लिवर में अतिरिक्त फैट जमा होने की स्थिति को फैटी लिवर (Fatty Liver) कहा जाता है। लिवर पोषक तत्वों को प्रोसेस करता है और विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर करने में मदद करता है। जब लिवर में अतिरिक्त फैट जमा हो जाता है, तो उसका यह कार्य प्रभावित होता है और इसका बुरा असर शरीर के कई हिस्सों पर पड़ सकता है। जैसे-जैसे लिवर में फैट बढ़ता है, बीमारियों का खतरा भी बढ़ने लगता है। फैटी लिवर के मरीज अक्सर लापरवाही में स्थिति को गंभीर बना लेते हैं।
Dr. Naveen Polavarapu, Senior Consultant, Medical Gastroenterologist, Liver Specialist, Lead-Advanced Endoscopic Interventions & Training, Clinical Director, Yashoda Hospitals, Hyderabad के मुताबिक, फैटी लिवर डिजीज में छोटी गलतियों के कारण स्थिति गंभीर हो सकती है। नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) या मेटाबॉलिक डिसफंक्शन से जुड़ा स्टिएटोटिक लिवर रोग (MASLD) जैसी बीमारी, लिवर में फैट जमा होने के कारण शुरू होती है। इसके पीछे मोटापा, डायबिटीज या खराब लाइफस्टाइल जैसे कारण हो सकते हैं। इस लेख में आगे जानेंगे कि फैटी लिवर की स्थिति में मरीजों को किन गलतियों से बचना चाहिए?
1. शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें

Dr. Naveen Polavarapu ने बताया कि फैटी लिवर के शुरुआती संकेतों (Fatty Liver Early Signs) की बात करें, तो उसमें-
- थकान
- पेट में दर्द
- लिवर एंजाइम्स का बढ़ना (जिसका पता जांच से चलता है) जैसे लक्षण शामिल हो सकते हैं। बीमारी के खतरे से बचने के लिए समय पर जांच करवाएं ताकि फाइब्रोसिस की स्थिति सिरोसिस में न बदल जाए।
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2. क्रैश या कीटो डाइट पर निर्भर होना
अक्सर फैटी लिवर के मरीज क्रैश डाइट या कीटो डाइट लेने लगते हैं, लेकिन इससे लिवर पर स्ट्रेस बढ़ सकता है। इसके बजाय ऐसी डाइट लें जो होल ग्रेन्स, सब्जियों और हेल्दी फैट्स से भरपूर हो। Dr. Naveen Polavarapu ने बताया कि लिवर को हेल्दी रखने के लिए Mediterranean Diet का सेवन कर सकते हैं। 2022 में Clinical Nutrition नामक जर्नल में छपा एक मेटा रिव्यू के मुताबिक, Mediterranean Diet लेने से लिवर की सेहत में सुधार देखा गया, ALT (लिवर एंजाइम) कम हुए और फैटी लिवर इंडेक्स में भी सुधार देखा गया।
मेडिटेरेनियन डाइट क्या होती है?
