Fri Sep 11, 2026 | 06:55 PM IST

Medically Reviewed by Dr KS Somasekhar Rao , Senior Consultant Gastroenterologist | Hepatologist | Advanced Therapeutic Endoscopist

क्‍या फैटी लि‍वर र‍िकवरी के बाद दोबारा हो सकता है?

ल‍िवर की कोश‍िकाओं में अति‍र‍िक्‍त फैट जमा होने की स्‍थ‍ित‍ि को फैटी ल‍िवर कहा जाता है। जो लोग फैटी ल‍िवर से र‍िकवरी कर चुके हैं, उनके मन में हमेशा यह सवाल होता है क‍ि क्‍या मुझे यह समस्‍या दोबारा हो सकती है? र‍िसर्च और एक्‍सपर्ट से समझते हैं क‍ि दोबारा फैटी ल‍िवर की समस्‍या होती है या नहीं? साथ ही समझेंगे क‍ि यह स्‍थ‍िति‍ कब आती है।

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फैटी ल‍िवर एक ऐसी स्‍थि‍त‍ि में ज‍िनमें ल‍िवर की कोश‍िकाओं में अति‍रि‍क्‍त फैट जमा हो जाता है। ध्‍यान न देने पर फैटी ल‍िवर गंभीर रोग बन सकता है। आज के समय में फैटी ल‍िवर एक कॉमन समस्‍या होती जा रही है। ल‍िवर की बीमार‍ियां ज्‍यादातर उन लोगों में देखने को म‍िल रही हैं, जो मोटापा, डायब‍िटीज, हाई बीपी या हाई कोलेस्‍ट्रॉल से पीड़ि‍त हैं। जो लोग फैटी ल‍िवर की समस्‍या से गुजर चुके हैं वह हमेशा इस च‍िंता में रहते हैं क‍ि कहीं उन्‍हें यह समस्‍या दोबारा न हो जाए। इसे नजरअंदाज करने से ल‍िवर की बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। ल‍िवर की बीमार‍ियों में मेटाबोलिक डिस्‍फंक्शन एसोसिएटेड स्टीटोहेपेटाइटिस (MASH or Metabolic Dysfunction Associated Steatohepatitis) को ज्‍यादा गंभीर रूप माना जाता है क्‍योंक‍ि इसमें केवल ल‍िवर में फैट जमा नहीं होता बल्‍क‍ि सूजन और ल‍िवर को नुकसान भी पहुंच सकता है। इस लेख में हम डॉक्‍टर और र‍िसर्च की मदद से समझेंगे क‍ि फैटी ल‍िवर रोग र‍िकवरी के बाद दोबारा हो सकता है या नहीं? इस व‍िषय पर बेहतर जानकारी के ल‍िये हमने Dr. K. S. Somasekhar Rao, Sr. Consultant Medical Gastroenterologist, Hepatologist & Clinical Director, Yashoda Hospitals, Hyderabad से बात की।

र‍िकवरी के बाद फैटी ल‍िवर रोग फ‍िर से हो सकता है

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Dr. K. S. Somasekhar Rao ने बताया क‍ि फैटी ल‍ि‍वर चाहे नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर (MASLD) हो या अल्कोहलिक फैटी ल‍िवर हो, इलाज के बाद दोबारा यह बीमारी हो सकती है। ल‍िवर में जमा फैट का अगर सही समय पर इलाज क‍िया जाए, तो फैट के जमाव, सूजन या शुरुआती फाइब्रोस‍िस को कम क‍िया जा सकता है। वहींं अगर समय पर इलाज न क‍िया जाए, तो यह स्‍थि‍त‍ि कुछ मामलों में नॉन-एल्कोहलिक स्टीटोहेपेटाइटिस (NASH, ज‍िसे अब MASH कहा जाता है), सिरोसिस या लिवर फेलियर में तब्दील हो जाती है। अक्‍सर ज‍िन मरीजों को दोबारा फैटी ल‍िवर की समस्‍या होती है उनमें लाइफस्‍टाइल से जुड़े कारण देखे जाते हैं जैसे हेल्‍दी डाइट न लेना, फ‍िज‍िकल एक्‍ट‍िव‍िटी न करना वगैरह। अगर हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल फॉलो नहीं करेंगे, तो ल‍िवर में फैट जमा होने की आशंका बढ़ सकती है।

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फैटी ल‍िवर रोग दोबारा होने के कारण

