फैटी लिवर की गंभीरता के अनुसार इसे तीन ग्रेड में बांटा गया है। इसमें फैटी लिवर ग्रेड 1 शुरुआती दौर होता है, जिसका समय पर इलाज न कराया जाए, तो यह बढ़कर फैटी लिवर ग्रेड 2 से लेकर 3 तक चला जाता है। फैटी लिवर ग्रेड 3 सबसे गंभीर अवस्था है। MOHFW 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में करीब एक अरब लोग MASLD (NAFLD) अब से प्रभावित हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न अध्ययनों के अनुसार भारत में MASLD की व्यापकता करीब 9 फीसदी से लेकर 32 फीसदी तक है। इन आंकड़ों को देखते हुए लोगों को फैटी लिवर ग्रेड 1 से लेकर 3 तक के सभी लक्षणों और कारणों की जानकारी होना जरूरी है। इस लेख में हमने दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के सीनियर कंसल्टेंट, लेप्रोस्कोपिक, लेजर और जनरल सर्जन डॉ. नीरज धमीजा के साथ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी से जुड़े विभिन्न अस्पतालों के डॉक्टर्स से बात की। इन डॉक्टर्स ने हमें बताया कि फैटी लिवर के तीनों ग्रेड्स में क्या अंतर होता है। इसके साथ ही डॉक्टर्स इनके लक्षण, कारण, जांच और इलाज के बारे में भी जानकारी दे रहे हैं।
ग्रेड 1 फैटी लिवर
Cleveland Clinic के अनुसार, लिवर पर थोड़ा फैट होना नॉर्मल है, क्योंकि लिवर को इसकी जरूरत एनर्जी के लिए पड़ती है, लेकिन जैसे ही फैट का लेवल 5% से ज्यादा होने लगता है, उसे फैटी लिवर कहा जाता है। इससे लिवर में सूजन होने का रिस्क बढ़ जाता है। इसे ही फैटी लिवर की शुरुआत कहा जाता है। साल 2023 में Journal of Clinical and Translational Hepatology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, अगर लिवर के सेल्स में 5% से 33% फैट जमा होता है, तो इस कंडीशन को फैटी लिवर ग्रेड 1 कहा जाता है। डॉ. नीरज धमीजा कहते हैं, “फैटी लिवर ग्रेड 1 को माइल्ट स्टियटोसिस (Mild Steatosis) भी कहा जाता है। इस ग्रेड में लक्षण तुरंत पहचान में नहीं आते क्योंकि इसके लक्षण बहुत ही कॉमन होते हैं, लेकिन अगर समय पर इलाज न हो, तो यह ग्रेड 2 और ग्रेड 3 में बदल सकता है। हालांकि, फैटी लिवर ग्रेड 1 में लिवर पर सूजन या फिब्ररोसिस का पता नहीं चलता।”

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फैटी लिवर ग्रेड 1 के लक्षण
NIH में प्रकाशित National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK) रिपोर्ट और डॉ. नीरज के मुताबिक, फैटी लिवर के शुरुआती स्टेज पर लक्षण नहीं दिखाई देते, इसलिए इसे साइलेंट बीमारी कहा जाता है। फैटी लिवर ग्रेड 1 में लिवर पर इतना कम फैट जमा होता है कि इसके लक्षणों में कई बार रोगी को थकान या पेट के ऊपरी दाहिने भाग में थोड़ा बहुत दर्द हो सकता है। इन लक्षणों को आमतौर पर मरीज इग्नोर कर देते हैं क्योंकि ये लक्षण किसी भी खास तरह की बीमारी का इशारा नहीं करते। अगर किसी भी व्यक्ति को बार-बार ऐसे लक्षण महसूस होते हैं, तो उसे डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए।
फैटी लिवर ग्रेड 1 के कारण
NIH में प्रकाशित National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (NIDDK)इस रिपोर्ट में बताया गया है कि नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर होने के कई कारण हो सकते हैं। इन कारणों से डॉ. नीरज भी सहमत हैं और उनका कहना है कि इन मरीजों के लिए लक्षणों की पहचान करना बहुत महत्वपूर्ण है।
- मोटापा - कमर का साइज बहुत ज्यादा होना
- टाइप 2 डायबिटीज
- ब्लड में HDL कोलेस्ट्रॉल लेवल बहुत कम होना
- हाई ब्लड प्रेशर होना
- जो लोग बहुत ज्यादा शराब पीते हैं, उनमें अल्कोहल के कारण लिवर पर फैट जमा हो जाता है।
- तेजी से वजन कम होना
- HIV का इलाज कराना
- किसी कैंसर का इलाज कराना
- कॉर्टिकोस्टेरॉयड दवाइयां लेना
फैटी लिवर ग्रेड 1 की जांच कैसे होती है?
