलब है कि जब थायराइड ग्रंथि जरूरत से कम या ज्यादा थायराइड हार्मोन जैसे T3 और T4 बनाने लगती है। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है। जानते हैं इससे कोलेस्‍ट्रॉल लेवल बढ़ सकता है या नहीं?

थायराइड हार्मोन शरीर की एनर्जी को रेगुलेट करते हैं। जब शरीर में थायराइड हार्मोन में असंतुलन होता है, तो कई बदलाव आते हैं। इसे हाई कोलेस्‍ट्रॉल के साथ भी जोड़ा जाता है। हाई कोलेस्‍ट्रॉल की स्‍थ‍िति‍ में ब्‍लड में कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल सामान्‍य से अध‍िक हो जाता है। जब शरीर में बैड या एलडीएल कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल ज्‍यादा हो जाता है, तो यह धमन‍ियों में जमा होकर प्‍लाक बना सकता है। इससे ब्‍लड सर्कुलेशन प्रभाव‍ित होता है और हार्ट अटैक, स्‍ट्रोक जैसी बीमार‍ियों का खतरा बबढ़ सकता है। कई बार लोगों के मन में यह सवाल उठता है क‍ि क्‍या थायराइड भी हाई कोलेस्‍ट्रॉल का कारण हो सकता है? इस सवाल का जवाब जानने के ल‍िए हमने Dr. Vidya Tickoo, Consultant Endocrinologist & Diabetologist At Yashoda Hospitals, Hitech City Hyderabad से बात की।

थायराइड और कोलेस्‍ट्रॉल के बीच क्‍या संबंध है?

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Dr. Vidya Tickoo ने बताया क‍ि थायराइड हार्मोन ल‍िवर को ब्‍लड से बैड कोलेस्‍ट्रॉल हटाने में मदद करता है। जब शरीर में थायराइड हार्मोन कम हो जाते हैं, तो ल‍िवर कोलेस्‍ट्रॉल को तेजी से बाहर नहीं न‍िकाल पाता है ज‍िससे कोलेस्‍ट्रॉल लेवल बढ़ सकता है। Harward Medical School में प्रकाश‍ित एक लेख के मुताब‍िक, लो थायराइड हार्मोन यानी हाइपोथायराइड की स्‍थ‍ित‍ि में कोलेस्‍ट्रॉल लेवल बढ़ सकता है। अगर हाइपोथायराइड का इलाज न क‍िया जाए, तो टोटल कोलेस्‍ट्रॉल और बैड कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा बढ़ सकती है।

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हाइपोथायराइड के कारण कोलेस्‍ट्रॉल बढ़ सकता है?

हाइपोथायराइड (Hypothyroidism) में थायराइड ग्रंथि जरूरत से कम हार्मोन बनाती है। थायराइड हार्मोन खासतौर पर टी3, ल‍िवर की शरीर से कोलेस्‍ट्रॉल को प्रोसेस करने में मदद करता है, लेक‍िन जब शरीर में पर्याप्‍त थायराइड हार्मोन नहीं बनते हैं, तो ल‍िवर कोलेस्‍ट्रॉल को प्रोसेस नहीं कर पाता है। इससे टोटल कोलेस्‍ट्रॉल और एलडीएल कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल बढ़ सकता है।

हाइपरथायराइड के कारण कोलेस्‍ट्रॉल बढ़ सकता है?

हाइपरथायराइड में थायराइड ग्रंथि जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाती है। इस स्‍थि‍त‍ि में कोलेस्‍ट्रॉल लेवल सामान्‍य से कम हो सकता है। कोलेस्ट्रॉल कम होने से सेहत से जुड़ी समस्‍याएं हो सकती हैं।

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कोलेस्‍ट्रॉल लेवल की जांच कैसे होती है?

American Thyroid Association के मुताब‍िक, हाइपोथायराइडिज्म वाले मरीजों में स्‍क‍िन ड्राईनेस हो सकती है। अगर व्‍यक्‍त‍ि को लगातार ड्राई स्‍क‍िन के साथ थकान, वजन बढ़ना, ज्‍यादा ठंड लगना, कब्‍ज, हेयर फॉल जैसे लक्षण नजर आएं, तो थायराइड की जांच कराएं।

Dr. Vidya Tickoo ने बताया क‍ि कोलेस्‍ट्रॉल की जांच के ल‍िए ब्‍लड टेस्‍ट क‍िया जाता है ज‍िसमें टोटल कोलेस्‍ट्रॉल और बैड कोलेस्‍ट्रॉल यानी एलडीएल के लेवल के बारे में पता चलता है। साथ ही थायराइड लेवल की जांच के ल‍िए टी3, टी4 और TSH टेस्‍ट क‍िए जाते हैं। अगर आपका TSH लेवल नॉर्मल है और फ‍िर भी हाई कोलेस्‍ट्रॉल है, तो डॉक्‍टर से जांच कराएं। थायराइड के अलावा भी हाई कोलेस्‍ट्रॉल के कई कारण हो सकते हैं जैसे कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हाई बीपी, फैटी ल‍िवर वगैरह।

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थायराइड में हाई कोलेस्‍ट्रॉल का खतरा क‍िन्‍हें ज्‍यादा होता है?

