महिलाओं के जीवन में मेनोपॉज वह अवस्था होती है, जब लगातार 12 महीनों तक पीरियड्स नहीं आता है और नेचुरल रूप से पीरियड साइकिल खत्म हो जाती है। इसके आस-पास का समय पेरिमेनोपॉज कहलाता है, जिसमें पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं और एस्ट्रोजन जैसे रिप्रोडक्टिव हार्मोन्स में उतार-चढ़ाव होने लगता है। इसी दौरान कई महिलाओं को यह महसूस होता है कि वजन पहले की तुलना में आसानी से बढ़ रहा है, खासकर पेट, कमर और शरीर के बीच वाले हिस्से के आस-पास। हालांकि, मेनोपॉज के दौरान वजन बढ़ने का एक अकेला कारण एस्ट्रोजन हार्मोन में कमी नहीं होती है, बल्कि इसके पीछे कई फैक्टर्स भी शामिल हो सकते हैं। आइए इस लेख में Dr.(Prof.) Anju Suryapani, Sr. Consultant - Obstetrics & Gynaecology, Metro Hospital, Noida से जानते हैं कि मेनोपॉज में वजन क्यों बढ़ता है?
मेनोपॉज में वजन बढ़ने के कारण
Dr.(Prof.) Anju Suryapani का कहना है कि मेनोपॉज के आस-पास वजन में बदलाव खान-पान की आदतों की वजह से नहीं बल्कि इस समय शरीर में हो रहे बदलावों के कारण होने वाली एक आम समस्या है। मेनोपॉज के दौरान वजन बढ़ने के कारणों को समझकर ही आप इसे सही तरह से कंट्रोल कर सकती हैं।
साल 2012 में Climacteric जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, मेनोपॉज के दौरान होने वाले हार्मोनल बदलावों के कारण शरीर के कुल फैट के साथ ही पेट के फैट में भी काफी बढ़ोतरी होती है। हालांकि, सीधे तौर पर वजन बढ़ने को सिर्फ मेनोपॉज का कारण नहीं माना जा सकता है।
स्टडी में यह भी बताया गया है कि एस्ट्रोजन थेरेपी या एस्ट्रोजन-प्रोजेस्टिन थेरेपी शरीर में जमे फैट को कम करने, इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाने और टाइप 2 डायबिटीज के खतरे को कम करने में मदद कर सकती है, जिससे शरीर में होने वाले कई तरह के बदलावों को रोका जा सकता है।
1. हार्मोनल बदलाव
मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन का लेवल कम होता है। इससे शरीर में फैट जमा होने का पैटर्न बदल सकता है। कई महिलाओं में पहले की तुलना में पेट के आस-पास चर्बी बढ़ने लगती है। यह बदलाव हर महिला में एक जैसा नहीं होता है। जेनेटिक्स, लाइफस्टाइल, फिजिकल एक्टिविटी और पहले से मौजूद मेटाबोलिक हेल्थ भी अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए, अगर मेनोपॉज के दौरान कमर का आकार बढ़ रहा है तो संपूर्ण मेटाबोलिक हेल्थ पर भी ध्यान देना जरूरी है।
2. मेटाबॉलिज्म में बदलाव
मेनोपॉज सिर्फ हार्मोनल प्रक्रिया से गुजरना नहीं है, बल्कि यह उम्र बढ़ने के एक ऐसे चरण के साथ भी आता है, जिसमें शरीर की एनर्जी बदल सकती है। उम्र बढ़ने के साथ अगर फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाए और मसल मास धीरे-धीरे कम होने लगे तो शरीर पहले की तुलना में कम कैलोरी बर्न कर सकता है। यही कारण है कि कई महिलाओं को लगता है कि वह पहले जितना ही खा रही हैं, लेकिन फिर भी उनका वजन पता नहीं क्यों बढ़ रहा है। कभी-कभी समस्या यह होती है कि रोजाना खर्च होने वाली एनर्जी कम हो जाती है, भले ही खाए जाने वाले भोजन की मात्रा में कोई खास बदलाव न हुआ हो।
3. मांसपेशियों का कम होना
उम्र बढ़ने के साथ मसल मास को बनाए रखना ज्यादा मुश्किल हो सकता है। अगर महिला नियमित ताकत बढ़ाने वाली एक्सरसाइज नहीं करती है, तो धीरे-धीरे मसल मास कम हो सकता है। मांसपेशियां शरीर की मेटाबोलिक एक्टिविटी में अहम भूमिका निभाती हैं। इसलिए, मेनोपॉज के दौरान सिर्फ कैलोरी कम करने पर ध्यान देने के बजाय मांसपेशियों की ताकत और फिजिकल एक्टिविटी बनाए रखना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।
4. नींद पर बुरा असर पड़ना
मेनोपॉज के आस-पास हॉट फ्लैशेज, रात में पसीना आना, एंग्जाइटी या बार-बार नींद खुलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इससे नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। जब नींद लगातार खराब होती है तो अगले दिन थकान बढ़ सकती है और फिजिकल एक्टिविटी कम हो सकती है। कुछ महिलाओं की भूख और खाने की रुचि पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए, अगर वजन बढ़ने के साथ नींद की समस्या भी है तो सिर्फ डाइट बदलने के बजाय नींद की समस्या के कारणों को भी समझना जरूरी है।
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5. स्ट्रेस और इमोशनल ईटिंग