फैटी लिवर ग्रेड 1 की जांच के लिए डॉक्टर आमतौर पर कुछ टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।
- अल्ट्रासाउंड - अगर फैटी लिवर की शुरुआत होती है, तो इसे अल्ट्रासाउंड के जरिए आसानी से पहचाना जा सकता है।
- लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT)- इस टेस्ट के जरिए यह पता चलता है कि लिवर कितने बेहतर तरीके से काम कर रहा है। अगर SGPT और SGOT एंजाइम बढ़े हुए आते हैं, तो लिवर में सूजन हो सकती है।
- लिपिड प्रोफाइल - अगर ब्लड में ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है, तो फैटी लिवर होने की संभावना हो सकती है।
- ब्लड शुगर - फैटी लिवर की समस्या डायबिटीज रोगियों को होने का खतरा रहता है, इसलिए डॉक्टर HbA1c टेस्ट की सलाह भी दे सकते हैं।
ग्रेड 1 फैटी लिवर का इलाज
डॉ. नीरज कहते हैं, “ ग्रेड 1 फैटी लिवर शुरुआती स्टेज होती है, जबकि ग्रेड 3 ज्यादा गंभीर मानी जाती है। हालांकि यह समझना जरूरी है कि हर मरीज में बीमारी एक ही तरह से आगे नहीं बढ़ती। कई लोगों में यह लंबे समय तक स्थिर रहती है और सही जीवनशैली, वजन घटाने, व्यायाम, शुगर व लिपिड कंट्रोल तथा डॉक्टर की सलाह से इसमें सुधार भी हो सकता है। आमतौर पर, मैं मरीज को वजन कम करने के लिए रोजाना कसरत करने की सलाह देता हूं। मरीजों को स्मोकिंग और अल्कोहल छोड़ने को कहता हूं। इसके अलावा, डाइट का खास ध्यान रखना होता है। डाइट में मरीजों को ज्यादा मसाले वाला, लाल मिर्च और नमक कम करने की सलाह देता हूं। सोडे वाले ड्रिंक्स और जंक फूड खाने की मनाही की जाती है। दरअसल, बैलेंस्ड डाइट और फिजिकल एक्टिविटी से ग्रेड 1 फैटी लिवर को रिवर्स करना आसान होता है।”
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ग्रेड 2 फैटी लिवर
दिल्ली के आकाश हेल्थकेयर अस्पताल के सेंटर फॉर लिवर-जीआई डिजीज और ट्रांसप्लानटेशन के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. सौरभ सिंघल ने कहा, “ग्रेड 2 फैटी लिवर मोडरेट कंडीशन है। Journal of Clinical and Translational Hepatology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार के मुताबिक, लिवर के सेल्स में 34% से लेकर 66% तक फैट जमा हो जाए, तो इसे ग्रेड 2 फैटी लिवर कहा जाता है। इस स्थिति में मरीज के लिवर के फंक्शन पर असर पड़ने लगता है।”
फैटी लिवर ग्रेड 2 के लक्षण
डॉ. सौरभ कहते हैं, “जैसे-जैसे लिवर में फैट बढ़ने लगता है, वैसे-वैसे लक्षण भी दिखाई देने लगते हैं। हालांकि ग्रेड 1 फैटी लिवर में लक्षण काफी हद तक नजर नहीं आते, लेकिन लिवर में फैट बढ़ने के साथ लक्षणों की पहचान होने लगती है। ग्रेड 2 फैटी लिवर के लक्षणों में भूख कम लगना, पेट में सूजन और खाना न पचना जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। मैंने कई मरीजों की स्किन में पीलापन और अचानक वजन बढ़ना भी देखा है। वैसे ग्रेड 2 फैटी लिवर में पेट में सूजन जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं।” NIH के मुताबिक, बहुत ज्यादा प्यास लगना, ब्लोटिंग, पेट के ऊपरी भाग में दर्द और नींद खराब होना भी फैटी लिवर ग्रेड 2 के लक्षण हो सकते हैं।
ग्रेड 2 फैटी लिवर के कारण
डॉ. सौरभ कहते हैं कि ग्रेड 2 फैटी लिवर के कई कारण हो सकते हैं।
- बैलेंस्ड डाइट न खाना
- बहुत ज्यादा तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड खाना
- मोटापा
- फिजिकल एक्टिविटी की कमी और लंबे समय तक बैठे रहने वाला लाइफस्टाइल अपनाना
- बहुत ज्यादा शराब पीना
- परिवार में लिवर से जुड़ी बीमारियों की हिस्ट्री
फैटी लिवर ग्रेड 2 की जांच कैसे होती है?
