आमतौर डायबिटीज के मरीज इस बीमारी को किडनी या हार्ट से जोड़कर देखते हैं, लेकिन आंखों में हो रहे बदलावों को नजरअंदाज कर देते हैं। इसलिए जिन लोगों को लंबे समय से डायबिटीज की समस्या है, उन्हें आंखों से जुड़े लक्षणों पर भी ध्यान देना चाहिए। डायबिटीज के कारण आंखों को कैसे नुकसान पहुंचता है? यह जानने के लिए हमने Dr. Purendra Bhasin, Ophthalmologist, Founder & Director, Ratan Jyoti Netralaya, MP से बात की। उन्होंने बताया कि बहुत समय से ब्लड शुगर का कंट्रोल न होना आंखों की नसों को नुकसान पहुंचाने लगता है।
डायबिटीज से आंखों को नुकसान होने का कारण
Dr. Purendra Bhasin कहते हैं, “जिन लोगों का ब्लड शुगर कंट्रोल में नहीं रहता, उनकी आंखों की बहुत ही बारीक ब्लड वेसल्स पर असर पड़ने लगता है। इससे धीरे-धीरे देखने की क्षमता कमजोर होने लगती है और अगर समय पर इलाज न कराया जाए, तो हमेशा के लिए आंखों की रोशनी भी जा सकती है। डायबिटीज के कारण होने वाले आंखों के नुकसान को डायबिटिक रेटिनोपैथी (Diabetic Retinopathy) कहा जाता है। दरअसल, आंखों के पिछले हिस्से में मौजूद रेटिना की परत रोशनी को पहचानकर दिमाग को मैसेज देती है। जिन लोगों का ब्लड शुगर कंट्रोल में नहीं होता, तो रेटिना की छोटी-छोटी ब्लड वेसल्स कमजोर होने लगती हैं। इससे आंखों में सूजन, ब्लड लीकेज या असामान्य ब्लड वेसल्स बनने लगती हैं, जो आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए इसके लक्षणों की पहचान करना जरूरी है।”
डायबिटिक रेटिनोपैथी के शुरुआती लक्षण
Dr. Purendra Bhasin के मुताबिक, “डायबिटिक रेटिनोपैथी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती स्टेज में अक्सर मरीज को कोई ज्यादा परेशानी महसूस नहीं होती कि आंखों के अंदर बदलाव शुरू हो चुके हैं। कई बार मरीज आंखों से जुड़ी समस्याओं को इग्नोर भी कर देते है कि यह कुछ समय की समस्या है। इसलिए आंखों का रेगुलर चेकअप कराना बहुत जरूरी है। डायबिटीज के मरीजों को इन लक्षणों पर खास ध्यान देने की जरूरत होती है।”
- धुंधला दिखाई देना
- आंखों के सामने काले धब्बे दिखना
- रंग पहले की तुलना में फीके दिखाई देना
- रात में देखने में मुश्किल होना
- अचानक नजर कम होना
- रोशनी के आसपास चमक या फ्लैश दिखाई देना

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डायबिटिक रेटिनोपैथी के स्टेज
CDC के अनुसार, यह बीमारी दो स्टेज में बढ़ती है। शुरुआती स्टेज में डायबिटीज के मरीजों की आंखों की नसें कमजोर हो सकती हैं और आंखों के बाहर की तरफ छोटे-छोटे पाउच बन सकते हैं। इन उभरी हुई थैलियों में सूजन आ सकती है। वहीं एडवांस स्टेज में आंखें खुद को बचाने की कोशिश करती है । जब रेटिना में ब्लड फ्लो सही नहीं हो पाता, तो नई ब्लड वेसल्स बनने लगती है, जो बहुत ही कमजोर होती है और आसानी से टूटने लगती है। िससे आंखों के अंदर ब्लीडिंग हो सकती है। अगर ब्लीडिंग की वजह से आंखों के आगे अंधेरा छा जाए, तो आंखों की रोशनी पूरी तरह से जा सकती है।
क्या डायबिटीज सिर्फ रेटिना पर ही असर डाल सकती है?
