Fri Sep 11, 2026 | 06:52 PM IST

Medically Reviewed by Prof Dr Smriti Agrawal , Professor & Gynaecologist - Department of Obstetrics & Gynaecology

PMOS में वजन घटाना क्‍यों मुश्‍क‍िल बन जाता है? डॉक्‍टर से जानें कारण

PMOS इस बात पर असर डालता है कि आपका शरीर इंसुलिन कैसे बनाता और इस्तेमाल करता है। इससे म‍हि‍लाओं को वजन कम करने में परेशानी हो सकती है। डॉक्‍टर से जानें अन्‍य कारणों के बारे में।

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PMOS में अक्‍सर मह‍िलाओं के ल‍िए वजन कम करना मुश्‍क‍िल होता है। PMOS में कई मह‍िलाओं के मन में यह सवाल अक्‍सर आता है क‍ि उनके डाइट और एक्‍सरसाइज फॉलो करने के बाद भी वजन कम होने का नाम ही नहीं लेता, लेक‍िन मह‍िलाएं अक्‍सर एक बात भूल जाती हैं क‍ि PMOS केवल एक र‍िप्रोडक्‍ट‍िव कंडीशन नहीं है, बल्‍क‍ि यह एक मेटाबॉल‍िक और हार्मोनल समस्‍या भी है। इससे शरीर के इंसुल‍िन, फैट और हार्मोन्‍स के साथ गहरा संबंध है। इन वजहों से PMOS में मेटाबॉल‍िज्‍म धीमा हो सकता है और वजन घटाना मुश्‍क‍िल लग सकता है। इस लेख में आगे डॉक्‍टर से समझते हैं PMOS में वजन न घटा पाने के अन्‍य कारण और इसका समाधान। बेहतर जानकारी के ल‍िए हमने Dr. Smriti Agrawal, Professor & Gynaecologist At Department Of Obstetrics & Gynaecology, King George's Medical University, Lucknow से बात की।

1. इंसुलि‍न रेजि‍स्‍टेंस के कारण वजन घटाना हो सकता है मुश्‍क‍िल

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Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि PMOS में वजन बढ़ने का एक कारण इंसुलि‍न रेजि‍स्‍टेंस भी होता है। इस कंडीशन में शरीर इंसुलि‍न को सही तरह से इस्‍तेमाल नहीं कर पाती है। इस वजह से इंसुल‍िन लेवल बढ़ जाता है और शरीर में फैट बर्न की प्रक्र‍िया धीमी हो जाती है और फैट स्‍टोर होने लगता है।

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2. हाई एंड्रोजन लेवल

PMOS में इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस ही वजन बढ़ने का कारण नहीं है। वजन बढ़ने के पीछे हार्मोन्‍स की भी अहम भूम‍िका होती है। अगर PMOS में एंड्रोजन लेवल हाई हैं, तो क्रेव‍िंग्‍स हो सकती हैं, पेट की चर्बी बढ़ सकती है और भूख ज्‍यादा लग सकती है। साल 2022 में Clinical Endocrinology में प्रकाश‍ित एक स्‍टडी के मुताब‍िक, PMOS में इंसुल‍िन रेज‍िस्‍टेंस, एंड्रोजन हार्मोन और सूजन के बढ़ने से ओव्‍यूलेशन और प्रजनन क्षमता प्रभाव‍ित हो सकती है।

3. हाई कोर्टि‍सोल लेवल

PMOS या पॉलिएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम (Polyendocrine Metabolic Ovarian Syndrome) पूर्व नाम (पीसीओएस) में कोर्ट‍िसोल, स्‍ट्रेस हार्मोन है जो अगर बढ़ा हुआ है, तो भी PMOS में वजन घटाना मुश्‍क‍िल हो सकता है। क्रॉन‍िक स्‍ट्रेस, खराब नींद के कारण कोर्टि‍सोल हार्मोन बढ़ सकता है।

4. स्‍लो मेटाबॉल‍िज्‍म और सूजन

अगर आपकी उम्र 35 से ज्‍यादा है और मोटापे का श‍िकार हैं, तो आपका मेटाबॉलि‍ज्‍म धीमा हो सकता है ज‍िसके कारण PMOS में वेट लॉस करना मुश्‍क‍िल हो सकता है। इसी तरह सूजन के कारण इंसुलिन प्रतिरोध बिगड़ सकता है और PMOS में वजन कम करना मुश्‍क‍िल हो सकता है।

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तुरंत वेट लॉस की उम्‍मीद न करें

PMOS में वजन सीधे-धीरे कम नहीं होता है। हार्मोन्‍स को एडजस्‍ट होने में समय लग सकता है। इसल‍िए बार-बार वजन मापने की मशीन को बार-बार चेक नहीं करने से बचना चाह‍िए। हफ्ते में एक तय द‍िन पर न‍ियम‍ित रूप से वजन चेक कर सकते हैं।

