बीते कुछ सालों में अनहेल्दी लाइफस्टाइल के कारण लिवर से जुड़ी बीमारियों में बढ़ोतरी हुई है, जिसमें फैटी लिवर के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं। फैटी लिवर एक ऐसी स्थिति है जिसके लक्षण शुरुआती स्टेज में मरीज को महसूस नहीं होते हैं और जब तक लक्षण दिखते हैं तब तक ज्यादातर मामलों में स्थिति फैटी लिवर ग्रेड 2 तक पहुंच जाती है। ऐसे में जब व्यक्ति को को इस बारे में पता चलता है तो मन में तरह-तरह के सवाल उठते हैं, जैसे कि फैटी लिवर क्या है, फैटी लिवर ग्रेड 2 होने का कारण क्या है और फैटी लिवर ग्रेड 2 का इलाज क्या है? इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए हमने, यशोदा हॉस्पिटल, हैदराबाद की कंसल्टेंट मेडिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और हेपेटोलॉजिस्ट, डॉ. सारदा पासंगुलपति से बात की-
फैटी लिवर ग्रेड 2 का कारण
डॉ. सारदा पासंगुलपति के अनुसार, ग्रेड 2 फैटी लिवर (Moderate Fatty Liver) होने के पीछे कई मेटाबॉलिक और लाइफस्टाइल से जुड़े कारण होते हैं। यह समस्या खासतौर पर मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप 2 डायबिटीज से जुड़ी होती है। जब शरीर में इंसुलिन सही तरह से काम नहीं करता, तो खून में अतिरिक्त फैट बढ़ने लगता है और यह धीरे-धीरे लिवर में जमा हो जाता है। इसी तरह हाई कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स भी लिवर में फैट जमा होने की समस्या को बढ़ा सकते हैं।
डॉ. सारदा पासंगुलपति बताती हैं, ''कई लोगों में फैटी लिवर की शुरुआती स्टेज में कोई खास लक्षण नजर नहीं आते हैं। इस बीमारी में लिवर की कोशिकाओं के अंदर छोटी-छोटी फैट की बूंदें जमा होने लगती हैं। जब यह समस्या बढ़कर ग्रेड 2 फैटी लिवर तक पहुंच जाती है, तो इस स्थिति में लिवर में हल्की सूजन या लिवर की कोशिकाओं को नुकसान होना भी शुरू हो जासकता है। इस स्टेज पर कुछ लोगों को थकान या पेट के दाईं ऊपरी तरफ भारीपन या भरा-भरा महसूस होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। अगर इस समय सही इलाज कर लिया जाए, तो बीमारी को आगे बढ़कर फाइब्रोसिस, सिरोसिस या गंभीर लिवर बीमारी बनने से रोका जा सकता है।''
फैटी लिवर ग्रेड 2 का इलाज
डॉ. सारदा पासंगुलपति बताती हैं कि जो मरीज उनके अस्पताल में ग्रेड 2 फैटी लिवर के साथ आते हैं उन्हें वह दवाओं के साथ-साथ डेली रूटीन और लाइफस्टाइल में बदलाव की सलाह भी देती हैं, जिनके बारे में आगे बताया गया है-
1. मेडिकल इलाज और टेस्ट
डॉ. सारदा पासंगुलपति बताती हैं, ''फैटी लिवर ग्रेड 2 के इलाज के कुछ मामलों में डॉक्टर दवाइयों की सलाह दे सकते हैं। जरूरत पड़ने पर विटामिन E, इंसुलिन को बेहतर बनाने वाली दवाएं या डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं के लिए इलाज दिया जा सकता है।'' इसके साथ-साथ ब्लड टेस्ट और स्कैन जैसी नियमित जांच कराना भी जरूरी होता है, ताकि बीमारी की स्थिति और सुधार पर नजर रखी जा सके।
