Fri Sep 11, 2026 | 07:29 PM IST

Medically Reviewed by Dr Neeraj Dhamija , Senior Consultant – Laparoscopic, Laser & General Surgery

दवाओं से फैटी लिवर: जानें कौन-सी दवाएं हैं खतरनाक और कैसे करें बचाव

अगर आप भी किसी बीमारी से जुड़ी दवाएं जैसे स्टेरॉयड्स या पेनकिलर्स लगातार लेते हैं, तो यह फैटी लिवर का कारण बन सकते हैं। कई दवाएं पहले से मौजूद फैटी लिवर को सिरोसिस या फाइब्रोसिस में बदल सकती हैं। इस लेख में विस्तार से जानें इन दवाओं और लिवर पर इनके असर के बारे में।

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बीमारी को ठीक करने के लिए दवा ली जाती है, लेकिन क्या हो अगर दवा ही आपको बीमारी देने लगे? जी हां, कुछ मामलों में ऐसा संभव है। कई ऐसी दवाएं हैं, जिनके लंबे समय तक इस्तेमाल से फैटी लिवर होने का रिस्क बढ़ सकता है। इसे 'ड्रग-इंड्यूस्ड फैटी लिवर' कहा जाता है। हालांकि इस कैटेगरी के मरीजों की अलग तरह की क्लिनिकल कंडीशन होती है, लेकिन अगर मरीज का फैटी लिवर दवाओं की वजह से हुआ है और उसने शराब का सेवन नहीं किया है, तो यह कंडीशन मेटाबॉलिक डिसफंक्शन एसोसिएटेड स्टेटोटिक लिवर डिजीज (Metabolic Dysfunction–Associated Steatotic Liver Disease या MASLD) की कैटेगरी में आ सकती है। इसे ही पहले नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर (NAFLD) के नाम से जाना जाता था। इस लेख में हमने दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट, लेप्रोस्कोपिक, लेजर और जनरल सर्जन डॉ. नीरज धमीजा और दिल्ली के आकाश हेल्थकेयर अस्पताल के सेंटर फॉर लिवर-जीआई डिजीज और ट्रांसप्लानटेशन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. सौरभ सिंघल से बात की। उन्होंने बताया कि कौन सी दवाओं से फैटी लिवर हो सकता है और इससे बचाव का क्या तरीका है।

किन बीमारियों की दवाओं का लिवर पर पड़ता है असर?

डॉ. नीरज कहते हैं, “कई दवाएं लिवर पर फैट जमा करती हैं। अगर ये दवाएं लंबे समय तक ली जाएं, तो इससे फैटी लिवर का रिस्क हो सकता है। इसमें स्टेरॉयड्स, हार्ट की बीमारी के लिए ली जाने वाली दवाएं, कैंसर की दवाएं, हार्मोनल और पेनकिलर दवाएं शामिल हो सकती हैं। इसके अलावा, मिर्गी को मैनेज करने के लिए ली जाने वाली दवाओं का असर भी लिवर पर पड़ सकता है। भारतीयों में खासतौर पर यह देखा गया है कि वे कई मामलों में पेनकिलर्स बिना डॉक्टर की सलाह के ले लेते हैं। अगर लंबे समय तक बिना डॉक्टर की सलाह के ऐसी दवा ली जाए, तो इससे फैटी लिवर होने का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, अधिकांश मामलों में इन दवाओं का प्रभाव - डोज, अवधि और मरीज की मेटाबॉलिक स्थिति पर निर्भर करता है।”

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किन दवाओं से फैटी लिवर का खतरा बढ़ता है?

डॉ. नीरज कहते हैं, "कुछ दवाएं लिवर में फैट जमा कर सकती हैं, तो कुछ लिवर में सूजन बढ़ा सकती हैं। इसलिए किसी भी दवा का इस्तेमाल सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए।”

साल 2021 में Journal of Clinical and Translational Hepatology में प्रकाशित लेख के मुताबिक, दवाओं की पहचान करना बहुत जरूरी है क्योंकि कई दवाएं पहले से मौजूद क्रोनिक लिवर डिजीज को बढ़ा सकती हैं।
इस लिस्ट में बताया गया है कि कौन-सी दवाएं कहां नुकसान पहुंचाती हैं।

