Fri Oct 23, 2026 | 03:37 AM IST

महिलाओं और पुरुषों पर अलग होता है डायबिटीज का असर, नई स्टडी में सामने आए हार्ट, किडनी और मेंटल हेल्थ के खतरे

टाइप 2 डायबिटीज होने पर महिलाएं और पुरुष सिर्फ ब्लड शुगर कंट्रोल करते हैं, लेकिन शायद कोई नहीं सोचता कि इसका असर महिलाओं और पुरुषों पर अलग-अलग हो सकता है। हालिया स्टडी ने खुलासा किया है कि डायबिटीज का असर महिलाओं और पुरुषों दोनों पर अलग-अलग हो सकता है। 
महिलाओं और पुरुषों पर अलग होता है डायबिटीज का असर, नई स्टडी में सामने आए हार्ट, किडनी और मेंटल हेल्थ के खतरेमहिलाओं और पुरुषों पर अलग होता है डायबिटीज का असर, नई स्टडी में सामने आए हार्ट, किडनी और मेंटल हेल्थ के खतरे

टाइप 2 डायबिटीज में अगर ब्लड शुगर लंबे समय तक कंट्रोल न हो, तो इसका असर हार्ट, किडनी, आंखों और स्किन पर पड़ सकता है। कुछ लोगों को मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं भी हो सकती है। आमतौर पर लोग सोचते हैं कि डायबिटीज का असर महिलाओं और पुरुषों पर एक जैसा ही पड़ सकता है, लेकिन हाल ही में हुई स्टडी में दावा किया है कि महिलाओं और पुरुषों में डायबिटीज का असर अलग-अलग होता है।

क्या कहती है स्टडी?

PLOS Medicine में प्रकाशित स्टडी UK Clinical Practice Research Datalink (CPRD GOLD) के हेल्थ रिकॉर्ड्स पर आधारित है। इसमें साल 2010 से लेकर 2020 के बीच नए टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित 28,720 लोगों को शामिल किया गया। इसमें शामिल डायबिटीज लोगों को बाद में हाइपरटेंशन, दिल से जुड़ी बीमारियां, किडनी की गंभीर बीमारियां और मेंटल हेल्थ जैसी समस्याओं के आधार पर फॉलो किया गया।

डायबिटीज पीड़ित महिलाओं में मेंटल हेल्थ का रिस्क ज्यादा

स्टडी में बताया गया कि जिन महिलाओं को डायबिटीज की समस्या थी, उनमें मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं ज्यादा देखने को मिली है। महिलाओं में मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं का आंकड़ा 8.1% था, तो वहीं पुरुषों में यह आंकड़ा 5.3% था।

  • इस कैटेगरी में एंग्जायटी, डिप्रेशन और कुछ सोमेटोफॉर्म डिस्ऑर्डर शामिल थे, लेकिन इसका यह मतलब कतई नहीं है कि हर महिला को डायबिटीज के बाद डिप्रेशन या एंग्जयाटी होगी ही।
  • स्टडी में बताया गया है कि महिलाओं की ऐसी कंडीशन पुरुषों के मुकाबले ज्यादा देखी गई थी। हालांकि, रिसर्च में माना गया है कि महिलाएं जल्दी चेकअप कराती हैं, तो उनके मेंटल हेल्थ के लक्षण जल्दी पहचाने जा सकते हैं।

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डायबिटीज पीड़ित पुरुषों में हार्ट और किडनी का रिस्क ज्यादा

स्टडी में पाया गया है कि पुरुषों में हार्ट और किडनी से जुड़ी बीमारियां महिलाओं की तुलना में ज्यादा होती है। पुरुषों में यह 8.4% देखा गया, तो महिलाओं में यह 5.3% था। इसमें कोरोनेरी हार्ट डिजीज, हार्ट फेल्यिर, सीरीब्रोवास्कुलर डिजीज, एटरियल फिब्रिलेशन और पेरिफरल आर्टरी डिजीज शामिल थी।

इस स्टडी में बताया गया है कि पुरुषों में डायबिटीज का पता चलने के बाद हार्ट और किडनी की मॉनिटरिंग लगातार होती रही चाहिए, ताकि समस्या की समय रहते पहचान हो सके।

दोनों में कॉमन कौन-सी बीमारी थी?