फैटी लिवर ग्रेड 2 की जांच करने के लिए डॉक्टर मरीज को ये टेस्ट कराने की सलाह देते हैं।
- लिवर फंक्शन टेस्ट - लिवर की हेल्थ को जानने के लिए एंजाइम और प्रोटीन चेक किए जाते हैं।
- फाइब्रोस्कैन - लिवर कितना हार्ड हो गया है, इसे जानने के लिए फाइब्रोस्कैन की सलाह दी जा सकती है।
- सीटी स्कैन - लिवर के ग्रेड को विस्तार से जांचने के लिए एमआरआई या सीटी स्कैन भी कराया जा सकता है।
फैटी लिवर ग्रेड 2 का इलाज
डॉ. सौरभ कहते हैं, “आमतौर पर ग्रेड 2 फैटी लिवर में मरीजों को वजन कम करने की सलाह दी जाती है ताकि फैटी लिवर ग्रेड 2 बीमारी का इलाज किया जा सके। जैसे ही मरीज का वजन कम होता है, इससे लिवर का फैट और सूजन कम होती है। इसके अलावा, मरीज को हेल्दी फूड, डाइट का पोर्शन साइज और फिजिकल एक्सरसाइज करने की सलाह देता हूं। ग्रेड 2 फैटी लिवर में मरीज को कम से कम 7 से 10 फीसदी तक वजन कम करना चाहिए ताकि लिवर की सूजन को कम किया जा सके।”

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फैटी लिवर ग्रेड 3
Journal of Clinical and Translational Hepatology में प्रकाशित स्टडी के अनुसार, अगर लिवर के सेल्स में 67 फीसदी से ज्यादा फैट जमा हो जाए, तो उसे ग्रेड 3 फैटी लिवर कहा जाता है। इस स्टेज में लिवर के आसपास के टिश्यू में गंभीर सूजन आ जाती है, इस वजह से ग्रेड 3 को बहुत ही गंभीर स्थिति माना जाता है। अगर फैटी लिवर ग्रेड 3 का समय पर इलाज न हो, तो लिवर सिरोसिस और कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे मामलों में कई बार लिवर ट्रांसप्लांट की भी जरूरत पड़ सकती है, इसलिए लिवर से जुड़े लक्षणों की पहचान करके समय पर इलाज कराने की जरूरत होती है।
फैटी लिवर ग्रेड 3 के लक्षण
डॉ. नीरज कहते हैं, "अगर मरीज को ग्रेड 3 फैटी लिवर की समस्या है, तो उन्हें समय पर अपने लक्षणों की पहचान करना बहुत महत्वपूर्ण है। अगर मरीज को ये लक्षण दिखें, तो उसे तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।"
Cleveland Clinic में भी ग्रेड 3 फैटी लिवर के लक्षण बताए गए हैं।
- पेट के ऊपर दाईं तरफ दर्द या पेट भरा हुआ महसूस होना
- बहुत ज्यादा थकान लगना
- बिना वजह वजन तेजी से कम होना
- मतली महसूस होना
- हाथ, पैर और टांगों में सूजन दिखाई देना
फैटी लिवर ग्रेड 3 की जांच कैसे की जाती है?
इस स्टेज पर डॉक्टर मरीज को अल्ट्रासाउंड, फाइब्रोस्कैन टेस्ट, लिवर फंक्शन टेस्ट, सीटी स्कैन या एमआरआई कराने की सलाह देते हैं। अगर डॉक्टर को लिवर में गंभीर रूप से सूजन महसूस होती है, तो लिवर बायोप्सी की सलाह भी दी जा सकती है। इसमें लिवर के टिश्यू के छोटे से हिस्से को लेकर लैब में टेस्ट किया जाता है।
फैटी लिवर ग्रेड 3 का इलाज
डॉ. नीरज कहते हैं, "अगर मरीज का वजन ज्यादा होता है, तो उसे वजन कम करने की सलाह देता हूं। इसके अलावा, फैटी लिवर ग्रेड 3 में मेडिकल कंडीशन को देखते हुए मरीज को दवाइयां देता हूं। इस कंडीशन में मरीज को बिना डॉक्टर की सलाह के दवाई नहीं लेनी चाहिए। इसके अलावा मरीज को अपनी डाइट और खानपान पर पूरा ध्यान देना चाहिए। इसके साथ, मरीज को किसी भी तरह के सप्लीमेंट्स लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।”
फैटी लिवर ग्रेड 1 से 3 तक बढ़ने के कारण क्या है?