एक्यूट लिवर इंजरी

पहले से मौजूद फैटी लिवर को
बढ़ाने वाली दवाएं

फैटी लिवर को फाइब्रोसिस
या सिरोसिस में बदलने वाली दवाएं

एमीओडेरोन

एंड्रोजेनिक स्टेरॉयड 

एंड्रोजेनिक स्टेरॉयड

एस्पिरिन कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स बेंज्रोमारोन
एसिटामिनोफेन मेथोट्रेक्सेट कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स
इबुप्रोफेन टैमोक्सीफेन इरिनोटेकन
आइसोफ्लुरेन फेनोबार्बिटल मेथोट्रेक्सेट
हैलोथेन रोसिग्लिटाजोन टैमोक्सीफेन
विटामिन ए टेट्रासाइक्लिन  
वालप्रोइक एसिड    
टेट्रासाइक्लिन    
ओमेप्राजोल    
लोसार्टन    

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दवाएं कैसे लिवर को नुकसान पहुंचाती हैं?

Journal of Clinical and Translational Hepatology में प्रकाशित लेख के अनुसार, दवाओं के कारण लिवर को कई तरह के नुकसान पहुंच सकते हैं। लिवर सेल्स में माइटोकॉन्ड्रिया होते हैं, जो फैट्स को बर्न करने में मदद करते हैं। कुछ दवाओं की वजह से ये माइटोकॉन्ड्रिया डैमेज हो जाता है और लिवर फैट बर्न नहीं कर पाता।

  • कुछ दवाएं लिवर सेल्स के डीएनए को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
  • कई मामलों में देखा गया है कि दवाओं के हानिकारक प्रभावों के कारण लिवर में फैट बनने में तेजी आ सकती है।
  • वहीं कुछ दवाओं के कारण लिवर का फैट बाहर निकालने का प्रोसेस रुक जाता है, जिससे फैट इकट्ठा होता जाता है और फैटी लिवर की स्थिति बन सकती है।

ड्रग-इंड्यूस्ड फैटी लिवर के लक्षण

दिल्ली के आकाश हेल्थकेयर अस्पताल के सेंटर फॉर लिवर-जीआई डिजीज और ट्रांसप्लानटेशन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. सौरभ सिंघल कहते हैं, “दवाओं के कारण फैटी लिवर होने पर मरीज को कई लक्षण नजर आ सकते हैं। हालांकि, शुरुआत में ये लक्षण ऐसे हो सकते है, जिन्हें लोग आमतौर पर नजरअंदाज कर देते हैं। इसलिए मैं सलाह देता हूं कि जो मरीज रेगुलर दवाएं ले रहे हैं, उन्हें इन लक्षणों को बिल्कुल भी इग्नोर नहीं करना चाहिए।"

  1. लगातार शरीर में एनर्जी की कमी महसूस होना
  2. पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में बेचैनी या दर्द महसूस होना। यह दर्द बहुत हल्का होता है।
  3. अगर मरीज की कंडीशन गंभीर है, तो स्किन और आंखों में पीलापन महसूस हो सकता है।
  4. पेशाब का रंग गहरा पीला होना
  5. कई मामलों में रोगी को दस्त लगना
  6. बुखार, सिरदर्द और भूख न लगना

डॉ. सौरभ कहते हैं कि कुछ मामलों में देखा गया है कि मरीज किसी अन्य बीमारी का इलाज कराने आते हैं, तो ब्लड टेस्ट में लिवर एंजाइम और अल्कलाइन फॉस्फेट का लेवल बहुत ज्यादा पाया गया है, तो लिवर से जुड़े टेस्ट कराए जा सकते हैं।

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किन लोगों को ड्रग-इंड्यूस्ड लिवर सबसे ज्यादा रिस्क है?