  • शरीर का अत‍िर‍िक्‍त वजन, खासतौर पर पेट की चर्बी।
  • इंसुल‍िन रेजि‍स्‍टेंस और टाइप 2 डायब‍िटीज।
  • शुगर, र‍िफाइंड कार्ब्स युक्‍त डाइट और अनहेल्‍दी फैट्स ल‍िवर में फैट जमा होने की प्रक्र‍िया को बढ़ावा दे सकते हैं।
  • मेटाबॉल‍िक स‍िंड्रोम और शारीर‍िक गत‍िव‍िध‍ि की कमी।
  • एल्कोहलिक फैटी ल‍िवर के मामलों में अल्‍कोहल का सेवन दोबारा शुरू करना। सीमि‍त मात्रा में भी अल्‍कोहल का सेवन नुकसानदायक ही माना जाता है। Alcohol and Alcoholism के जर्नल र‍िव्‍यू के अनुसार, अल्‍कोहल का सेवन दोबारा शुरू करने वाले मरीजों में ल‍िवर में फैट का जोख‍िम बढ़ जाता है।

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मोटापे और एक्‍सरसाइज की कमी से फैटी ल‍िवर ड‍िजीज दोबारा हो सकता है

2021 में साइंट‍िफ‍िक र‍िपोर्ट्स में छपी की एक स्‍टडी के अनुसार, मेटाबॉलिक डिसफंक्शन से जुड़ा स्टीटोटिक लिवर रोग (MASLD or Metabolic Dysfunction Associated Steatotic Liver Disease) से पीड़ि‍त ऐसे 1260 पुरुषों को अध्‍ययन में शाम‍िल क‍िया गया जो बीमारी से ठीक हो चुके थे। स्‍टडी में 49.0 प्रत‍िशत पुरुषों में दोबारा यह रोग देखा गया। स्‍टडी में यह भी देखा गया क‍ि जीवनशैली में बदलाव करने के बाद भी यह बीमारी दोबारा हो सकती है। इस स्‍टडी में एक्‍सरसाइज की कमी और मोटापा दो बड़े कारण देखे गए ज‍िसकी वजह से फैटी ल‍िवर ड‍िजीज ने दोबारा दस्‍तक दी।

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ल‍िवर ट्रांसप्‍लांट के बाद भी फैटी लि‍वर रोग लौट सकता है

2023 में JHEP Reports की एक स्‍टडी के मुताब‍िक, साल 2000 और 2019 के बीच ट्रांसप्‍लांट हुए 150 मरीजों में देखा गया क‍ि पांच साल में स्टीटोसिस (Steatosis) दोबारा होने की दर 80 प्रत‍िशत थी और स्टीटोहेपेटाइटिस (Steatohepatitis) या एमएएसएच (MASH या मेटाबोलिक डिस्‍फंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोहेपेटाइटिस) की दर 60.3 प्रत‍िशत थी। यानी ल‍िवर ट्रांसप्‍लांट के बाद भी कई मरीजों में दोबारा इसका खतरा देखा गया।

ज्‍यादा बीएमआई और डायब‍िटीज से फैटी लि‍वर रोग लौट सकता है

2021 में Clinical And Translational Gastroenterology की एक स्‍टडी यह देखने के ल‍िए की गई थी क‍ि ल‍िवर ट्रांसप्‍लांट के बाद क्‍या नॉन अल्‍कोहल‍िक फैटी ल‍िवर ड‍िजीज दोबारा हो सकता है? 66 मरीजों में ट्रांसप्‍लांट के लगभग एक साल बाद जांच की गई और 65.2 प्रत‍िशत मरीजों में यह रोग दोबारा पाया गया। स्‍टडी में यह भी बताया गया क‍ि ज‍िन लोगों का बीएमआई ज्‍यादा था, उनमें यह बीमारी दोबारा देखी गई। इसके साथ ही ट्रांसप्‍लांट के बाद होने वाली डायब‍िटीज का भी इस रोग के दोबारा होने से संबंध देखा गया।

Dr. K. S. Somasekhar Rao ने बताया क‍ि र‍िकवरी के बाद फैटी ल‍िवर की स्‍थ‍ित‍ि से बचने के ल‍िए इंसुल‍िन सेंस‍िट‍िव‍िटी में सुधार करें और हफ्ते में 150 म‍िनट कार्ड‍ियो और अन्‍य व्‍यायाम को दें। हर छह से बारह महीनों में डॉक्‍टर की सलाह से ब्‍लड टेस्‍ट, ल‍िप‍िड प्रोफाइल टेस्‍ट, ल‍िवर एंजाइम टेस्‍ट कराएं ताक‍ि शारीर‍िक स्‍थ‍ित‍ि का पता चल सके। र‍िकवरी के बाद डॉक्‍टर ल‍िवर फंक्‍शन टेस्‍ट या अल्‍ट्रासाउंड कराने की सलाह भी दे सकते हैं। इस तरह ल‍िवर की जांच करने में मदद म‍िलेगी और यह पता चलेगा क‍ि ल‍िवर में अत‍िर‍िक्‍त फैट मौजूद है या नहीं।

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दोबारा फैटी ल‍िवर की समस्‍या से कैसे बचें?

