वजन कम करना कई लोगों के लिए बहुत मुश्किल हो जाता है, कुछ लोग नियमित एक्सरसाइज करते हैं, डाइट भी कंट्रोल करते हैं, फिर भी उनका वजन कम नहीं होता है। खासतौर पर पेट का फैट कम करना सबसे मुश्किल लगता है। ऐसे में कई लोग खुद को जिम्मेदार मानने लगते हैं, लेकिन कई बार इसके पीछे शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव भी जिम्मेदार हो सकते हैं। इन्हीं में से एक है इंसुलिन रेजिस्टेंस, जो वजन घटाने की प्रोसेस को प्रभावित कर सकता है। यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. जयादित्य घोष के अनुसार, इंसुलिन रेजिस्टेंस में शरीर की सेल्स इंसुलिन हार्मोन के प्रति कम सेंसिटिव हो जाती हैं। शरीर में इंसुलिन का लेवल बढ़ने से फैट जमा होने की प्रोसेस बढ़ सकती है, खासकर पेट के आसपास की चर्बी बढ़ने का खतरा ज्यादा हो सकता है। इसके अलावा इंसुलिन रेजिस्टेंस की वजह से बार-बार भूख लगना, मीठा खाने की इच्छा बढ़ना, खाने के बाद थकान महसूस होना और वजन घटाने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
क्या इंसुलिन रेजिस्टेंस से वजन घटाना मुश्किल हो सकता है?
डॉ. जयादित्य घोष बताते हैं, ''इंसुलिन केवल ब्लड शुगर कंट्रोल नहीं करता, बल्कि शरीर में फैट के मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित करता है। जब शरीर में इंसुलिन का लेवल लगातार बढ़ा रहता है, तो फैट टूटने की प्रोसेस धीमी हो जाती है और शरीर में चर्बी यानी फैट जमा होने लगता है। इसके अलावा इंसुलिन रेजिस्टेंस भूख और खाने की इच्छा को भी प्रभावित कर सकता है। इससे व्यक्ति को बार-बार भूख लगना, मीठा या रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट वाले फूड्स खाने की तेज इच्छा होना जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में कैलोरी कंट्रोल डाइट का पालन करना कठिन हो जाता है।''
डॉ. जयादित्य घोष के अनुसार, यह धारणा गलत है कि इंसुलिन रेजिस्टेंस होने पर वजन कम नहीं किया जा सकता। वजन घटाने का सबसे जरूरी है कैलोरी डेफिसिट यानी जितनी कैलोरी शरीर खर्च करता है, उससे कम कैलोरी लेना है। हालांकि, यदि साथ ही इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार किया जाए, तो वजन कम करना आसान हो सकता है और शरीर की मेटाबॉलिक सेहत भी बेहतर होती है।
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साल 2011 में Diabetes Research and Clinical Practice में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, जब 25 से 45 साल की बिना मोटापा (non-obese) महिलाओं ने 12 महीनों तक कम कैलोरी वाली डाइट और घरेलू एक्सरसाइज (home-based exercise) को अपनाया, तो उनके वजन घटने पर इंसुलिन रेजिस्टेंस का अलग असर देखा गया। घरेलू एक्सरसाइज का फायदा केवल सामान्य इंसुलिन वाली महिलाओं को मिला, जिससे उनका वजन ज्यादा कम हुआ। इंसुलिन रेजिस्टेंट वाली महिलाओं के मामले में एक्सरसाइज करने और न करने वालों के वजन घटने में कोई खास अंतर नहीं आया। इसके अलावा, वजन के बदलावों को ध्यान में रखने के बाद दोनों समूहों के लिपिड प्रोफाइल में कोई अंतर नहीं मिला। संक्षेप में, इंसुलिन रेजिस्टेंस ने वजन घटाने को थोड़ा आसान बनाया, लेकिन घरेलू एक्सरसाइज का वजन घटाने में फायदा केवल सामान्य इंसुलिन लेवल वाली महिलाओं को ही मिला।

इंसुलिन रेजिस्टेंस के क्या लक्षण होते हैं?
वजन कम करने में परेशानी के अलावा कुछ अन्य संकेत भी इंसुलिन रेजिस्टेंस की ओर इशारा कर सकते हैं। डॉ. जयादित्य घोष बताते हैं कि पेट के आसपास ज्यादा फैट जमा होना, बार-बार भूख लगना, मीठा खाने की इच्छा बढ़ना, खाने के बाद नींद या थकान महसूस होना, गर्दन या स्किन के कुछ हिस्सों का काला पड़ना और ब्लड शुगर बढ़ना शामिल हो सकता है लेकिन केवल लक्षणों के आधार पर इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए डॉक्टर की सलाह और चेकअप कराना जरूरी होता है।
इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ाने के लिए उपाय
डॉ. जयादित्य घोष सलाह देते हैं कि भोजन में साबुत अनाज, हरी सब्जियां, दालें, फलियां और लीन प्रोटीन को शामिल करें। हाई-फाइबर डाइट ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने और लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करती है। वहीं रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, शुगर ड्रिंक्स और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करना चाहिए। इसके साथ नियमित एरोबिक एक्सरसाइज और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग दोनों को दिनचर्या का हिस्सा बनाना जरूरी है, क्योंकि ये वजन कम हुए बिना भी इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार कर सकते हैं। यदि शरीर के कुल वजन का केवल 5 से 10 प्रतिशत भी कम हो जाए, तो इंसुलिन रेजिस्टेंस में सुधार देखा जा सकता है।
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डॉक्टर की सलाह
डॉक्टर जयादित्य सलाह देते हैं कि यदि लंबे समय तक बैलेंस डाइट, नियमित एक्सरसाइज और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाने के बावजूद वजन कम नहीं हो रहा है, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। कई बार प्रीडायबिटीज, टाइप-2 डायबिटीज, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS), हाइपोथायराइडिज्म, कुशिंग सिंड्रोम या कुछ दवाएं वजन बढ़ने का कारण बन सकती हैं। ऐसी स्थिति में सही चेकअप और इलाज जरूरी होता है। कुछ मरीजों में डॉक्टर की सलाह पर एंटी-ओबेसिटी दवाएं या बैरिएट्रिक सर्जरी भी इलाज का हिस्सा हो सकती है।
निष्कर्ष
इंसुलिन रेजिस्टेंस वजन घटाने की प्रोसेस को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि यह शरीर के मेटाबॉलिज्म और फैट स्टोरेज को बदल देता है लेकिन सही डाइट, नियमित एक्सरसाइज, बेहतर नींद और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारा जा सकता है। अगर लगातार कोशिशों के बाद भी वजन कम नहीं हो रहा है, तो केवल कैलोरी कम करने के बजाय डॉक्टर की सलाह से अन्य हेल्थ चेकअप भी करें।
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FAQ
इंसुलिन रेजिस्टेंस में वजन क्यों बढ़ता है?
इंसुलिन का लेवल बढ़ने पर शरीर एनर्जी को खर्च करने की बजाय ज्यादा फैट स्टोर करने लगता है, जिससे वजन बढ़ सकता है।क्या एक्सरसाइज से इंसुलिन रेजिस्टेंस कम हो सकता है?
नियमित एक्सरसाइज, खासकर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और कार्डियो, शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर करने में मदद कर सकते हैं।
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Jul 20, 2026 18:39 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Jayaditya Ghosh