Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Purendra Bhasin , Ophthalmologist

डायबिटिक के कारण आंखों को होने वाले नुकसान से बचना है, तो करें ये 10 काम

डायबिटीज मरीजों के घटते-बढ़ते ब्लड शुगर के कारण आंखों पर बहुत तेजी से असर पड़ता है, लेकिन अगर समय रहते मरीज अपने लाइफस्टाइल में ये 10 बदलाव कर लें, तो आंखों को बीमारियों से बचाया जा सकता है। अगर आप भी डायबिटीज रोगी है, तो यह लेख खास आपके लिए है। 

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डायबिटीज की बीमारी में अगर मरीज का ब्लड शुगर कंट्रोल में न रहे, तो आंखों पर इसका असर पड़ता है। लगातार हाई ब्लड शुगर के कारण आंखों के रेटिना के ब्लड वेसल्स को नुकसान होने लगता है। इस वजह से आंखों से जुड़ी बीमारियां और आंखों की रोशनी कम हो सकती है। इस कंडीशन को डायबिटिक रेटिनोपैथी कहते हैं। वैसे तो इस कंडीशन से बचाव के लिए डायबिटीज में ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखना जरूरी है, लेकिन अगर लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव कर लिए जाए, तो भी आंखों को काफी हद तक बचाया जा सकता है। इस बारे में हमने Dr. Purendra Bhasin, Ophthalmologist, Founder & Director, Ratan Jyoti Netralaya, MP से बात की।

डायबिटिक रेटिनोपैथी से होने वाले नुकसान से बचाव

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, साल 1990 में दुनियाभर में डायबिटीज के मामले 20 करोड़ थे, जो साल 2022 में बढ़कर 83 करोड़ तक पहुंच गए हैं। इससे पता चलता है कि दुनिया में डायबिटीज के मामले कितनी तेजी से बढ़ रहे हैं। इसलिए डायबिटीज से आंखों को होने वाले नुकसान से बचाव करना बहुत जरूरी है। इस बारे में Dr. Purendra Bhasin ने कहा कि आंखों को बीमारियों से बचाने के लिए रोजाना की आदतों में सुधार करना जरूरी है।

1. ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखना जरूरी

Dr. Purendra Bhasin के मुताबिक, “डायबिटिक रेटिनोपैथी से बचने का सबसे असरदार तरीका ब्लड शुगर को कंट्रोल में रखना है। इसके लिए रेगुलर ब्लड शुगर मॉनीटर करना जरूरी है और जब भी डॉक्टर HbA1c टेस्ट की सलाह देते हैं, तो इस टेस्ट को जरूर कराएं। इससे ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव की पूरी जानकारी मिलती है और इसी के आधार पर दवाओं में बदलाव भी किए जा सकते हैं।”

2. ब्लड प्रेशर को चेक करना जरूरी

National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK) के अनुसार, ब्लड शुगर के साथ ब्लड प्रेशर को भी सामान्य रखना जरूरी है, क्योंकि ब्लड प्रेशर के कारण आंखों के ब्लड वेसल्स पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और अगर दोनों एक साथ हो, तो रेटिनोपैथी तेजी से बढ़ सकती है। इसलिए डायबिटीज रोगियों को बीपी मॉनिटर करते रहना चाहिए।

3. साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच कराएं

Dr. Purendra Bhasin ने कहा, “डायबिटीज के मरीजों को साल में एक बार आंखों का चेकअप जरूर कराना चाहिए। इस चेकअप में मरीज की आंखों की पुतलियों को फैलाकर रेटिना की जांच की जाती है। अगर मरीज को पहले से ही रेटिनोपैथी, प्रेग्नेंसी या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, तो मरीज की कंडीशन को देखते हुए इस चेकअप को साल में एक से ज्यादा बार कराने की भी सलाह दी जा सकती है। आमतौर पर लोग सिर्फ चश्मे का नंबर बदलवा लेते हैं, लेकिन डायबिटीज के मरीजों की रेटिना का चेकअप करना जरूरी है।”

diabetic retinopathy precautions

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4. कोलेस्ट्रॉल पर रखें नजर

NIDDK के अनुसार, डायबिटीज के मरीजों को कोलेस्ट्रॉल का रेगुलर चेकअप कराना चाहिए, क्योंकि खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL बढ़ने पर रेटिना में फैट जमा हो सकता है और इससे सूजन बढ़ सकती है। इसलिए शरीर में कोलेस्ट्रॉल न बढ़ने दें। इसे कंट्रोल में रखने के लिए बैलेंस्ड डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और दवाओं को समय पर लें।

5. दवाएं या इंसुलिन खुद से बंद करना हो सकता है खतरनाक

Dr. Purendra Bhasin कहते हैं, “मेरे पास कई मरीज ऐसे आते हैं, जो बताते हैं कि उनका ब्लड शुगर नॉर्मल आ रहा था, तो इंसुलिन या दवाएं लेना छोड़ दिया। मैं डायबिटीज मरीजों को सलाह दूंगा कि ऐसा करना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि अचानक ब्लड शुगर बढ़ने पर आंखों की ब्लड वेसल्स को तेजी से नुकसान हो सकता है। दवाएं या इंसुलिन ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करते हैं। इसलिए बिना डॉक्टर से पूछे किसी भी तरह की दवा या इंसुलिन बंद न करें।”