World Journal of Gastroenterology की साल 2015 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, जानवरों पर किए गए एक्सपेरिमेंट के नतीजे बताते हैं कि हर्बल दवाएं और नेचुरल प्रोडक्ट NAFLD/NASH के इलाज के लिए असरदार हो सकते हैं। हालांकि, क्लिनिकल स्टडी में इनके असर और सुरक्षा की जांच करने की जरूरत है। फैटी लिवर के इलाज को बेहतर बनाने के लिए मौजूदा और संभावित दवाओं पर लगातार क्लिनिकल और प्रीक्लिनिकल स्टडीज की जरूरत है।
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2. लाइफस्टाइल में बदलाव
ग्रेड 2 फैटी लिवर के इलाज में सबसे अहम भूमिका लाइफस्टाइल की होती है। Current Obesity Reports में साल 2019 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, NAFLD (MASLD) से पीड़ित अगर कोई व्यक्ति अपने शरीर के वजन का लगभग 7-10% तक वजन कम कर ले, तो इससे लिवर में जमा फैट और सूजन काफी कम हो सकती है। इसके अलावा, नियमित एक्सरसाइज, शराब से दूरी बनाना और अच्छी नींद लेना भी लिवर की सेहत सुधारने में मदद करता है और शरीर पर पड़ने वाला मेटाबॉलिक तनाव कम करता है।
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3. लिवर के लिए सही डाइट
फैटी लिवर को ठीक करने में बैलेंस डाइट बहुत जरूरी होती है। मरीजों को अपने खाने में हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, साबुत अनाज जैसे ओट्स, प्रोटीन के लिए मछली, दालें और टोफू, और हेल्दी फैट के लिए नट्स शामिल करना चाहिए। वहीं शुगर ड्रिंक्स, ज्यादा चीनी, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, तली-भुनी चीजें और प्रोसेस्ड फूड कम से कम खाना चाहिए, क्योंकि ये लिवर में फैट बढ़ाने का काम करते हैं।
डॉ. सारदा के अनुसार, वजन कम करने और NAFLD (MASLD) को कंट्रोल करने के लिए एक बैलेंस और सीमित मात्रा वाला डाइट प्लान बहुत जरूरी है। इसे आसान भाषा में समझें तो आपकी एक थाली ऐसी होनी चाहिए जिसमें आधी थाली (40-50%) कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट से भरी हो, जैसे कि गेहूं की रोटी, ब्राउन राइस, ओट्स या बाजरा, और साथ में हरी सब्जियां जो फाइबर से भरपूर हों। थाली का एक हिस्सा (लगभग 15-20%) प्रोटीन का होना चाहिए, जैसे दाल, पनीर, सोया, अंडा या दही, जो शरीर को ताकत देता है और वजन घटाने में मदद करता है। इसके अलावा थोड़ी मात्रा में हेल्दी फैट्स भी शामिल करें, जैसे मूंगफली, बादाम, अखरोट या सरसों/ऑलिव ऑयल, जो मोनो और पॉलीअनसैचुरेटेड फैट्स देते हैं और लिवर के लिए अच्छे होते हैं। ज्यादा तली-भुनी और मीठी चीजों से बचना चाहिए। इस तरह बैलेंस थाली खाने से वजन कंट्रोल में रहता है और लिवर भी हेल्दी रहता है।
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नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर का इलाज
यह प्रकार मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस, टाइप 2 डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी मेटाबॉलिक समस्याओं से जुड़ा होता है। इसका इलाज मुख्य रूप से लाइफस्टाइल सुधार पर आधारित है।
- वजन कम करना (लगभग 7-10%) फैटी लिवर को मैनेज करने का सबसे असरदार तरीका हो सकता है।
- रोजाना एक्सरसाइज करें, तेज चलना, साइकिल चलाना जैसे एरोबिक एक्सरसाइज के साथ हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी जरूरी है।
