आजकल कम उम्र में ही फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिसका मुख्य कारण खराब खानपान, बढ़ता वजन और फिजिकल एक्टिविटी की कमी है। ऐसे में लोग इसकी जांच और सही स्टेज जानने के लिए अल्ट्रासाउंड का सहारा लेते हैं। हालांकि, कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या अल्ट्रासाउंड से फैटी लिवर की सटीक स्टेज का पता लगाया जा सकता है या नहीं? इस बारे में सही जानकारी के लिए हमने यशोदा हॉस्पिटल हैदराबाद की कंसल्टेंट मेडिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और हेपेटोलॉजिस्ट, डॉ. सारदा पासंगुलपति से बात की।
अल्ट्रासाउंड फैटी लिवर की जांच में कैसे काम करता है?
क्लिनिकल प्रैक्टिस में फैटी लिवर का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड सबसे आम और शुरुआती टेस्ट माना जाता है। डॉ. सारदा पासंगुलपति के अनुसार, अल्ट्रासाउंड इसलिए ज्यादा उपयोग किया जाता है क्योंकि यह नॉन-इनवेसिव, आसानी से किया जाने वाला और अपेक्षाकृत कम खर्चीला होता है। अल्ट्रासाउंड के दौरान लिवर की फोटो स्क्रीन पर दिखाई देती है। जब लिवर में फैट जमा होता है, तो उसकी बनावट में बदलाव दिखाई देता है। इस स्थिति में लिवर सामान्य से ज्यादा ब्राइट या इकोजेनिक (echogenic) दिख सकता है। इसी आधार पर रेडियोलॉजिस्ट यह अनुमान लगा सकते हैं कि लिवर में फैट कितना जमा है।
डॉ. सारदा पासंगुलपति बताती हैं, ''अल्ट्रासाउंड फैटी लिवर की मौजूदगी और उसकी लगभग ग्रेड का अंदाजा तो दे सकता है, लेकिन यह लिवर की बीमारी की सटीक स्टेज नहीं बता सकता।'' डॉ. सारदा पासंगुलपति आगे बताती हैं कि अल्ट्रासाउंड से यह पता लगाना मुश्किल होता है कि लिवर में सूजन (inflammation) है या नहीं, या फिर लिवर में फाइब्रोसिस यानी शुरुआती स्कारिंग कितनी हो चुकी है। कुछ गंभीर स्थितियां जैसे मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोहेपेटाइटिस (MASH) या एडवांस्ड फाइब्रोसिस का सही आंकलन केवल अल्ट्रासाउंड से करना संभव नहीं होता। इसलिए डॉक्टर केवल अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के आधार पर पूरी बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकालते।
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डॉ. सारदा पासंगुलपति के अनुसार, फैटी लिवर की स्थिति को सही तरीके से समझने के लिए डॉक्टर अक्सर ब्लड टेस्ट और अन्य जांचों को भी देखते हैं।
- लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT)
- ब्लड शुगर टेस्ट
- कोलेस्ट्रॉल और लिपिड प्रोफाइल
- मरीज की मेडिकल हिस्ट्री और लाइफस्टाइल
अगर डॉक्टर को यह संदेह हो कि बीमारी आगे बढ़ रही है या लिवर में स्कारिंग हो सकती है, तो वे अतिरिक्त जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
American Association for the Study of Liver Diseases (AASLD) के Hepatology जर्नल में साल 2011 में प्रकाशित मेटा एनालिसिस के अनुसार, यह निष्कर्ष निकलता है कि अल्ट्रासोनोग्राफी (Ultrasonography) मध्यम से गंभीर फैटी लिवर का पता लगाने के लिए एक सटीक तकनीक है। हिस्टोलॉजी (बायोप्सी) की तुलना में, अल्ट्रासाउंड की संवेदनशीलता (sensitivity) 84.8% और विशिष्टता (specificity) 93.6% पाई गई है। इसकी कम लागत, सुरक्षा और व्यापक उपलब्धता के कारण, यह क्लिनिकल यूज के लिए फैटी लिवर की स्क्रीनिंग के लिए सबसे पसंदीदा इमेजिंग का तरीका है। हालांकि, अल्ट्रासाउंड लिवर में फैट की मात्रा को पूरी तरह सटीक रूप से नहीं माप सकता, लेकिन क्लिनिकल यूज के लिए यह एक प्रभावी उपकरण साबित होता है।
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अल्ट्रासाउंड में फैटी लिवर की ग्रेडिंग
डॉ. सारदा पासंगुलपति बताती हैं कि अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में अक्सर फैटी लिवर को माइल्ड यानी फैटी लिवर ग्रेड 1, मॉडरेट यानी फैटी लिवर ग्रेड 2 या सीवियर यानी फैटी लिवर ग्रेड 3 में बताया जाता है। यह ग्रेडिंग लिवर हेल्थ में दिखाई देने वाले बदलावों के आधार पर की जाती है।
- माइल्ड फैटी लिवर में लिवर में फैट की मात्रा कम होती है और शुरुआती बदलाव दिखाई देते हैं।
- मॉडरेट फैटी लिवर की इस स्थिति में फैट का जमाव ज्यादा स्पष्ट दिखाई देता है।
- सीवियर फैटी लिवर की स्थिति में लिवर में फैट काफी ज्यादा मात्रा में जमा हो जाता है।
हालांकि, यह ग्रेडिंग केवल फैट की मात्रा का एक सामान्य अनुमान देती है, इससे यह नहीं पता चलता कि लिवर को कितना नुकसान पहुंच चुका है।

फैटी लिवर की सही स्टेज जानने के लिए कौन से टेस्ट जरूरी हैं?
