क्या आपकी गर्दन, बगल या शरीर के कुछ हिस्सों की त्वचा अचानक काली और मोटी होने लगी है? या फिर शरीर पर छोटे-छोटे स्किन टैग्स (Skin Tags) दिखाई देने लगे हैं? ज्यादातर लोग इन्हें केवल स्किन से जुड़ी सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार ये बदलाव शरीर के अंदर होने वाली एक गंभीर मेटाबॉलिक समस्या इंसुलिन रेजिस्टेंस (Insulin Resistance) का शुरुआती संकेत हो सकते हैं। इंसुलिन रेजिस्टेंस ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की सेल्स इंसुलिन हार्मोन का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पातीं। यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. जयादित्य घोष के अनुसार, इंसुलिन रेजिस्टेंस के शुरुआती संकेत केवल ब्लड टेस्ट में ही नहीं, बल्कि स्किन पर भी दिखाई दे सकते हैं।
स्किन पर इंसुलिन रेजिस्टेंस के संकेत
एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. जयादित्य घोष बताते हैं, ''जब शरीर में इंसुलिन का लेवल लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो यह स्किन की सेल्स की बढ़ोतरी और पिगमेंटेशन को प्रभावित करता है। इससे स्किन पर कुछ खास बदलाव दिखाई देने लगते हैं। ये बदलाव अक्सर डायबिटीज होने से कई साल पहले भी नजर आ सकते हैं। इसलिए यदि स्किन में अचानक ऐसे परिवर्तन दिखें तो बिना डॉक्टर की सलाह के क्रीम लगाने की बजाय डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।''
इसे भी पढ़ें: इंसुलिन रेजिस्टेंस की परेशानी है, तो बदलें सुबह की ये 5 आदतें
- एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. जयादित्य घोष के अनुसार, इंसुलिन रेजिस्टेंस में सबसे सामान्य संकेत एकेन्थोसिस नाइग्रिकन्स (Acanthosis Nigricans) है।
- इसमें गर्दन के पीछे, बगल, कोहनी, घुटनों या कमर के आसपास की स्किन काली, मोटी दिखाई देने लगती है।
- इसके अलावा स्किन पर छोटे-छोटे स्किन टैग्स यानी मांस के उभरे हुए दाने भी बनने लगते हैं। कुछ लोगों में स्किन पर खुजली, बार-बार फंगल इंफेक्शन, घाव का देर से भरना या चेहरे पर ज्यादा मुंहासे भी इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़े हो सकते हैं।
- महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन के कारण PCOS के साथ ऐसे स्किन संबंधी बदलाव ज्यादा देखने को मिलते हैं।
यदि आपका वजन ज्यादा है, खासकर पेट के आसपास फैट जमा है, परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, फिजिकल एक्टिविटी कम है या आपको हाई ब्लड प्रेशर, हाई ट्राइग्लिसराइड्स या PCOS जैसी समस्या है, तो इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे लोगों को स्किन में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर ब्लड शुगर, HbA1c और अन्य जरूरी जांच करवाने से बीमारी की शुरुआती अवस्था में ही पहचान हो सकती है।
इसे भी पढ़ें: बार-बार भूख लगना क्या इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत है? जानें किन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
साल 2016 में Dermatology and Therapy में प्रकाशित रिव्यू के अनुसार, इंसुलिन रेजिस्टेंस मोटापा और डायबिटीज का एक मुख्य कारण है, जो बीमारी के लक्षण दिखने से कई साल पहले ही शुरू हो जाता है। लैब टेस्ट के जरिए इसका सटीक पता लगाना काफी मुश्किल होता है। ऐसे में, स्किन पर दिखने वाले बदलाव इसे पहचानने का एक आसान तरीका हैं। डॉक्टरों को स्किन के इन लक्षणों को देखकर मरीज के छिपे हुए खतरे को भांपना चाहिए। उन्हें मरीज की जांच करनी चाहिए और उन्हें सही खान-पान, नियमित एक्सरसाइज, वजन घटाने और धूम्रपान छोड़ने की सलाह देनी चाहिए ताकि समय रहते उन्हें डायबिटीज से बचाया जा सके।

इंसुलिन रेजिस्टेंस को कैसे कंट्रोल कर सकते हैं?
डॉ. जयादित्य घोष के अनुसार, लाइफस्टाइल में सुधार इंसुलिन रेजिस्टेंस को कंट्रोल करने का सबसे प्रभावी तरीका है। रोजाना कम से कम 30-40 मिनट एक्सरसाइज करें, वजन को कंट्रोल रखें, फाइबर और प्रोटीन से भरपूर बैलेंस डाइट लें तथा शुगर ड्रिंक्स, प्रोसेस्ड फूड और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का सेवन कम करें। पर्याप्त नींद लेना और तनाव को कंट्रोल रखना भी इंसुलिन के फंक्शन को बेहतर बनाने में मदद करता है। यदि जरूरत हो तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं का सेवन भी किया जा सकता है।
निष्कर्ष
स्किन हमारे शरीर के अंदर होने वाले कई बदलावों का आईना होती है। यदि गर्दन या बगल की स्किन का रंग गहरा होने लगे, बार-बार स्किन टैग बनने लगें या स्किन में अन्य असामान्य बदलाव दिखाई दें, तो इन्हें केवल कॉस्मेटिक समस्या समझकर नजरअंदाज न करें। डॉ. जयादित्य घोष के अनुसार, समय पर जांच, हेल्दी लाइफस्टाइल और उचित इलाज से इंसुलिन रेजिस्टेंस को कंट्रोल किया जा सकता है और फ्यूचर में होने वाली गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।
All Image Credit- magnific
FAQ
किन लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा ज्यादा होता है?
ज्यादा वजन, पेट का फैट, इनएक्टिव लाइफस्टाइल, PCOS, परिवार में डायबिटीज का इतिहास और अनहेल्दी खानपान वाले लोगों में इसका जोखिम ज्यादा होता है।इंसुलिन रेजिस्टेंस की जांच कैसे होती है?
डॉक्टर की सलाह पर फास्टिंग ब्लड शुगर, HbA1c, फास्टिंग इंसुलिन और अन्य जरूरी जांच कराई जा सकती हैं।
इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।
How we keep this article up to date:
We work with experts and keep a close eye on the latest in health and wellness. Whenever there is a new research or helpful information, we update our articles with accurate and useful advice.
-
Current Version
Jul 16, 2026 15:27 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Jayaditya Ghosh