- खाने में चीनी और रिफाइंड कार्ब्स जैसे मैदा, सफेद ब्रेड कम करें और फाइबर से भरपूर चीजें जैसे सब्जियां, फल और साबुत अनाज ज्यादा खाएं।
- हेल्दी फैट्स जैसे नट्स, बीज और सरसों या ऑलिव ऑयल को डाइट में शामिल करें।
- जरूरत पड़ने पर डॉक्टर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल और इंसुलिन रेजिस्टेंस को कंट्रोल करने के लिए दवाएं दे सकते हैं।
अल्कोहलिक फैटी लिवर का इलाज (ALD)
- पूरी तरह शराब बंद करना सबसे जरूरी है, क्योंकि अगर मरीज शराब पीना जारी रखता है, तो लिवर डैमेज तेजी से बढ़ सकता है और सिरोसिस तक पहुंच सकता है।
- गंभीर मामलों में न्यूट्रिशन थेरेपी दी जाती है क्योंकि ऐसे मरीजों में कुपोषण आम होता है।
- कुछ मामलों में सूजन कम करने के लिए दवाएं दी जा सकती हैं।
2023 की AASLD गाइडलाइंस का निष्कर्ष यह है कि नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) अब एक बड़ी वैश्विक समस्या बन गई है। इसका सबसे प्रभावी इलाज लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव और वजन कम करना (कम से कम 7-10%) है। गाइडलाइंस में 'फाइब्रोसिस' की पहचान के लिए नॉन-इनवेसिव टेस्ट (जैसे FIB-4) पर जोर दिया गया है। हार्ट डिजीज (CVD) इस बीमारी में मौत का मुख्य कारण है, इसलिए कोलेस्ट्रॉल और शुगर का कंट्रोल जरूरी है। गंभीर मामलों में वजन घटाने वाली सर्जरी या खास दवाओं (जैसे Semaglutide या विटामिन-ई) की सलाह दी गई है।
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फैटी लिवर ग्रेड 2 के लिए CAP स्कोर
CAP स्कोर लिवर में जमा फैट को मापता है। ग्रेड 2 फैटी लिवर का मतलब है कि लिवर में मध्यम मात्रा में फैट जमा हो गया है। इस स्थिति में CAP स्कोर लगभग 260 से 290 dB/m के बीच होता है। यह बीमारी बहुत गंभीर नहीं होती, लेकिन समय पर ध्यान देना जरूरी है।
फैटी लिवर ग्रेड 2 ठीक होने में कितना समय लगता है?
डॉ. सारदा बताती हैं कि फैटी लिवर ग्रेड 2 की स्थिति को ठीक होने में कितना समय लगेगा ये बात व्यक्ति की उम्र, वजन और लाइफस्टाइल में बदलाव जैसे कारकों पर निर्भर करती है। अधिकांश मरीजों को 3-6 महीनों में सुधार महसूस होने लगता है। अगर ग्रेड 2 फैटी लिवर के पीड़ित मरीज डॉक्टर की सलाह को सही से फॉलो करते हैं और समय से अपनी दवाओं का सेवन करते हैं तो फर्क जल्दी नजर आने लगता है, लेकिन जरा सी लापरवाही इस समस्या को गंभीर भी बना सकती है। ऐसे में अगर मरीज को समय से ग्रेड 2 फैटी लिवर की समस्या का पता चल चुका है, तो इलाज को पूरा करना चाहिए और डॉक्टर की सलाह अनुसार चलना चाहिए।
डॉक्टर से सलाह कब लें?
डॉ. सारदा पासंगुलपति बताती हैं कि यदि किसी व्यक्ति को थकान, पेट के ऊपरी सीधे हिस्से में दर्द या पाचन संबंधी समस्याएं लगातार महसूस हो रही हैं, तो तुरंत किसी एक्सपर्ट गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और हेपेटोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। सही समय पर इलाज ही लिवर को गंभीर नुकसान से बचा सकता है।

हॉस्पिटल की जरूरत कब पड़ती है?