स्टडी के मुताबिक, डायबिटीज रोगियों में हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या सबसे ज्यादा आम थी। जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या थी, चाहे वे किसी भी उम्र के थे और महिला व पुरुषों सभी में देखी गई है। पुरुषों में हाइपरटेंशन 21.1% थी, जबकि महिलाओं में यह 20.2% था। इसलिए डायबिटीज होने पर फास्टिंग शुगर या HbA1c के साथ-साथ ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और किडनी फंक्शन का भी चेकअप कराना जरूरी है।

डायबिटीज पीड़ितों में मेंटल हेल्थ के साथ मृत्यु दर का रिस्क ज्यादा

स्टडी में रिसर्चर्स ने यह भी पाया है कि जिन पुरुषों और महिलाओं में डायबिटीज के साथ मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं होती है, उनमें प्रिमैच्योर मृत्यु दर का पैटर्न देखा गया। यह तथ्य इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि आमतौर पर डायबिटीज और मेंटल हेल्थ को अलग-अलग समस्या के तौर पर देखा जाता है, जबकि लंबे समय तक डायबिटीज मैनेज करने का स्ट्रेस, लाइफस्टाइल बदलाव, आर्थिक परेशानी, विभिन्न बीमारियां होने का खतरा और पहले से मौजूद एंग्जायटी या डिप्रेशन एक-दूसरे को प्रभावित कर सकते हैं।

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निष्कर्ष
इस स्टडी से यह सामने आया है कि डायबिटीज के रोगियों को सिर्फ ब्लड शुगर कंट्रोल तक सीमित नहीं रहना है। महिलाओं को डायबिटीज के साथ एंग्जायटी, डिप्रेशन और दूसरे मेंटल हेल्थ के लक्षणों पर भी ध्यान देना चाहिए, वहीं पुरुषों को ब्लड प्रेशर, हार्ट हेल्थ और किडनी फंक्शन की रेगुलर जांच करानी चाहिए। इसके अलावा, रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी, पर्याप्त नींद, स्मोकिंग से दूरी और डॉक्टर की सलाह पर दवाओं को सही तरीके से लेने से अन्य बीमारियों के रिस्क को कम करने में मदद मिल सकती है।

FAQ

  • क्या डायबिटीज से होने वाले न्यूरोपैथी के लक्षण महिलाओं और पुरुषों में अलग होते हैं?

    पुरुषों में न्यूरोपैथी का असर पहले पैरों की उंगलियों में सुन्नपन और जलन के रूप में दिखता है, जबकि महिलाओं में ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी (जैसे पाचन में गड़बड़ी, ब्लैडर कंट्रोल खोना, और ड्राई स्किन) के लक्षण अधिक प्रमुख होते हैं।
  • महिलाओं में डायबिटीज होने पर इंफेक्शन का खतरा पुरुषों से ज्यादा क्यों होता है?

    हाई ब्लड शुगर के कारण महिलाओं में वजाइनल यीस्ट इंफेक्शन और यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) बार-बार होता है। बढ़ा हुआ शुगर लेवल बैक्टीरिया और फंगस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बनाता है।

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Aneesh Rawat

Health & Lifestyle Journalist

अनीश रावत पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से 3 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में चीफ सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यहां वह महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, योग और मेडिटेशन जैसे विषयों पर शोध आधारित लेख लिखते हैं। उनका फोकस स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को डेटा, रिसर्च और विशेषज्ञों की राय के आधार पर पाठकों तक पहुंचाना है। जिन लेखों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। OnlyMyHealth से पहले वह News 24, All India Radio और ThinkRight Meditation App के साथ काम कर चुके हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Aug 31, 2026 19:49 IST

    Published By : Aneesh Rawat