Fri Sep 11, 2026 | 06:56 PM IST

Medically Reviewed by Dr KS Somasekhar Rao , Senior Consultant Gastroenterologist | Hepatologist | Advanced Therapeutic Endoscopist

क्या ऑयली फूड्स खाने से फैटी लिवर का खतरा बढ़ता है?

ज्यादा तला-भुना खाने से फैटी लिवर की समस्या हो सकती है। ऐसा कैसे होता है और फैटी लिवर के मरीजों को कौन सा ऑयल अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए? जानिए, इस लेख में सभी जरूरी बातें।

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ऑयली चीजें हमारी सेहत को काफी नुकसान पहुंचाती हैं। इसलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में ही किया जाना चाहिए। इसकी वजह से मोटापा बढ़ता है और हृदय स्वास्थ्य पर भीअसर पड़ता है। यहां यह जान लेना जरूरी है कि क्या ज्यादा मात्रा में तली-भुनी चीजें या ऑयली फूड का सेवन करने से फैटी लिवर की समस्या भी हो सकती है? American Liver Foundation के अनुसार, लिवर में 5 फीसदी से अधिक मात्रा में फैट के जमा होने वाली स्थिति को फैटी लिवर कहा जाता है। हैदराबाद  स्थित यशोदा हॉस्पिटल्स में Senior Consultant Gastroenterologist, Hepatologist डॉ. के. एस. सोमशेखर राव ने इस लेख में बताए गए तथ्यों और साक्ष्यों की खुद पुष्टि की है।

क्या ऑयली फूड खाने से फैटी लिवर होता है?

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डॉ. के. एस. सोमशेखर राव बताते हैं, "फैटी लिवर का एक मुख्य कारण तैलीय पदार्थ का सेवन माना जाता है। हालांकि, यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि हर तरह के तैलीय खाद्य पदार्थ को बुरा नहीं माना जा सकता है। सैचुरेटेड फैट, ट्रांस फैट और अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड का सेवन अधिक मात्रा में करने से लिवर में फैट का जमाव बढ़ता है, जिससे लिवर में सूजन आ सकती है।"

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फैटी लिवर में तला-भुना खाने के नुकसान

Divya Gandhi's Diet & Nutrition Clinic की डायटिशियन और न्यूट्रिशनिस्ट दिव्या गांधी बताती हैं कि फैटी लिवर में तला-भुना खाने से कई तरह के नुकसान हो सकते हैं, जैसे- 

  • लिवर फैट बढ़ने का जोखिम: फैटी लिवर के मरीजों को ऑयली या फ्राइड चीजों का सेवन अपनी सेहत को ध्यान में रखते हुए करना चाहिए। जाहिर तौर पर फैटी लिवर में फ्राइड चीजों का सेवन करने से लिवर में फैट बढ़ सकता है। असल में, लिवर अतिरिक्त वसा को प्रोसेस नहीं कर पाता है, जिसकी वजह से यह लिवर के आसपास जमा होने लगता है। इससे मेटाबॉलिक इंबैलेंस हो सकता है।
  • लिवर फेलियर का रिस्क: 2023 The Journal of Nutritional Biochemistry में चूहों पर की गई एक रिसर्च प्रकाशित हुई, जिससे पता चलता है कि अधिक मात्रा में ऑयली चीजों का सेवन करने से लिवर में सूजन बढ़ जाती है। अगर समय रहते अपनी डाइट में सुधार न किया जाए, संभवतः यह भविष्य में लिवर स्कारिंग (Liver Scarring) या लिवर फेलियर के जोखिम को बढ़ा सकता है।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस की दिक्कत: ऑयली और प्रोसेस्ड फूड इंसुलिन संवेदनशीलता को प्रभावित कर सकता है, जिससे लिवर में अतिरिक्त वसा जमा होने लगती है।
  • हृदय स्वास्थ्य पर असर: फैटी लिवर और हृदय स्वास्थ्य का भी गहरा संबंध माना जाता है। UChicago Medicine की मानें, तो फैटी लिवर मेटाबॉलिक हेल्थ पर असर डालता है और अधिक मात्रा में वसायुक्त चीजों का सेवन करने से हृदय रोग, स्ट्रोक और डायबिटीज का जोखिम बढ़ सकता है।

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अल्कोहलिक या नॉन-अल्कोहलिक: किसमें तेल का सेवन है ज्यादा नुकसानदायक?