डॉ. सौरभ सिंघल कहते हैं, “कुछ लोगों को इसका खतरा सबसे ज्यादा होता है। इसमें सबसे ज्यादा रिस्क उन लोगों को होता है, जो बिना डॉक्टर की सलाह लिए लंबे समय तक पेनकिलर दवाएं, एंटीबायोटिक्स, एंटी-ट्यूबरकुलोसिस (TB) की दवाएं, हर्बल प्रोडक्ट्स या सप्लीमेंट्स इस्तेमाल करते हैं।”

  • कई लोगों को लगता है कि आयुर्वेदिक या हर्बल प्रोडक्ट्स सेफ होते हैं, लेकिन इसमें मौजूद कई तत्व लिवर पर एक्स्ट्रा प्रेशर डालते हैं। इसलिए लोगों को बिना एक्सपर्ट की सलाह के हर्बल प्रोडक्ट्स लेने से मना किया जाता है। अगर एक साथ कई दवाओं का इस्तेमाल किया जा रहा हो, तो इनके बीच होने वाला केमिकल इंटरैक्शन भी लिवर को नुकसान पहुंचा सकता है।
  • जिन लोगों को फैटी लिवर, हेपेटाइटिस या क्रॉनिक लिवर की बीमारी है, उन्हें कुछ दवाओं से नुकसान हो सकता है, खासकर बुजुर्गों, महिलाओं, बहुत ज्यादा शराब का सेवन करने वाले लोगों को इसका रिस्क हो सकता है।
  • इसके अलावा, कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों में ड्रग-इंड्यूस्ड लिवर इंजरी का खतरा ज्यादा पाया जाता है।

दवाओं के दुष्प्रभाव से लिवर को कैसे बचाएं?

Journal of Clinical and Translational Hepatology में प्रकाशित इसी लेख के अनुसार, जब भी दवाएं लें, तो डॉक्टर द्वारा बताई गई मात्रा ही लें। अगर दवाएं लेने से फैटी लिवर के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो डॉक्टर की सलाह जरूर ही दवाएं बंद करें या फिर सुरक्षित दवाएं लें। समय रहते दवा बंद करने से करीब 95% तक मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं ।
डॉ. नीरज ने दवाओं से होने वाले लिवर पर दुष्प्रभाव को रोकने के लिए लोगों को सावधानियां बरतने की सलाह दी है।

  1. पैरासिटामोल या एसिटामिनोफेन जैसी दवाओं की खुराक कभी भी ज्यादा न लें।
  2. अगर कोई भी दवा बिना डॉक्टर की सलाह के ले रहे हैं, तो उसके बारे में डॉक्टर को जरूर बताएं।
  3. बिना डॉक्टर की सलाह के हर्बल दवाएं, सप्लीमेंट्स या प्रोडक्ट्स लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए डॉक्टर को इन दवाओं के बारे में जरूर बताएं।
  4. एमियोडेरोन जैसी दवाओं को लंबे समय तक लेने वाले मरीजों को लिवर की रेगुलर जांच करानी चाहिए।
  5. कई मामलों में डॉक्टर उन दवाओं को बंद कर देते हैं, जिनसे लिवर डैमेज हो रहा है।
  6. अगर फैटी लिवर के लक्षण बहुत गंभीर हो गए हैं, तो आराम करना जरूरी है।
  7. इस दौरान हैवी एक्सरसाइज से जरूर बचना चाहिए।
  8. एसिटामिनोफेन दवा लिवर को नुकसान पहुंचा सकती है, इसलिए इसे बिना डॉक्टर की सलाह के न लें।
  9. अगर मरीज को बहुत ज्यादा उल्टी हो रही है, तो डॉक्टर IV फ्लुइड्स दे सकते हैं।

क्या दवाएं बंद करने से लिवर ठीक हो सकता है?

डॉ. सौरभ सिंघल कहते हैं, “हां, अगर दवाओं के कारण लिवर को नुकसान हुआ है, तो दवाएं बंद करने से कई मामलों में लिवर धीरे-धीरे ठीक हो सकता है। दरअसल, अगर किसी दवा या सप्लीमेंट के कारण लिवर के सेल्स डैमेज होने लगते हैं, तो उसमें सूजन, एंजाइम्स का बढ़ना या फैटी बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अगर इस कंडीशन को शुरुआत में पहचान लिया जाए और दवाओं को तुरंत बंद कर दिया जाए या उन्हें सुरक्षित विकल्प से बदल दिया जाए, तो ज्यादातर मामलों में लिवर खुद धीरे-धीरे ठीक हो सकता है। फैटी लिवर की हर कंडीशन में सिर्फ दवाएंई बंद कर देना काफी नहीं है। अगर लिवर गंभीर रूप से डैमेज हुआ है, तो मरीज को डॉक्टर से सलाह लेकर दवाओंइयां, रेगुलर चेकअप और इलाज की जरूरत भी हो सकती है। ऐसे मामलों में हम मरीज का लिवर फंक्शन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड या दूसरे चेकअप करके मरीज की कंडीशन देखते हैं। यहां यह जानना जरूरी है कि मेडिकल साइंस के अनुसार लिवर एक ऐसा अंग है, जो हल्का डैमेज होने के बाद भी भी खुद को दोबारा ठीक कर सकता है। ”

डॉक्टर को कब दिखाएं?