मेनोपॉज का समय कई महिलाओं के लिए इमोशनल और शारीरिक बदलाव से भरा होता है। परिवार, करियर, बच्चों की जिम्मेदारियां और उम्र से जुड़े बदलाव स्ट्रेस बढ़ा सकते हैं। लंबे समय तक स्ट्रेस रहने पर कुछ महिलाएं ज्यादा शुगरी या हाई-कैलोरी फूड्स लेने लगती हैं, जिसे इमोशनल ईटिंग कहा जाता है। यह जरूरी नहीं है कि हर महिला में ऐसा हो, लेकिन अगर तनाव के समय बार-बार फ्राइड फूड्स या स्नैक्स खाने की क्रेविंग बढ़ रही है तो स्ट्रेस मैनेज करने पर ध्यान देना जरूरी है।
6. फिजिकल एक्टिविटी की कमी
कई महिलाओं की रूटीन इस उम्र में काफी बदल जाती है। काम, परिवार या स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के कारण वॉक, एक्सरसाइज या घर के बाहर की गतिविधियां कम हो सकती हैं। अगर कैलोरी इनटेक लगभग वही रहे, लेकिन रोजाना की मूवमेंट कम हो जाए तो धीरे-धीरे वजन बढ़ सकता है। इसलिए, रोजमर्रा की छोटी-छोटी फिजिकल एक्टिविटिज भी जरूरी होती हैं, जिसमें वॉकिंग, सीढ़ियों का ज्यादा इस्तेमाल करना, घर के काम के लिए ज्यादा चलना-फिरना और नियमित एक्सरसाइज करना शामिल हैं।
क्या मेनोपॉज के दौरान वजन बढ़ना रोका जा सकता है?
Dr. Anju Suryapani का कहना है कि वजन और मेटाबोलिक हेल्थ को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है। हालांकि, महिलाओं का टारगेट सिर्फ वजन कम करना नहीं होना चाहिए। इस उम्र में हेल्दी फूड, मांसपेशियां बढ़ाने, कमर की चर्बी कम करने, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल पर भी ध्यान देना चाहिए।
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वजन कम करने के लिए खाने में किन बातों का ध्यान रखें?
Dr. Anju Suryapani कहती हैं कि हर महिला की न्यूट्रिशनल जरूरतें अलग-अलग होती हैं, लेकिन आमतौर पर उन्हें इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है:
- पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन लें
- सब्जियां और फाइबर से भरपूर फूड्स खाएं
- साबुत अनाज और दालों को डाइट में शामिल करें
- रिफाइंड शुगर और ज्यादा प्रोसेस्ड फूड्स को सीमित करें
- पोर्शन साइज पर ध्यान दें
- हाइड्रेटेड रहने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
- बिना जरूरत के क्रैश डाइट करने से बचें
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कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
अगर मेनोपॉज के आस-पास वजन तेजी से बढ़ रहा है, बिना कारण वजन में बदलाव हो रहा है, बहुत ज्यादा थकान हो रही है, पीरियड्स में असामान्य बदलाव हैं या साथ में ज्यादा प्यास, बार-बार पेशाब, सांस फूलना या कोई नया लक्षण दिखाई दे रहा है तो मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है। कई बार वजन बढ़ने के पीछे सिर्फ मेनोपॉज नहीं, बल्कि थायराइड असंतुलन, इंसुलिन रेजिस्टेंस, दवाइयों का असर, नींद से जुड़ी समस्याएं और अन्य मेटाबोलिक कंडीशन भी हो सकती हैं।
निष्कर्ष
Dr. Anju Suryapani का कहना है कि मेनोपॉज के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं और वजन को मैनेज करना पहले की तुलना में थोड़ा मुश्किल हो सकता है, लेकिन सही तरीकों को अपनाकर आप हेल्दी वजन पा सकती हैं। मेनोपॉज के दौरान सबसे जरूरी बात है, खुद को भूखा न रखना और अपने शरीर को समझना।
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FAQ
मेनोपॉज के किस स्टेज पर आपका सबसे ज्यादा वजन बढ़ता है?
मेनोपॉज से पहले पेरिमेनोपॉज स्टेज और आखिरी पीरियड के बाद के शुरुआती दो सालों में सबसे ज्यादा वजन बढ़ता है और पेट के आस-पास की चर्बी बढ़ती है। इस दौरान बदलावों के कारण शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है।मेनोपॉज में वेट लॉस कैसे करें?
मेनोपॉज के दौरान हार्मोनल बदलावों के कारण वजन और बेली फैट बढ़ना आम है। वजन कंट्रोल करने के लिए कैलोरी की मात्रा कम करना, फाइबर ज्यादा लेना और प्रोटीन का सेवन बढ़ाना जरूरी है। इसके साथ ही नियमित रूप से ब्रिस्क वॉक, योग और हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें।
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Aug 22, 2026 16:35 IST
Modified By : Katyayani Tiwari Aug 22, 2026 16:35 IST
Modified By : Katyayani TiwariAug 22, 2026 16:35 IST
Published By : Katyayani Tiwari
Reviewed By : Dr Anju Suryapani
