लिवर फंक्शन टेस्ट क्या है? जानें किन मरीजों को पड़ती है इसकी जरूरत और कैसे होता है ये टेस्ट

लिवर फंक्शन टेस्ट क्या है, क्यों किया जाता है। टेस्ट से किन-किन बीमारियों का पता करते है जानने के लिए लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन क्या कहते हैं जानें।

Satish Singh
Written by: Satish SinghPublished at: Sep 16, 2021
लिवर फंक्शन टेस्ट क्या है? जानें किन मरीजों को पड़ती है इसकी जरूरत और कैसे होता है ये टेस्ट

जन्म से लेकर मृत्यु तक कभी बीमार तो कभी स्वस्थ होने का सिलसिला चलते रहता है। इस बीच कभी स्थिति गंभीर हो जाती है तो कभी कुछ दिनों में ही व्यक्ति स्वस्थ हो जाता है। लेकिन सबसे जरूरी यह है कि बीमार होने पर जांच करना जरूरी है। यदि कोई व्यक्ति जांच ही नहीं करवाएगा, बीमारी को नजरअंदाज करेगा तो बीमारी अधिक बढ़ेगी और जानलेवा साबित होने की संभावनाएं भी रहती हैं। आज के इस आर्टिकल में हम जमशेदपुर (डिमना) के ऑर्गन ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. एन सिंह से बात कर लिवर फंक्शन टेस्ट क्या है? किन-किन मरीजों को इस टेस्ट की आवश्यकता पड़ती है। इस टेस्ट को कैसे किया जाता है, ये क्यों जरूरी है तमाम विषयों पर बिंदुवार चर्चा करेंगे। जानने के लिए पढ़ें ये आर्टिकल। 

क्या है एलएफटी

डॉक्टर बताते हैं कि लिवर का हमारे शरीर में अहम अंग है। हमारे शरीर के टॉक्सिन यानि विशाक्त पदार्थ को बाहर निकालने में काफी अहम भूमिका अदा करता है। हमारे लिवर का ख्याल कैसे रखना है इसके लिए लिवर फंक्शन टेस्ट अहम है। बीमारियां होने पर इसमें बदलाव आता है। इन तमाम टेस्ट को मिलाकर लिवर फंक्शन टेस्ट पूरा किया जाता है और बीमारियों का पता लगाया जाता है।

Liver Test

लिवर फंक्शन टेस्ट में की जाती है ये जांच

  • एएलटी :  इसे एलानिन एमिनोट्रांसफरेस (Alanine aminotransferase) कहा जाता है। - जीजीटी :  इसे गामा ग्लूटेमिल ट्रांसफेरसे (Gamma glutamyl Transferase) कहा जाता है। 
  • टोटल प्रोटीन : इसमें एल्ब्यूमिन और ग्लोबुलिन (Albumin & Globunin) आता है। 
  • एलएफटी : इसे लिवर बायो कैमेस्ट्री और लिवर प्रोफाइल के नाम से जाना जाता है। इसमें टोटल बिलुरिबिन इसमें डायरेक्ट बिलुरिबिन और इनडायरेक्ट बिलुरिबिन के बारे में पता चलता है। 
  • एसजीओटी : इसे एएसटी कहा जाता है। एएसटी का अर्थ एस्पारटेट अमिनोट्रांसफेरसे (Aspartate Aminotransferase) कहा जाता है।  

क्यों किया जाता है लिवर फंक्शन टेस्ट

लिवर शरीर का काफी अहम भाग है। डॉक्टर बताते हैं कि हम कोई भी दवा लेते हैं, खाना खाते हैं वो लिवर से होकर ही गुजरता है। ऐसे में यदि इसमें किसी प्रकार की खराबी आ जाए तो स्थिति बिगड़ सकती है। बीमारियों का पता लगाने के लिए एलएफटी किया जाता है। इसके अलावा आप कोई भी हेल्थ चेकअप करवाते हैं तो उसमें एलएफटी करवाना बेहद ही जरूरी होता है। हेपेटाइटिस ए व बी, लिवर इंफेक्शन, डायबिटीज, मोटापा, हार्ट की समस्या की समस्या, फैटी लिवर से जुड़ी बीमारी का इस टेस्ट से पता लगाया जाता है। यदि कोई शराब पीता है या फिर नशीले पदार्थ का सेवन करता है तो उस स्थिति में भी एलएफटी करवाना अहम हो जाता है। 