डॉ. नीरज कहते हैं, "अगर मरीज को दवाएं लेने के बाद थकान, दर्द, बुखार और दस्त जैसी समस्याएं रहती हैं। अगर दवा बंद करने के बाद भी लक्षणों में कोई सुधार नहीं होता, तो मरीज को तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए क्योंकि ज्यादा देर करने पर मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है।”

निष्कर्ष

कुछ दवाओं को जरूरत से ज्यादा लेने से या फिर बिना डॉक्टर की सलाह लेने से लिवर को नुकसान पहुंच सकता है। ये नुकसान कई बार फैटी लिवर जैसी स्थिति भी पैदा कर सकता है। अगर किसी को दवा लेने के बाद पेट में सूजन, दर्द या थकान महसूस होने लगे, तो डॉक्टर को जरूर दिखाना चाहिए। समय पर इलाज से लिवर को डैमेज होने से बचाया जा सकता है। सबसे जरूरी बात यह है कि कोई भी दवा, भले ही वह बुखार या दर्द की हो, बिना डॉक्टर की सलाह के न लें।

FAQ

  • क्या दवा लेने से लिवर खराब हो सकता है? 

    कई दवाओं की ज्यादा मात्रा लेने से लिवर को नुकसान पहुंच सकता है। कई दवाओं के कारण हेपेटाइटिस हो सकता है। इसलिए दवाएं लेते समय सही डोज लेना बहुत जरूरी है।
  • लिवर टेस्ट कब करवाना चाहिए?

    अगर मरीज को थकान, पीलिया, पेट दर्द या गहरे रंग का पेशाब आए, तो लिवर टेस्ट (LFT) कराना चाहिए। जो लोग बहुत ज्यादा शराब का सेवन करते हैं, मोटापे या डायबिटीज के रोगी हैं, उन्हें रेगुलर लिवर टेस्ट कराते रहना चाहिए।
  • लिवर काम करना बंद कर दे तो क्या होगा?

    लिवर में खून के थक्के जमने लग जाएंगे, जिससे ब्लड का फ्लो रोकने में दिक्कत हो सकती है। लिवर फेलियर होने पर लोगों को निमोनिया हो सकता है। अगर लिवर ठीक नहीं होगा, तो इसका असर किडनी पर भी पड़ सकता है।
  • क्या आयुर्वेदिक दवाओं से लिवर ठीक किया जा सकता है?

    लिवर के इलाज के लिए अनुभवी डॉक्टर से ही इलाज कराना महत्वपूर्ण है। घरेलू तरीकों से इलाज करने पर लिवर की कंडीशन गंभीर हो सकती है।
  • ऐसे कौन से संकेत हैं जो बताते हैं कि लिवर ठीक हो रहा है?

    अगर स्किन के रंग में पीलापन कम होने लगे, घाव या चोट जल्दी ठीक हो और नसों या हथेलियों में मकड़ी के जाले कम महसूस होने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि लिवर काफी हद ठीक हो रहा है।

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Aneesh Rawat

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Chief Sub Editor

अनीश रावत को हेल्थ और लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 16+ साल का अनुभव है। फिलहाल जागरण न्यू मीडिया के Onlymyhealth में चीफ सब एडिटर हैं। महिला स्वास्थ्य, बच्चों की सेहत, कैंसर, मेडिटेशन और योग पर Research based, doctor verified और SEO फ्रेंडली लेख लिखने में विशेषज्ञ हैं। न्यूज 24, ऑल इंडिया रेडियो और ThinkRight मेडिटेशन ऐप जैसे भरोसेमंद platforms पर काम कर चुकी हैं। Editorial Policy: अनीश द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Mar 30, 2026 18:51 IST

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