विशेषता अल्कोहलिक फैटी लिवर (AFLD) नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर (NAFLD/MASLD)
नुकसान का मुख्य कारण शराब के साथ फैटी लिवर होने पर मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ता है। अत्यधिक कैलोरी, सैचुरेटेड फैट और रिफाइंड कार्ब्स।
तेल का प्रभाव शराब के साथ तला-भुना खाने से लिवर की सूजन दुगनी रफ्तार से बढ़ती है। ट्रांस फैट लेने से यह लिवर में जमा होकर 'इंसुलिन रेजिस्टेंस' पैदा करता है।
जटिलता शराब के कारण लिवर पहले से ही कमजोर होता है। ऐसे में तेल को पचाना और भी मुश्किल हो जाता है। ज्यादा मात्रा में तेल का सेवन करने से लिवर सेल्स को 'स्टीटोसिस'(वसायुक्त) बनाता है।
खतरे का स्तर शराब के कारण हुए फैटी लिवर में तेल के सेवन से बचना चाहिए। इससे लिवर सिरोसिस का जोखिम बढ़ता है। फैटी लिवर की समस्या होने के बावजूद लंबे समय तक खराब तेल का सेवन करने से धीरे-धीरे लिवर डैमेज हो सकता है।
रिकवरी की संभावना शराब छोड़ने और हल्का खाना खाने से रिकवरी की संभावना बढ़ जाती है। डाइट में बदलाव (हेल्दी फैट्स) और वजन घटाने से फैटी लिवर को रिवर्स किया जा सकता है।

फैटी लिवर में कैसा तेल खाना चाहिए?

जनवरी 2023 में Evidence-Based Complementary and Alternative Medicine में प्रकाशित जर्नल से पता चलता है कि फैटी लिवर में एक्स्ट्रा वर्जिन ऑयल को अच्छा माना जाता है। दरअसल, एक्स्ट्रा वर्जिन ऑयल लिवर का फैट कम करने, इंसुलिन सेंसिटिविटी में सुधार करने और सूजन को कम करने के लिए जाना जाता है। इसके अलावा, फैटी लिवर के मरीज फ्लैक्स सीड ऑयल, वॉलनट ऑयल का सेवन कर सकते हैं। ये सभी वेजिटेबल ऑयल हैं। इनमें मोनोसैच्युरेटेड फैट अधिक मात्रा में पाया जाता है और यह एंटीऑक्सीडेंट्स का भी अच्छा स्रोत हैं। यह लिवर एंजाइम्स (एक प्रकार का प्रोटीन जो लिवर में रासायनिक प्रतिक्रियाओं जैसे पाचन प्रक्रिया को तेज करते हैं) को कम करने में उपयोगी साबित होते हैं। Uchicago medicine में प्रकाशित इसी लेख पर यकीन करें, तो फैटी लिवर के मरीजों को किसी भी तरह के ऑयल का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।

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फैटी लिवर के किस ग्रेड में तेल पूरी तरह बंद कर देना चाहिए?

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फैटी लिवर के तीन ग्रेड होते हैं। फैटी लिवर 1, 2 और 3। जहां तक सवाल इस बात का है कि फैटी लिवर के किस ग्रेड में तेल का सेवन पूरी तरह बंद कर देना चाहिए, इस संबंध में कोई विशेष साक्ष्य मौजूद नहीं है जिससे पता चल सके कि फैटी लिवर के किस ग्रेड में तेल का सेवन अधिक हानिकारक होता है? हालांकि, फैटी लिवर के मरीजों को ही नहीं, बल्कि स्वस्थ लोगों को भी स्वस्थ वसा को अपनी डाइट का हिस्सा बनाना चाहिए। रिफाइंड या प्रोसेस्ड ऑयल को डाइट से पूरी तरह बाहर निकाल देना चाहिए। इसके अलावा, ट्रांस फैट और डीप फ्राइड फूड से भी दूरी बनाए रखनी चाहिए।

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फैटी लिवर को बढ़ने से कैसे रोकें?

