GERD की स्थिति में पेट का एसिड भोजन नली से ऊपर फूड पाइप में आ जाता है जिससे गले और श्वसन तंत्र में जलन हो सकती है। कुछ लोगों को रात में इसके लक्षण अधिक परेशान करते हैं। स्ट्रेस या मोटापे के कारण यह समस्या हो सकती है। अगर आपको रात में गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) की समस्या होती है, तो गले में सूजन हो सकती है, लगातार या बार-बार खांसी आ सकती है। Mayo Clinic के मुताबिक, रात में GERD के लक्षण बढ़ने से कुछ लोगों को गले में सूजन या आवाज बैठ जाने की समस्या होती है जिसे लैरिंजाइटिस (Laryngitis) कहा जाता है। GERD के कारण अस्थमा के लक्षण भी बढ़ सकते हैं। इसके कारण सांस फूलना, सीने में जकड़न या भीतर से घरघराहट जैसी आवाज भी महसूस हो सकती है। जीईआरडी के लक्षण बढ़ने के पीछे कई कारण और बीमारियां हो सकती हैं जिसके बारे में आगे जानेंगे। बेहतर जानकारी के लिए हमने Dr. Kapil Sharma, Gastroenterologist At Yatharth Super Speciality Hospital, Faridabad से बात की।
रात में पाचन समस्याओं के पीछे हो सकती हैं ये बीमारियां
- गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD)
- हाइटल हर्निया (Hiatal Hernia)
- गैस्ट्राइटिस
- पेप्टिक अल्सर
- डिस्पेप्सिया या अपच
- भोजन नली में सूजन या एसोफैगिटिस
- मोटापा
यह भी पढ़ें- रात में ही क्यों बढ़ जाती है एसिडिटी और सीने की जलन? डॉक्टर से जानें वजह
रात में क्यों बढ़ जाते हैं GERD के लक्षण?

1. खाते ही लेट जाने की आदत
Dr. Kapil Sharma ने बताया कि लोग अक्सर खाने के बाद तुरंत लेट जाते हैं जिससे खाना पचने से भी पहले एसिड भोजन नली (इसोफेगस) में आ जाता है जिसके कारण सीने में जलन, एसिडिटी या खट्टी डकारें आने लगती हैं। साल 2024 में BMC Gastroenterology में प्रकाशित एक स्टडी में बताया गया कि देर रात भोजन करने की आदत और रात में अधिक कैलोरी लेना एसिड रिफ्लक्स की समस्या से जुड़ा पाया गया है। शोधकर्ताओं ने स्टडी में यह भी बताया कि जिन लोगों को बार-बार रात में भूख लगती है और वे देर रात खाना खाते हैं, उनमें GERD का जोखिम बढ़ सकता है।
बचाव
- डिनर और सोने के समय के बीच गैप रखें। रात को सोने से तीन से चार घंटे पहले ही डिनर कर लें।
- भोजन के बाद आधा घंटा वॉक करने से पाचन में मदद मिलती है।
2. डिनर में पेट की दुश्मन बनती हैं ये चीजें
रात में मसालेदार भोजन, ज्यादा फैट, मीठा या तेल वाला भोजन, कैफीन ड्रिंक्स, अल्कोहल, खट्टी चीजें वगैरह खाने से एसिड रिफ्लक्स की समस्या हो सकती है और GERD के लक्षण गंभीर हो सकते हैं। साल 2023 में Nutrients में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, रात में होने वाली जीईआरडी की परेशानी से न केवल नींद खराब होती है बल्कि हार्ट डिजीज और ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का खतरा भी जुड़ा हो सकता है।
बचाव
- रात में हल्की और आसानी से पचने वाली चीजों का सेवन करें।
- धूम्रपान न करें क्योंकि इससे पाचन समस्याएं बढ़ सकती हैं।
- रात में बहुत ज्यादा प्याज और लहसुन का सेवन भी न करें।
3. डिनर की मात्रा बढ़ा सकती है तकलीफ
Dr. Kapil Sharma ने कहा ''डिनर में ज्यादा भोजन खा लेने के कारण अक्सर लोगों को रातभर खट्टी डकारें, मितली या पेट में भारीपन महसूस होता है। इसलिए डिनर हल्का, आसानी से पचने वाला और कम फैट वाला रखना बेहतर होता है।''
बचाव
प्लेट का साइज छोटा रखें। रात में प्लेट भरकर खाने के बजाय आधी प्लेट में सलाद रखें और आधी प्लेट में प्रोटीन, विटामिन, हेल्दी कार्ब्स, प्रोबायोटिक फूड्स को शामिल करें। इससे पेट भी भरेगा और मात्रा भी सीमित रहेगी।
यह भी पढ़ें- 7 फूड्स जिनके कारण बढ़ सकती है GERD की समस्या, डॉक्टर ने दी सावधानी बरतने की सलाह
4. ज्यादा वजन से भी बढ़ सकते हैं GERD के लक्षण
जिन लोगों का वजन ज्यादा होता है उनमें GERD के लक्षण बढ़ सकते हैं। ज्यादा वजन के कारण पेट पर प्रेशर बढ़ता है और रात को इसके लक्षण परेशान कर सकते हैं।
बचाव
- बेली फैट एसिड रिफ्लक्स का खतरा बढ़ा सकती है। वॉकिंग, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और कार्डियो जैसी एक्सरसाइज मदद कर सकती हैं।
- रात को सोते समय ढीले कपड़े पहनें।
5. स्ट्रेस और नींद की कमी से होती हैं पाचन समस्याएं
स्ट्रेस और नींद की कमी का GERD से सीधा कनेक्शन नहीं है, लेकिन स्ट्रेस के कारण ईटिंग हैबिट्स में बदलाव आता है जिसका असर पाचन पर पड़ सकता है।
क्या कहती हैं स्टडीज?