American Heart Association के मुताबिक, मेडिटेरेनियन डाइट में फल, सब्जियां, बीन्स, मेवे और बीज शामिल होते हैं। हेल्दी फैट के स्रोत में इसमें जैतून का तेल (Olive Oil) शामिल करना फायदेमंद माना जाता है। साथ ही डेयरी प्रोडक्ट्स या प्रोसेस्ड मीट का सेवन कम करने की सलाह दी जाती है।
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3. एक से ज्यादा बीमारियों को नजरअंदाज करना
बीमारियों को नजरअंदाज करना फैटी लिवर के मरीजों की सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। डायबिटीज कंट्रोल में नहीं है, हाई बीपी की समस्या है, हाई कोलेस्ट्रॉल है, तो डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं और इलाज से इन बीमारियों को कंट्रोल करें। ऐसा न करने से फैटी लिवर को कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है।
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4. खुद से दवाएं लेना
Dr. Naveen Polavarapu ने बताया कि फैटी लिवर की स्थिति में खुद से दवाएं न लें। किसी भी दवा का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। पेनकिलर्स या हर्बल सप्लीमेंट्स का सेवन भी डॉक्टर की सलाह के बगैर नहीं करना चाहिए। Scientific Electronic Library Online की एक स्टडी के मुताबिक, डॉक्टर की सलाह के बगैर ली गई दवाएं (Self Medication) के गलत इस्तेमाल, ओवरडोज के कारण लिवर को गंभीर नुकसान या एक्यूट लिवर फेलियर की स्थिति भी हो सकती है। स्टडी में यह भी बताया गया है कि दर्द की दवाएं, हर्बल सप्लीमेंट्स या अन्य ओटीसी दवाएं लिवर इंजरी का कारण बन सकती हैं इसलिए डॉक्टर की सलाह के बगैर दवाओं का सेवन न करें।
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5. वेट मैनेजमेंट को नजरअंदाज करना
फैटी लिवर के मरीज अक्सर लिवर में जमा फैट को कम करने के लिए तेजी से वेट लॉस करने का प्रयास करने लगते हैं, लेकिन तेजी से वजन घटाना सही तरीका नहीं माना जाता है। Dr. Naveen Polavarapu ने बताया कि फैटी लिवर की स्थिति में वजन घटाना जरूरी है, लेकिन इसे तेजी से करने की कोशिश न करें। तेजी से वेट लॉस करना शरीर को ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।
Wiley Online Library में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, करीब तीन लाख से अधिक लोग जो मोटापे का शिकार थे उनमें नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर (MASLD) का जोखिम 3.5 गुना ज्यादा देखा गया। स्टडी के मुताबिक, जैसे-जैसे वजन और बीएमआई बढ़ता है, वैसे-वैसे लिवर के फैटी होने का खतरा भी बढ़ता है।
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6. रेगुलर मॉनिटरिंग न करना
फैटी लिवर के मरीजों को रेगुलर मॉनिटरिंग की जरूरत होती है। इससे खतरों से बचा जा सकता है। डॉक्टर की सलाह पर एलएफटी या अल्ट्रासाउंड जैसी जांच कराएं। नियमित जांच न कराने से फैटी लिवर, सिरोसिस या अन्य गंभीर समस्या में बदल सकता है। रेगुलर मॉनिटरिंग के साथ हेल्दी डाइट लें, एक्सरसाइज करें और हेल्दी लाइफस्टाइल बनाए रखें।
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7. अच्छी नींद की अहमियत न समझना
फैटी लिवर के मरीजों को नींद को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नींद की कमी से शरीर में इंसुलिन सही ढंग से काम नहीं करता है, जिससे फैटी लिवर की समस्या बढ़ सकती है। नींद की कमी से मेटाबॉलिज्म भी बिगड़ सकता है और लिवर में अतिरिक्त चर्बी जमा हो सकती है। नींद की कमी से भूख बढ़ाने वाले हार्मोन एक्टिव हो सकते हैं जिससे ओवरईटिंग और मोटापा का खतरा बढ़ सकता है।
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क्या फैटी लिवर में थोड़ी मात्रा में अल्कोहल का सेवन कर सकते हैं?
Dr. Naveen Polavarapu ने बताया कि फैटी लिवर की स्थिति में अल्कोहल का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि कम मात्रा में अल्कोहल भी शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकती है। फैटी लिवर की स्थिति में अल्कोहल का सेवन करने से फैटी लिवर ज्यादा गंभीर स्टेज में पहुंच सकता है। यानी यह खतरा ग्रेड 1 से 2 या 3 में बदल सकता है। अगर जांच में फैटी लिवर का पता चल जाता है, तो अल्कोहल का सेवन बंद कर दें, वरना लिवर डैमेज का खतरा बढ़ सकता है।
Clinical Gastroenterology and Hepatology की ओर से प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, नॉन-अल्कोहल िक फैटी लिवर डिजीज (MASLD) में अल्कोहल का अधिक सेवन, लिवर में फैट जमने की स्थिति को और भी खराब कर सकता है। स्टडी के मुताबिक, अल्कोहल की मात्रा और बिंज ड्रिंकिंग दोनों ही स्थिति का संबंध लिवर फैट के साथ देखा गया। ऐसे में फैटी लिवर के मरीजों को अल्कोहल के सेवन से बचना चाहिए।
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डॉक्टर से सलाह कब लें?