ग्रेड 1 और 2

जैसे-जैसे फैटी लिवर की कंडीशन बिगड़ती जाती है और लिवर के आसपास फैट जमा होता जाता है, वैसे-वैसे यह पहले से दूसरे ग्रेड में शिफ्ट हो जाता है। जाहिर है, यह कंडीशन सही नहीं है। सवाल है, इसे बढ़ने से कैसे रोका जा सकता है? ग्रेड 1 और ग्रेड 2 को मैनेज करने के लिए आप कैलोरी काउंट कम करें, अपने वजन को संतुलित रखें और सैचुरेटेड फैट तथा ट्रांस फैट का सेवन न करें। इसके साथ ही डाइट में हार्ट हेल्दी अनसैचुरेटेड फैट को जगह दें। इससे फैट को रिवर्स करने में मदद मिलती है।

ग्रेड 3

जब फैटी लिवर ग्रेड 3 में पहुंच जाता है, तो इसमें मरीज को हर समय विशेष देखरेख की जरूरत होती है। इस स्थिति तक आते-आते मरीज के लिवर में सूजन बहुत ज्यादा बढ़ चुकी होती है और फाइब्रोसिस का जोखिम भी बढ़ जाता है। ऐसे में लिवर फैट को पचाने की अपनी क्षमता भी खो देता है। इसलिए, डॉक्टर ट्रीटमेंट की जरूरत है और लो फैट डाइट फॉलो करना आवश्यक है।

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फैटी लिवर होने पर डॉक्टर के पास कब जाएं?

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फैटी लिवर एक गंभीर समस्या है। इसलिए, इस स्थिति को कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे में यह सवाल जरूर आपके मन में उठ सकता है कि आखिर फैटी लिवर होने की स्थिति में कब डॉक्टर के पास जाना चाहिए? इस बारे में डॉ. के. एस. सोमशेखर राव का कहना है, "मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और हाइपरटेंशन के रोगियों को नियमित रूप से फैटी लिवर की जांच करवानी चाहिए। समय पर जांच करवाने से इस गंभीर समस्या से बचा जा सकता है।" वहीं, अगर किसी को फैटी लिवर है, तो उन्हें अपने शरीर में नजर आ रहे संकेतों पर गौर करना चाहिए। डॉ. के. एस. सोमशेखर राव आगे कहते हैं, "जॉन्डिस होना, त्वचा-आंखों का पीला पड़ना, पेट में सूजन आना, अक्सर थकान महससू करना और खून की उल्टी होना। ये तमाम लक्षण बहुत गंभीर हैं। ऐसे संकेत दिखें तो डॉक्टर के पास तुरंत जाएं।" Mayo Clinic में इसके लक्षणों का जिक्र करते हुए बताया गया है- बहुत ज्यादा थकान, असहज महसूस करना, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द होना आदि फैटी लिवर के लक्षण हैं।

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निष्कर्ष

फैटी लिवर होने के पीछे कई तरह के कारक जिम्मेदार हैं, जैसे खराब जीवनशैली, मोटापा, खराब खानपान और एक्सरसाइज न करना। इसके अलावा, आज की तारीख में ज्यादातर लोग कंप्यूटर टेबल पर बैठकर काम करते हैं और निष्क्रिय जीवनशैली बिताते हैं। इसका लिवर पर बहुत बुरा असर पड़ता है। ऐसा आपके साथ न हो, इसके लिए कोशिश यही की जानी चाहिए कि डाइट में अच्छी चीजों को शामिल करें। अनहेल्दी ऑयली चीजों को डाइट से पूरी तरह बाहर निकाल दें।

Image Credit: Freepik

FAQ

  • ज्यादा तेल खाने से क्या नुकसान होते हैं?

