लाइफस्टाइल में बदलाव होने के कारण पुरुषों में फैटी लिवर, डायबिटीज और हार्ट की समस्याएं देखने को ज्यादा मिल रही है। एक दशक पहले तक इन बीमारियों को उम्र से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब यह बीमारियां 30 से 40 उम्र के पुरुषों में भी हो रही है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह तीनों ही बीमारियां एक दूसरे से जुड़ी हुई है। जैसे अगर किसी को फैटी लिवर की समस्या है, तो उसे टाइप 2 डायबिटीज होने का रिस्क बढ़ सकता है। इस बारे में हमने Dr. Vineet Malhotra, Head of Urology, VNA Hospital, Delhi से बात की। उन्होंने बताया कि फैटी लिवर, डायबिटीज और हार्ट डिजीज मिलकर जो कंडीशन बनाते हैं, उसे मेटाबोलिक सिंड्रोम कहा जाता है। इसे डेडली मेटाबोलिक ट्रायंगल भी कहते हैं। इसका मतलब है कि इन तीनों बीमारियों की जड़ एक जैसी होती है और यह एक दूसरे को लगातार बढ़ाती रहती है।
फैटी लिवर, डायबिटीज और हार्ट डिजीज का आपस में क्या कनेक्शन है?
Dr. Vineet Malhotra कहते हैं, “फैटी लिवर में लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा फैट जमा हो जाता है। कुछ लोगों को यह समस्या बहुत ज्यादा शराब पीने के कारण होती है, तो कुछ को लाइफस्टाइल में बदलाव के कारण होती है। हालांकि, शुरुआती स्टेज पर फैटी लिवर के लक्षणों की पहचान नहीं हो पाती, इसलिए लोगों को इस बीमारी के बारे में पता ही नहीं चलता। कुछ ऐसा डायबिटीज में भी होता है। कुछ लोगों को फैमिली हिस्ट्री की वजह से डायबिटीज का रिस्क रहता है, तो कुछ लोगों को खानपान और लाइफस्टाइल में होने वाले बदलावों के कारण टाइप 2 डायबिटीज होने का खतरा बना रहता है। इन तीनों ही बीमारियों की शुरुआत इंसुलिन रेजिस्टेंस से होती है।”
Dr. Vineet Malhotra आगे बताते हैं, “जब शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो ब्लड शुगर बढ़ने लगती है और इससे टाइप 2 डायबिटीज का रिस्क बढ़ जाता है और यही शुगर और कार्बोहाइड्रेट फैट में बदलकर लिवर में जमा होने लगते हैं, जिससे फैटी लिवर होने लगता है। फैटी लिवर सिर्फ लिवर तक सीमित नहीं रहता और फैट जमा होने से लिवर शरीर में सूजन बढ़ाने वाले प्रोटीन छोड़ता है, जो धमनियों को नुकसान पहुंचा सकता है। धमनियों में प्लाक बनने से हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए फैटी लिवर में सिर्फ लिवर का इलाज न कराएं, बल्कि हार्ट और ब्लड शुगर का भी रेगुलर चेकअप रखें।”

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पुरुषों में ये रिस्क ज्यादा क्यों होता है?
Dr. Vineet Malhotra के मुताबिक, “पुरुषों में अक्सर फैट पेट के आसपास जमा होता है, जिसे विसरल फैट कहते हैं। यह फैट सीधे तौर पर लिवर और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है। विसरल फैट लगातार फैटी एसिड्स को लिवर तक पहुंचाती है, जिससे फैटी लिवर और इंसुलिन रेजिस्टेंस दोनों का खतरा बढ़ जाता है। इसके साथ ही यह शरीर में सूजन बढ़ाकर हार्ट डिजीज की संभावना भी बढ़ा देती है। अगर पुरुष स्मोकिंग, शराब, जंक फूड, मीठे ड्रिंक्स, नींद की कमी और फिजिकल एक्टिविटी कम करने से यह खतरा कई गुना बढ़ सकता है।”
किन लक्षणों को न करें इग्नोर
Dr. Vineet Malhotra कहते हैं कि शुरुआती स्टेज में लक्षण बहुत कम दिखाई देते हैं या फिर मरीज इसकी पहचान करने में देर कर देते हैं, लेकिन अगर पुरुषों को लगातार थकान, पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में भारीपन, कमर का बढ़ना, बार-बार प्यास लगना, ज्यादा पेशाब आना, सांस फूलना या सीने में दर्द जैसे संकेत मिलने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। अगर पहले से डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर है, तो लिवर को चेक कराना बहुत जरूरी हो जाता है।
कौन से टेस्ट कराना जरूरी है?
Dr. Vineet Malhotra ने कहा कि जो लोग मोटापे से पीड़ित है, डायबिटीज या हार्ट डिजीज होने का रिस्क है, तो उन्हें कुछ जरूरी चेकअप कराने चाहिए। इसमें लिवर फंक्शन टेस्ट (ALT, AST), फास्टिंग ब्लड शुगर और HbA1c, लिपिड प्रोफाइल, लिवर का अल्ट्रासाउंड और फाइब्रोस्कैन शामिल है।
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निष्कर्ष
Dr.Vineet Malhotra ने कहा कि पुरुषों को अपने वजन कंट्रोल में रखना चाहिए और इसके लिए रोजाना कम से कम 30 से 45 मिनट एक्सरसाइज करनी चाहिए। हालांकि, लोग फैटी लिवर, डायबिटीज और हार्ट की बीमारियों को अलग-अलग मानते हैं, लेकिन ये बीमारियां एक दूसरे के साथ जुड़ी हुई है और मिलकर शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है। पुरुषों में इस तिकड़ी बीमारी के होने का रिस्क ज्यादा होता है, इसलिए पुरुषों को खासतौर पर अपने लाइफस्टाइल में बदलाव करने चाहिए।
FAQ
महिलाओं की तुलना में पुरुषों में यह तिकड़ी कम उम्र में क्यों बन रही है?
इसका मुख्य कारण शारीरिक बनावट और हार्मोन्स का अंतर है। महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन के कारण फैट अक्सर जांघों या कूल्हों पर जमा होता है। लेकिन पुरुषों में फैट सीधे पेट और लिवर के आसपास जमा होता है, जो मेटाबॉलिज्म के लिए सबसे ज्यादा खतरनाक है। इसके अलावा, बहुत ज्यादा स्ट्रेस, स्मोकिंग और शराब का सेवन भी पुरुषों में इसे तेजी से ट्रिगर करता है।क्या शराब न पीने वाले पुरुषों को भी यह फैटी लिवर हो सकता है?
इसे नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) कहते हैं। यह शराब से नहीं, बल्कि अत्यधिक मीठा खाने, कोल्ड ड्रिंक्स (फ्रुक्टोज), मैदे से बनी चीजें और बाहर के जंक फूड (ट्रांस फैट) खाने से होता है। यह लिवर को शराब जितना ही गंभीर नुकसान पहुंचाता है।
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Jul 08, 2026 18:57 IST
Modified By : Aneesh Rawat Jul 08, 2026 18:57 IST
Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Vineet Malhotra