Dr. Purendra Bhasin कहते हैं, “आमतौर पर लोग यही सवाल लेकर भी आते हैं कि डायबिटीज से आंखों की रोशनी पर ही असर पड़ता है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। डायबिटीज के मरीजों को कम उम्र में मोतियाबिंद, काला मोतिया होने का रिस्क बढ़ सकता है। आंखों में इंफेक्शन होना और जख्म होने जैसी समस्याएं भी हो सकती है। इसलिए अगर किसी मरीज को धुंधला दिखाई दे रहा है, तो सिर्फ आंखों का चश्मा न बदलें, बल्कि डॉक्टर को दिखाकर आंखों की जांच कराएं।”
American Diabetes Association के अनुसार, जिन डायबिटीज मरीजों का ब्लड शुगर बढ़ा रहता है, उनकी आंखों की बनावट में बदलाव आ सकता है। यह बदलाव मोतियाबिंद के प्रोसेस को तेज कर देता है। हालांकि, शुरुआती दौर में मोतियाबिंद का पता न चल सके, लेकिन एक बार लेंस के बीच में धुंधलापन आने लगता है, तो मोतियाबिंद बहुत तेजी से बढ़ने लगता है।
आंखों की जांच कब करानी चाहिए?
Dr. Purendra Bhasin का मानना है कि जिन लोगों को पहली बार डायबिटीज होने का पता चलता है, उन्हें जल्द से जल्द आंखों की जांच करानी चाहिए। डॉक्टर आंखों की पुतलियों को फैलाकर रेटिना को चेक करते हैं और अगर डॉक्टर को लगता है, तो मरीज को रेटिना फोटोग्राफी, ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी या फ्लोरोसिन एंजियोग्राफी कराने की सलाह दी जा सकती है।
डायबिटीज के मरीजों की आंखों का इलाज कैसे किया जा सकता है?
Dr. Purendra Bhasin के अनुसार, अगर डायबिटीक रेटिनोपैथी का समय रहते पता चल जाता है, तो मरीज की कंडीशन के अनुसार ही इलाज किया जाता है। इसमें आंखों में Anti-VEGF इंजेक्शन, लेजर थेरेपी, स्टेरॉयड इंजेक्शन या विट्रेक्टॉमी सर्जरी जैसे इलाज किए जा सकते हैं, लेकिन इलाज की सलाह मरीज की आंखों की कंडीशन को देखकर ही लिया जा सकता है।”
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निष्कर्ष
Dr. Purendra Bhasin डायबिटीज मरीजों को सलाह देते हैं कि उन्हें आंखों में किसी तरह के बड़े बदलाव का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि रेगुलर आंखों का चेकअप कराते रहना चाहिए, ताकि समय पर आंखों की बीमारी का पता चल सके और इलाज हो सके।
FAQ
क्या इलाज कराने से आंखों की रोशनी पूरी तरह पहले जैसी हो सकती है?
नहीं, डायबिटिक रेटिनोपैथी का इलाज खोई हुई रोशनी को पूरी तरह वापस लाने के लिए नहीं, बल्कि बची हुई रोशनी को और ज्यादा खराब होने या अंधेपन से बचाने के लिए किया जाता है।क्या आंखों में लगने वाले एंटी-वीईजीएफ (Anti-VEGF) इंजेक्शन दर्दनाक होते हैं?
मरीज अक्सर आंख में सुई या इंजेक्शन का नाम सुनकर डर जाते हैं, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी तरह दर्द रहित होती है। इंजेक्शन लगाने से पहले डॉक्टर आंख में बेहद असरदार एनेस्थेटिक ड्रॉप्स डालते हैं। इसके बाद पूरी तरह सुन्न आंख के सफेद हिस्से में एक बेहद बारीक सुई से दवा डाली जाती है। इसमें मात्र कुछ सेकंड लगते हैं और मरीज को सिर्फ हल्का सा दबाव महसूस होता है।
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Jul 15, 2026 20:54 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Purendra Bhasin