    ज्यादा तेल सेहत के लिए बिल्कुल सही नहीं है। ऑयली चीजें खाने से पाचन संबंधी समस्या, पेट फूलना, अपच, एसिड रिफ्लक्स और पेट दर्द जैसी कई परेशानियां हो सकती हैं। खासकर, फैटी लिवर के मरीजों की बात करें, तो उन्हें ऑयली फूड का सेवन कम करना चाहिए।
  • फैटी लिवर को जड़ से खत्म करने के क्या उपाय हैं?

    सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि फैटी लिवर किस चरण का है? अगर शुरुआती चरण में है और इसका पता चल जाए तो इसे रिवर्स किया जा सकता है, लेकिन इसे जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता है। फैटी लिवर को रिवर्स करने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल और सही डाइट फॉलो करनी चाहिए। एक्सपर्ट भी सलाह देते हैं कि लिवर के सूजन को कम करने के लिए वजन को संतुलित रखें, नियमित रूप से व्यायाम करें, शुगर और रिफाइंड कार्ब्स से परहेज करें। साथ ही नशीले पदार्थों से दूर रहें और सब्जियां, फल और साबुत अनाज का सेवन करें।
  • घर में रहकर लिवर की चर्बी को कैसे कम किया जा सकता है?

    फैटी लिवर को कंट्रोल करने के लिए वजन को संतुलित रखना जरूरी होता है। Harvard Health Publishing में प्रकाशित लेख की मानें, तो शरीर के कुल वजन का महज 3 से 5 फीसदी कम करने से फैटी लिवर में कमी आ सकती है। बहरहाल, घर पर बैठे लिवर की चर्बी कम की जा सकती है या नहीं, यह लिवर की स्थिति पर निर्भर करता है। अगर किसी का फैटी लिवर ग्रेड 3 तक पहुंच गया है, तो ऐसे में डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक होता है। हालांकि, आप सही डाइट की मदद से लिवर की चर्बी को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
  • लिवर में चर्बी क्यों बढ़ती है?

    लिवर में चर्बी की मात्रा ज्यादा होने की स्थिति को स्टीटोटिक (Steatotic) लिवर डिजीज कहा जाता है। इसे ही हम फैटी लिवर के नाम से जानते हैं। यह स्थिति तब होती है जब लिवर में कुल 5 फीसदी से ज्यादा फैट जमा हो जाता है। विशेषज्ञों की मानें, तो यह कंडीशन तब होती है जब लिवर फैट को ठीक से तोड़ नहीं पाता, जिससे यह लिवर सेल्स में जमा हो जाता है। फैटी लिवर के कई कारण हो सकते हैं, जैसे मोटापा, बेली फैट का बढ़ना, मेटाबॉलिक सिंड्रोम आदि।

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Disclaimer

इस जानकारी की सटीकता, समयबद्धता और वास्तविकता सुनिश्चित करने का हर सम्भव प्रयास किया गया है हालांकि इसकी नैतिक जि़म्मेदारी ओन्लीमायहेल्थ डॉट कॉम की नहीं है। हमारा आपसे विनम्र निवेदन है कि किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें। हमारा उद्देश्य आपको जानकारी मुहैया कराना मात्र है।

Meera Tagore

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Senior Sub Editor

मीरा टैगोर 2009 से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और पिछले 5 वर्षों से विशेष रूप से हेल्थ जर्नलिज्म पर काम कर रही हैं। फिलहाल वह OnlyMyHealthमें सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। वह महिला स्वास्थ्य और यौन स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों पर लिखती हैं और इनसे जुड़ी जानकारी को प्रमाणित स्रोतों और रिसर्च के आधार पर सटीक और सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं। जिन विषयों में मेडिकल पुष्टि जरूरी होती है, उन्हें प्रकाशित होने से पहले डॉक्टरों द्वारा रिव्यू किया जाता है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की थी और OnlyMyHealth से पहले Image Reflection Centre, Haribhoomi और MyUpchar के साथ काम कर चुकी हैं।

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    Apr 01, 2026 18:22 IST

    Modified By : Meera Tagore
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