Fri Sep 11, 2026 | 06:55 PM IST

Medically Reviewed by Dr Neeraj Dhamija , Senior Consultant – Laparoscopic, Laser & General Surgery

फैटी लिवर ग्रेड 3 का इलाज क्या है?

ग्रेड 3 फैटी लिवर गंभीर समस्या है, क्योंकि इस कंडीशन में लिवर पर 66% से ज्यादा फैट जमा हो जाता है। इस स्थिति में मरीज के शरीर पर सूजन होने लगती है, स्किन और आंखों में पीलापन आ जाता है। ग्रेड 3 फैटी लिवर का इलाज समय पर होना बहुत जरूरी है ताकि सिरोसिस और लिवर कैंसर की बीमारी से बचा जा सके। 

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लिवर में 5% से कम फैट जमा होना हेल्दी लिवर की कैटेगरी में आता है, लेकिन Gastroenterology & Hepatology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, 66% से ज्यादा फैट जमा होने पर लिवर को ग्रेड 3 फैटी लिवर माना जाता है। यह बहुत ही गंभीर कंडीशन होती है और अगर इसका समय पर इलाज न कराया जाए, तो सिरोसिस और कैंसर जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। फैटी लिवर ग्रेड 3 से जुड़े इलाज के बारे में हमने दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट, लैप्रोस्कोपिक, लेजर और जनरल सर्जन डॉ. नीरज धमीजा से बात की। उन्होंने बताया कि National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK) की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रेड 3 फैटी लिवर का रिस्क आमतौर पर मोटापे से ग्रस्त लोगों, टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या हाई कोलेस्ट्रॉल के मरीजों में ज्यादा हो सकता है। जिन लोगों को इस तरह की दिक्कतें हैं, उन्हें फैटी लिवर के लक्षणों की पहचान करके जल्द से जल्द डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। इसका इलाज दवाओं, लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव करके किया जा सकता है।

कैसे पता चलेगा कि मुझे ग्रेड 3 फैटी लिवर है?

डॉ. नीरज धमीजा कहते हैं कि नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) यानी MASLD के लक्षणों की पहचान करना मुश्किल होता है। हालांकि, Cleveland Clinic के अनुसार, ग्रेड 3 फैटी लिवर के मरीजों को अगर ये लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें डॉक्टर से जल्द से जल्द सलाह लेनी चाहिए।

  1. पेट के ऊपर दाईं तरफ दर्द या पेट भरा हुआ महसूस होना
  2. बहुत ज्यादा थकान लगना
  3. बिना वजह वजन तेजी से कम होना
  4. मतली महसूस होना
  5. हाथ, पैर और टांगों में सूजन दिखाई देना

fatty liver grade 3 treatment by dr dhamija

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ग्रेड 3 फैटी लिवर चेक करने के टेस्ट

इस बारे में डॉ. नीरज धमीजा कहते हैं, “मैं ग्रेड 3 फैटी लिवर के मरीजों का पहले फिजिकल एग्जामिनेशन करता हूं। इसमें मरीज का वजन, बीएमआई, स्किन पर पीलापन और मेडिकल हिस्ट्री शामिल हैं। इसके अलावा, मरीज की उंगलियों, कोहनियों और घुटनों पर डार्क पैच होने जैसे इंसुलिन रेजिस्टेंस लक्षणों की भी जांच करता हूं। अगर ये सब दिखाई देता है, तो मैं कुछ टेस्ट कराने की सलाह देता हूं ताकि ग्रेड 3 फैटी लिवर की समस्या का पता चल सके।”