1. ग्रेड 2 फैटी लिवर के ज्यादातर मामलों में इसे लाइफस्टाइल बदलाव, डाइट और नियमित मॉनिटरिंग से कंट्रोल किया जा सकता है लेकिन कुछ परिस्थितियों में मरीज को हॉस्पिटल जाने या डॉक्टर की निगरानी में इलाज की जरूरत पड़ सकती है। सबसे पहले, अगर मरीज को लगातार तेज थकान, पेट के दाईं ऊपरी हिस्से में दर्द, सूजन या भारीपन महसूस हो रहा हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये संकेत हो सकते हैं कि लिवर में सूजन (Inflammation) बढ़ रही है या स्थिति गंभीर हो रही है।
2. दूसरी स्थिति तब होती है जब लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) की रिपोर्ट्स लगातार खराब आती हैं। अगर SGPT, SGOT या बिलीरुबिन जैसे पैरामीटर बढ़े हुए हों, तो डॉक्टर आगे की जांच जैसे अल्ट्रासाउंड, फाइब्रोस्कैन या कभी-कभी बायोप्सी की सलाह दे सकते हैं। ऐसे मामलों में हॉस्पिटल विजिट जरूरी हो जाती है।
3. तीसरी स्थिति है जब मरीज को पहले से टाइप 2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियां हों और वे कंट्रोल में न हों। इससे फैटी लिवर तेजी से फाइब्रोसिस या लिवर सिरोसिस की ओर बढ़ सकता है, इसलिए मल्टी-स्पेशियलिटी केयर की जरूरत पड़ सकती है।
निष्कर्ष
डॉ. सारदा पासंगुलपति के अनुसार, शरीर का 7-10% वजन कम करके, नियमित एक्सरसाइज करके और चीनी व प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाक ग्रेड 2 फैटी लिवर को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। इस स्टेज पर की गई लापरवाही भविष्य में लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है, इसलिए डॉक्टर की सलाह को फॉलो करते हुए सही लाइफस्टाइल अपनाएं।
FAQ
फैटी लिवर कितने ग्रेड के होते हैं?
फैटी लिवर के तीन ग्रेड होते हैं, फैटी लिवर ग्रेड 1 की स्थिति को हेल्दी लाइफस्टाइल से रिवर्स किया जा सकता है। वहीं ग्रेड 2 फैटी लिवर की स्थिति को भी हेल्दी लाइफस्टाइल और सही इलाज से रिवर्स करने में मदद मिल सकती है। ग्रेड 3 फैटी लिवर एक गंभीर स्थिति है लेकिन कुछ मामलों में इसे भी रिवर्स किया जा सकता है। फैटी लिवर ग्रेड 3 के बारे में डॉक्टर बताती हैं कि अगर मरीज को इसके साथ अन्य गंभीर बीमारियां जैसे डायबिटीज, हार्ट डिजीज आदि हैं तो इसका इलाज इन कारकों पर भी निर्भर करता है।ग्रेड 2 फैटी लिवर के क्या लक्षण हैं?
ग्रेड 2 फैटी लिवर की स्थिति में कुछ लोगों को थकान, पेट में बेचैनी या पेट के दाहिने हिस्से में भारीपन महसूस हो सकता है लेकिन कई बार ये बिना लक्षण के भी ये स्टेज हो सकती है।क्या चिकन खाने से ग्रेड 2 फैटी लिवर होता है?
सिर्फ चिकन खाने से ग्रेड 2 फैटी लिवर नहीं होता है लेकिन अगर आप अनहेल्दी लाइफस्टाइल जी रहे हैं, शराब का सेवन करते हैं और ज्यादा तेल मसालों के साथ बना हुआ चिकन रोजाना खा रहे हैं, तो फैटी लिवर की समस्या हो सकती है।फैटी लिवर ग्रेड 2 का इलाज न कराया तो क्या होगा?
फैटी लिवर ग्रेड 2 को नजरअंदाज किया गया, तो यह स्थिति समय के साथ ग्रेड 3 फैटी लिवर, फिर लिवर फाइब्रोसिस, लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर तक में बदल सकती है, जो कि गंभीर स्थिति होती है और व्यक्ति की जान भी जा सकती है।
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Mar 31, 2026 17:00 IST
Modified By : Akanksha Tiwari Mar 31, 2026 17:00 IST
Modified By : Akanksha TiwariMar 31, 2026 17:00 IST
Modified By : Akanksha TiwariMar 31, 2026 17:00 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Sarada Pasangulapati