Mon Oct 12, 2026 | 05:34 AM IST

Medically Reviewed by Dt Divya Gandhi , Therapeutic Diet (Diabetes & PCOD)

एक टाइम का खाना छोड़ने से हार्मोन्स और मेटाबॉलिज्म पर क्या असर पड़ता है? समझें इसके बड़े नुकसान

एक टाइम का खाना छोड़ना किसी भी रूप में सही नहीं है। इसका मेटाबॉलिज्म और हार्मोन संतुलन पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसा क्यों होता है, इस विज्ञान को समझने के लिए लेख पूरा पढ़ें।
एक टाइम का खाना छोड़ने से हार्मोन्स और मेटाबॉलिज्म पर क्या असर पड़ता है? समझें इसके बड़े नुकसान
एक टाइम का खाना छोड़ने से हार्मोन्स और मेटाबॉलिज्म पर क्या असर पड़ता है? समझें इसके बड़े नुकसान

आमतौर पर लोग वजन घटाने के लिए सबसे पहले एक टाइम का खाना छोड़ देते हैं। ज्यादातर लोगों का मानना है कि ऐसा करने से वजन तेजी से कम होता है और ऐसा किया जाना समग्र स्वास्थ्य के लिए भी सही होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह एक गलत अवधारणा है। असल में एक टाइम का भी खाना छोड़ने का हमारे हार्मोन्स और मेटाबॉलिज्म पर बुरा असर डाल सकता है। आइए, Divya Gandhi's Diet & Nutrition Clinic की डायटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी से जानते हैं कि एक टाइम का मील छोड़ने का इन पर क्या असर पड़ता है?

एक टाइम का खाना छोड़ने से हार्मोन्स-मेटाबॉलिज्म पर असर

how skipping meals affect hormones and metabolism 1 (13)how skipping meals affect hormones and metabolism 1 (13)

धीमा मेटाबॉलिज्म

किसी भी समय का मील छोड़ना हमारे शरीर में पोषक तत्वों की कमी कर सकता है, जिससे शरीर में ऊर्जा की कमी हो जाती है। ऊर्जा के स्तर को बनाए रखने के लिए मेटाबोलिक रेट को धीमा कर देता है ताकि कैलोरी बची रहे। नतीजतन, जब आप अगला मील लेते हैं, तो ऐसे में शरीर प्राप्त पोषक तत्वों को एनर्जी में बदलने के बजाय फैट (चर्बी) के रूप में जमा करने लगता है, जिससे वजन घटने के बजाय बढ़ने की संभावना बढ़ जाती है।

इसे भी पढ़ें: क्या नाश्ता छोड़ने से बढ़ जाते हैं स्ट्रेस हार्मोन? जान लें डॉक्टर की सलाह 

भूख और तनाव के हार्मोन्स पर असर

अगर आप ऐसे लोगों में से हैं, जो लंबे समय से एक टाइम का मील स्किप कर रहे हैं, तो जरा सचेत हो जाएं। इसका सीधा असर हार्मोन्स पर पड़ता है। दरअसल, भोजन न मिलने पर भूख बढ़ाने वाले हार्मोन घ्रेलिन का स्तर बहुत बढ़ जाता है और लेप्टिन (पेट भरने का संकेत देने वाला हार्मोन) कम हो जाता है। यही नहीं, पर्याप्त भोजन न मिलने की वजह से शरीर में कोर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है, जिससे चिड़चिड़ापन, थकान होने लगती है। यह स्थिति मीठे की क्रेविंग को बढ़ाती है, जो कि अंततः वजन बढ़ाने में के खतरे को बढ़ाता है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या

कहने की जरूरत नहीं है कि जब कोई लंबे समय तक भूखा रहता है, तो ऐसे में ब्लड शुगर का स्तर तेजी से बढ़ता है। इसे संभालने के लिए पैंक्रियाज इंसुलिन हार्मोन प्रोडक्शन को बढ़ा देता है। ब्लड शुगर के इस बार-बार आने वाले उतार-चढ़ाव से आगे चलकर बॉडी सेल्स इंसुलिन के प्रति सेंसिटिव नहीं रहती हैं, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या बढ़ जाती है। यह स्थिति भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज का मुख्य कारण बनती है।

इसे भी पढ़ें: काम के चक्कर में आप भी करते छोड़ देते हैं लंच (दोपहर का खाना), जानें इससे सेहत को होने वाले नुकसान

निष्कर्ष

अगर आप वजन कम करने के चलते एक टाइम का मील स्किप कर रहे हैं, तो आज ही अपनी इस आदत में सुधार करें। शरीर के लिए एक भी समय का मील स्किप किया जाना सही नहीं है। समग्र स्वास्थ्य के लिए पौष्टिक आहार को डाइट का हिस्सा बनाएं। ध्यान रखें एक समय का भी खाना छोड़ने से मेटाबॉलिज्म सुस्त हो जाता है और हार्मोनल संतुलन भी बिगड़ता है।

All Image Credit: Freepik

FAQ

  • क्या वजन घटाने के लिए ब्रेकफास्ट छोड़ना सही है?

    नहीं। सुबह का नाश्ता हेल्दी और पोषक तत्वों से भरपूर होना चाहिए। अगर आप नियमित रूप से नाश्ता छोड़ते हैं, तो लंच में ओवर ईटिंग करने का जोखिम बना रहता है, जो कि वेट गेन कर सकता है।
  • खाना छोड़ने के कारण सिरदर्द क्यों होता है?

    जब आप लंबे समय तक कुछ नहीं खाते हैं, तो ऐसे में शरीर में ग्लूकोज का स्तर काफी गिर जाता है। मस्तिष्क को ऊर्जा न मिलने और तनाव हार्मोन कोर्टिसोल के बढ़ने के कारण सिरदर्द और चक्कर आने जैसी समस्या हो जाती है।
  • स्वस्थ मेटाबॉलिज्म के लिए दो भोजन के बीच कितना अंतर होना चाहिए?

    सामान्य तौर पर दो हैवी मील के बीच 4 से 5 घंटे का गैप होना चाहिए।

Read Next

→ शरीर में अचानक झुनझुनी क्यों होती है? इन बीमारियों का हो सकता है संकेत

Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

Health Journalist

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

Read More..

How we keep this article up to date:

We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.

  • Current Version

    Jun 01, 2026 19:17 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Jun 01, 2026 19:17 IST

    Modified By : Meera Tagore
  • Jun 01, 2026 19:17 IST

    Published By : Meera Tagore
    Reviewed By : Dt Divya Gandhi