स्वस्थ रहने के लिए मेटाबॉलिज्म यानी शरीर की एनर्जी बनाने की प्रक्रिया का तेज रहना बहुत जरूरी है। जब आपका मेटाबॉलिज्म अच्छा होता है तो यह आपके खाए हुए भोजन को सही तरह से एनर्जी में बदलने में मदद करता है। मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने से वजन कंट्रोल करने और शरीर में ज्यादा चर्बी इकट्ठा होने से रोकता है। उम्र बढ़ने के साथ हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म में नेचुरल तरीके से कई बदलाव आते हैं। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर की कार्यप्रणाली और एनर्जी को खर्च करने की गति धीमी होने लगती है। मेटाबॉलिज्म धीमा होने के कारण वजन बढ़ने और सुस्ती जैसी समस्याएं होना काफी आम हो जाता है। ऐसे में आइए Dr. Anupama N K, Senior Consultant - Medical Gastroenterology, Aster CMI Hospital, Bengaluru से जानते हैं कि उम्र बढ़ने का मेटाबॉलिज्म पर क्या असर पड़ता है?
मेटाबॉलिज्म उम्र के साथ कैसे बदलता है?
Dr. Anupama N K ने बताया कि मेटाबॉलिज्म वह प्रक्रिया है, जिसके जरिए शरीर खाने को एनर्जी में बदलता है, ताकि सांस लेने, हिलने-डुलने, खाना पचाने और दूसरे जरूरी काम हो सकें। उम्र बढ़ने के साथ मेटाबॉलिज्म में कुछ बदलाव आते हैं, लेकिन ये बदलाव आमतौर पर धीरे-धीर होते हैं। बचपन और किशोरावस्था के दौरान मेटाबॉलिज्म तेज होता है क्योंकि शरीर तेजी से बढ़ रहा होता है और उसे ज्यादा एनर्जी की जरूरत होती है। शुरुआती युवावस्था में, अगर शरीर का वजन और मसल्स मास ठीक बना रहे तो मेटाबॉलिज्म काफी हद तक स्थिर रहता है।
क्या कहती है रिसर्च?
साल 2022 में The Journal of Clinical Investigation में प्रकाशित रिसर्च रिव्यू के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ मेटाबॉलिज्म में कई बदलाव होते हैं, जिसमें सबसे बड़ा शरीर में होने वाला बदलाव है। उम्र बढ़ने के साथ फैट हाथ-पैरों के स्थान पर पेट और अंदरूनी अंगों के पास ज्यादा जमा होने लगती है, जो इंसुलिन रेजिस्टेंस का कारण बनती है। 60 साल की उम्र के बाद मांसपेशियों में हर साल लगभग 0.8% की गिरावट आती है और शारीरिक ताकत उससे ज्यादा तेजी से कम होती है। इतना ही नहीं, सेल्स में माइटोकॉन्ड्रियल कार्यक्षमता कम होने से एनर्जी प्रोडक्शन भी कम हो जाता है। इसके अलावा, लिवर का आकार और ब्लड फ्लो भी कम हो सकता है।
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उम्र बढ़ने, मांसपेशियां घटने और हार्मोन्स का असर
Dr. Anupama N K ने बताया कि जैसे-जैसे लोग बड़े होते हैं, खासकर 40 साल की उम्र के बाद, मांसपेशियों का द्रव्यमान कम होने लगता है और शरीर में फैट बढ़ सकता है। मांसपेशियां फैट की तुलना में ज्यादा कैलोरी बर्न करती हैं, इसलिए मांसपेशियों के कम होने से आराम की स्थिति में शरीर के द्वारा बर्न होने वाली कैलोरी कम हो सकती है। उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक गतिविधियां भी अक्सर कम हो जाती हैं, जिससे एनर्जी का इस्तेमाल और धीमा हो जाता है। हार्मोनल बदलाव, जैसे महिलाओं में मेनोपॉज और पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का धीरे-धीरे कम होना भी मेटाबॉलिज्म पर असर डाल सकते हैं।

मेटाबॉलिज्म धीमा होने का सेहत पर प्रभाव
Dr. Anupama N K के अनुसार अगर उम्र के साथ कैलोरी की जरूरत कम होने पर भी आपका खान-पान वैसा ही रहता है तो मेटाबॉलिज्म धीमा होने के कारण वजन बहुत आसानी से बढ़ने लगता है। कई लोग वजन बढ़ने के लिए सिर्फ धीमे मेटाबॉलिज्म को जिम्मेदार मानते हैं, जबकि कम शारीरिक गतिविधियां, खराब डाइट, नींद की कमी और तनाव भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं। हालांकि, वजन ज्यादा बढ़ने से सेहत से जुड़ी कई समस्याओं का खतरा भी बढ़ जाता है, जिसमें शामिल हैं-
- टाइप 2 डायबिटीज
- हाई ब्लड प्रेशर
- दिल की बामरी
- फैटी लिवर
- जोड़ों से जुड़ी समस्याएं
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मेटाबॉलिज्म को बेहतर और मजबूत बनाने के आसान तरीके
Dr. Anupama N K ने बताया कि हेल्दी लाइफस्टाइल की आदतें किसी भी उम्र में मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती हैं, जैसे-
- नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने से मसल्स बनती हैं और उन्हें बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।
- एरोबिक एक्सरसाइज से कैलोरी बर्न करने और दिल की सेहत को बेहतर बनाने में मदद मिलती है।
- दाल, बीन्स, अंडे, डेयरी प्रोडक्ट्स, मछली या लीन मीट जैसे फूड्स से भरपूर मात्रा में प्रोटीन लेने से मसल्स को बनाए रखने में मदद मिलती है।
- साबुत अनाज, फल, सब्जियां, नट्स और हेल्दी फैट्स का सेवन संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए जरूरी न्यूट्रिएंट्स देता है।
- हाइड्रेटेड रहने के लिए रोजाना 8 से 9 गिलास पानी पिएं और खुद को हाइड्रेट रखें।
- रोजाना 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद लेने की कोशिश करें।
- स्ट्रेस को मैनेज करने के लिए रोजाना मेडिटेशन करें।
निष्कर्ष
Dr. Anupama N K का कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सेहत को खराब होने से रोका नहीं जा सकता है। उम्र बढ़ने के साथ वजन कंट्रोल में रखने और मेटाबॉलिज्म को बढ़ाने के लिए नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियां करें, संतुलित डाइट लें, हेल्दी वजन बनाए रखें और नियमित रूप से सेहत की जांच करवाएं। डाइट में लाइफस्टाइल में हेल्दी बदलाव करने से उम्र से जुड़े मेटाबॉलिक बदलावों के असर को कम किया जा सकता है।
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FAQ
शरीर में मेटाबॉलिज्म कम होने से क्या होता है?
शरीर में मेटाबॉलिज्म कम होने से भोजन एनर्जी में ठीक तरह से नहीं बदल पाता है, जिससे वजन बढ़ना, लगातार थकान और पाचन से जुड़ी समस्याएं होने लगती हैं।मेटाबॉलिज्म तेज होने के क्या नुकसान हैं?
मेटाबॉलिज्म ज्यादा तेज होने पर वजन बढ़ाने में मुश्किल होना, बार-बार भूख लगना और थकान या कमजोरी जैसी समस्याएं महसूस होती है।
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Jul 30, 2026 10:59 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Anupama N K