दोबारा फैटी ल‍िवर की समस्‍या से बचने के ल‍िए कुछ हेल्‍दी ट‍िप्‍स को लाइफस्‍टाइल में शाम‍िल कर सकते हैं-

  • मोटापे से बचें और हेल्‍दी वजन बनाए रखें ताक‍ि ल‍िवर में अत‍िर‍िक्‍त फैट जमा न हो।
  • फल, सब्‍ज‍ियां, होल ग्रेन्‍स, लीन प्रोटीन और हेल्‍दी फैट्स युक्‍त डाइट से ल‍िवर हेल्‍थ को सपोर्ट म‍िल सकता है।
  • शुगरी और र‍िफाइंड कार्ब्स युक्‍त डाइट से परहेज करें।
  • रोजाना कम से कम 30 से 40 मि‍नट एक्सरसाइज करें ताक‍ि इंसुल‍िन सेंस‍िट‍िव‍ि‍टी को बेहतर बनाने में मदद म‍िले और ल‍िवर में जमा फैट कम हो सके।
  • फैटी ल‍िवर की समस्‍या से बचने के ल‍िए डायब‍िटीज और हाई कोलेस्‍ट्रॉल की जांच भी जरूरी है।
  • फैटी ल‍िवर से र‍िकवरी के बाद अल्‍कोहल का सेवन करने से बचें वरना दोबारा फैटी ल‍िवर और ल‍िवर सि‍रोस‍िस का श‍िकार हो सकते हैं।

डॉक्‍टर से संपर्क कब करें?

फैटी ल‍िवर की समस्‍या इलाज के बाद दोबारा हाे सकती है इसल‍िए इस स्‍थ‍िति‍ में क‍िसी भी असामान्‍य लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें। लगातार थकान, कमजोरी या ऊर्जा की कमी को हल्‍के में न लेंं, यह ल‍िवर से संबंध‍ित समस्‍या का संंकेत हो सकता है। ज‍िन लोगों को पहले फैटी ल‍िवर की समस्‍या हो चुकी है, उन्‍हें न‍ियम‍ित जांच से इस पर नजर रखनी चाह‍िए। अगर अचानक पील‍िया, पेट में सूजन, उल्‍टी में खून, ल‍िवर के आसपास सूजन नजर आए, तो ये फैटी ल‍िवर के गंभीर लक्षण हो सकते हैं। ऐसे में तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करें।

नि‍ष्‍कर्ष:

Clinical Studies और Gastroenterologist & Hepatologist Dr. K. S. Somasekhar Rao से हुई बातचीत के आधार पर यह पता चला क‍ि फैटी ल‍िवर रोग कुछ मरीजों में दोबारा हो सकता है ज‍िसका एक कारण खराब लाइफस्‍टाइल भी हो सकती है इसल‍िए अगर फैटी ल‍िवर रोग से गुजर चुके हैं, तो हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल फॉलो करें और डॉक्‍टर की सलाह पर समय-समय पर जांच कराएं ताक‍ि दोबारा इस बीमारी के खतरे से बचा जा सके।

FAQ

  • फैटी ल‍िवर के लक्षण क्‍या हैं?

    फैटी ल‍िवर में कुछ लोगों में थकान, पेट के दाईं तरफ ऊपर की ओर दर्द महसूस हो सकता है।
  • क्या अल्‍कोहल पीने से फैटी लिवर दोबारा होने का खतरा बढ़ जाता है?

    अल्‍कोहल के सेवन से फैटी ल‍िवर का खतरा बढ़ सकता है। अल्‍कोहल ल‍िवर की कार्यक्षमता को प्रभाव‍ित करता है ज‍िससे ल‍िवर में फैट जमा हो सकता है।
  • फैटी लिवर दोबारा होने के शुरुआती संकेत क्या हो सकते हैं?

    फैटी ल‍िवर की समस्‍या दोबारा हुई है, तो थकान, पेट में भारीपन, पेट के दाईं ओर दर्द महसूस हो सकता है। फैटी ल‍िवर से बचने के ल‍िए समय पर जांच कराएं।
  • क्या वजन बढ़ने से फैटी लिवर दोबारा आ सकता है?

    अगर व्‍यक्‍त‍ि का वजन ज्‍यादा है या वह मोटापे का श‍िकार है, तो ल‍िवर में फ‍िर से फैट जमा होने की संभावना बढ़ सकती है। 

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इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Apr 03, 2026 11:36 IST

    Modified By : Yashaswi Mathur
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