  1. ब्लड टेस्ट - ब्लड टेस्ट में लिवर एंजाइम्स के लेवल ज्यादा होने पर लिवर की बीमारी का पता चल सकता है। इसके अलावा, FIB-4 या APRI के जरिए चेक किया जाता है कि एडवांस लिवर फाइब्रोसिस तो नहीं है?
  2. अल्ट्रासाउंड - इसके जरिए लिवर की इमेज के जरिए फैट चेक किया जाता है।
  3. सीटी स्कैन - अगर अल्ट्रासाउंड से पता नहीं चलता, तो सीटी स्कैन से लिवर की इमेज ली जाती है।
  4. MRI - कई केस में लिवर के फैट और सूजन के लेवल को जानने के लिए एमआरआई कराने की सलाह दी जाती है।
  5. इलास्टोग्राफी टेस्ट - अगर डॉक्टर को लिवर में अकड़न या कठोरता महसूस होती है, तो वह मरीज को इलास्टोग्राफी टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। अगर लिवर में अकड़न काफी ज्यादा है, तो यह फाइब्रोसिस का लक्षण हो सकता है।
  6. लिवर बायोप्सी - इसके जरिए मरीज के लिवर में यह चेक किया जाता है कि बीमारी किस लेवल तक पहुंच गई है।

फैटी लिवर ग्रेड 3 का कैप स्कोर क्या है?

Ministry of Health and Family Welfare (MoHFW) की रिपोर्ट के अनुसार, अगर मरीज का Controlled
Attenuated Parameter (कैप स्कोर) 280 dB/m से ज्यादा होता है, तो इसे ग्रेड 3 फैटी लिवर की कैटेगरी में रखा जाता है। इस कंडीशन में मरीज को तुरंत डॉक्टर से सलाह लेकर दवा, डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करने की जरूरत होती है। 

फैटी लिवर ग्रेड 3 का इलाज न हो, तो क्या होगा?

फैटी लिवर ग्रेड 3 का समय पर इलाज न होने पर यह हेपाटाइटिस, फाइब्रोसिस और सिरोसिस में बदल सकता है।

  • हेपाटाइटिस - इसमें लिवर में सूजन आने लगती है और सूजन टिश्यू को डैमेज करने लगती है।
  • फाइब्रोसिस - इस कंडीशन में लिवर के टिश्यू क्षतिग्रस्त होने के कारण लिवर में कड़ापन आने लगता है।
  • सिरोसिस - जब हेल्दी टिश्यू की जगह क्षतिग्रस्त टिश्यू होने लगते हैं, तो लिवर फेलियर और लिवर कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

ग्रेड 3 फैटी लिवर का इलाज

डॉ. नीरज धमीजा कहते हैं, “अगर मरीज का वजन बहुत ज्यादा है, तो उसे वजन कम करने की सलाह देता हूं, क्योंकि अगर मरीज 10% वजन भी कम कर लेते हैं, तो इससे भी लिवर का फैट कम होने लगता है। मैं मरीज की कंडीशन और मेडिकल टेस्ट देखकर ही दवाएं देता हूं। हर मरीज की स्थिति एक जैसी नहीं हो सकती, इसलिए दवाएं और उनका डोज भी एक नहीं हो सकता। वैसे भी ग्रेड 3 फैटी लिवर बहुत ही गंभीर कंडीशन होती है, इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी तरह की दवा नहीं लेनी चाहिए। इसके अलावा, अल्कोहोलिक मरीजों को शराब का सेवन बिल्कुल बंद करने की सलाह दी जाती है।”

हालांकि, NIDDK रिपोर्ट में बताया गया है, अगर लोग कुल वजन का 3% से 5% तक वजन कम कर लेते हैं, तो लिवर में जमा फैट कम हो सकता है। अगर लिवर में सूजन और फाइब्रोसिस हो, तो 7% से 10% तक वजन कम करना जरूरी है। इसके साथ रिपोर्ट में ग्रेड 3 फैटी लिवर के मरीजों को कुछ खास बातों का ध्यान रखने की सलाह दी गई है।

  • बैलेंस्ड डाइट लेना और उसके पोर्शन पर कंट्रोल करना जरूरी है।
  • फिजिकल एक्टिव रहने से लिवर में सुधार होता है।
  • किसी भी तरह के सप्लीमेंट्स लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
  • हर्बल उपचार लिवर को डैमेज कर सकते हैं, इसलिए हर्बल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

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क्या ग्रेड 3 फैटी लिवर का आयुर्वेदिक इलाज है?