Dr. Naveen Polavarapu ने बताया कि फैटी लिवर की जांच के लिए एक टेस्ट काफी नहीं होता। मरीज की स्थिति के आधार पर अल्ट्रासाउंड, फाइब्रोस्कैन या ब्लड टेस्ट किए जा सकते हैं, इसलिए लक्षणों की पहचान में देरी न करें। अगर पेट दर्द, भूख कम लगना जैसे लक्षण महसूस हों, तो डॉक्टर से संपर्क करें। लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) में अगर ALT/AST की मात्रा ज्यादा हो, तो भी डॉक्टर से तुरंत सलाह लें, यह फैटी लिवर का संकेत हो सकता है।
निष्कर्ष:
इस लेख में Gastroenterologist & Liver Specialist Dr. Naveen Polavarapu से बातचीत के आधार पर पता चला कि फैटी लिवर की स्थिति में मरीज को बेहद सावधानी बरतने की जरूरत होती है। फैटी लिवर के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। फैटी लिवर को कम करने के लिए क्रैश डाइट या कीटो डाइट पर निर्भर न रहें। बीमारियों के निदान के लिए डॉक्टर से सलाह लें और वेट मैनेजमेंट को अपनाएं। साथ ही सेल्फ मेडिकेशन से बचें।
FAQ
फैटी लिवर में कौन से टेस्ट होते हैं?
ब्लड टेस्ट, फाइब्रोस्कैन, अल्ट्रासाउंड, लिवर फंक्शन टेस्ट और गंभीर मामलों में डॉक्टर लिवर बायोप्सी कराने की सलाह भी दे सकते हैं। ये सभी जांच डॉक्टर की सलाह के बाद ही की जाती हैं।फैटी लिवर में क्या दिक्कत होती है?
फैटी लिवर की स्थिति में जब लिवर में फैट की मात्रा बढ़ने लगती है, तो पेट दर्द, भूख कम लगना, लिवर में सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा व्यक्ति को थकान और कमजोरी भी महसूस हो सकती है। हालांकि ये लक्षण हर मरीज में नजर आएं, ऐसा जरूरी नहीं है।फैटी लिवर में दर्द होता है?
फैटी लिवर की स्थिति में कुछ लोगों को पेट के दाईं तरफ हल्का दर्द महसूस हो सकता है या दबाव व भारीपन का एहसास भी हो सकता है। अगर दर्द लगातार बना रहे, तो डॉक्टर की सलाह से जांच कराएं।फैटी लिवर में किन चीजों के सेवन से बचें?
फैटी लिवर की स्थिति में शुगर युक्त ड्रिंक्स और प्रोसेस्ड कार्ब्स से बचें वरना शरीर में फैट की मात्रा बढ़ सकती है। फ्रुक्टोज युक्त ड्रिंक्स का सेवन करने से भी बचें, इसकी जगह पानी या हर्बल चाय पी सकते हैं।फैटी लिवर में कौन सी एक्सरसाइज करें?
हमेशा बैठने की आदत फैटी लिवर की स्थिति को और खराब कर सकती है। लाइफस्टाइल को एक्टिव बनाएं। हफ्ते में कम-से-कम 150 मिनट मध्यम गति वाली एक्सरसाइज जैसे ब्रिस्क वॉक या कार्डियो कर सकते हैं।
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Apr 04, 2026 10:55 IST
Modified By : Yashaswi Mathur Apr 04, 2026 10:55 IST
Modified By : Yashaswi MathurApr 04, 2026 10:55 IST
Published By : Yashaswi Mathur
Reviewed By : Dr Naveen Polavarapu