60 फीसदी से अधिक डैमेज होने पर दिखता है लक्षण

डॉक्टर बताते हैं कि लिवर शरीर का संवेदनशील अंग है। इसके लक्षण तबतक दिखाई नहीं देते जबतक लिवर के करीब 60 से 70 फीसदी भाग खराब नहीं हो जाता। ऐसे में लोगों को नियमित जांच की सलाह दी जाती है। ताकि बीमारी का समय रहते पता किया जा सके। लिवर फंक्शन टेस्ट के साथ अन्य जांच करवाने से इससे जुड़ी बीमारियों का पता कर सकते हैं। यदि कोई लंबे समय तक दवा का सेवन करता है तो ऐसे में उन्हें एलएफटी की जांच करवानी चाहिए।

Liver Disease

शरीर में इस प्रकार के लक्षण दिखे तो लें डॉक्टरी सलाह, कराएं एलएफटी

  • पेशाब का कलर पीला होना
  • आंखों का रंग पीला होना
  • ज्यादा थकावट का एहसास होना
  • पेट में पानी
  • पैरों में सूजन आना
  • पेट में दर्द होना
  • बार-बार उल्टियां आना
  • वजन का बढ़ना और एकाएक घटना
  • आप गर्भवती हैं आपको स्किन की बीमारी है
  • लंबे समय तक हड्डियों से जुड़ी बीमारी है
  • लंबे समय तक दवाओं का सेवन करने वाले मरीजों को

विस्तार से समझें टेस्ट, डॉक्टर इसके जरिए क्या पता करते हैं जानें

एसजीओटी टेस्ट में लिवर की बीमारी का पता चलता है

एक्सपर्ट बताते हैं कि इसे एएसटी कहा जाता है। शरीर में हार्ट, ओवरी या कहीं अन्य बीमारी हो तो उस स्थिति में एसजीओटी की समस्या होती है। आपको लिवर में कोई भी परेशानी हो तो ये बढ़ सकता है। 

लिवर की बीमारी एसजीपीटी बढ़ व घट सकता है

लिवर में कोई भी बीमारी-परेशानी हो तो एसजीपीटी उपर व नीचे हो सकता है। कभी कबार डॉक्टर इसकी जांच कर लिवर से जुड़ी बीमारियों का पता लगाते हैं। 

अल्कलाइन फॉस्फोटेट जिसे जीजीटी कहा जाता है

जब भी पित्त की नली या बाइल डक्ट में कोई भी बीमारी व परेशानी हो तो एएलटी व जीजीटी बढ़ता है। पित्त का स्टोन, लिवर स्टोन, गॉल ब्लैडर स्टोन होता है तो उस केस में जीजीटी बढ़ता है। जब भी कोई व्यक्ति शराब पीकर आता है और झूठ बोलता है तो उस केस में उस व्यक्ति की जीजीटी की जांच की जाती है। क्योंकि शराब पीने वालों में जीजीटी की मात्रा बढ़ी होती है। 