हरियाणा के सिरसा स्थित रामहंस चैरिटेबल हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉ. श्रेय शर्मा कहते हैं, "ग्रेड 3 फैटी लिवर के इलाज में आहार और विहार यानी लाइफस्टाइल में बदलाव करना जरूरी होता है। चाय, लाल मिर्च और फ्राइड खाना बिल्कुल बंद करने की सलाह दी जाती है। इसके साथ गुरु आहार यानी हैवी मील्स बिल्कुल बंद करने के लिए कहा जाता है। खाने में हल्का भोजन लेना ही फायदेमंद होता है। आयुर्वेद के अनुसार, ग्रेड 3 फैटी लिवर में त्रिफला बहुत असरदार माना गया है। इसके अलावा, भूम्यामलकी और गिलोय का इस्तेमाल भी फैटी लिवर में किया जा सकता है।"

Frontiers in Pharmacology में प्रकाशित रिसर्च लेख के मुताबिक, त्रिफला तीनों फलों से मिलकर बना है, जिसमें आंवला, बहेड़ा और हरड़ शामिल होते हैं। इस स्टडी को चूहों के समूह पर किया गया था, क्योंकि चूहों में इंसानी लिवर की बीमारियों जैसे लक्षण होते हैं। इस स्टडी में जिन चूहों को त्रिफला दिया गया, उनके लिवर एंजाइम्स कम हुए और उनके लिवर के सेल्स में सुधार देखा गया। हालांकि, अभी तक इंसानों पर इस तरह की कोई स्टडी नहीं हुई है, लेकिन चूहों पर की गई इस स्टडी में त्रिफला ने लिवर एंजाइम्स जैसे ALT और AST के बढ़ते हुए लेवल को कम किया और नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट्स के लेवल को बढ़ाया था। यह ध्यान रखें कि आयुर्वेदिक इलाज को पारंपरिक मेडिकल इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

ग्रेड 3 फैटी लिवर के मरीजों की डाइट क्या होनी चाहिए?

ग्रेड 3 फैटी लिवर के मरीजों के लिए डाइट बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल की चीफ डाइटिशियन मीना कुमारी ने मरीजों को कुछ खास टिप्स दिए हैं।

  1. डाइट में साबुत अनाज, ओट्स, जौ, ब्राउन राइस, हरी सब्जियां, सलाद और मौसमी फल जरूर शामिल करने चाहिए। इनमें फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो लिवर में जमा फैट को कम करने में मदद कर सकते हैं।
  2. दालें, पनीर, दही, अंकुरित अनाज, सोया और अंडे जैसे प्रोटीन से भरपूर आहार लेना चाहिए, क्योंकि प्रोटीन लिवर को रिपेयर करने में मदद कर सकता है।
  3. अखरोट, अलसी, चिया सीड्स और ऑलिव ऑयल को सीमित मात्रा में शामिल किया जा सकता है। इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड लिवर की सूजन को कम करने में मदद कर सकता है।
  4. नमक कम से कम लेना चाहिए। Food Science & Nutritionमें प्रकाशित रिव्यू रिपोर्ट के मुताबिक, लोग खाने में सबसे ज्यादा नमक लेते हैं, उनमें NAFLD (नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज) होने का खतरा 60% ज्यादा पाया गया है।
  5. रेड मीट और प्रोसेस्ड मीट से बचना चाहिए।
  6. चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट जैसे कि मिठाइयां, कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस, मैदा से बनी चीजें और तले-भुने खाने से बचना चाहिए।
  7. शराब बिल्कुल नहीं पीनी चाहिए।

fatty liver grade 3 treatment

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ग्रेड 3 फैटी लिवर के मरीजों का लाइफस्टाइल कैसा होना चाहिए?