PMOS डाइट में हेल्‍दी न्‍यूट्रि‍एंट्स को शाम‍िल करें

  • PMOS में लो ग्‍लाइसेमि‍क फूड्स को डाइट में शाम‍िल कर सकते हैं।
  • प्रोटीन के ल‍िए टोफू, पनीर, दाल, अंडे वगैरह का सेवन कर सकती हैं।
  • हेल्दी फैट्स जैसे ऑलिव ऑयल, नट्स, सीड्स और ओमेगा 3 र‍िच फूड्स का सेवन कर सकती हैं। से भरपूर मछली। यह हार्मोन्‍स प्रोडक्शन को सपोर्ट करते हैं।
  • इसके अलावा हाई फाइबर फूड्स जैसे वेजिटेबल्स, होल फ्रूट्स, फलियां और होल ग्रेंस का सेवन कर सकती हैं। यह सब इंसुलिन सेंसिटिविटी और गट हेल्थ दोनों को ही सपोर्ट करते हैं।

PMOS में वेट लॉस के ल‍िए फ‍िजि‍कल मूवमेंट जरूरी है

  • स‍िर्फ डाइट ही नहीं, PMOS में वेट लॉस के ल‍िए मूवमेंट भी बहुत जरूरी होता है। रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी PMOS मैनेजमेंट में बहुत जरूरी है।
  • हर हफ्ते दो-तीन बार स्ट्रेंथ ट्रेनिंग कर सकते हैं। इससे मसल मास बिल्ड होगा जिससे इंसुलिन सेंसिटिविटी इंप्रूव हो सकती है। मॉडरेट एरोबिक एक्टिविटी जैसे ब्रिस्क वॉक, साइकिलिंग या स्विमिंग भी कर सकती हैं। यह मेटाबॉलिक हेल्थ इंप्रूव कर सकती है। योगा, स्ट्रेचिंग और ब्रीथिंग एक्सरसाइज को न भूलें, इससे कोर्टिसोल लेवल्स को रिड्यूस करने में मदद म‍िलती है।

क्‍या वेट लॉस से PMOS ठीक हो सकता है?

Dr. Smriti Agrawal ने बताया क‍ि केवल वेट लॉस से PMOS ठीक नहीं हो सकता, हालांक‍ि इससे ओव्‍यूलेशन साइक‍िल को बेहतर बनाने में मदद म‍िलती है। साथ ही हार्मोन्‍स का बैलेंस ठीक करने में भी मदद म‍िल सकती है।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

  • ब‍िना क‍िसी कारण के वजन बढ़ना।
  • डायब‍िटीज जैसे लक्षण महसूस होना जैसे अध‍िक प्‍यास लगना या बार-बार पेशाब आना।
  • पीर‍ियड्स अन‍ियम‍ित होना।
  • पीर‍ियड्स में लंबे समय तक ब्‍लीड‍िंग होना।
  • वजन बढ़ना।

न‍िष्‍कर्ष:

PMOS में वजन बढ़ने के पीछे इंसुल‍िन रेजि‍स्‍टेंस, हाई एंड्रोजन लेवल, हाई कोर्टि‍सोल लेवल, स्‍लो मेटाबॉल‍िज्‍म और सूजन जैसे कारण हो सकते हैं। PMOS में वजन बढ़ने से बचने के ल‍िए एक्‍सरसाइज को प्राथम‍िकता दें। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें, एरोबिक एक्टिविटी, स्‍ट्रेच‍िंग और योग की भी मदद लें। लो ग्‍लाइसेमि‍क फूड्स, प्रोटीन, हेल्‍दी फैट्स, हाई फाइबर फूड्स वगैरह को डाइट का ह‍िस्‍सा बनाएं। अगर क‍िसी कारण वजन बढ़ रहा है, डायब‍िटीज के लक्षण नजर आएं, पीर‍ियड्स अन‍ियम‍ित हों, वजन बढ़े, तो डॉक्‍टर से संपर्क करें।

FAQ

  • PMOS के कारण क‍िन बीमार‍ियों का खतरा बढ़ सकता है?

    PMOS के कारण हाई बीपी, हाई कोलेस्‍ट्रॉल, स्‍लीप एपन‍िया, फैटी ल‍िवर, टाइप 2 डायब‍िटीज या प्रीडायब‍िटीज जैसी बीमार‍ियों का खतरा बढ़ सकता है।
  • PMOS में मुंहासे क्यों बढ़ जाते हैं?

    PMOS में हार्मोनल असंतुल‍न के कारण एंड्रोजन हार्मोन का लेवल बढ़ सकता है। इससे ऑयल ग्‍लैंड्स ज्‍यादा एक्‍ट‍िव हो जाते हैं और सीबम प्राेडक्‍शन बढ़ने से मुंहासे हो सकते हैं।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 14, 2026 18:56 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
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  • Aug 14, 2026 18:56 IST

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