6. हेल्दी और बैलेंस्ड डाइट लें

Dr. Purendra Bhasin ने बताया कि आंखों को सेहतमंद रखने के लिए डायबिटीज मरीजों को अपनी डाइट पर खास ध्यान देना चाहिए। डाइट में मौसमी फल और सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, प्रोटीन और हेल्दी फैट लें। इसके अलावा, मीठे और कार्बोनेटिड ड्रिंक्स, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, तले हुए फूड्स और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का इस्तेमाल कम से कम करें। डाइट को बेहतर तरीके से लेने के लिए एक्सपर्ट की सलाह ली जा सकती है, क्योंकि डायबिटीज मरीजों की डाइट ब्लड शुगर को कंट्रोल कर सकती है, जिसका आंखों में प्रेशर कम पड़ सकता है।

7. रेगुलर फिजिकल एक्टिविटीज करें

Dr. Purendra Bhasin के अनुसार, डायबिटीज मरीजों को फिजिकल एक्टिविटीज करना बहुत जरूरी है। अगर एक्सरसाइज करना मुश्किल है, तो रोजाना कम से कम 30 से 45 मिनट वॉक जरूर करें। डॉक्टर ने जो भी एक्सरसाइज बताई है, उसे रोज करें। इससे ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने में मदद मिलती है। अगर किसी मरीज को गंभीर डायबिटिक रेटिनोपैथी या आंख के अंदर ब्लीडिंग की समस्या है, तो किसी भी एक्सरसाइज को करने से पहले आंखों के एक्सपर्ट से जरूर सलाह लें।

8. स्मोकिंग और तंबाकू से पूरी तरह से परहेज करें

Dr. Purendra Bhasin ने कहा, “स्मोकिंग या तंबाकू शरीर के ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाता है और इस वजह से शरीर में ऑक्सीजन पर असर पड़ता है। अगर डायबिटीज मरीजों में स्मोकिंग की वजह से ऑक्सीजन की कमी होती है, तो आंखों की ब्लड वेसल्स को तेजी से नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए मैं सलाह दूंगा कि अगर किसी को भी अपनी आंखों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना है, तो सबसे जरूरी है कि स्मोकिंग और तंबाकू बिल्कुल छोड़ दें।”

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9. प्रेग्नेंसी में आंखों का चेकअप कराना जरूर

Dr. Purendra Bhasin के मुताबिक, अगर किसी महिला को पहले से डायबिटीज है या फिर प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज हो गई है, तो उन महिलाओं को आंखों का चेकअप जरूर कराना चाहिए, क्योंकि प्रेग्नेंसी में डायबिटिक रेटिनोपैथी तेजी से बढ़ सकती है। इसलिए डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान रेगुलर आंखों का चेकअप कराते रहना बहुत जरूरी है।

10. आंखों में होने वाले किसी भी बदलाव को न करें इग्नोर

Dr. Purendra Bhasin का कहना है, “मैंने डायबिटीज रोगियों में देखा है कि वे आंखों से जुड़े बदलावों को बहुत हल्के में लेते हैं, जो बीमारी को गंभीर कर सकता है। इसलिए अगर डायबिटीज मरीजों को अचानक धुंधला दिखे, आंखों के सामने काले धब्बे नजर आए या रंग फीके दिखने लगें, तो तुरंत डॉक्टर को जरूर दिखाएं। ये लक्षण रेटिना में ब्लीडिंग या गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकते हैं। अगर इन बदलावों की पहचान करके मरीज समय पर डॉक्टर से सलाह लेते हैं, तो मरीज की आंखों की रोशनी को काफी हद तक बचाया जा सकता है।”

निष्कर्ष
Dr. Purendra Bhasin डायबिटीज मरीजों को सलाह देते हैं कि उन्हें ब्लड शुगर के साथ-साथ ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल पर भी ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा, स्मोकिंग, तंबाकू या शराब जैसी चीजों को बिल्कुल छोड़ दें। बैलेंस्ड डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और समय पर दवाएं लेकर डायबिटिक रेटिनोपैथी से बचा जा सकता है या इसके खतरे को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। डायबिटीज के मरीज आंखों का चेकअप आई स्पेशलिस्ट से जरूर कराएं।


All Image Credit: Magnific 

FAQ

  • स्क्रीन टाइम का डायबिटीज के मरीजों की आंखों पर क्या असर पड़ता है?

    स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट और लगातार स्क्रीन को देखने से आंखें सूखी हो जाती हैं। डायबिटीज के मरीजों में कॉर्निया की संवेदनशीलता वैसे ही कम होती है, जिससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। काम करते समय हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखने का 20-20-20 नियम अपनाएं।
  • क्या बहुत भारी वजन उठाने से रेटिना में ब्लीडिंग हो सकती है?

    अगर किसी मरीज को पहले से ही प्रोलिफेरेटिव डायबिटिक रेटिनोपैथी है। इस बीमारी में आंख में नई और कमजोर नसें बन जाती हैं, तो बहुत भारी वजन उठाने, सांस रोककर जोर लगाने या जिम में भारी स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने से आंखों के अंदर का दबाव अचानक बढ़ सकता है। इससे वे कमजोर नसें फट सकती हैं और आंख के अंदर खून भर सकता है। ऐसे मरीजों को हल्की एक्सरसाइज करनी चाहिए।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Jul 16, 2026 14:28 IST

    Modified By : Aneesh Rawat
  • Jul 16, 2026 14:28 IST

    Published By : Aneesh Rawat
    Reviewed By : Dr Purendra Bhasin

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