आजकल 20-22 साल के युवा भी फैटी लिवर जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है हमारी खराब लाइफस्टाइल, फिजिकल एक्टिविटी की कमी और बढ़ता वजन। सोशल मीडिया पर फैटी लिवर को कम करने के लिए ग्रीन टी का इस्तेमाल फायदेमंद बताया जाता है लेकिन कभी भी बिना एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह के खुद से इलाज शुरू नहीं करना चाहिए। इस लेख में यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद की कंसल्टेंट मेडिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और हेपेटोलॉजिस्ट, डॉ. सारदा पासंगुलपति से जानिए, क्या ग्रीन टी फैटी लिवर कम कर सकती है?
फैटी लिवर क्या है और क्यों बढ़ रही है यह समस्या?
डॉ. सारदा पासंगुलपति का कहना है कि फैटी लिवर के लिए ग्रीन टी फायदेमंद है या नहीं, यह जानने से पहले इस बात को समझना जरूरी है कि फैटी लिवर क्यों होता है और यह समस्या क्या है। डॉ. सारदा पासंगुलपति बताती हैं कि आज के समय में सबसे ज्यादा नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) जिसे अब मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) कहते हैं के मामले मिलते हैं। पुराने समय में फैटी लिवर की समस्या या लिवर की किसी भी समस्या को शराब से जोड़कर देखा जाता था लेकिन आज के समय में यह समस्या उन लोगों में भी ज्यादा हो रही है जो शराब का सेवन नहीं करते हैं, जिसकी सबसे बड़ी वजह आज की अनहेल्दी लाइफस्टाइल है। लंबे समय तक फैटी लिवर की स्थिति बनी रहने पर लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस और लिवर सिरोसिस तक की समस्या हो सकती है।
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क्या ग्रीन टी फैटी लिवर कम कर सकती है?
डॉ. सारदा पासंगुलपति बताती हैं, ''ग्रीन टी में कई तरह के बायोएक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं जो शरीर और खासतौर पर लिवर के लिए फायदेमंद माने जाते हैं और ये फैटी लिवर की समस्या को भी कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकते हैं।''
- International Journal of Molecular Sciences में साल 2022 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, ''ग्रीन टी में सबसे जरूरी तत्व कैटेचिन्स होते हैं, जिनमें खासतौर पर एपिगैलोकैटेचिन गैलेट (EGCG) प्रमुख है। ये तत्व पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण रखते हैं। एंटीऑक्सीडेंट शरीर में बनने वाले हानिकारक फ्री रेडिकल्स को कम करने में मदद करते हैं।'' जब शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम होता है तो लिवर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने की संभावना भी कम हो सकती है।
- इसके अलावा, फैटी लिवर को मैनेज करने में वजन कंट्रोल और इंसुलिन सेंसिटिविटी की अहम भूमिका होती है। ग्रीन टी को लेकर यह भी माना जाता है कि यह मेटाबॉलिज्म को थोड़ा तेज कर सकती है, जिससे वेट मैनेजमेंट में मदद मिल सकती है।
- The American Journal of Clinical Nutrition में साल 2013 में प्रकाशित मेटा-विश्लेषण से यह निष्कर्ष निकलता है कि ग्रीन टी (Green Tea) का सेवन मानव शरीर में ग्लूकोज कंट्रोल और इंसुलिन सेंसिटिविटी पर पॉजिटिव प्रभाव डालता है। 17 रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल्स के डेटा विश्लेषण के अनुसार, ग्रीन टी पीने से फास्टिंग ग्लूकोज (Fasting Glucose) और हीमोग्लोबिन A1c (HbA1c) के लेवल में अहम रूप से कमी देखी गई। इसके अलावा, हाई क्वालिटी वाली स्टडी में यह भी पाया गया कि ग्रीन टी फास्टिंग इंसुलिन की सांद्रता (concentrations) को कम करने में प्रभावी है। ये रिजल्ट दर्शाते हैं कि ग्रीन टी डायबिटीज मैनेजमेंट और मेटाबॉलिक हेल्थ को बेहतर बनाने में एक सहायक नेचुरल विकल्प हो सकती है। इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर होने से शरीर में शुगर और फैट के उपयोग की प्रक्रिया बैलेंस रहती है, जिससे फैटी लिवर का जोखिम कम हो सकता है। हालांकि, यह प्रभाव भी सीमित होता है और इसे हेल्दी लाइफस्टाइल के साथ ही ज्यादा प्रभावी माना जाता है।
