Fri Sep 11, 2026 | 07:30 PM IST

Medically Reviewed by Dr KS Somasekhar Rao , Senior Consultant Gastroenterologist | Hepatologist | Advanced Therapeutic Endoscopist

ऑफिस वर्कर्स में बढ़ रही है फैटी लिवर की श‍िकायत? एक्सपर्ट से जानें सुरक्ष‍ित रहने के उपाय 

ऑफिस वर्कर्स में आजकल फैटी लिवर का खतरा तेजी से बढ़ रहा है, इसका एक कारण है लंबे समय तक बैठने के कारण होने वाला मोटापा, ज्‍यादा वजन के चलते कम उम्र में फैटी ल‍िवर जैसे रोग हो जाते हैं। जानें इसके कारण और बचाव के उपाय, जिससे लिवर को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सके।

आजकल की व्‍यस्‍त लाइफस्टाइल में घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करना आम बात हो गई है। सुबह ऑफिस पहुंचने के बाद लगातार लैपटॉप स्क्रीन के सामने बैठना, बीच-बीच में जंक फूड या चाय-कॉफी लेना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी जैसी आदतें धीरे-धीरे शरीर के अंदर बीमार‍ियां पैदा कर सकती हैं। इन्हीं में से एक है फैटी लिवर (Fatty Liver) की समस्या, जो ज्‍यादा वजन वाले लोगों के साथ-साथ सामान्य वजन और फ‍िट द‍िखने वाले ऑफिस वर्कर्स में भी तेजी से द‍िखने लगा है।

फैटी लिवर तब होता है जब लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है। शुरुआत में इसके लक्षण साफ नजर नहीं आते, लेकिन समय रहते ध्यान न देने पर यह लिवर में सूजन, लिवर डैमेज और यहां तक कि लिवर सिरोसिस का कारण भी बन सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह एक लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी है, जिसे सही आदतों से काफी हद तक रोका जा सकता है। इसलिए ऑफिस वर्कर्स के लिए इसके कारण और बचाव के उपाय जानना जरूरी है।

ऑफिस वर्कर्स में क्‍यों बढ़ रही है फैटी लिवर की समस्या?

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  • Dr. K. S. Somasekhar Rao is a Senior Consultant Gastroenterologist, Hepatologist, Clinical Director, Yashoda Hospitals, Hyderabad ने बताया क‍ि नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) तेजी से बढ़ रहा है और इसका मुख्य कारण खराब लाइफस्टाइल है। लगातार नौ से दस घंटे बैठकर काम करने से शरीर की कैलोरी बर्न नहीं होती। इससे फैट जमा होने लगता है, जो लिवर में भी पहुंच सकता है।
  • ऑफिस में प्रोसेस्ड फूड, बिस्किट, नमकीन, मीठी चाय और फास्ट फूड का सेवन ज्‍यादा होता है। इनमें ट्रांस फैट और शुगर ज्यादा होती है, जो फैटी लिवर का खतरा बढ़ाती है।
  • पेट के आसपास जमा फैट, लिवर पर सीधा असर डालता है और फैटी लिवर का कारण बनता है।
  • ऑफिस में स्‍ट्रेस और नींद की कमी मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देते हैं, जिससे फैट जमा होने लगता है।

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ज्‍यादा समय तक बैठने से फैटी ल‍िवर का खतरा बढ़ जाता है

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नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेड‍िस‍िन की एक स्‍टडी के मुताब‍िक, ज्यादा समय तक काम करने वाले कर्मचारियों में फैटी लिवर का खतरा ज्यादा देखा गया, खासकर ऑफिस और बैठे-बैठे काम करने वाले लोगों में। जो लोग 53 से 83 घंटे प्रति हफ्ते काम करते थे, उनमें फैटी लिवर का खतरा सामान्य काम करने वालों की तुलना में ज्‍यादा था। यह स्‍टडी बताती है क‍ि लंबे समय तक बैठना, कम शारीरिक गतिविधि और ऑफिस के काम से फैटी लिवर का खतरा बढ़ जाता है।

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फैटी लिवर के शुरुआती संकेत क्‍या हैं?

  • लगातार थकान महसूस होना
  • पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में भारीपन
  • अचानक वजन बढ़ना
  • कमजोरी और सुस्ती
  • ब्लोटिंग या अपच

फैटी ल‍िवर से कैसे बचें?

मैं एक द‍िन अपने पत‍ि के साथ हॉस्‍प‍िटल गई। वहां एक डॉक्‍टर बता रहे थे क‍ि कैसे कुछ समय पहले यह बीमारी केवल वयस्‍कों में देखी जाती थी, लेक‍िन अब युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। फैटी ल‍िवर से बचने के ल‍िए ये उपाय अपनाएं-

  • लंबे समय तक बैठने से बचें। हर आधे घंटे में दो से तीन मिनट टहलने से मेटाबॉलिज्म एक्‍ट‍िव रहता है।
  • डाइट में सुधार करें।
  • जंक फूड कम करें।
  • हरी सब्जियां और फल का सेवन बढ़ाएं।
  • रिफाइंड शुगर कम लें।
  • हेल्दी फैट जैसे नट्स और सीड्स को डाइट में शामिल करें।
  • नियमित एक्सरसाइज करें।
  • रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक, योग या एक्सरसाइज करने से लिवर में जमा फैट कम हो सकता है।
  • वजन कंट्रोल करें। सिर्फ पांच से सात प्रत‍िशत वजन कम करने से भी लिवर की सेहत में सुधार देखा जा सकता है।
  • सात से आठ घंटे की अच्छी नींद मेटाबॉलिज्म को संतुलित रखने में मदद करती है।
  • समय-समय पर लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) और अल्ट्रासाउंड करवाने से समस्या का जल्दी पता चल सकता है।

निष्कर्ष:

खराब लाइफस्टाइल, लंबे समय तक बैठना और अनहेल्दी खानपान के कारण ऑफ‍िस वर्कर्स में फैटी ल‍िवर की समस्‍या बढ़ रही है। सही डाइट, नियमित एक्सरसाइज और एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाकर इसे रोका जा सकता है।

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Yashaswi Mathur

Yashaswi Mathur

Senior Sub Editor

यशस्वी माथुर पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं, जिनमें से करीब 8 साल उन्होंने हेल्थ जर्नलिज्म को दिए हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealth में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं। यहां वह स्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, पोषण और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। यशस्वी की खासियत है जटिल मेडिकल विषयों और रिसर्च को आसान भाषा में समझाना, ताकि आम पाठक भी उन्हें आसानी से समझ सके। लेख तैयार करते समय वह विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय, मेडिकल रिसर्च और भरोसेमंद स्रोतों का ध्यान रखती हैं। जिन विषयों में मेडिकल वैरिफिकेशन जरूरी होता है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत हिंदुस्तान अखबार से की थी। उस दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी उनकी एक खोजी रिपोर्ट के बाद लखनऊ के KGMU स्थित क्वीन मेरी अस्पताल के गायनेकोलॉजी विभाग में व्यवस्थाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग को सुधारात्मक कदम उठाने पड़े। Editorial Policy: यशस्वी द्वारा लिखे गए सभी लेखों की हमारी संपादकीय टीम द्वारा तथ्य-जांच की जाती है और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषय विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाती है।

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    Modified By : Yashaswi Mathur
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