इस बारे में भी चीफ डाइटिशियन मीना कुमारी ने बताया कि ग्रेड 3 फैटी लिवर को सिर्फ दवाओं से नहीं, बल्कि डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करके कंट्रोल किया जा सकता है।

  1. रोजाना मरीजों को कम से कम 30 से 45 मिनट तेज वॉक करनी चाहिए। इसके अलावा, साइकिलिंग या एरोबिक एक्सरसाइज लिवर में जमा फैट को कम करने में मदद कर सकती है।
  2. वजन कम करना बहुत जरूरी है। इसलिए मरीजों को अपना डाइट प्लान एक्सपर्ट से जरूर बनवाना चाहिए।
  3. नींद पूरी करना जरूरी है। इसलिए रोजाना सात से आठ घंटे की नींद जरूर लें।
  4. स्ट्रेस मैनेज करने के लिए मेडिटेशन और योग करना चाहिए।

फैटी लिवर ग्रेड 3 की रिकवरी कितने समय में हो सकती है?

फैटी लिवर ग्रेड 3 की रिकवरी काफी हद तक मरीज की कंडीशन पर निर्भर करती है। ग्रेड 3 में मरीज के लिवर पर 66 फीसदी से ज्यादा फैट जमा हो चुका होता है, ऐसे में मरीज की रिकवरी इस बात पर निर्भर करती है कि उसे दवाएं कितनी तेजी से असर कर रही हैं और उसके लाइफस्टाइल एवं डाइट में कितना बदलाव आया है। रिकवरी इन सभी बातों को ध्यान में रखकर हो सकती है।

क्या ग्रेड 3 फैटी लिवर को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है?

इस बारे में डॉ. नीरज धमीजा कहते हैं, “लिवर की खासियत है कि अगर लाइफस्टाइल और खानपान में बदलाव किया जाए, तो यह खुद ही रिपेयर होने लगता है। वैसे तो ग्रेड 3 फैटी लिवर गंभीर स्थिति होती है, लेकिन मरीज इसे काफी हद तक कंट्रोल कर सकते हैं। इसके लिए मरीज को अपनी डाइट और फिजिकल एक्टिविटी पर रेगुलर ध्यान देना होगा। साथ ही, डॉक्टर की बताई सभी दवाओं को सही डोज के साथ रेगुलर लेना महत्वपूर्ण है।”

डॉक्टर को कब दिखाएं?

डॉ. नीरज कहते हैं, “ग्रेड 3 फैटी लिवर में मरीजों को पेट में भारीपन और हाथ-पैरों में सूजन दिखने लगती है। थकान या भूख न लगे और सारा दिन मतली महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।”

निष्कर्ष

ग्रेड 3 फैटी लिवर जैसी गंभीर बीमारी को इग्नोर करना जानलेवा हो सकता है। इस कंडीशन में तुरंत डॉक्टर की सलाह लेकर दवाएं शुरू कर देनी चाहिए। इसके साथ मरीज को बैलेंस्ड डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करने की जरूरत होती है। इस कंडीशन में अगर छोटी सी लापरवाही भी लिवर को परमानेंट नुकसान पहुंचा सकती है। इससे लिवर फाइब्रोसिस, सिरोसिस या लिवर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ सकता है।

FAQ

  • फैटी लिवर का कौन सा ग्रेड खतरनाक होता है?

    फैटी लिवर का ग्रेड 3 सबसे खतरनाक होता है, क्योंकि अगर इस पर ध्यान न दिया जाए, तो लिवर को परमानेंट नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
  • क्या लिवर रोग में खुजली होती है?

    लिवर में हाथों-पैरों में खुजली होना गंभीर लक्षण हो सकता है। अगर लिवर सही से काम नहीं करता, तो शरीर में टॉक्सिन्स और बाइल एसिड जमा होने लगते हैं। इस वजह से रात को हाथ और पैरों में खुजली होने लगती है।
  • क्या ग्रेड 3 फैटी लिवर में एक्सरसाइज करना सुरक्षित है?

    इस कंडीशन में डॉक्टर से सलाह लेकर ही एक्सरसाइज करनी चाहिए। फैटी लिवर ग्रेड 3 में धीमी गति वाली एक्सरसाइज करना फायदेमंद होता है।

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Aneesh Rawat

Aneesh Rawat

Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Modified By : Aneesh Rawat
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