- International Journal of Clinical and Experimental Medicine में साल 2015 में प्रकाशित मेटा-विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि ग्रीन टी (Green Tea) का नियमित सेवन लिवर की बीमारियों के जोखिम को कम करने में एक सुरक्षात्मक कारक (protective factor) के रूप में काम करता है। इस रिसर्च के रिजल्ट के अनुसार, ग्रीन टी पीने वालों में लिवर कैंसर (HCC), फैटी लिवर, हेपेटाइटिस और क्रोनिक लिवर रोगों के होने की संभावना काफी कम पाई गई है। यह पॉजिटिव प्रभाव एशियाई, अमेरिकी और यूरोपीय सभी समुदायों में समान रूप से देखा गया है। स्टडी यह सुझाव देती है कि ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण लिवर की हेल्थ को बनाए रखने में सहायक हैं। हालांकि, अभी भी इस पर ज्यादा बड़े लेवल पर रैंडमाइज्ड क्लीनिकल ट्रायल्स (randomized clinical trials) की जरूरत है।
ग्रीन टी कितनी मात्रा में पीना सुरक्षित है?
डॉ. सारदा पासंगुलपति के अनुसार, आमतौर पर दिन में दो से तीन कप ग्रीन टी पीना सुरक्षित हो सकता है, बशर्ते इसमें अलग से चीनी न मिलाई जाए। इसे सुबह या दिन में पीना सेहत को ज्यादा फायदा पहुंचाता है बहुत ज्यादा मात्रा में ग्रीन टी पीना भी सही नहीं है, क्योंकि इससे कुछ लोगों में कमजोरी, पेट की समस्या, नींद की कमी या अन्य नुकसान हो सकते हैं, इसलिए संतुलन बनाए रखना जरूरी है।
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MDPI में साल 2024 में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, दिन में 2 से 3 कप ग्रीन टी पीना पूरी तरह सुरक्षित माना गया है। इतनी मात्रा से शरीर को लगभग 250 मिलीग्राम कैटेचिन्स (Catechins) मिलते हैं, जो लिवर की सूजन कम करने और एंटीऑक्सीडेंट बढ़ाने में मदद करते हैं। हालांकि, खाली पेट बहुत अधिक मात्रा में ग्रीन टी या इसके सप्लीमेंट्स लेने से लिवर पर बुरा असर पड़ सकता है।

क्या ग्रीन टी फैटी लिवर का इलाज है?
डॉ. सारदा पासंगुलपति सलाह देती हैं कि ग्रीन टी के कुछ फायदे रिसर्च में सामने आए हैं, लेकिन इसे फैटी लिवर का इलाज नहीं माना जा सकता। इसे केवल एक हेल्दी सपोर्ट के रूप में देखा जाना चाहिए। फैटी लिवर को कंट्रोल करने का सबसे प्रभावी तरीका हेल्दी लाइफस्टाइल ही है। केवल ग्रीन टी पीने से यह समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होती, इसलिए अगर किसी को फैटी लिवर है, तो उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज, डाइट और लाइफस्टाइल सुधार पर ध्यान देना चाहिए।
इसके अलावा, डॉ. सारदा सलाह देती हैं कि आजकल की लाइफस्टाइल को देखते हुए 20 वर्ष की आयु के बाद से ही साल में एक बार लिवर फंक्शन टेस्ट जरूर करवाना चाहिए, जिससे समय-समय पर लिवर हेल्थ का सही पता चल सके।
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फैटी लिवर में ग्रीन टी एक्सट्रैक्ट या कैप्सूल
डॉ. सारदा बताती हैं कि बाजार में आज के समय में ग्रीन टी एक्सट्रैक्ट या कैप्सूल के रूप में कई सप्लीमेंट्स आसानी से केमिस्ट की दुकानों पर मिलते हैं। कुछ लोग फैटी लिवर से छुटकारा जल्द पाने के लिए इनका उपयोग करने लगते हैं, जो कि गलत है। डॉ. सारदा के अनुसार, हाई क्वांटिटी में ग्रीन टी एक्सट्रैक्ट का सेवन बिना डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह के बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। रोजाना ज्यादा मात्रा में ऐसे सप्लीमेंट लेने पर यह कभी-कभी लिवर फंक्शन पर बुरा प्रभाव भी डाल सकता है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति ग्रीन टी सप्लीमेंट लेने की सोच रहा है तो उसे पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।
डॉक्टर से कब मिलें?