  • हाई बीपी, डायबि‍टीज, मोटापे या हार्ट ड‍िजीज के मरीज।
  • ज‍िन मरीजों का T3, T4 या TSH लेवल सामान्‍य न हो।
  • ज‍िन लोगों का एलडीएल या ट्राइग्लिसराइड लेवल पहले से ज्‍यादा हो।
  • मेनोपॉज के बाद मह‍िलाओं में इसका खतरा बढ़ सकता है।
  • 40 से अध‍िक उम्र वाले लोगों में इसका खतरा ज्‍यादा हो सकता है।
  • धूम्रपान और अल्‍कोहल का सेवन करने वाले लोग।
  • सैचुरेटेड फैट और ट्रांस फैट का अधिक सेवन करने वाले लोग।
  • शारीर‍िक रूप से कम एक्‍ट‍िव रहने वाले लोग।

हाई कोलेस्‍ट्रॉल का इलाज कैसे क‍िया जाता है?

  • अगर हाई कोलेस्‍ट्रॉल का कारण खराब लाइफस्‍टाइल है, तो हेल्‍दी डाइट लेने और एक्‍सरसाइज करने की सलाह दी जाती है।
  • कोलेस्‍ट्रॉल लेवल को कंट्रोल करने के ल‍िए दवाओं की मदद भी ली जाती है। कोलेस्‍ट्रॉल लेवल ज्‍यादा होने से हार्ट की बीमारी और स्‍ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है इसल‍िए समय पर इलाज की जरूरत होती है।
  • अगर वजन ज्यादा है, तो 5 से 10% वजन कम करके भी कोलेस्ट्रॉल और हार्ट ड‍िजीज र‍िस्‍क को कम करने में मदद म‍िल सकती है।
  • अगर हाई कोलेस्ट्रॉल, हाइपोथायराइडिज्म, डायबिटीज, किडनी रोग की वजह से है, तो उस बीमारी का सही इलाज करना भी जरूरी होता है।
  • इलाज के दौरान डॉक्टर समय-समय पर लिपिड प्रोफाइल की जांच कराने के ल‍िए कह सकते हैं।

न‍िष्‍कर्ष:

हाइपोथायराइडिज्म में थायराइड हार्मोन कम बनते हैं। इससे टोटल और एलडीएल कोलेस्‍ट्रॉल का लेवल बढ़ सकता है। वहीं हाइपरथायराइडिज्म में थायराइड हार्मोन अधिक बनते हैं ज‍िससे एलडीएल सामान्य से कम हो सकता है।लाइफस्‍टाइल में बदलाव करने से, वजन घटाने से, समय-समय पर जांच कराकर हाई कोलेस्‍ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद म‍िलती है। ज‍िन लोगों को पहले से हाई काेलेस्‍ट्रॉल की समस्‍या है या असामान्‍य थायराइड, डायब‍िटीज, क‍िडनी रोग वगैरह है, उनमें थायराइड होने पर हाई कोलेस्‍ट्रॉल का खतरा ज्‍यादा हो सकता है।

FAQ

  • थायराइड म‍ह‍िलाओं की सेहत को प्रभाव‍ित कर सकती है?

    हां, थायराइड असामान्‍य होगा, तो मह‍िलाओं में अन‍ियम‍ित पीर‍ियड्स की समस्‍या हो सकती है और प्रजनन क्षमता भी प्रभाव‍ित हो सकती है ज‍िससे गर्भधारण में कठ‍िनाई हो सकती है। 
  • थायराइड मानसिक स्वास्थ्य को प्रभाव‍ित करता है?

    हां, इससे ध्‍यान लगाने में मुश्‍क‍िल हो सकती है, याददाश्त कमजोर हो सकती है, च‍िंता, चिड़चिड़ापन और नींद की समस्या भी हो सकती है।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 30, 2026 20:15 IST

    Published By : Yashaswi Mathur
    Reviewed By : Dr Vidya Tickoo

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