डॉ. सारदा पासंगुलपति बताती हैं कि कुछ मामलों में डॉक्टर फाइब्रोस्कैन (FibroScan) कराने की सलाह देते हैं। फाइब्रोस्कैन का कैप स्कोर अल्ट्रासाउंड से ज्यादा सटीक तरीके से फैट मापता है। यह लिवर की स्टिफनेस यानी कठोरता को मापती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि लिवर में फाइब्रोसिस या स्कारिंग कितनी है। इसके अलावा, कुछ मामलों में MRI आधारित इमेजिंग या खास ब्लड मार्कर्स का भी उपयोग किया जाता है, जो लिवर की स्थिति को ज्यादा सटीक तरीके से दिखा सकते हैं। बहुत ही चुनिंदा मामलों में डॉक्टर लिवर बायोप्सी की भी सलाह दे सकते हैं, जिसे लिवर की बीमारी की स्टेज जानने का सबसे सटीक तरीका माना जाता है।
डॉक्टर से कब मिलें?
डॉ. सारदा पासंगुलपति के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक पेट के दाहिने हिस्से में हल्का दर्द, पेट में भारीपन, भूख कम लगना या बिना वजह वजन बढ़ना या घटना जैसे लक्षण महसूस होते हैं, तो डॉक्टर से मिलना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति के ब्लड टेस्ट में लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) का रिजल्ट असामान्य आता है या रिपोर्ट में लिवर एंजाइम बढ़े हुए दिखाई देते हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि लिवर पर दबाव पड़ रहा है। ऐसे में गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट या हेपेटोलॉजिस्ट से जांच करवाना जरूरी होता है। इसके अलावा, जिन लोगों को पहले से डायबिटीज, मोटापा, हाई कोलेस्ट्रॉल या मेटाबोलिक सिंड्रोम जैसी समस्याएं हैं, उनमें फैटी लिवर का खतरा ज्यादा होता है। ऐसे लोगों को नियमित हेल्थ चेकअप करवाना चाहिए।

निष्कर्ष
फैटी लिवर की पहचान के लिए अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट देखकर डॉक्टर को यह अनुमान लगाने में मदद मिलती है कि फैट की मात्रा माइल्ड, मॉडरेट या सीवियर लेवल पर है। हालांकि, अल्ट्रासाउंड से केवल फैट की मौजूदगी और उसकी ग्रेडिंग का अंदाजा मिलता है, लेकिन इससे यह सटीक रूप से पता नहीं चलता कि लिवर में सूजन या स्कारिंग कितनी हो चुकी है। लिवर की सही स्थिति को समझने के लिए डॉक्टर अक्सर कई अन्य जांचों का सहारा लेते हैं, जैसे लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT), ब्लड शुगर टेस्ट और लिपिड प्रोफाइल। अगर लिवर में फाइब्रोसिस या स्कारिंग की आशंका होती है, तो फाइब्रोस्कैन (FibroScan) जैसी जांच ज्यादा उपयोगी साबित होती है। कुल मिलाकर, अल्ट्रासाउंड फैटी लिवर की पहचान और निगरानी के लिए प्रभावी है, लेकिन यह बीमारी की पूरी स्टेज निर्धारित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
FAQ
क्या ग्रेड 1 फैटी लिवर खतरनाक है?
ग्रेड 1 फैटी लिवर फैटी लिवर की स्थिति में व्यक्ति को परेशान होने की जरूरत नहीं है, ऐसा इसलिए क्योंकि सही देखभाल, नियमित एक्सरसाइज और संतुलित भोजन से लिवर फिर से पूरी तरह सही हो सकता है लेकिन अगर इस स्टेज पर लापरवाही बरती तो समस्या गंभीर हो सकती है।कैसे पता चलेगा कि फैटी लिवर ठीक हो रहा है?
फैटी लिवर ठीक हो रहा है या नहीं, यह अल्ट्रासाउंड या लिवर फंक्शन टेस्ट से पता लगाया जा सकता है।फैटी लिवर से क्या-क्या दिक्कत होती है?
फैटी लिवर (Fatty Liver) का अगर इलाज समय से न किया जाए तो लिवर में सूजन, लिवर में फाइब्रोसिस और गंभीर मामलों में लिवर खराब होने यानी सिरोसिस या लिवर कैंसर (Liver Cancer) तक हो सकता है।फैटी लिवर में क्या नहीं खाना चाहिए?
फैटी लिवर की समस्या से अगर कोई व्यक्ति जूझ रहा है तो उसे प्रोसेस्ड फूड, शराब, मिठाई, मैदा और तले-भुने खाने से बिल्कुल दूरी बना लेनी चाहिए। ऐसा इसलिए, क्योंकि ये सभी चीजें लिवर में फैट को बढ़ा सकती हैं, जिससे कई अन्य समस्याएं हो सकती हैं।क्या फैटी लिवर वापस सामान्य हो सकता है?
फैटी लिवर के बारे में अगर समय से पता चल जाए तो लाइफस्टाइल में बदलाव करने से फैटी लिवर की समस्या में सुधार हो सकता है और कई मामलों में यह पूरी तरह ठीक भी हो सकता है।
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Apr 04, 2026 20:17 IST
Modified By : Akanksha Tiwari Apr 04, 2026 20:17 IST
Modified By : Akanksha TiwariApr 04, 2026 20:17 IST
Published By : Akanksha Tiwari
Reviewed By : Dr Sarada Pasangulapati