अगर आपको लंबे समय से थकान महसूस हो रही है, पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में भारीपन या दर्द रहता है, भूख कम लगती है या पेट बार-बार फूलता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। जिन लोगों को मोटापा, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल है, उन्हें समय-समय पर लिवर की जांच डॉक्टर की सलाह अनुसार करानी चाहिए और रिपोर्ट के आधार पर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट या हेपेटोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए।

निष्कर्ष
ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण लिवर की सेहत को सपोर्ट कर सकते हैं और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं। कुछ रिसर्च में यह भी पाया गया है कि नियमित और सीमित मात्रा में ग्रीन टी पीने से लिवर से जुड़ी समस्याओं का जोखिम कुछ हद तक कम हो सकता है। हालांकि, इसे फैटी लिवर का इलाज नहीं माना जा सकता। फैटी लिवर को कंट्रोल करने के लिए बैलेंस डाइट, नियमित एक्सरसाइज, वजन कम करना और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना सबसे जरूरी है।
FAQ
फैटी लिवर में कौन सी चाय पीनी चाहिए?
फैटी लिवर की समस्या में ग्रीन टी फायदा कर सकती है। यह लिवर हेल्थ को सपोर्ट कर सकती है, लेकिन फैटी लिवर को कंट्रोल करने के लिए सही डाइट और नियमित एक्सरसाइज जरूरी होती है।क्या खाली पेट ग्रीन टी पीना सही है?
खाली पेट ग्रीन टी पीने से कुछ लोगों को एसिडिटी या पेट में जलन हो सकती है। इसलिए इसे नाश्ता करने के बाद या दिन के समय पीना बेहतर माना जाता है।क्या ग्रीन टी से वजन कम होता है?
ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं, जिससे वजन कंट्रोल करने में थोड़ी मदद मिल सकती है।फैटी लिवर में क्या परहेज करें?
जिन लोगों को फैटी लिवर की समस्या होती है उन्हें जंक फूड, ज्यादा तली-भुनी चीजें, शुगर वाली ड्रिंक्स, प्रोसेस्ड फूड से बचना चाहिए।फैटी लिवर ठीक होने में कितना समय लगता है?
फैटी लिवर ठीक होने में कितना समय लगेगा, यह बात बीमारी की गंभीरता पर निर्भर करती है। फैटी लिवर ग्रेड 1 में डाइट और लाइफस्टाइल बदलने से 2 से 3 महीनों में सुधार दिख सकता है, लेकिन कुछ लोगों को ज्यादा समय भी लग सकता है। फैटी लिवर ग्रेड 2 और ग्रेड 3 की स्थिति में यह समय और बढ़ सकता है।
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Apr 01, 2026 17:08 IST
Modified By : Akanksha Tiwari Apr 01, 2026 17:08 IST
Modified By : Akanksha TiwariApr 01, 2026 17:08 IST
Modified By : Akanksha TiwariApr 01, 2026 17:08 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Sarada Pasangulapati