साल 2016 में The American Journal Of The Medical Sciences में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, जिन मरीजों की नींद खराब थी, उनमें रात का एसिड रिफ्लक्स ज्यादा था। नींद की समस्या वाले मरीजों में इरोसिव एसोफेगाइटिस (भोजन नली की अंदरूनी परत में सूजन) की दर 45% थी, जबकि जिन लोगों की नींद सामान्य थी उनमें यह 31% थी।
साल 2010 में Journal Of Neurogastroenterology And Motility में प्रकाशित एक रिव्यू लेख के मुताबिक, GERD और नींद की समस्या का संबंध दोतरफा (Bidirectional) हो सकता है। यानी GERD नींद को खराब कर सकता है और खराब नींद भी GERD के लक्षणों को और बढ़ा सकती है।
बचाव
- डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें।
- तनाव में जल्दी-जल्दी न खाएं, समय लेकर आराम से भोजन करें।
- नींद की कमी से भी तनाव बढ़ सकता है इसलिए नींद पूरी करें।
यह भी पढ़ें- क्या पेट का एसिड गले में आने (एसिड रिफ्लक्स) का कारण तनाव हो सकता है? बता रहे हैं पेट के डॉक्टर
किन लोगों को होता है GERD का अधिक खतरा?
- जिन लोगों का वजन ज्यादा होता है।
- गर्भवती महिलाएं।
- स्ट्रेस में रहने वाले लोग।
- धूम्रपान करने वाले लोग।
- कम शारीरिक गतिविधि करने वाले लोग।
डॉक्टर से संपर्क कब करें?
- अगर हार्टबर्न की समस्या हफ्ते में दो बार से ज्यादा हो रही हो।
- सांस लेने में तकलीफ हो या जॉ और हाथों में दर्द होने लगे।
- पेट की समस्याओं के कारण रोजाना नींद खुल जाती हो।
- खाना निगलने में परेशानी होना।
- अचानक वजन घटना।
- उल्टी या उल्टी के साथ ब्लड आना।
- स्टूल के रंग या टेक्सचर में बदलाव।
निष्कर्ष:
रात में अगर GERD के लक्षण जैसे एसिडिटी, खट्टी डकारें, सीने में जलन वगैरह ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं, ताे इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे ज्यादा मात्रा में भोजन करना, खाना खाने के तुरंत बाद लेट जाना, मिर्च-मसाले वाला भोजन रात को करना, वजन ज्यादा होना या नींद की कमी और स्ट्रेस। रात में होने वाली पाचन समस्याओं के पीछे GERD के अलावा कुछ पाचन समस्याएं भी हो सकती हैं जैसे मोटापा, हाइटल हर्निया, गैस्ट्राइटिस, पेप्टिक अल्सर, बदहजमी, भोजन नली में सूजन या एसोफैगिटिस वगैरह।
FAQ
GERD में किस करवट सोना बेहतर हो सकता है?
कई स्टडीज में पाया गया है कि पाचन समस्याएं होने पर बाईं करवट सोने से एसिड रिफ्लक्स के लक्षण कम हो सकते हैं। हालांकि हर व्यक्ति में इसका असर अलग हो सकता है।क्या सिर ऊंचा करके सोने से GERD में राहत मिलती है?
हां, रात में GERD के लक्षण जैसे खट्टी डकारें या असहजता महसूस होने पर सिर वाले हिस्से को थोड़ा ऊंचा रखने से एसिड ऊपर आने की संभावना कम हो सकती है।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Jul 30, 2026 15:44 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Kapil Sharma