Fri Sep 11, 2026 | 06:53 PM IST

Medically Reviewed by Dr Smita Singh , Dietitian

क्या फैटी लिवर में पिस्ता खाना सेहतमंद है? एक्‍सपर्ट से जानें

प‍िस्‍ता एक स्वादिष्ट नट है ज‍िसे खाकर अक्‍सर लोगों के मन में यह सवाल आता है क‍ि क्‍या प‍िस्‍ता खाकर फैटी ल‍िवर की समस्‍या दूर होती है? इस सवाल का जवाब जानने के ल‍िए जानें एक्‍सपर्ट की सलाह।

फैटी लिवर की समस्‍या तब होती है जब लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है। शुरुआत में इसके लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते, लेकिन समय के साथ यह लिवर की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है। खराब खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी, मोटापा और टाइप 2 डायबिटीज जैसे कारक फैटी लिवर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में डाइट में हेल्‍दी चीजों को शामिल करना जरूरी हो जाता है। सूखे मेवों में पिस्ता एक लोकप्रिय विकल्प है, जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें हेल्दी फैट, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं। यही कारण है कि कई लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या फैटी लिवर की स्थिति में पिस्ता खाना फायदेमंद हो सकता है? इस सवाल का जवाब जानने के ल‍िए हमने Smita Singh, Chief Dietitian At Midland Hospital & Director At Wellness Diet Clinic, Lucknow से बात की।

पिस्ता के पोषक तत्व फैटी लिवर में हैं फायदेमंद 

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पिस्ता में हेल्दी अनसैचुरेटेड फैट, फाइबर और प्रोटीन की अच्छी मात्रा होती है। फाइबर पाचन को बेहतर बनाने और लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद कर सकता है, जिससे कैलोरी का सेवन कम हो सकता है। इसके अलावा पिस्ता में एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं, जो शरीर को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। फैटी लिवर के मरीजों के लिए वजन को कंंट्रोल करना जरूरी है और संतुलित मात्रा में पिस्ता का सेवन करने से वजन कंट्रोल करने में मदद म‍िल सकती है।

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ऑक्‍सीडेट‍िव स्‍ट्रेस घटता है

पिस्ता में ल्यूटिन, पॉलीफेनॉल और अन्य एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो ऑक्सीडेटिव स्‍ट्रेस को कम करने में मदद कर सकते हैं। ऑक्सीडेटिव स्‍ट्रेस कम होने पर फ्री रेडिकल्स का प्रभाव घटता है, जिससे लिवर की कोशिकाओं को कम नुकसान पहुंचता है।

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क्‍या कहती है स्‍टडी?

साल 2018 में Nutrients नामक जर्नल में प्रकाशि‍त एक स्‍टडी के मुताबि‍क, पिस्ता लिपिड मेटाबॉलिज्म से जुड़े कुछ जीन्‍स को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। साथ ही स्‍टडी में बताया गया क‍ि प‍िस्‍ता का सेवन करने से कोलेस्ट्रॉल लेवल कंंट्रोल होता है ज‍िससे लिवर में जमा फैट को कंंट्रोल करने में मदद म‍िलती है। 

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पिस्ता खाते समय इन बातों का ध्‍यान रखें

  • फैटी लिवर में पिस्ता खाना फायदेमंद हो सकता है, लेकिन इसकी मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।
  • नमक वाले या अधिक प्रोसेस्ड पिस्ता को खाने के बजाय सादे (Unsalted) पिस्ता को चुनें।
  • साथ ही, इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाकर खाना चाहिए न क‍ि एकलौते आहार के रूप में।

न‍िष्‍कर्ष:

फैटी लिवर में पिस्ता खा सकते हैं। इससे कोलेस्‍ट्राॅल कंट्रोल होता है ज‍िससे ल‍िवर में जमा फैट को कम करने में मदद म‍िलती है। प‍िस्‍ता खाने से ऑक्सीडेटिव तनाव भी कम होता है।

FAQ

  • फैटी लिवर में क्‍या खाएं?

    हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, ओट्स, नट्स, हेल्दी फैट, प्रोटीन और फाइबर युक्त भोजन लिवर की सेहत को सपोर्ट करने में मदद कर सकता है।
  • फैटी लिवर में क्‍या न खाएं?

    मीठे पेय, ज्यादा चीनी वाली चीजें, तली-भुनी चीजें, प्रोसेस्ड फूड, अल्‍कोहल, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, जंक फूड और ट्रांस फैट से भरपूर चीजों के सेवन से बचें। 

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Disclaimer

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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