टोटल प्रोटीन से भी चलता है बीमारी का पता

इसमें एल्ब्यूमिन और ग्लोबुलिन की मात्रा को डॉक्टर देखते हैं। डॉक्टर बताते हैं कि लिवर प्रोटीन बनाता है। ज्यादातर प्रोटीन एल्ब्यूमिन में बनता है। जब भी आपको लिवर की कोई भी परेशानी हो तो एल्ब्यूमिन में पता चल सकता है। प्रोटीन से जुड़ी बीमारी होती है तो ये टेस्ट करवा सकते हैं। जब प्रोटीन लो रहता है तो डॉक्टर अन्य जांच करवाने की सलाह देते हैं। जैसे पेशाब में प्रोटीन की मात्रा की जांच करना। किडनी की जांच, प्रोटीन इलेक्ट्रोफोरेसिस की जांच की जाती है, ताकि प्रोटीन की बीमारी का पता लगाया जा सके। डॉक्टर बताते हैं कि जांच में टोटल बिलुरिबिन का पता किया जाता है। हमारे शरीर में लिवर जो वेस्ट मैटेरियल तैयार करता है उसे बिलुरिबिन के माध्यम से बाहर निकालता है। लिवर हमारे शरीर से टॉक्सिन को बाहर निकालने में मदद करता है। ये गंदगी बिलुरिबिन के जरिए बाहर निकालता है। ये बाइल यानि पित्त को फैट को ब्रेकडाउन कर उसे पचाने में मदद करता है। बिना बाइल के फैटी फूड पचाना मुश्किल होता है। जब भी लिवर में कोई भी समस्या आती है तो टोटल बिलुरिबिन ज्यादा होती है। इसमें दो तत्व होते हैं पहला डायरेक्ट बिलुरिबिन और इनडायरेक्ट बिलुरिबिन होता है। डायरेक्ट बिलुरिबिन तब होता है जब लिवर को सीधा नुकसान पहुंचता है। या जब भी पित्त की नली में किसी प्रकार की समस्या जैसी स्टोन, कैंसर आदि हो तो डायरेक्ट बिलुरिबिन  ज्यादा होता है। 

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इनडायरेक्ट बिलुरिबिन इस केस में बढ़ता है

इनडायरेक्ट बिलुरिबिन के केस में जब भी हीमोलाइसिस यानि आरबीसी- रेड ब्लड सेल्स को तोड़ने का काम होता है तो और वो शरीर के नियंत्रण के बाहर होता है, जैसे हीमोलेटिक एनिमिया। इसमें शरीर इनडायरेक्ट बिलुरिबिन को क्लीयर नहीं कर पाती है। तभी ये इनडायरेक्ट बिलुरिबिन बढ़ सकता है। लिवर में सीधे इंज्युरी व समस्या होने की वजह से ऐसा नहीं होता है। शरीर में कोई अन्य बीमारी होने के केस में इनडायरेक्ट बिलुरिबिन बढ़ सकता है। या फिर चाइल्डहुड जॉन्डिस है या अनुवांशिक बीमारी होने के केस में इनडायरेक्ट बिलुरिबिन बढ़ सकता है। ऐसे में टोटल बिलुरिबिन ज्यादा दिखता है। लेकिन इसमें परेशान होने की जरूरत नहीं है इससे लिवर को नुकसान नहीं पहुंचता है। यदि ये बढ़े तो आपको डॉक्टरी सलाह लेकर लिवर एक्सपर्ट की सलाह लेनी चाहिए ताकि बीामरी का इलाज किया जा सके। 

एलएफटी के आंकड़े इन केस में होते हैं अलग-अलग

डॉक्टर बताते हैं कि एलएफटी के आंकड़े तब अलग अलग हो जाते हैं जब अलग अलग मशीनों से जांच करवाई जाती है। वहीं एक देश में जांच करवाने के बाद दूसरे देश में जांच करवाएं तो आंकड़े अलग-अलग आ सकते हैं। ऐसे में आप डॉक्टरी सलाह ले सकते हैं। 

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एलएफटी जांच करवाने को लेकर जरूरी बातें

  • यदि आप नियमित तौर पर शराब का सेवन करते हैं तो नियमित तौर पर एलएफटी की जांच करवानी चाहिए हर साल करवानी चाहिए
  • 20 से 40 साल के बीच में हर तीन साल में एलएफटी की जांच करवानी चाहिए
  • 40 से 50 साल के बीच में आपकी उम्र है तो हर दो साल में एलएफटी की जांच करवानी चाहिए
  • यदि आपकी उम्र 50 साल से ज्यादा है तो हर साल एलएफटी की जांच करवानी चाहिए

रेगुलर करवाएं जांच

डॉक्टर बताते हैं कि लिवर की बीमारी बच्चों से लेकर बड़ों में हो सकती है। ऐसे में शरीर में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए। वहीं डॉक्टरी सलाह के दवा का सेवन नहीं करना चाहिए। यही वजह है कि डॉक्टर की बताई गई इन तमाम बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है।

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