पुणे के खराड़ी स्थित मणिपाल हॉस्पिटल के मेडिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के कंसल्टेंट डॉ. आदित्य गिरीश बोरावके कहते हैं, “फैटी लिवर के गंभीर होने में कई रिस्क फैक्टर्स जैसे अनकंट्रोल्ड डायबिटीज, अल्कोहल, स्मोकिंग, हाई कोलेस्ट्रॉल, जंक फूड, फिजिकल एक्टिविटी न करना कंट्रोल न हो, तो फैटी लिवर गंभीर हो सकता है। कई मामलों में देखा गया है कि फैटी लिवर शुरुआती स्टेज में डायग्नोसिस नहीं होता है, तो यह फैटी लिवर के ग्रेड बढ़ते जाते हैं। इसलिए समय रहते लक्षणों की पहचान करके डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है।”
डॉक्टर को कब दिखाएं?
डॉ. नीरज कहते हैं कि अगर मरीज को पेट के ऊपरी हिस्से में लगातार दर्द रहे, अचानक वजन कम होने लगे, बुखार तेज हो और दवाई खाने के बाद फिर से आने लगे, बिना वजह थकान और उल्टी जैसी फीलिंग हो, तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं क्योंकि ये लक्षण आमतौर पर फैटी लिवर के हो सकते हैं।
निष्कर्ष
फैटी लिवर से बचाव के लिए इसके लक्षणों की पहचान करना जिसमें सबसे जरूरी कि अगर मरीज के पेट के ऊपरी दाहिने भाग में लगातार दर्द रहता हो, तो डॉक्टर से चेकअप जरूर कराना चाहिए। फैटी लिवर होने का यह लक्षण काफी महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, पीलिया होना के साथ बुखार होने पर घरेलू इलाज करने की बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है क्योंकि ये लक्षण फैटी लिवर के हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों को सिर्फ पीलिया मानकर इग्नोर न करें। जो लोग बहुत ज्यादा शराब पीते हैं, उन्हें खासतौर पर लिवर से जुड़े लक्षणों पर ध्यान रखना चाहिए।फैटी लिवर में सबसे राहत की बात यह है कि इसे लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव करके सुधारा जा सकता है। इसके अलावा, फैटी लिवर के मरीजों को डॉक्टर से पूछकर फिजिकल एक्टिविटी पर भी ध्यान देना चाहिए।
FAQ
फैटी लिवर का कौन सा ग्रेड खतरनाक है?
फैटी लिवर का ग्रेड 3 सबसे खतरनाक होता है। अगर फैटी लिवर ग्रेड 3 का इलाज समय पर न हो, तो सिरोसिस की समस्या हो सकती है।फैटी लिवर ग्रेड 2 ठीक होने में कितना समय लगता है?
फैटी लिवर ग्रेड 2 का इलाज मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। अगर मरीज समय पर अपनी डाइट और फिजिकल एक्टिविटी पर ध्यान दें, तो आमतौर पर मरीजों में तीन से छह महीने में सुधार होने लगता है।क्या फैटी लिवर को पूरी तरह रिवर्स किया जा सकता है?
फैटी लिवर ग्रेड 1 और ग्रेड 2 को सही डाइट और लाइफस्टाइल में बदलाव करके रिवर्स किया जा सकता है। फैटी लिवर ग्रेड 3 में दवाइयों, जीवनशैली में सुधार और खानपान में बदलाव करने के साथ डॉक्टर से रेगुलर फॉलो-अप की जरूरत होती है।लिवर का लास्ट स्टेज क्या है?
लिवर का आखिरी स्टेज सिरोसिस या एंड-स्टेज लिवर डिजीज होती है। इसमें लिवर में स्थायी रूप से घाव बन जाते हैं। यह एक जानलेवा स्थिति है, जिसमें लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है।क्या लिवर की बीमारी में मीठा खाना चाहिए?
फैटी लिवर में मीठा नहीं खाना चाहिए या बहुत सीमित कर देना चाहिए। चीनी लिवर को नुकसान पहुंचा सकती है, खासतौर पर मिठाई, सोडा, और डिब्बाबंद जूस जैसे पैकेज्ड फूड लेने से परहेज करना चाहिए।
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Mar 28, 2026 13:37 IST
Modified By : Aneesh Rawat Mar 28, 2026 13:37 IST
Modified By : Aneesh RawatMar 28, 2026 13:37 IST
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Published By : Aneesh Rawat
Reviewed By : Dr Neeraj Dhamija